Famous disabled persons in india

‘असफल हम तब नहीं होते जब हम अपने उद्देश्य को पाने के कही कम पड़ जाते है मगर जब हमारे पास कोई बड़ा उद्देश ही नहीं होता तब हम नाकामयाब हो जाते है।’

Famous disabled persons in India

Famous disabled persons in india

हम इंसानों में एक बहुत ही बुरी आदत है की अगर हमें हमारे काम करने के कठिनाइयों का सामना करना पड़ता तो हम उसे छोड़ देते है या फिर उससे भागने की कोशिश करते है। सारी सुविधाए उपलब्ध होने के बाद भी हम हमारे सपनों को पुरा करने में नाकामयाब रहे तो तो हम दुसरो को दोष देते रहते है।

मगर समाज में कई सारे लोग है जो जन्म से अपाहिज होते है या फिर किसी दुर्घटना के कारण वह हमेशा के लिए विकलांग बन जाते है, मगर ऐसे लोग अपनी विकलांगता को बाजु में रखकर ऐसे मुश्किल काम कर दिखाते है जो दुनिया के सभी लोग नही कर सकते। ऐसे अपाहिज लोगो की कई सारी कहानिया है जो पूरी दुनिया को प्रेरित करने का काम करती है।

वो अपनी इच्छा, धैर्य और हिम्मत की मदत से किसी भी असंभव काम को संभव बनाने की काबिलियत रखते है जिसकी वजह से वह ऐसे काम कर दिखाते जिसे देखने के बाद आम इन्सान भी हैरान हो जाता है। कुछ ऐसे ही लोगो की दिलचस्प मगर सच्ची कहानिया हम आपके लिए लेकर आये है जिसे पढने के बाद आप भी कुछ मुश्किल काम करने के लिए प्रेरित हो जायेंगे।

  • अरुनिमा सिन्हा

अरुनिमा सिन्हा दुनिया की पहली महिला और भारत की पहली विकलांग महिला है जिन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढने का काम कर दिखाया है। अरुनिमा सिन्हा राष्ट्रीय स्थर की वॉलीबॉल खिलाडी भी है।

एक बार वह ट्रेन से जा रही थी और अचानक वहापर कुछ चोर आ गए और उन्होंने उनके गले का हार जबरन निकालते समय उन्हें चलती ट्रेन के निचे फेक दिया था। ट्रेन की पटरी पर गिरने के बाद उनके शरीर के ऊपर से 49 ट्रेन उन्हें कुचलकर चली गयी।

ऐसी ख़राब हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया उस वक्त उनके पैर पूरी तरहसे कट चूका था इसीलिए उनके पैर में रॉड डालकर पैर को ठीक किया गया। उनकी कहानी मीडिया में बहुत मशहूर हुई मगर उसकी वजह से उन्हें कुछ आलोचना और अफवाह का सामना भी करना पड़ा।

उसके बाद में उन्होंने फैसला की किया खुद को सही साबित करने के लिए कुछ करना ही पड़ेगा। फिर उन्होंने फैसला किया वह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का मुश्किल काम कर दिखाएंगी और वो भी अपनी विकलांगता के साथ। जब उन्होंने अपना यह फैलसा सुनाया तो सभीने उनका मजाक उड़ाया और डॉक्टर ने भी उन्हें जाने के लिए मना कर दिया था।

मगर उन्होंने किसी की एक बात भी नहीं सुनी उन्होंने ठान लिया की इस नामुमकिन काम को कर दिखाना है और दुनिया के सबसे उचे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ कर दिखाना ही है।

  • सतेन्द्र सिंह

सतेन्द्र सिंह को बचपन में ही पोलियो हो गया था मगर आज वो एक कामयाब डॉक्टर है। उन्होंने अपाहिज लोगो की मदत करने के लिए इनफिनिट एबिलिटी समूह की स्थापना भी की है।

