नागा साधू के बारेमें अद्भुत रहस्य और इतिहास | Naga sadhu

Naga sadhu – नागा साधू किसे कहा जाता है? नागा साधू अन्य साधुओ से बिलकुल भिन्न होते है। उन्हें कड़े नियमो का पालन करना पड़ता है उसके बाद ही वह नागा साधू बन सकते है। भारत में 13 ऐसे अखाड़े है जहापर सन्यासी लोगो को नागा साधू बनाया जाता है।

मगर सभी लोगो को नागा साधू से जुडी बहुत सारी बाते मालूम नहीं। इन नागा साधू की रोचक और रहस्यमयी जानकारी निचे दी गयी है।

Naga Sadhu

नागा साधू के बारेमें अद्भुत रहस्य और इतिहास – Naga sadhu History and Facts

जिसे भी नागा साधू बनना होता है उसकी सबसे पहले यहाँ के अखाड़े में ब्रह्मचर्य की परीक्षा ली जाती है। इसे 6 महीने भी लग सकते है और 12 साल भी लग सकते है।

जब अखाडा के गुरु को लगता है की उसका शिष्य पूरी तरह से तयार हो चूका है उसके बाद ही गुरु उसे आगे की शिक्षा देना शुरू कर देता है।

ऐसा नहीं की केवल पुरुष ही नागा साधू बन सकते है बल्की महिला भी नागा साधू बन सकती है और खास तौर पर दुसरे देशो को महिलाये भी नागा साधू बन चुकी है।

नागा साधू बनने के लिए सबसे पहले बालो को पूरी तरह से काटना पड़ता है, बाद में गंगा नदी में 108 बार डुबकी लगाकर स्नान करना पड़ता है और उसके बाद में उसे पाच गुरु शिक्षा देते है। उसके बाद में उसका खुदका श्राद्ध कर्म पुरा करना पडत है जिससे वह अपने परिवार और समाज के लिए मर जाता है। इस तरह से पिंडदान करने के बाद वह अखाड़े का साधू बन जाता है।

इस विधि के बाद में उस व्यक्ति को गुरु मंत्र दिया जाता है और उसके बाद में उसका पुरा जीवन उसी गुरु मंत्र के लिए ही देना पड़ता है।

नागा साधू बनने के बाद सभी तरह के कपड़ो का त्याग करना पड़ता है मगर किसी की इच्छा हो तो वह भूरे रंग का कपड़ा पहन सकता है।

नागा साधू किसी को भी झुककर नमस्कार नहीं कर सकते लेकिन वह ऐसा केवल किसी तपस्वी के सामने ही कर सकते है। नागा साधू किसी की निंदा भी नहीं कर सकते।

नागा साधू दिन में केवल एक भी बार खाना खा सकते है। नागा साधू भिक्षा मांग सकते है लेकिन वह केवल सात घरो में ही भिक्षा मांग सकते है। अगर उन्हें इन सात घरो से भिक्षा में कुछ नहीं मिलता तो उन्हें दिनभर भूका ही रहना पड़ता है।

नागा साधू विशेष रूप से अपने तिलक पर खास ध्यान देते है। सभी नागा साधू हर दिन एक जैसा ही तिलक लगाते है।

अधिकतर नागा साधू केवल कुम्भ मेला में ही देखने को मिलते है। जैसे ही कुम्भमेला ख़तम हो जाता है वैसे ही सारे नागा साधू चले जाते है। सभी नागा साधू जंगल में से ही सफर करते है।

महिला नागा साधू – Female Naga Sadhu

नागा साधू बनने से पहले सभी महिलाओ को 6 से 12 साल तक ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है। ऐसा करने के कोई महिला सफल हो जाती है उसके बाद ही वह नागा साधू बन सकती है।

महिला को नागा साधू बनने से पहले खुद का पींडदान करना पड़ता है।

नागा साधू बनने के लिए महिला को सबसे पहले पुरे बाल काटने पड़ते है उसके बाद में परंपरा के अनुसार नदी में स्नान करना पड़ता है।

जीतना सम्मान किसी पुरुष नागा साधू को दिया जाता है उतना ही सम्मान महिला नागा साधू को दिया जाता है।

महिला नागा साधू और पुरुष नागा साधू में केवल एक ही फर्क है की महिला नागा साधू पीले रंग के कपडे पहन सकती है। सभी महिला साधू माथे पर टिकालगाती है और पीले वस्त्र पहनती है।

महिला को सन्यासी बनाने का काम आचार्य महामंडलेश्वर को सौपा गया है।

महिला का पूरा जीवन ही भगवान को समर्पित होने की वजह उन्हें दिन के शुरवात में भगवान की प्रार्थना करनी पड़ती है और दिन के आखिरी में भी प्रार्थना करनी पड़ती है।

जब कोई महिला नागा साधू बन जाती है तो वहा के सारे साधू उन्हें माता कह के बुलाते है।

नागा साधू बनने क लिए महिला और पुरुष दोनों को ही एक जैसे नियमो का पालन करना पड़ता है। इन नागा साधू की एक खास बात यह है की वह बड़ी आसानी से नहीं दिखाई देते। वह केवल कुछ विशेष अवसर पर ही दिखाई देते है। सभी नागा साधू केवल कुम्भ मेला में ही दिखाई देते है। मगर कुम्भ मेला ख़तम होने के बाद में वह जल्द ही चले जाते है। सभी नागा साधू केवल जंगल में से ही सफ़र करते है।

नागा साधू का इतिहास – Naga sadhu History

ऐसा कहा जाता है की नागा साधू की शुरुवात त्रेता युग में हुई थी और उसकी शुरुवात भगवान दत्तत्रेय ने की थी मगर इन सभी नागा साधू को जोड़ने का काम, उन्हें कड़े नियमो का पालन करने सिख आदि शंकराचार्य ने दी थी। उन्होंने हिन्दू सनातन धर्म की रक्षा की थी इसीलिए उन्हें ‘सन्यासी योद्धा’ भी कहा जाता है। आज भी सभी नागा साधू के हातो में भगवान शिव का त्रिशूल देखने को मिलता है।

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