क्रांतिकारी सुखदेव की जीवनी

Sukhdev Information in Hindi

सुखदेव थापर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन और पंजाब में विविध क्रांतिकारी संगठनो के वरिष्ट सदस्य थे। उन्होंने नेशनल कॉलेज, लाहौर में पढाया भी है और वही उन्होंने नौजवान भारत सभा की स्थापना भी की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिशो का विरोध कर आज़ादी के लिये संघर्ष करना था।

Sukhdev विशेषतः 18 दिसम्बर 1928 को होने वाले लाहौर षडयंत्र में शामिल होने की वजह से जाने जाते है। वे भगत सिंह और शिवराम राजगुरु के साथ सह-अपराधी थे जिन्होंने उग्र नेता लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद जवाब में लाहौर षड्यंत्र की योजना बनायीं थी।

8 अप्रैल 1929 को उन्होंने नयी दिल्ली के सेंट्रल असेंबली हॉल में उन्होंने मिलकर बमबारी की थी और कुछ समय बाद ही पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया था। और 23 मार्च 1931 को तीनो को फाँसी दी गयी थी। और रहस्यमयी तरीके से उन्हें शवो को सतलज नदी के किनारे पर जलाया गया था।

क्रांतिकारी सुखदेव की जीवनी – Sukhdev Biography in Hindi

freedom fighter Sukhdev Thapar

महान क्रांतिकारक सुखदेव के बारेमें – Sukhdev Information in Hindi

पुरा नाम (Name)सुखदेव थापर
जन्म (Birthday)१५ मई १९०७
जन्मस्थान (Birthplace)लुधियाना,पंजाब
माता का नाम (Mother Name)श्रीमती रल्ली देवी
पिता का नाम (Father Name)श्री. रामलाल थापर
सदस्य संगठनहिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन असोसिएशन
मृत्यू (Death)२३ मार्च १९३१

 

सुखदेव का प्रारंभिक जीवन – Sukhdev History

सुखदेव का जन्म 15 मई 1907 को पंजाब में लुधियाणा के नौघरा में हुआ था। उनके पिता का नाम रामलाल और माता का नाम राल्ली देवी था। सुखदेव के पिता की जल्द ही मृत्यु हो गयी थी और इसके बाद उनके अंकल लाला अचिंत्रम ने उनका पालन पोषण किया था।

किशोरावस्था से ही सुखदेव ब्रिटिशो द्वारा भारतीयों पर किये जा रहे अत्याचारों से चिर-परिचित थे। उस समय ब्रिटिश भारतीय लोगो के साथ गुलाम की तरह व्यवहार करते थे और भारतीयों लोगो को घृणा की नजरो से देखते थे। इन्ही कारणों से सुखदेव क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हुए और भारत को ब्रिटिश राज से मुक्त कराने की कोशिश करते रहे।

बाद में सुखदेव हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन और पंजाब के कुछ क्रांतिकारी संगठनो में शामिल हुए। वे एक देशप्रेमी क्रांतिकारी और नेता थे जिन्होंने लाहौर में नेशनल कॉलेज के विद्यार्थियों को पढाया भी था और समृद्ध भारत के इतिहास के बारे में बताकर विद्यार्थियों को वे हमेशा प्रेरित करते रहते थे।

इसके बाद सुखदेव ने दुसरे क्रांतिकारियों के साथ मिलकर “नौजवान भारत सभा” की स्थापना भारत में की। इस संस्था ने बहुत से क्रांतिकारी आंदोलनों में भाग लिया था और आज़ादी के लिये संघर्ष भी किया था।

सुखदेव का स्वतंत्रता संग्राम मे प्रवेश – Indian Freedom Fighters Sukhdev Thapar in Hindi

Sukhdev Real Photo
Sukhdev Real Photo

सुखदेव ने उनके नौजवान साथी भगत सिंह, भगवती चरण बोहरा, कौम्रेड रामचंद्र इत्यादी के साथ संघटित होकर देश के स्वतंत्रता संग्राम मे योगदान देने के लिये शुरुवात की। इसके लिये बाद में सुखदेव  हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन  और पंजाब के कुछ क्रांतिकारी संगठनो में शामिल हुए।

सुखदेव एक देशप्रेमी क्रांतिकारी और नेता थे जिन्होंने लाहौर में नेशनल कॉलेज के विद्यार्थियों को पढाया भी था और समृद्ध भारत के इतिहास के बारे में बताकर विद्यार्थियों को वे हमेशा प्रेरित करते रहते थे। दुसरे क्रांतिकारियों के साथ मिलकर सुखदेव ने  “नौजवान भारत सभा” की स्थापना भारत में की। इस संस्था ने बहुत से क्रांतिकारी आंदोलनों में भाग लिया था और आज़ादी के लिये संघर्ष भी किया था।