उन्होंने विकलांग लोगो के लिए विशेष रूप से पोस्ट ऑफिस, मतदान केंद्र और एटीएम बनवाये है ताकी वहापर उन्हें किसी तरह की तकलीफ ना हो।

  • साईं प्रसाद विश्वनाथन

विश्वनाथन के शरीर का निचे का सारा हिस्सा परलायिज हो चूका है फिर भी उन्होंने 14000 फीट की उचाई से स्काईडाईव करने का मुश्किल काम कर दिखाया है। ऐसा कारनामा करनेवाले वह पहले भारतीय विकलांग व्यक्ति है। इस रिकॉर्ड के लिए उनका नाम लिम्का बुक में शामिल किया गया है। साईं प्रसाद विश्वनाथन अभी अमेरिका में रहते है।

  • राजेंद्र सिंह रहेलू

राजेन्द्रसिंह रहेलू को पोलियो होने के बाद भी उन्होंने 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर इतिहास निर्माण किया है।

  • मलाथी कृष्णमूर्ति होल्ला

मलाथी कृष्णमूर्ति एक परा एथलिट खिलाडी है। उनका निचे का आधा शरीर परलायिज होने के बाद भी उन्होंने देश के लिए कई सारे अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में पदक दिलाये है। उन्हें पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

  • स्टीफन हौकिंग्स

स्टीफन हौकिंग्स दुनिया के बहुत ही मशहूर और प्रसिद्ध इंग्लिश भौतिक वैज्ञानिक और लेखक थे। ब्लैक होल्स, दुनिया के कई सारे रहस्य, ब्रह्माण्ड विज्ञान, गुरुत्वाकर्षण की लहरे, क्वांटम मैकेनिक्स और जनरल रिलेटिविटी की खोज का सारा श्रेय उन्हें ही जाता है।

‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम’ उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब है। उन्हें अमित्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस का संक्रमण हुआ था जिसकी वजह से धीरे धीरे उनका पूरा शरीर परलायिज हो गया था। इस तरह से पूरा शरीर बेजान होने के बाद वह केवल उनके गाल की एक मासपेशी की मदत से बोलते थे क्यों की उनके गाल से आवाज निर्माण करने वाली मशीन लगायी गयी थी।

मगर उनकी यह विकलांगता कभी उनके काम में कभी भी परेशानी नहीं बन पायी वह इस खामी के बाद भी अपने काम अच्छे से करते है अपने आविष्कार पूरी दुनिया के सामने रखने में सफल भी रहे। उन्हें अल्बर्ट आइंस्टीन पुरस्कार, अल्बर्ट मैडल, प्रेसिडेंशियल मैडल जैसे कई सारे पुरस्कार मिल चुके है।

विकलांग होने के बाद भी उन्होंने कई सारे आविष्कार किये, कई सारी नयी खोज की, उनकी उपलब्धियों के देखने के बाद पता चलता है उन्होंने अपाहिज होने के बाद भी इतने बड़े बड़े काम किये इसीलिए लोग आज उन्हें अपना आदर्श मानते है।

  • सुधा चंद्रन

सुधा चंद्रन बहुत ही मशहूर और प्रसिद्ध भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री और प्रसिद्ध नर्तिका भी है। वह भरतनाट्यम नृत्य के लिए काफी मशहूर है जब वह तीन साल की थी तब उन्होंने डांस करना शुरू कर दिया था। एक बार वह त्रिची जा रही थी तभी अचानक उनकी बस का एक्सीडेंट हो गया।

उन्हें जो चोट लगी तथी वह इतनी गंभीर नहीं थी मगर एक्सीडेंट के बाद उन्हें समय पर उपचार ना मिलने की वजह से उनके दाहिने पैर का टखना था पूरी तरह से ख़राब हो गया था और उसकी वजह से उनके पैर को गैंग्रीन हो गया था।

