अंतिम मुग़ल बहादुर शाह ज़फर | Bahadur Shah Zafar History In Hindi

Bahadur Shah Zafar – मिर्ज़ा अबू ज़फर सिराजुद्दीन मुहम्मद बहादुर शाह ज़फर अंतिम मुग़ल शासक थे। वे अपने पिता अकबर द्वितीय की 28 सितंबर 1837 को मृत्यु होने के बाद उत्तराधिकारी बने। अपने नाम में वे ज़फर का उपयोग करते है जिसका अर्थ विजेता है। उन्होंने बहोत सी उर्दू कविताये और ग़ज़ल लिखी है। वे केवल नाममात्र के लिए ही शासक थे, एक मुग़ल शासक की तरह उनका नाम केवल इतिहास में लिखित था और उसके पास केवल दिल्ली (शाहजहाँबाद) पर शासन करने का ही अधिकार था। 1857 की क्रांति में उन्होंने भी भाग लिया था क्योकि ब्रिटिश सेना ने उन्हें रंगून भेज दिया था।’

Bahadur Shah Zafar

अंतिम मुग़ल शासक बहादुर शाह ज़फर – Bahadur Shah Zafar History In Hindi

ज़फर के पिता अकबर द्वितीय को ब्रिटिशो ने कैद कर लिया था और उनके पिता भी नही चाहते थे की ज़फर उनका उत्तराधिकारी बने। बल्कि अकबर शाह की बेगम मुमताज़ ने अपने बेटे को उत्तराधिकारी बनाने के लिए जिद की थी। जब ब्रिटिशो ने लाल किले पर आक्रमण किया था तब उन्होंने जहाँगीर को भी वहा से निकाल दिया था।

व्यक्तिगत जीवन –

उनकी चार पत्नियाँ (बेगम) थी, बेगम अशरफ महल, बेगम अख्तर महल, बेगम जीनत महल और बेगम ताज महल। इन सभी बेगमो में से जीनत बेगम उनकी सबसे प्रिय थी। उनके बहुत से बेटे और बेटियाँ थी।

Loading...

ब्रिटिश सेना को सरेंडर करने के बाद उन्हें बर्मा के रंगून से निकाल दिया गया था। निकालते समय उन्हें अपनी प्रिय बेगम जीनत महल का साथ भी मिला था। 7 नवंबर 1862 को 87 साल की आयु में उनका देहांत हो गया था।

शासक के तौर पे उल्लेखनीय कार्य –

भारत पर ब्रिटिश साम्राज्य के शासन करने के बाद बहादुर शाह ज़फर – Bahadur Shah Zafar के नियंत्रण में ज्यादा जमीन नही आयी, उनके नियंत्रण में केवल दिल्ली थी। लेकिन लोगो से टैक्स वसूल कर अपने साम्राज्य का विस्तार करने की उन्हें इजाजत दी गयी थी। इसके साथ ही उन्हें थोड़ी बहुत पेंशन भी मिलती थी। ज़फर की वजह से ब्रिटिश शासको को भारत में ज्यादा तकलीफ नही हुई क्योकि ज़फर अपने ही राज्य में खुश थे और उनका कोई लक्ष्य भी नही था। वे अंतिम और सबसे कमजोर मुघल शासक थे। इसके बावजूद लोग उन्हें अपना हीरो मानते थे और बहुत सी हिंदी फिल्मो में उनके द्वारा लिखित कविताओ को भी लिया गया है। भारत के नयी दिल्ली में एक रास्ते के नाम उन्ही के नाम पर रखा गया है। उन्होंने भले ही अपने साम्राज्य को विकसित न किया हो लेकिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की काफी सहायता की है और इसीलिए उन्हें आधुनिक भारत के राष्ट्रिय सेनानी भी कहा जाता है। वे एक सशक्त शासक नही थे और उनका साम्राज्य भी आक्फी समृद्ध और विकसित नही था। 1857 की क्रांति के बाद उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा और उन्हें रंगून भेज दिया गया।

