पति-पत्नी ने एक लाख में शुरू की कंपनी, सालभर में 12 करोड़ हुआ टर्नओवर!

Vikas Sharma and Deepti Sharma co-founder of Gohoardings

हमारे समाज में शादी एक ऐसी क्रिया है जिसके बाद आपको सेटल कहा जाता है। इसके बाद आपकी लगभग भागदौड़ खत्म होने लगती है और अपने परिवार के बारे में सोचने लगते है और कोई रिस्क नहीं लेना चाहते है। लेकिन कुछ कपल्स ऐसे होते है जो शादी के बाद भी संघर्ष जारी रखते है और कुछ नया करने की कोशिश करते है।

ऐसा ही है दिल्ली में रहने वाले कपल की कहानी जिनका नाम है विकास और दीप्ति, इन्होने शादी के बाद अपना स्टार्टअप शुरू किया जिसका नाम है Gohoardings.com. भारत में कही भी होर्डिंग लगवाना हो तो ये काम इस कंपनी से हो सकता है। शादी के बाद एक लाख रुपये में शुरू हुआ ये बिजनस आज 24 करोड़ के टर्नओवर तक पहुच चुका है।

Vikas Sharma and Deepti Sharma co-founder of Gohoardings

पति-पत्नी ने एक लाख में शुरू की कंपनी, सालभर में 12 करोड़ हुआ टर्नओवर – Vikas Sharma and Deepti Sharma co-founder of Gohoardings

इस कंपनी की शुरुआत के बारे में बताते हुए दीप्ति ने कहा की “ग्रेजुएशन करने के बाद जब मैंने सीए करने का विचार किया तो घरवालो ने सपोर्ट किया लेकिन उसे मैंने बीच में छोड़ दिया”। इसके बाद एक उन्हें एक इवेंट करवाने का मौक़ा मिला। इस इवेंट में कई सारे बड़े लोग आने वाले थे और इससे काफी फायदा होता।

एक बन्दे के साथ मिलकर मैंने ये इवेंट करवाने का विचार किया लेकिन ये पूरी तरह से असफल रहा और लगभग चालीस लाख का घाटा लगा गया। वो बन्दा भी साथ छोड़कर भाग गया। अब चालीस लाख रुपये चुकाने की जिम्मेदारी दीप्ति के ऊपर थी और इतने पैसे थे ही नहीं। लेकिन इस समय उनके घरवालो ने खूब साथ दिया और उनके पापा ने घर बेच दिया। इससे वो पैसे चुका पाई लेकिन मन में मलाल था की नुकसान बहुत हुआ है।

इसके बाद दीप्ति की शादी हो गई विकास के साथ जो की एक कंपनी में सॉफ्टवेर इंजिनियर थे। विकास से मिलकर दीप्ति को लगा की दोनों के सपने एक जैसे है यानी की खुद का बिजनस करना। शादी के कुछ दिनों बाद विकास ने नौकरी छोड़ दी और फिर घर से कुछ कंपनियों के लिए काम करने लगे।

ऐसे आया आईडिया-

कहते है की आवश्कयता ही आविष्कार की जननी होती है और ऐसा ही हुआ। विकास जब एक क्लाइंट के साथ काम कर रहे थे उस वक्त क्लाइंट ने कहा की उन्हें कुछ जगह होर्डिंग्स लगवाने है। इसके लिए विकास खूब घूमे और उन्हें काम करके दिया। लेकिन इतनी मेहनत के बाद उन्होंने सोचा की कितने सारे ऐसे लोग होते है जो इस काम के लिए परेशान होते है। फिर क्या दीप्ति से आईडिया शेयर किया और एक लाख रुपये में शुरू किया गोहोर्डिंग्स.कॉम।

एक संगठित काम-

दीप्ति कहती है की ये इंडस्ट्री बहुत ही असंगठित है और यहाँ दलाल बहुत अधिक है। अलग अलग जगह में दाम अलग है और लोगो को परेशान होना पड़ता है। लेकिन उन्होंने यह समस्या खत्म कर दी। आज एक क्लिक के आप जहाँ चाहे होर्डिंग लगवा सकते है। इनके पास पूरे भारत में तीस हजार होर्डिंग साइट्स है। पहले साल दीप्ति की कंपनी का टर्नओवर लगभग दो करोड़ था लेकिन अगले साल ही यह बढ़कर 12 करोड़ रुपये हो गया।

जुबान की वैल्यू-

दीप्ति कहती है की हम इस बिजनस में सबसे अधिक महत्व अपने शब्दों को देते है। अगर हमने किसी से वादा कर दिया की उस जगह आपका होर्डिंग लग जाएगा तो फिर हम लगवाते ही है। इसके लिए चाहे हमे नुकसान ही क्यों ना सहना पड़े। ऐसा करने से हमारे ग्राहक हमारे पास ही रहते है। कई बार ऐसा हुआ भी है लेकिन उसके बाद हमने खूब पैसा भी कमाया।

ओयो बनने का सपना-

दीप्ति कहती है की हम एडवरटाईसमेंट की दुनिया के ओयो बनना चाहते है। जैसे होटल्स के बिजनस में ओयो का डंका है वैसे ही हमारे भी स्टार्टअप का इस फील्ड में डंका बजे। वो ओयो को दिल से फालो करती है और उनके जैसे ही बड़ा करने का विचार दीप्ति और विकास के मन में है। मेरा काम ही मेरा ओक्सीजन है ये दीप्ति और विकास का मूल मन्त्र है।

दीप्ति और विकास की कहानी हमे बताती है की आपके सेटल होने की कोई उम्र नहीं होती है। किसी भी हालात से डरकर भाग जाना सही नहीं होता है बल्कि उसका सामना करना चहिये और इसी दौरान आपको बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

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