आज़ादी के अभियान मे सुखदेव की भूमिका – Sukhdev Role Into Indian Independence Movement

Sukhdev Photo सुखदेव ने बहुत से क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लिया है जैसे 1929 का “जेल भरो आंदोलन” । इसके साथ-साथ वे भारतीय स्वतंत्रता अभियान के भी सक्रीय सदस्य थे। भगत सिंह  और  शिवराम राजगुरु  के साथ मिलकर वे लाहौर षड़यंत्र में सह-अपराधी भी बने थे।

1928 में लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद यह घटना हुई थी। 1928 में ब्रिटिश सरकार ने सर जॉन साइमन के अंडर एक कमीशन का निर्माण किया, जिसका मुख्य उद्देश्य उस समय में भारत की राजनितिक अवस्था की जाँच करना और ब्रिटिश पार्टी का गठन करना था।लेकिन भारतीय राजनैतिक दलों ने कमीशन का विरोध किया क्योकि इस कमीशन में कोई भी सदस्य भारतीय नही था।

बाद में राष्ट्रिय स्तर पर उनका विरोध होने लगा था। जब कमीशन 30 अक्टूबर 1928 को लाहौर गयी तब लाला लाजपत राय ने अहिंसात्मक रूप से शांति मोर्चा निकालकर उनका विरोध किया लेकिन ब्रिटिश पुलिस ने उनके इस मोर्चे को हिंसात्मक घोषित किया।

इसके बाद जेम्स स्कॉट ने पुलिस अधिकारी को विरोधियो पर लाठी चार्ज करने का आदेश दिया और लाठी चार्ज के समय उन्होंने विशेषतः लाला लाजपत राय को निशाना बनाया। और बुरी तरह से घायल होने के बाद लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गयी थी। जब 17 नवम्बर 1928 को लाला लाजपत राय की मृत्यु हुई थी तब ऐसा माना गया था की स्कॉट को उनकी मृत्यु का गहरा धक्का लगा था।

लेकिन तब यह बात ब्रिटिश पार्लिमेंट तक पहुची तब ब्रिटिश सरकार ने लाला लाजपत राय की मौत का जिम्मेदार होने से बिल्कुल मना कर दिया था।इसके बाद सुखदेव ने भगत सिंह के साथ मिलकर बदला लेने की ठानी और वे दुसरे उग्र क्रांतिकारी जैसे शिवराम राजगुरु, जय गोपाल और चंद्रशेखर आज़ाद  को इकठ्ठा करने लगे, और अब इनका मुख्य उद्देश्य स्कॉट को मारना ही था।

जिसमे जय गोपाल को यह काम दिया गया था की वह स्कॉट को पहचाने और पहचानने के बाद उसपर शूट करने के लिये सिंह को इशारा दे। लेकिन यह एक गलती हो गयी थी, जय गोपाल ने जॉन सौन्ड़ेर्स को स्कॉट समझकर भगत सिंह को इशारा कर दिया था और भगत सिंह और शिवराम राजगुरु ने उनपर शूट कर दिया था।

यह घटना 17 दिसम्बर 1928 को घटित हुई थी। जब चानन सिंह सौन्ड़ेर्स के बचाव में आये तो उनकी भी हत्या कर दी गयी थी। इसके बाद पुलिस ने हत्यारों की तलाश करने के लिये बहुत से ऑपरेशन भी चलाये, उन्होंने हॉल के सभी प्रवेश और निकास द्वारो को बंद भी कर दिया था।

जिसके चलते सुखदेव अपने दुसरे कुछ साथियों के साथ दो दिन तक छुपे हुए ही थे। 19 दिसम्बर 1928 को सुखदेव ने भगवती चरण वोहरा की पत्नी दुर्गा देवी वोहरा को मदद करने के लिये कहा था, जिसके लिये वह राजी भी हो गयी थी। उन्होंने लाहौर से हावड़ा ट्रेन पकड़ने का निर्णय लिया। अपनी पहचान छुपाने के लिये भगत सिंह ने अपने बाल कटवा लिये थे और दाढ़ी भी आधे से ज्यादा हटा दी थी।

अगले दिन सुबह-सुबह उन्होंने पश्चिमी वस्त्र पहन लिये थे, भगत सिंह और वोहरा एक युवा जोड़े की तरह आगे बढ़ रहे थे जिनके हाथ में वोहरा का एक बच्चा भी था। जबकि राजगुरु उनका सामान उठाने वाला नौकर बना था। वे वहाँ से निकलने में सफल हुए और इसके बाद उन्होंने लाहौर जाने वाली ट्रेन पकड़ ली। लखनऊ ने, राजगुरु उन्हें छोड़कर अकेले बनारस चले गए थे जबकि भगत सिंह और वोहरा अपने बच्चे को लेकर हावड़ा चले गए।

