बीजेपी के अध्यक्ष “अमित शाह” | Amit Shah

Amit Shah – अमित भाई अनिलचंद्र “अमित” शाह गुजरात राज्य के भारतीय राजनेता और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष है।
Amit Shah

बीजेपी के अध्यक्ष “अमित शाह” – Amit Shah

शुरुवाती जीवन:

अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1965 को मुंबई में हुआ। उनका परिवार वैष्णव गुजराती – बनिया लोगो से संबंध रखता था। उनके पिता अनिलचंद्र शाह मनसा के एक व्यापारी थे, जिनका पीव्हीसी पाइप का व्यापार था। मेहसाना से उन्होंने अपनी स्कूल की पढाई पूरी की और बायोकेमिस्ट्री की पढाई पूरी करने के लिए उन्होंने अहमदाबाद के शाह विज्ञान कॉलेज में प्रवेश किया।

बायोकेमिस्ट्री में बीएससी कर वे ग्रेजुएट हुए और अपने पिता के व्यवसाय में ही उनकी सहायता करने लगे थे। अहमदाबाद की को-ऑपरेटिव बैंक में उन्होंने स्टॉकब्रोकर के रूप में भी काम किया है।

बचपन से ही शाह राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए है और अपने घर के पास ही की शाखा में वे दाखिल हो चुके थे। अहमदाबाद में कॉलेज के दिनों में ही वे आरएसएस स्वयंसेवक बन चुके थे। 1982 में अहमदाबाद आरएसएस सर्किल की वजह से पहली बार वे नरेंद्र मोदी से मिले। उस समय मोदी आरएसएस प्रचारक थे, जो शहर में युवा गतिविधियों के लिए कार्यरत थे।

अमित शाह की निजी जिंदगी:

अमित शाह ने सोनल शाह से शादी की और उन्हें जय नाम का एक बेटा भी है। शाह अपनी माँ से बहुत प्यार करते है। जिनका देहांत 8 जून 2010 को हुआ था।

अमित शाह शुरुवाती रजनीतिक करियर:

आरएसएस के विद्यार्थी के रूप में उन्होंने अपने रजनीतिक जीवन की शुरुवात की है, 1983 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सदस्य भी बने। मोदी के बीजेपी में शामिल होने से एक साल पहले ही 1986 में वे बीजेपी में दाखिल हुए। 1987 में अपनी प्रतिभा के बल पर वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के सक्रीय कार्यकर्ता बन चुके थे। इसके बाद धीरे-धीरे वे युवा मोर्चा के मुख्य नेता बने और विविध पदों पर उन्होंने काम भी किया। जिनमे मुख्य रूप से तालुका सेक्रेटरी, स्टेट सेक्रेटरी, उपाध्यक्ष और जनरल सेक्रेटरी का पद शामिल है। 1991 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने लाल कृष्णा अडवाणी की सहायता भी की थी।

1995 में बीजेपी ने गुजरात में पहली बार अपनी सत्ता स्थापित की और उस समय केशुभाई पटेल को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया। उस समय बीजेपी की मुख्य विरोधी पार्टी कांग्रेस ही थी, जिसने गुजरात के ग्रामीण भागो में अपनी सत्ता बना रखी थी। मोदी और शाह ने मिलकर ग्रामीण भागो में भी बीजेपी की सत्ता का प्रसार-प्रचार किया था।

उनकी इस रणनीति से बीजेपी ने गुजरात के सभी क्षेत्रो में अपने उम्मेदवार बना लिए थे। इस प्रकार उन्होंने 8000 प्रभावशाली ग्रामीण नेताओ की श्रुंखला बना रखी थी।

राज्य में कांग्रेस की सत्ता का विनाश करने के लिए भी मोदी ने इसी रणनीति का प्रयोग किया, जिससे राज्य की आर्थिक व्यवस्था में भी सुधार आया। 1999 में शाह की नियुक्ति अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में की गयी, जो भारत की सबसे बड़ी सहकारी बैंक है। गुजरात में इस प्रकार के चुनाव अक्सर जातियों को ध्यान में रखकर जीते जाते है और उस समय सहकारी बैंकों पर पटेल, गड़ेरिया और क्षत्रिय जाति का नियंत्रण हुआ करता था। लेकिन इस जातियो में से किसी एक से भी संबंधित ना होने के बावजूद शाह को चुनाव में जीत मिली।

उस समय बैंक डूबने की कगार पर ही थी। बैंक को 36 करोड़ की हानि भी हुई थी। लेकिन शाह ने अपनी नीतियों से बैंक की काया ही पलटकर रख दी और अगले ही साल बैंक को 27 करोड़ का लाभ हुआ। 2014 में बैंक का लाभ बढ़कर 250 करोड़ हो गया। शाह ने इस बात की भी पुष्टि की के बैंक के 22 डायरेक्टरो में से 11 बीजेपी पार्टी के हो।

