“टी ट्रेल्स” जहाँ सौ से अधिक तरह की चाय का स्वाद मिल सकता है!

Co-founders of Tea Trails Kavita Mathur

अगर चाय की बात की जाय तो कई सारे लोगो के कान खड़े हो जाते है और वो चाय पीने के लिए हर वक्त तैयार रहते है। हमारे देश में चाय केवल एक पेय नहीं है बल्कि ये जरिया है खुद के भावनाओं को बाहर निकलाने का और खुद को खोलने का।

अक्सर देखा जाता है की लोग चाय में चर्चा करते है, चाय से लोग कहा तक पहुच गए, खुद हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते है की वो पहले चाय बेचा करते थे। ऐसे ही एक महिला है जो चालीस के बाद रिटायर होने का विचार नहीं कर रही थी बल्कि दुनिया भर में घूमते हुए उसने ये ठान लिया था की भारतीयों के इमोशन से जुडी इस चीज को वो अलग स्वाद देगी।

उन्होनें ये कर दिखाया और देखते ही देखते आज बना दी है “टी ट्रेल्स” – Tea Trails जिसमे आपको सौ से अधिक तरह की चाय का स्वाद मिल सकता है। ये कहानी है कविता माथुर की।

Co-founders of Tea Trails Kavita Mathur

“टी ट्रेल्स” जहाँ सौ से अधिक तरह की चाय का स्वाद मिल सकता है – Co-founders of Tea Trails Kavita Mathur

कविता दुनिया की सबसे बड़ी प्ले स्कूल यूरोकिड्स की संस्थापक सदस्यों में भी रह चुकी है। चालीस के बाद कविता ने देश विदेश में घूमना शुरू किया और कई तरह की चाय का आनंद लिया। कविता कहती है की मुझे एक बार एक जापानी चाय समारोह में आमंत्रण मिला और मैं वहां गई तो मुझे समझ आया की केवल टी बैग को डुबाकर उसमे चीनी मिला देना ही चाय नहीं है बल्कि चाय एक इमोशन है जो इस देश का हर नागरिक महसूस करता है।

इसके बाद उन्होंने ये ठान लिया की ये इमोशन वो वेस्ट नहीं होने देगी। वो कई जगह गई और महगी से महगी जगहों से लेकर सडक के किनारे वाली चाय का भी आनंद लिया।

55 साल की कविता शिक्षाविद रही है और उन्होंने कहा की रिटायर होने के बाद अपने पति उदय माथुर और उनके सहयोगी गणेश विश्वनाथन को समझ आया की चाय वाली जगहे आज के समय में युवाओ के लिए फेवरेट स्पॉट बने हुए है।

बस फिर क्या था सोच लिया की भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश जो सबसे अधिक चाय के बगान रखता है लेकिन उसकी चाय दूसरे देशो में चली जाती है तो अब इस देश को यहाँ का स्वाद मिलेगा। कविता मुंबई से है तो उन्होंने अपना पहला आउटलेट मुंबई के थाणे में खोला जिसे नाम दिया “टी ट्रेल्स”।

कविता ने इसे शुरू करने के बाद केवल यहाँ चाय बेचना ही नहीं बल्कि चाय पीने के स्वास्थ लाभों के बारे में बताना भी शुरू किया। उन्होंने कैफ़े का माहौल ऐसा बनाया की लोग चाय की तरफ आकर्षित हो और चाय पीने के बारे सोचे। सुगन्धित माहौल और ऐसा लगता की जैसे आप चाय के बागानों में बैठे हुए है।

अदरक, इलायची, कड़क चाय से हटकर वो जापानी और बाकी अलग अलग देशो की चायो का स्वाद यहाँ देती है। कुल मिलाकर सौ से अधिक चाय के प्रकार है जो की यहाँ मिलते है।

कविता चाय के साथ साथ स्नैक्स और भोजन भी परोसती है। यानी की खाने के बाद जिन्हें चाय पीने की आदत है वो कही बाहर नहीं जाए बल्कि यही चाय पियें।

आज इसके देशभर में 31 से ज्यादा आउटलेट है और देशभर के लोग अलग अलग जगहों में इसका स्वाद ले रहे है। कविता को पहली फंडिंग एनएचआई से मिली जिससे उनका बिजनस काफी ग्रोथ कर गया। चाय के अलावा कैफे के मेनू में कई विशेष चीजें शामिल हैं। जै

से बर्मीज टी सलाद, टी मार्बल्ड अंडे, टी इन्फ्यूज्ड थाई कटोरा आदि। कविता अपने स्टाफ को खुद ट्रेन करती हैं। ताकि वे ग्राहकों को सलाह दे सकें कि वे किस फूड के साथ कौन सी चाय का पेयर ऑर्डर कर सकते हैं।

आज कविता उन लोगो के लिए आदर्श बन चुकी है जो कहते है की अब रिटायर होने का वक्त आ गया है। देश को असली चाय का स्वाद देने वाली कविता की कहानी बहुत रोचक है।

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2 thoughts on ““टी ट्रेल्स” जहाँ सौ से अधिक तरह की चाय का स्वाद मिल सकता है!”

  1. yah aapne ek bahut he achchi jankari hamare sath share ki hai isse pahle me tea trails ke bare me nahi janta tha. is tarah ke article hamare sathe share karne ke lye aapka dhanyawad

    1. धन्यवाद विक्रम जी, कविता जी के ‘टी ट्रेल्स’ खोलने तक का सफर बहुत ही शानदार और प्रेरणादायक है। जिन्होनें टी ट्रेल्स के माध्यम न सिर्फ लोगों को दुनिया भर के चाय का टेस्ट चखाया और आज वे उन लोगों के लिए आादर्श बनी हुई हैं जिनका रिटायरमेंट का समय आ गया है।

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