क्यों मनाई जाती है होली, इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं…

Holi Information in Hindi

रंगों का त्योहार होली भारत में हिन्दू धर्म के और भारत के प्रमुख मुख्य त्योंहारों में से एक है। यह पर्व आपसी सोहार्द, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। हिन्दी पंचाग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन हर साल होली मनाई जाती है।

इसे हिन्दू धर्म के लोग बेहद हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। होली के पर्व पर लोग अपने पुराने गिले-शिकवे मिटाकर प्रेम की भावना से एक-दूसरे से मिलते हैं एवं मुंह मीठा कर होली की शुभकामनाएं देते हैं।

यह पावन पर्व मुख्य रुप से मौज-मस्ती करने का त्योहार है, जिसकी तैयारियां बच्चे कई दिन पहले से ही करने लगते हैं। इस पर्व की बाजारो में भी अलग ही रौनक दिखाई देती है।

इस त्योहार को मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं और इतिहास – Holi History जुडा हुआ हैं, जिनके बारे में हम आपको अपने इस लेख में बता रहे हैं।

तो आइए जानते हैं होली का पर्व कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है, एवं इसके महत्व एवं इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में-

क्यों मनाई जाती है होली, इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं – Holi Information in Hindi

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होली का त्योहार कब मनाया जाता है ? – When Holi is Celebrated or Holi Kab Hai

भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक होली का पर्व हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। (यह त्योहार फरवरी और मार्च के बीच में पड़ता है)। यह त्योहार 2-3 दिन तक मनाया जाता हैं। वहीं कई-कई जगहों पर महीनों तक होली की रौनक दिखती हैं। फिलहाल 2021 में होली का पर्व 28 और 29 मार्च को मनाया जाएगा। 28 मार्च को होलिका दहन (Holika Dahan) है, जबकि 29 मार्च को रंग वाली होली है।

होलिका दहन पर लोग अपनी-अपनी परंपराओं के मुताबिक पूजा-अर्चना करते हैं। यह त्योहार खुशियों और मन को प्रफुल्लित कर देने वाला पर्व है। किसान इस पर्व को फसल उगने की खुशी में भी मनाते हैं इसलिए इसे फसलों का त्योहार भी कहा जाता है।

क्यों मनाई जाती है होली एवं इससे जुडी पौराणिक कथाएं – Holi Festival Story in Hindi

रंगों के त्योहार होली से कई धार्मिक कथाएं और पौराणिक मान्ताएं जुड़ी हुई हैं। वहीं होलिका और विष्णु के परम भक्त प्रह्ललाद की कहानी सबसे अधिक प्रसिद्ध है।

हिरण्यकश्यप और भक्त प्रल्हाद से जुड़ी है होली की कहानी – Bhakt Prahlad Story in Hindi

बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार होली मनाने की सबसे प्रचलित कहानी – विष्णु भक्त प्रल्हाद, हिरण्यकश्यप और होलिका से जुड़ी हुई है – ऐसा कहा जाता है कि हिरण्यकश्य नाम का एक ऐसा राक्षस था, जिसके अत्याचार काफी बढ़ गए थे, जिससे लोग खौफ खाते थे।

वहीं राक्षस रुपी राजा हिरण्यकश्यप को ब्रह्म देव द्वारा वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु न किसी इंसान के द्वारा होगी, न ही उसे कोई किसी अस्त्र-शस्त्र से मार सकता है, न जानवर ही उसका कुछ बिगाड़ सकता है, ना वह घर के अंदर, ना घर के बाहर, ना दिन में, ना रात में, ना आकाश में, ना ही धरती में उसकी मृत्यु होगी।

ऐसा वरदान पाकर वह खुद को बेहद शक्तिशाली समझने लगा था और इतना अंहकारी हो गया था, कि वह खुद को ही भगवान मानने लगा था और लोगों से विष्णु भगवान की पूजा करने की मना करता था, और इसके बजाय खुद की पूजा करने के लिए कहता था, क्योंकि भगवान विष्णु ने ही उसके राक्षसी भाई का वध किया था, हालांकि उसके राज्य की प्रजा भी उसके डर से उसकी पूजा करने लगी थी।