यह गैंग्रीन उनके पुरे शरीर में फ़ैल सकता था इसीलिए उनकी जान बचाने के लिए उनके पैर को हमेशा के लिए काट दिया गया। उनका पैर कट जाने की वजह से उनका डांस करने का सपना पूरी तरह से टूट चूका था। मगर उन्होंने हार नहीं मानी और उन्हें कृत्रिम जयपुरी पैर लगाया गया। मगर पैर लगाने के बाद नाचने की बात तो दूर ही रही लेकिन उन्हें ठीक से चलने के लिए पुरे तीन साल लग गए।

लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से बार अपने सपने को पूरा करने के काम में लग गयी। इस दुर्घटना के बाद जब उन्होंने पहली बार डांस किया तो सभी उनके धैर्य और शानदार डांस को देखकर आश्चर्यचकित हो गए थे।

  • जॉन मिल्टन

जॉन मिल्टन एक बहुत ही मशहूर इंग्लिश कवी थे और वह अपाहिज होने के बाद भी साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की थी। उन्होंने बहुत सी जगह सफ़र किया और वहा के लोगो से भेट की और यह सब हमें उनकी कविताये पढने के बाद भी मालूम पड़ता है।

इंग्लिश साहित्य में वह बहुत ही जाने माने और प्रसिद्ध कवी थे। ‘पैराडाइस लॉस्ट’ यह उनकी सबसे अच्छी कलाकृति थी। उनके आखो की रोशनी धीरे धीरे कम होती जा रही थी और सन 1654 में जॉन मिल्टन पूरी तरह से अंधे हो चुके थे।

सबसे बड़ी आश्चर्य की बात तो यह है की उन्होंने अपनी सर्वश्रेष्ट कलाकृति ‘पैराडाइस लॉस्ट’ अंधे होने के बाद ही लिखी। राजनीती पर उन्होंने बहुत कुछ लिखा है वह अभिव्यक्ति स्वतंत्रता और प्रेस का काफी समर्थन करते थे। उन्होंने लोगो के सामने एक आदर्श खड़ा कर दिया था और शारीरिक विकलांगता के बावजूद भी उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में योगदान देना जरी रखा।

  • इरा सिंघल

दिल्ली की रहनेवाली ईरा सिंघल ने 2014 साल की युपीएससी की देश के सबसे कठिन परीक्षा में टॉप किया। पुरे देश में ईरा सिंघल इस परीक्षा में टॉपर थी। देश के सभी महिलाओ के लिए यह बड़े गर्व की बात है और साथ ही जितने भी विकलांग व्यक्ति है उनके लिए यह प्रेरणा देने वाली बात है क्यों इरा सिंघल ने अपाहिज होने के बाद भी देश की सबसे कठिन परीक्षा में पहला आने का सम्मान प्राप्त किया।

उन्हें स्कोलियोसिस नाम की बीमारी है जिसकी वजह से उनके पीठ का सारा हिस्सा विकृत हो चूका है जिसकी वजह से वह अपने हातो को भी ठीक से हिला नहीं सकती। मगर इतनी कठिनाई होने के बाद भी उन्होंने इस कठिन परीक्षा में प्रथम आने का गौरव हासिल किया साथ ही वह देश की ऐसी पहली विकलांग व्यक्ति है जिन्होंने इस युपीएससी परीक्षा में टॉप किया।

  • प्रीति श्रीनिवासन

प्रीति श्रीनिवासन तमिलनाडु की अंडर 19 टीम की पूर्व कप्तान रह चुकी है। एक बार स्विमिंग करते हुए उनका एक्सीडेंट हो गया और उनके गले के निचे का सारा हिस्सा परलायिज हो गया। मगर इस दुर्घटना के बाद भी उनका आत्मविश्वास कम नहीं हुआ और उन्होंने विकलांग लोगो की सहायता करने के लिए ‘सोलफ्री’ संघटना की स्थापना की।