Bahadur Shah Zafar एक कवी की तरह – भारतीय इतिहास में उन्हें एक महान उर्दू कवी के नाम से भी जाना जाता है, बहादुर शाह ज़फर ने बहुत सी उर्दू गज़ले लिखी है, जिनमे से ज्यादातर उन्होंने 1857 की क्रांति के समय में ही लिखी थी। आज भी उनकी बहुत सी गजलो को बचाकर रखा गया है और बाद में उन्हें कुल्लियात-ए-ज़फर का नाम भी दिया गया। उनकी गज़लों में मनमोहक और सुंदर शब्दों का प्रयोग किया गया है और उनके शब्दों को सुनकर ऐसा लगता है जैसे की उनमे दिल को छू जाने का जादू हो। उनके दरबार में और भी बहुत से उर्दू कवी थे जैसे की ग़ालिब, दाघ, मोमिन और जोक। कहा जाता है की निर्वासित किये जाते समय उन्हें अपने विचारो को लिखने के लिए एक कागज और कलम भी नही दी गयी थी। इसके बाद वे दीवारों पर काली स्याही से कविताये लिखते थे।

धार्मिक इंसान की तरह – ज़फर सूफी धर्म के अनुयायी थे। वे अपने भाषण में सूफी धर्म का सन्देश दिया करते थे और सूफी धर्म पर ही उनका ज्यादा प्रेम था। उस समय के प्रसिद्ध अखकर, दिल्ली उर्दू अखबार ने उन्हें सूफी संत का दर्जा भी दिया था। अपनी युवावस्था में एक शाही परिवार का सदस्य होने के बावजूद वे साधारण कपडे पहनना पसंद करते थे। वे हमेशा ही किसी गरीब विद्वान की तरह जीवन जीने की कोशिश करते रहते। उन्होंने गहराई से सूफी धर्म का अभ्यास कर रखा था। उन्हें सूफी धर्म की कई भावनाओ और परंपराओ और अन्धविश्वास पर भी विश्वास होने लगा था। अपने आप को आध्यात्मिक रूप से इतने शक्तिशाली मानते थे की वे किसी भी साधारण इंसान की समस्या को आसानी से दूर कर सके। वे हमेशा से अपनेआप को बुरी आदतों से बचाकर अच्छी बातो और आदतों में अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहते थे। ज़फर के दरबार में बहुत से ज्योतिषी, जादूगर और पीर भी हुआ करते थे, हमेशा किसी महत्वपूर्ण विवाद या मुद्दे पर ज़फर उनकी सलाह अवश्य लेता था। उनका मानना था की भगवान् को मूक जानवरों की बलि देने की बजाये हमें उन पैसो से गरीबो की सहायता करनी चाहिए। उनका हमेशा से ही यह मानना था की हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्मो की उत्पत्ति एक ही तत्व से हुई है। अपने दरबार में वे हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्मो की परंपराओ का पालन करते थे। जैसे की होली के त्यौहार पर वे अपनी बेगम, मित्र और रिश्तेदारों पर रंगों की बौछार करते थे और दशहरा के समय वे हिन्दू ऑफिसर और दरबारियों को इनाम भी देते थे।यह सारी बाते हमें ज़फर की भावना और हिन्दू धर्म के प्रति उनकी सोच को बताती है।

मृत्यु –

1862 में 87 साल की उम्र में जानकारों के अनुसार Bahadur Shah Zafar को कोई शारीरिक बीमारी हुई थी। अक्टूबर में उनकी हालत और भी ख़राब हो गयी थी। उस समय उन्हें चम्मच से खाना खिलाया जाता था लेकिन 3 नवम्बर के बाद से चम्मच से खाना खिलाना भी मुश्किल होता गया। 6 नवम्बर को ब्रिटिश कमिश्नर एच.एन. डेविस ने यह पाया की उनका शरीर लकवे से ग्रसित हो चूका है। उनकी अंतिम यात्रा की तैयारी का आदेश देते हुए ब्रिटिश कमिश्नर ने निम्बू के पेड़ और इट (Brick) इकट्टा करने का आदेश दिया। ज़फर की मृत्यु शुक्रवार को 7 नवम्बर 1862 को सुबह 5 बजे हुई। ज़फर को शाम 4 बजे यंगून के पैगोडा रोड के पास दफनाया गया था। बहादुर शाह ज़फर की याद में वहाँ बहादुर शाह ज़फर दरगाह भी बनाया गया था और फिर 16 फरवरी 1991 में दोबारा इस मस्जिद की मरम्मत भी की गयी थी। ब्रिटिश कमिश्नर डेविस ने ज़फर की जिंदगी को बहुत ही “अनिश्चित” बताया।