लेकिन हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रल्हाद, भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था, वह हर समय उनकी भक्ति में लीन रहता था, जिसकी वजह से हिरण्यकश्यप उसको बिल्कुल पसंद नहीं करता था, हिरण्यकश्यप की लाख कोशिशों के बाबजूद भी जब प्रल्हाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी तो राक्षस हिरण्यकश्यप ने अपनी ही पुत्र प्रल्हाद को मारने की योजना बनाई।

हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर अपने पुत्र प्रल्हाद के खिलाफ मौत का षडयंत्र रचा। दरअसल, उसकी बहन होलिका भी भगवान शिव की उपासक थी और उसे भगवान शिव से वरदान के रुप में एक ऐसी चादर मिली थी, कि जब तक वह चादर होलिका के तन पर रहेगी तो उसे कोई जला नहीं सकता है।

इसीलिए हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रल्हाद को गोद में लेकर जलती आग में बैठने को कहा, जिससे उसका पुत्र भस्म हो जाए। हालांकि, अहंकारी राक्षस हिरण्यकश्यप को अपनी यह चाल उल्टी पड़ गई, क्योंकि आग में बैठी होलिका की चादर, तूफान में उड़ गई, जिससे वह आग में जलकर राख हो गई, जबकि प्रल्हाद भगवान विष्णु की कृपा से बच गया।

तभी से बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रुप में होली मनाने की शुरुआत की गई, इसलिए होली के पर्व पर समाज में फैली सभी बुराइयों को नष्ट करने के लिए होलिका दहन – Holika Dahan की भी परम्परा है। जिसमें लकड़ी की होलिका बनाकर उसे जलाया जाता है।

राधा – कृष्ण के पवित्र प्रेम से भी जुड़ा है रंगों का त्योहार होली – Dhulivandan (Rang Panchami)

ऐसा कहा जाता है कि, भगवान श्री कृष्ण रंगों से होली मनाते थे, बसंत में श्री कृष्ण लीला के दौरान गोकुल के लोग एक-दूसरे पर गुलाल और रंग डालते थे, इसलिए होली का त्योहार, रंगों के त्योहार के रुप में मनाया जाने लगा।

वहीं होली के पर्व में गोकुल नगरी मथुरा वृन्दावन में सभी लोग राधा-कृष्ण के प्रेम रंग में डूबे रहते हैं, यहां की बरसाने की फूलों की होली और नंदगांव की लठमार होली दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

रबी की फसल तैयार होने की खुशी में भी मनाई जाती है होली:

होली के त्योहार को बसंत का त्योहार भी कहा जाता है, इस मौसम में किसानों की रबी की फसल पककर अच्छी तरह तैयार हो जाती हैं, इसलिए इसकी खुशी में होली के त्योहार को ‘बसंत महोत्सव’ – Basant Mahotsav के रुप में भी मनाया जाता है।

होली से जुड़ी अन्य पौराणिक प्रचलित कथाएं – Holi Ki Kahani

होली के त्योहार कामदेव के पुनर्जन्म, राक्षसी पूतना का श्री कृष्ण द्वारा वध से भी जुड़ा हुआ है।

कुछ कथाओं के मुताबिक इस दिन ही भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रुप में स्वीकार किया था, तभी से लोग इसे लोग प्रेम की विजय के रुप में मनाते हैं, जबकि कुछ लोगो का मानना है कि भगवान श्री कृष्ण ने इसी दिन अपने बाल रुप में राक्षसी पूतना का वध किया था।

जिसकी खुशी में गोकुल नगरी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की थी और एक-दूसरे पर रंग-गुलाल डालकर होली का पवित्र उत्सव मनाया था। वहीं इसके बाद से ही मथुरा की होली काफी मशहूर हो गई।