  • एच रामकृष्णन

एच रामकृष्णन पोलियो की वजह से हमेशा के लिए विकलांग होने के बाद भी आज वह संगीत के क्षेत्र में सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है। आज वह एक मशहूर संगीतकार तो है ही मगर वह एस एस म्यूजिक टेलीविज़न चैनल के सीईओ भी है।

वह कई स्कूल में नौकरी के लिए गए थे लेकिन वह अपाहिज होने के कारण उन्हें किसी ने भी नौकरी नहीं दी। मगर इसके बाद भी उन्होंने धैर्य से काम लिया और संगीत के क्षेत्र में खुद को साबित कर दिखाया।

  • रविन्द्र जैन

संगीत और फ़िल्म जगत में रविन्द्र जैन काफी मशहूर है। जन्म से अंधे होने के बाद भी रविन्द्र जैन हमेशा संगीत के क्षेत्र में अपना नाम बनाना चाहते थे और सत्तर के दशक में उन्होंने बॉलीवुड में एक संगीत निर्देशक के रूप में कामयाबी हासिल की।

सर्वश्रेष्ट म्यूजिक डायरेक्टर के सूची में सबसे पहले उनका नाम लिया जाता है। उन्होंने कई सारे म्यूजिक अलबम भी किये थे और उसके लिए उन्हें बहुत सारे पुरस्कार भी मिल चुके है।

  • गिरीश शर्मा

बैडमिंटन खेल में गिरीश शर्मा ने अपनी अलग ही पहचान बनायीं है। गिरीश शर्मा बैडमिंटन के कोर्ट में जब भी खेलने को उतरते है तो सारे लोग उन्हें ही देखते रह जाते है। क्यों की कोर्ट में वह केवल एक पैर पर खड़े होकर बैडमिंटन खेलते है।

गिरीश शर्मा जब छोटे थे तो एक ट्रेन एक्सीडेंट में उन्हें अपना एक पैर गवाना पड़ा मगर उन्होंने अपना बैडमिंटन खिलाडी होने का सपना एक पैर जाने के बाद भी पूरा किया। आज बैडमिंटन जगत में वह एक महान खिलाडी बन चुके है।

  • एच बोनीफेस प्रभु

एच बोनीफेस प्रभु एक टेनिस खिलाडी है। उन्होंने सन 1998 में हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप में व्हीलचेयर पर बैठकर टेनिस का मुकाबला जीता और देश लिए मैडल भी हासिल किया। वह अपनी विकलांगता को अपनी कमजोरी नहीं मानते थे और इसीलिए उन्होंने अपाहिज होने के बाद भी व्हीलचेयर की मदत से टेनिस का मुकाबला खेला और उसमे जीत भी हासिल की। उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया।

  • शेखर नायक

शेखर नायक एक अंधे क्रिकेट खिलाडी होने के बाद भी उन्होंने 32 शतक बनाये है। इसके अलावा वह टी20 ब्लाइंड क्रिकेट के विश्व विजेता भी रह चुके है। इस युवा ने यह बात साबित कर दी की अगर साहस और लगन हो तो अपने सपने को पूरा करने में शारीरिक कमिया भी बाधा नहीं बन सकती।

इन महान लोगो के बारे में पढने के बाद हमें पता चलता है की इनमे और आम लोगो में कोई फरक नहीं होता। मगर उनकी सोच में काफी फर्क होता है जो इन्हें हम सबसे अनोखा बना देती है। जहापर सामान्य लोग बड़ी आसानी से हार मान लेते है, उस समय उनके जैसे खास लोग केवल जितने के बारे ही सोचते रहते है और उसी तरह से काम को पुरा करने की कोशिश में लग जाते है। लेकिन साधारण लोगो अपनी सारी शक्ती नकारात्मक विचारो में ही गवा बैठते है। वह कोई भी काम धैर्य और हिम्मत के साथ पुरा करते है। वह अपने शरीर के अंगोपर विजय पाकर कोई भी नामुमकिन काम को बड़ी आसानी से कर दिखाते है।

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