बाल दिवस पर कुछ कवितायेँ | Poem on Children’s Day

Happy Children’s Day: बच्चों को हर तरह से आनंद लेने के लिए बाल दिवस हमेशा एक खास दिन होता है अलग-अलग देशों में त्योहारों जैसा बच्चों के दिन का जश्न मनाया जाता है। भारतीय 14 नवंबर 2017 को दिन मनाते हैं। बच्चे अपने स्कूलों में विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते जैसे भाषण, निबंध,सांस्कृतिक कार्यक्रम और कोई कोई तो कवितायेँ भी पढ़ता हैं। आज हम निम्नलिखित बाल दिवस पर कुछ कवितायेँ – Poem on Children’s Day के रूप में सुंदर रचनाएं लाये हैं जो आपकी बचपन की यादों को फिर से ताजा कर देंगी।

Poem on Children's Day
बाल दिवस पर कुछ कवितायेँ – Poem on Children’s Day

Poem on Children’s Day 1

“मुश्किल है इसको भुलाना”

बचपन है एक खज़ाना , जो आता हैं ना दोबारा,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

वो खेलना खुदना और खाना, मौज मस्ती में बलखाना,
वो माँ की ममता और पापा का दुलार, भुलाये ना भूले वो सावन की फुहार,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

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वो कागज़ की नाव बनाना और,वो बारिश में भीगना,
वो झूले झुलाना और मुस्कुराना, वो पतंगो का उड़ाना,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

वो यारो की यारी में सब भूल जाना, और डंडे से गिल्ली को मारना,
वो अपने पढ़ाई से जी चुराना, और शिक्षक के पूछने पर अलग अलग बहाने बनाना,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

वो पेपर में रट्टा लगाना, उसके बाद नतीजें के डर से बहुत घबराना,
वो दोस्तों के साथ साइकिल चलाना, वो छोटी छोटी बातो पर रूठ जाना,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

Poem on Children’s Day 2

“बाल दिवस”

हर स्कूलों में भी होते हैं, नये नये आयोजन.
जिन्हेँ देख आनंदित होते, हम बच्चों के तन मन.
बाल दिवस के इस अवसर पर, एक कसम यह खाओ.
ऊँच नीच का भेद भुला कर, सबको गले लगाओ.

Poem on Children’s Day 3

“बाल-दिवस है आज साथियों”

बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल,
जगह-जगह पर मची हुई खुशियों की रेलमरेल!
जन्मदिन चाचा नेहरू का फिर आया है आज,
उन पर सारे भारत को है नाज!
वह भोले थे इतने, जितने हम हैं नादान,
हमेशा ही मन से वे थे जवान!
हम उनसे सीखे मुस्कुराना, सारें संकट झेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल!

नही घृणा हो किसी ह्रदय में, नही द्वेष का वास,
आँखों में आँसू न कहीं हो, हो अधरों पर हास!
हम सब मिलकर क्यों न रचाएं ऐसा सुख संसार,
भाई-भाई जहां सभी हो, रहे छलकता प्यार!
झगड़े नही आपस में कोई, हो आपस में मेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल!

पड़े जरूरत अगर, पहन ले हम वीरों का वेश,
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा हमको रहे स्वदेश!
मातृभूमि के हित के लिए हो जाएं बलिदान,
मिट्टी से मिलकर भी माँ की रक्खे ऊँची शान!
दुश्मन के दिल को दहला दे, डाल नाक-नकेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल!

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