होली का इतिहास ? – Holi History in Hindi

होली का पर्व प्राचीन काल से मनाया जा रहा है। इसका उल्लेख कई हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में ही नहीं बल्कि कई इतिहासकारों द्वारा भी किया गया है।

होली मनाने की परंपरा मुगलों के शासनकाल से ही चली आ रही है वहीं कुछ इतिहासकारों की माने तो मुगल शासक शाहजहां के काल में होली को ईद-ए-गुलाबी के नाम से संबोधित किया जाता था।

इसके अलावा अकबर का जोधाबाई के साथ और जहांगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का उल्लेख भी इतिहास में मिलता है।

कई प्राचीन मंदिरों की दीवारों पर बने चित्रों से भी होली उत्सव के प्रमाण मिलते हैं। इसके अलावा कई प्रमाणों के मुताबिक होली का त्योहार ईसा मसीह के जन्म से कई सदियों पहले ही मनाया जा रहा है।

वहीं विजयनगर की राजधानी हंपी में 16वीं सदी का एक मंदिर है। जिसमें होली के कई ऐसे दृश्य हैं जिसमें राजकुमार, राजकुमारी अपने दासों समेत एक दूसरे को रंग लगाते प्रतीत हो रहे हैं। इससे होली के पर्व के महत्व को समझा जा सकता है।

होली का उत्सव कैसे मनाया जाता है ? – How To Celebrate Holi in Hindi – Holi Kaise Manaye

होली का उत्सव दो-तीन दिनों तक चलता है। इसके पहले दिन होलिका दहन होता है, इस दिन हर चौराहे और कॉलोनियों में लकड़ी और उपलों से होलिका बनाई जाती है फिर होलिका दहन किया जाता है।

होलिका दहन में लोग पूजा-अर्चना करते हैं। और अपने घरों में जो भी पकवान बनाते हैं, उनका भोग लगाते हैं। इसके साथ ही होलिका दहन में नई फसले गेहूँ की बालियों और चने के होले को सेकने का भी काफी महत्व माना गया है। कई जगहों पर होलिका दहन के मौके पर महिलाएं लोक गीत भी गाती नजर आती हैं।

होलिका दहन के अगले दिन धूलंडी मनाते हैं, जिसे रंगवाली होली के नाम से जानते हैं। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और पकवान खिलाते हैं। इस त्योहार को खुशियों और उमंग के त्योहार में धूमधाम से मनाया जाता है।

प्रेम और भाईचारे का प्रतीक होली के पर्व को हिन्दू धर्म के लोग धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन जगह-जगह पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और मुंह मीठा कर होली के पर्व की बधाई देते हैं तो बच्चे रंगों की पिचकारियों से खेलते हैं एवं पानी के गुब्बारें से मौज-मस्ती करते नजर आते हैं।

बसंत के मौसम में इस त्योहार पर सभी लोग रंग में डूबे नजर आते हैं। होली के लोक गीत एवं आधुनिक म्यूजिक के साथ लोग रेन डांस करते हैं, तो कई लोग होली मिलन समारोह का आयोजन कर मौज-मस्ती करते हैं।

वहीं भारत में अलग-अलग जगहों पर लोग इसे अपने-अपने तरीके से मनाते हैं एवं इस दिन लोग अपने सभी गिले शिकवे भुलाकर प्रेम से एक-दूसरे को इस पावन पर्व की बधाई देते हैं और सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं।

होली का महत्व – Importance of Holi Festival or Holi ka Mahatva

होली के पर्व का विशेषकर हिन्दू धर्म के लोगों के लिए बेहद महत्व है। होली के त्योहार को लोग धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक त्योहार के रुप मे भी मनाते हैं।

इस पर्व से लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। इसके साथ ही इसे फसल के त्योहार के रुप में भी मनाया जाता है। यह पर्व लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का भी मौका प्रदान करता है, इसलिए इसका सामाजिक महत्व भी है।