सुखदेव की मृत्यु – Sukhdev Death

Sukhdev Name Image दिल्ली में सेंट्रल असेंबली हॉल में बमबारी करने के बाद सुखदेव और उनके साथियों को पुलिस ने पकड़ लिया था और उन्होंने मौत की सजा सुनाई गयी थी।

23 मार्च 1931 को सुखदेव थापर, भगत सिंह और शिवराम राजगुरु को फाँसी दी गयी थी और उनके शवो को रहस्यमयी तरीके से सतलज नदी के किनारे पर जलाया गया था। सुखदेव ने अपने जीवन को देश के लिये न्योछावर कर दिया था और सिर्फ 24 साल की उम्र में वे शहीद हो गए थे।

भारत को आज़ाद कराने के लिये अनेकों भारतीय देशभक्तों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। ऐसे ही देशभक्त शहीदों में से एक थे, सुखदेव थापर, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन भारत को अंग्रेजों की बेंड़ियों से मुक्त कराने के लिये समर्पित कर दिया। सुखदेव  महान क्रान्तिकारी भगत सिंह के बचपन के मित्र थे।

दोनों साथ बड़े हुये, साथ में पढ़े और अपने देश को आजाद कराने की जंग में एक साथ भारत माँ के लिये शहीद हो गये। 23 मार्च 1931 की शाम 7 बजकर 33 मिनट पर सेंट्रल जेल में इन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया गया और खुली आँखों से भारत की आजादी का सपना देखने वाले ये तीन दिवाने हमेशा के लिये सो गये।

इस विषय पर अधिक बार पुछे गये सवाल – Frequently Asked Question About Sukhdev

१. उम्र के कौनसे साल मे सुखदेव को फासी दी गई थी?

जवाब: २४ वे साल।

२. सुखदेव कौनसे क्रांतिकारी संगठन से जुडे हुये थे?

जवाब: हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन ।

३. सुखदेव के साथ किन अन्य दो नौजवान क्रांतीकारियो को फासी पर चढाया गया?

जवाब: भगत सिंह और शिवराम हरी राजगुरू को।

४. किस बुजुर्ग स्वतंत्रता सेनानी की मृत्यू से युवा क्रांतिकारी सुखदेव और उनके साथीयो मे ब्रिटीश शासन के खिलाफ रोष उत्पन्न हुआ?

जवाब: लाला लजपत राय।

५. सायमन कमिशन क्या था?

जवाब: उस समय में भारत की राजनितिक अवस्था की जाँच करना और ब्रिटिश पार्टी का गठन करने के मुख्य उद्देश्य से भारत मे कमिशन का गठन किया गया था, जिसका नाम सायमन कमिशन था।

६. राजनैतिक दलो द्वारा सायमन कमिशन का विरोध क्यो किया जा रहा था?

जवाब: सायमन कमिशन में कोई भी सदस्य भारतीय नही था, इसलिये इस कमिशन का विरोध किया गया।

७. सुखदेव के माता पिता का नाम क्या था?

जवाब: सुखदेव के माता का नाम रल्ली देवी तथा पिता का नाम रामलाल थापर था।

८. सुखदेव का जन्म कहा पर हुआ था?

जवाब: पंजाब राज्य के लुधियाना मे नौघरा नामक जगह पर सुखदेव का जन्म हुआ था।

९. सुखदेव ने कौनसे संस्था की स्थापना की थी?

जवाब: नौजवान भारत सभा।

१०. सुखदेव ने कौनसे कॉलेज मे छात्रो को पढाया था?

जवाब: लाहोर के नेशनल कॉलेज के छात्रो को सुखदेव ने पढाया था।

4 COMMENTS

  1. Krantikari Sukhdev, Bhagatsigh, Rajguru and Chandrashekhar Azad contribution in Indian freedom fight was incredible and greater than Mahatma Gandhi, J.Nehru though these Krantivir fought for Indian freedom for very short period and loved death in the leg of Bharat Mata. Gandhi, J.Nehru fough for long time but their long fight is almost nothing against Krantikari Sukhdev, Bhagatsigh, Rajguru and Chandrashekhar Azad contribution for Indian freedom fight…

    • We really thank you for going through this historical article. Whatever you stated here is completely true. Bhagat Singh, Sukhdev, Rajguru were a great freedom fighter. They sacrificed their lives to make India free. Sukhdev’s contribution in freedom struggle is invaluable. Nobody can equal Sukhdev in patriotism.

    • It is a very memorable experience for us that you like our article. If you want to read more article and experience happiness you can read articles on Bhagat Singh and Rajguru as well.

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