ज़फर महल –

ज़फर महल मुघलो के अंतिम शासक बहादुर शाह ज़फर – Bahadur Shah Zafar द्वारा निर्मित एक अंतिम मुघल ईमारत है। ज़फर महल भारत के दिल्ली में स्थापित किया गया है। अकबर द्वितीय, बहादुर शाह जफ़र द्वारा ज़फर महल के प्रवेश द्वार का निर्माण 19 वी शताब्दी के मध्यकाल में किया गया था। ज़फर महल दिल्ली के मेहरुली में बना हुआ है। मेहरुली एक रमणीय स्थल है जहाँ लोग शिकार करने और साथ ही पिकनिक मनाने के लिए भी आते है। पहले से ही प्रसिद्ध मेहरुली में ज़फर ने ज़फर महल और दरगाह बनाकर इसकी सुन्दरता और बढ़ा दी। प्रवेश द्वारा के पास बना गुम्बद तक़रीबन 15 वी शताब्दी में बनवाया गया था और महल के बाकी भाग पश्चिमी आर्किटेक्चर के अनुसार बनाये गए है।

उस समय शासक और उनका परिवार महल की बालकनी से पुरे शहर का नजारा देखते थे और मेहरुली के सुंदर बागो का दृश्य महल की खिडकियों से भी दिखायी देता है। ज़फर के शासनकाल में फूल वालो की सैर नामक तीन दिनों तक चलने वाला एक उत्सव होता था। उत्सव के दौरान ज़फर अपने परिवार के साथ मेहरुली के तीर्थ स्थान ख्वाजा बख्तियार काकी के दरगाह पर भी जाते थे। देखा जाए तो इस महल का निर्माण उनके पिता ने करवाया था लेकिन महल के मुख्य द्वार का निर्माण ज़फर ने करवाया था। और ज़फर ने इसका नाम बदलकर फिर ज़फर महल रखा।

उस समय लोधी शासनकाल में बना जहाँज़ महल मेहरुली के केंद्र में बना था, जहाँ क़व्वाली का आयोजन किया जाता था। मेहरुली में बना झरना फ़िरोज़ शाह तुगलक ने बनवाया था और बाद में अकबर द्वितीय ने इसकी मरम्मत करवायी थी।

बहादुर शाह जफर – Bahadur Shah Zafar सिर्फ एक देशभक्त मुगल बादशाह ही नहीं बल्कि उर्दू के मशहूर कवि भी थे। उन्होंने बहुत सी मशहूर उर्दू कविताएं लिखीं, जिनमें से काफी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत के समय मची उथल-पुथल के दौरान खो गई या नष्ट हो गई। देश से बाहर रंगून में भी उनकी उर्दू कविताओं का जलवा जारी रहा। वहां उन्हें हर वक्त हिंदुस्तान की फिक्र रही। उनकी अंतिम इच्छा थी कि वह अपने जीवन की अंतिम सांस हिंदुस्तान में ही लें और वहीं उन्हें दफनाया जाए लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। देश से अंग्रेजों को भगाने का सपना लिए सात नवंबर 1862 को 87 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उन्हें रंगून में श्वेडागोन पैगोडा के नजदीक दफनाया गया। उनके दफन स्थल को अब बहादुर शाह जफर दरगाह के नाम से जाना जाता है। लोगों के दिल में उनके लिए कितना सम्मान था उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हिंदुस्तान में जहां कई जगह सड़कों का नाम उनके नाम पर रखा गया है, वहीं पाकिस्तान के लाहौर शहर में भी उनके नाम पर एक सड़क का नाम रखा गया है।

यह भी पढ़ें :- History in Hindi

Note:-  आपके पास About Bahadur Shah Zafar History in Hindi मैं और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इस अपडेट करते रहेंगे. धन्यवाद.
अगर आपको Life History Of Bahadur Shah Zafar in Hindi Language अच्छी लगे तो जरुर हमें WhatsApp Status और Facebook पर Share कीजिये.
Note:- E-MAIL Subscription करे और पायें Essay With Short Biography About Bahadur Shah Zafar in Hindi and More New Article… आपके ईमेल पर.

2 COMMENTS

  1. Sir I’m fully confused because I read different history of bahadur shah zafar in class 10th.. Bahadur shah zafar ko to angrejo ne apne desh mein lejakar fasi di thi. Sir plz reply me. Is this right or wrong who I read in class 10th

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here