दरअसल आज के व्यस्त जीवन में लोगों को एक-दूसरे से मिलने का वक्त नहीं मिलता है। ऐसे में यह त्योहार लोगों को करीब लाने का काम करता है एवं आपसी मतभेदों को दूर करता है।

होली का वैज्ञानिक रुप से भी काफी महत्व है क्योंकि यह त्योहार खुशी लाने का काम करता है एवं मनुष्य को मानिसक रुप से भी स्वस्थ बनाता है और आलस को दूर करता है।

इस तरह से सकरात्मक ऊर्जा प्रवाह करने वाले इस पर्व का सभी के लिए अलग-अलग महत्व है।

कहां-कहां मनाया जाता है रंगो का त्योहार होली – Where Holi Is Celebrated in Hindi

होली का त्योहार भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मनाया जाता है। वहीं भारत में अलग-अलग राज्यों में लोग इसे अपने-अपने तरीके से लो मनाते हैं।

ब्रज की होली- भारत में ब्रज यानि की मथुरा की होली काफी मशहूर है। यहां बरसाने की फूलों की होली और नंदगांव की लठमार होली को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। 

वहीं उत्तर प्रदेश की कृष्णनगरी मथुरा में इस त्योहार को करीब 25 दिनों तक मनाया जाता है। होली के पर्व के दौरान यहां के लोग राधा-कृष्ण के प्रेम रंग में सारोबार होते हैं। वहीं इस मौके पर कुमाऊं, लोक गीत एवं सगीत गोष्ठियां इस त्योहार के आनंद को दो गुना कर देती हैं।

भारत के अन्य राज्यों में होली-हरियाणा राज्य में धुलंडी के दिन भाभी द्वारा देवर को सताए जाने की अनूठी परंपरा है।

गोवा में होली पर जुलूस निकालने की परंपरा है तो महाराष्ट्र में सूखे गुलाल से होली खेलने एवं पंजाब में होली के दिन सिखों द्वारा अपनी शक्ति प्रदर्शन की परंपरा है। इस तरह भारत के अलग-अलग राज्यों में होली के पर्व को लोग अपने-अपने तरीकों से मनाते हैं।

होली पर बनने वाले स्वादिष्ट पकवानों की परंपरा – Holi Festival Food

होली के त्योहार के मौके पर लोग अपने-अपने घरों में पारंपरिक पकवान बनाते हैं, जिसकी तैयारी कुछ दिन पहले से ही घरों में शुरु हो जाती हैं।

इस मौके पर घरों में विशेषकर गुझिया, गुलाब जामुन, लड्डू, मालपुआ, मठरी, चिप्स, पापड, कचौरी, कांजी बड़ा, मूंग दाल हलवा आदि तैयार किए जाते हैं। होली के त्याहोर पर ठंडाई, कांजी, भांग का भी काफी चलन है।

होली सेफ्टी टिप्स – Holi Safety Tips in Hindi

  • होली की मस्ती में बच्चों का ख्याल रखें, क्योंकि इस दौरान बच्चे मनमानी करते हैं और अधिक समय तक गीले रहने से बीमार पड़ जाते हैं।
  • कैमिकल वाले रंगों से बचें एवं अपनी स्किन, बालों एवं आंखों का विशेष ध्यान रखें। होली खेलनें से पहले अपने शरीर और बालों पर खूब सारा तेल या फिर मॉइश्च्राइजर लगाएं और सनस्क्रीन का भी इस्तेमाल करें। इससे रंगों का ज्यादा असर स्किन और बालों पर नहीं पड़ेगा।
  • होली में कैमिकल वाले रंगों की जगह ऑर्गेनिक एवं नैचुरल रंगों का इस्तेमाल करें।
  • गहरे रंग के कपड़ों चुनाव करें, क्योंकि कई बार हल्के रंग के कपड़े गीले होने पर पारदर्शी हो जाते हैं, जिससे शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है।
  • इसके साथ ही ऐसे कपड़ों पहनें जिससे पूरा शरीर ढका रहे ताकि स्किन पर ज्यादा रंग नहीं चढ़ पाए।
  • होली खेलने से पहले ज्वैलरी उतार दें, क्योंकि होली के खींचतान में कई ज्वेलरी गिरने का डर रहता है।
  • रंगों से खेलने के बाद अगर आपकी स्किन रेड हो जाए या फिर किसी भी तरह की एलर्जी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