धीरे-धीरे मोदी और शाह राज्य से कांग्रेस का पत्ता साफ़ करने लगे। इसके बाद शाह गुजरात राज्य चेस एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। 2009 में वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बने, उसी समय नरेंद्र मोदी भी एसोसिएशन के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे। 2014 में मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह GCA के अध्यक्ष बने।

1990 के शुरुवाती दिनों में ही मोदी पार्टी के जनरल सेक्रेटरी बन चुके थे और उन्होंने इसके बाद शाह की नियुक्ति बड़े पदों के लिए की। उन्होंने उस समय के राज्य मुख्यमंत्री पटेल को अमित शाह को गुजरात राज्य फाइनेंसियल कारपोरेशन का चेयरमैन बनाने की सिफारिश भी की। यह कारपोरेशन एक पब्लिक सेक्टर फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट है, जो छोटे और लघु उद्योगों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है।

शंकर सिंह वाघेला और पार्टी के दुसरे मुख्य नेताओ ने जब गुजरात सरकार में मोदी के बढ़ते कदमो को देखते हुए शिकायत की तो सरकार ने मोदी को राज्य से निकालकर दिल्ली के बीजेपी मुख्य कार्यालय में स्थानांतरित किया। उस समय (1995-2001) शाह गुजरात में मोदी के इनफॉर्मर (जानकारी प्रदान करने वाले) बने हुए थे।

1997 में मोदी ने बीजेपी मुख्य कार्यालय में गुजरात असेंबली चुनाव का टिकेट शाह को देने की सिफारिश भी की। फरवरी 1997 में चुनाव जीतकर शाह MLA बने। इसके बाद 1998 में भी वे अपनी सीट को बचाने में सफल हुए।

अमित शाह की राष्ट्रिय राजनीती:

जब नरेन्द्र मोदी बीजेपी की तरफ से पंतप्रधान पद के उम्मेदवार घोषित किया गया, तब शाह के प्रभाव ने भी पार्टी की ताकत को बढाया था। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्णा अडवानी, सुषमा स्वराज, मुरली मनोहर जोशी और जसवंत सिंह के साथ मिलकर इन्होने पार्टी को राष्ट्रिय स्तर पर एक नयी पहचान दिलवाई। इसी समय से शाह ने भी राष्ट्रिय स्तर पर अपनी पहचान एक उत्कृष्ट चुनाव अभियान मेनेजर के रूप में बना ली और लोगो ने उन्हें “आधुनिक चाणक्य और नीतियों के मास्टर” की भी उपाधि दे दी।

इसके बाद शाह को बीजेपी का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य सौपा गया। इस पद के लिए उनकी नियुक्ति मोदी ने नहीं बल्कि राजनाथ सिंह ने की, जो उनके कौशल और उनकी योग्यताओ से काफी प्रभावित हुए थे। पार्टी के दुसरे नेताओ को उनका यह निर्णय ज्यादा रास नही आया और दुसरे नेताओ ने उनपर कुछ आरोप लगाना भी शुरू कर दिए। राजनितिक सलाहकार शेखर गुप्ता ने बीजेपी के इस निर्णय को काफी भयावह बताया।

बीजेपी अध्यक्ष:

जुलाई 2014 में बीजेपी सेंट्रल पार्लियामेंट्री बोर्ड ने अमित शाह की नियुक्ति पार्टी के अध्यक्ष के रूप में की। इसके बाद दोबारा 24 जनवरी 2016 को उनकी नियुक्ति बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में की गयी।

पार्टी का अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने बीजेपी में सदस्यता अभियान शुरू किया और मार्च 2015 में 100 मिलियन सदस्यों के साथ बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी।

2014-16 में उनके नेतृत्व में ही बीजेपी ने जम्मू और कश्मीर, महाराष्ट्र, हरियाणा, असम और झारखण्ड के असेंबली चुनावो में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। लेकिन साथ पार्टी को दिल्ली और बिहार में हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद 2017 के असेंबली चुनाव में भी बीजेपी को संभाला और उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में सफलतापूर्वक बीजेपी की सत्ता स्थापित की। उनके नेतृत्व में ही बीजेपी ने 403 में से 325 सीटे जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। साथ ही मणिपुर में भी बहुत सी जगहों पर बीजेपी अपनी जगह बनाने में सफल रही।

अमित शाह के चुनावी रिकॉर्ड:

1989 से अब तक शाह ने कुल 28 चुनाव लढे। साथ ही 2014 से अब तक उन्हें एक भी चुनाव में हार नही मिली।

गुजरात विधायी विधानसभा (बाय-इलेक्शन) 1997 – विजयी

गुजरात विधायी विधानसभा 1998 – विजयी

गुजरात विधायी विधानसभा 2002 – विजयी

गुजरात विधायी विधानसभा 2007 – विजयी

गुजरात विधायी विधानसभा 2012 – विजयी

Read More:

Hope you find this post about ”Amit Shah Biography in Hindi” useful and inspiring. if you like this post then please share on Facebook & Whatsapp. and for latest update download: Gyani Pandit free android app.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.