बसंतोत्सव के रुप में होली – Basanta Utsav

होली के उत्सव को बसंतोत्सव के रुप में भी मनाया जाता है। वहीं इसे फसलों का त्योहार भी कहा जाता है। दरअसल, बसंत ऋतु में किसानों की फसलें पककर अच्छी तरह तैयार हो जाती हैं, इसलिए इसकी खुशी में होली के त्योहार को मनाया जाता है।

होली का बदलता एवं आधुनिक स्वरुप – New Generation Holi Celebration

बाकी त्योहारों की तरह आज होली के त्योहार ने भी आधुनिकता का रुप ले लिया है। होली के त्योहार में भी महज दिखावा ही रह गया है।

वहीं जहां पहले लोग इसे अपनी सभी बुराइयों को जलाकर प्रेम और सोहार्द की भावना से मनाते थे, आज इस त्योहार ने फुहड़ता और जबरदस्ती का रुप ले लिया है।

लोग होली पर जबरदस्ती कैमिकल वाले रंगों को लगाते हैं। वहीं पहले जहां ज्यादातर महिलाएं घर पर पकवान बनाती थीं, अब बाहर से ही मंगवाना पसंद करती हैं, जिससे मिलावट वाली मिठाई और पकवान मिलते हैं जो कि हेल्थ के लिए काफी नुकसानदेह हैं।

वहीं आज की होली पूरी तरह से बाजारवाद की चपेट में आ चुकी है। युवा वर्ग इस मौके पर शराब आदि पीकर गाली-गलौच करते नजर आते हैं और लड़कियों के साथ छेड़खानी करने से भी नहीं कतरा।

सही मायने में होलिका का दहन न होकर नैतिकता और मर्यादा का दहन हो रहा है। हालांकि, हम सभी को इसके प्रति जागरूक होने की जरुरत है और इसके महत्व को समझने की जरूरत है।

हमें इस पर्व को आपसी प्रेम और भाईचारा के पर्व के रुप में सेलिब्रेट करना चाहिए और अपनी अंदर की बुराईयों का नाश करने का संकल्प लेना चाहिए।

होली पर शायरी, मैसेज एवं शुभकामनाएं संदेश – Holi Wishes, Shayari, Message

  • खुशियों से हो ना कोई दूरी, रहे न कोई भी ख्वाहिश अधूरी, रंगो से भरे इस मौसम में, रंगीन हो आपकी दुनिया पूरी, हैप्पी होली।।
  • राधा का रंग और कान्हा की पिचकारी, प्यार के रंग से रंग दो दुनिया सारी, यह रंग ना जाने कोई जात ना कोई बोली, मुबारक हो आपको रंगों भारी होली।।
  • पिचकारी की धार, गुलाल की बौछार,अपनों का प्यार, यही है यारों होली का त्यौहार. हैप्पी होली!!!!
  • वसंत ऋतु की बहार, चली पिचकारी उड़ा है गुलाल, रंग बरसे नीले हरे लाल, मुबारक हो आपको होली का त्यौहार।।
  • रंग के त्यौहार में सभी रंगों की हो भरमार, ढेर सारी खुशियों से भरा हो आपका संसार यही दुआ है हमारी भगवान से हर बार।

प्रेम और भाईचारे का प्रतीक होली के पर्व के दिन लोग अपनी सभी गिले शिकवे भुलाकर, एक-दूसरे से गले मिलते हैं और रंग-गुलाल लगाकर इस पावन पर्व की बधाई देते हैं और सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं।

ज्ञानी पंडित की टीम की तरफ से आप सभी को होली की शुभकामनाएं!

“Happy Holi”

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