चन्द्रगुप्त मौर्य का इतिहास | Chandragupta Maurya History in Hindi

Chandragupta Maurya Chandragupta Maurya

चन्द्रगुप्त मौर्य का इतिहास – Chandragupta Maurya History in Hindi

चन्द्रगुप्त मौर्य मौर्य साम्राज्य के संस्थापक थे और वे पुरे भारत को एक साम्राज्य के अधीन लाने में सफल रहे। चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्यारोहण की तिथि साधारणतः 324 ईसा पूर्व की मानी जाती है, उन्होंने लगभग 24 सालो तक शासन किया और इस प्रकार उनके शासन का अंत प्रायः 297 ईसा पूर्व में हुआ।

बाद में 297 में उनके पुत्र बिन्दुसार ने उनके साम्राज्य को संभाला। मौर्य साम्राज्य को इतिहास के सबसे सशक्त सम्राज्यो में से एक माना जाता है। अपने साम्राज्य के अंत में चन्द्रगुप्त को तमिलनाडु (चेरा, प्रारंभिक चोला और पंड्यां साम्राज्य) और वर्तमान ओडिसा (कलिंग) को छोड़कर सभी भारतीय उपमहाद्वीपो पर शासन करने में सफलता भी मिली। उनका साम्राज्य पूर्व में बंगाल से अफगानिस्तान और बलोचिस्तान तक और पश्चिम के पकिस्तान से हिमालय और कश्मीर के उत्तरी भाग में फैला हुआ था।

और साथ ही दक्षिण में प्लैटॉ तक विस्तृत था। भारतीय इतिहास में चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल को सबसे विशाल शासन माना जाता है।

ग्रीक और लैटिन खातो के अनुसार चन्द्रगुप्त सैंड्रोकोटॉ (Sandrocottos) और अन्ड्रोकोटॉ (Androcottos) के नाम से भी जाने जाते है। चन्द्रगुप्त ने अलेक्ज़ेण्डर द ग्रेट के युनानी सुदूर पूर्वी शासन काल को भी निर्मित किया और अलेक्ज़ेण्डर के सबसे शक्तिशाली शासक सेलुकस प्रथम निकटोर को युद्ध में पराजीत किया। और परिणामस्वरूप गठबंधन के इरादे से चंदगुप्त ने सेलुकस की बेटी से मित्रता की भावना से विवाह कर लिया ताकि वे सशक्त साम्राज्य का निर्माण कर सके और युनानी साम्राज्य से अपनी मित्रता को आगे बढा सके।

इसके चलते भारत का पश्चिमी देशो से सम्बन्ध निर्मित होता गया और आसानी से भारतीय पश्चिमी देशो से व्यापार भी करने लगे। बाद में ग्रीक राजनीतिज्ञ मेगस्टेन्स ने मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र को भेट दी, जो उस समय मौर्य साम्राज्य का मुख्य अंग था।

ज्यादातर भारत को एक करने के बाद चन्द्रगुप्त और उनके मुख्य सलाहकार चाणक्य ने आर्थिक और सामाजिक बदलाव किये। उन्होंने भारत की आर्थिक और राजनैतिक स्थिति में भी सुधार किये। और चाणक्य के अर्थशास्त्र को ध्यान में रखते हुए राजनैतिक सुधार करने हेतु केंद्रीय प्रशासन की स्थापना की गयी। चन्द्रगुप्त कालीन भारत को प्रभावशाली और नौकरशाही की प्रणाली अपनाने वाले भारत के रूप में जाना जाता है जिसमे सिविल सेवाओं पर ज्यादा से ज्यादा जोर दिया गया था।

चन्द्रगुप्त के साम्राज्य में एकता होने की वजह से ही उनकी आर्थिक स्थिति सबसे मजबूत मानी जाने लगी थी। और विदेशो में व्यापार होने के साथ ही देश का आंतरिक और बाहरी विकास भी होने लगा था।

कला और शिल्पकला दोनों के ही विकास में मौर्य साम्राज्य का बहोत बडा योगदान रहा है। अपनी प्राचीन संस्कृति को आगे बढाने की सिख कुनबे अकियाई साम्राज्य और युनानी साम्राज्य से ही मिली। चन्द्रगुप्त के शासनकाल में धार्मिक गुरुओं को भी काफी महत्त्व दिया गया था। उनके साम्राज्य में बुद्ध और जैन समाज का तेज़ी से विकास हो रहा था।

जैन खातो के अनुसार चन्द्रगुप्त ने अपने सिंहासन को स्वैच्छा से छोड़ा था क्यू की ऐसा कहा जाता है की उनके पुत्र बिन्दुसार ने जैन धर्म का आलिंगन कर लिया था और उनका पुत्र दक्षिणी साधु भद्राभाऊ का अनुयाई बन गया था। कहा जाता है की श्रवणबेलगोला (अभी का कर्नाटक) में अपनी इच्छा नुसार ही भुखमरी से ही उनकी मृत्यु हुई थी।

चन्द्रगुप्त मौर्य का प्रारंभिक जीवन कहानी – Chandragupta Maurya Ki Kahani in Hindi

चन्द्रगुप्त के युवा जीवन और वंशज के बारे में बहोत कम जानकारी उपलब्ध है। उनके जीवन के बारे में जो भी जानकारी उपलब्ध है वो सारी जानकारी संस्कृत साहित्य और ग्रीक और लैटिन भाषाओं में से जो चन्द्रगुप्त के ही अँड्रॉटोस और सैंड्रोकोटॉ नाम पर है में से ली गयी है। बहोत से पारंपरिक भारतीय साहित्यकारों ने मौर्य का सम्बन्ध नंदा राजवंश से भी बताया है जो की आधुनिक भारत में बिहार के नाम से भी जाना जाता है।

बाद में हज़ारो साल बाद एक संस्कृत नाटक मुद्राराक्षस में उन्हें “नंदनवय” मतलब नंद के वंशज भी कहा गया था। चन्द्रगुप्त का जन्म उनके पिता के छोड़ चले जाने के बाद एक बदहाल परिवार में हुआ था, कहा जाता है की उनके पिता मौर्य की सरहदों के मुख्य प्रवासी थे। चन्द्रगुप्त की जाती के बारे में यदि बात की जाये तो मुद्राराक्षस में उन्हें कुल-हीन और वृषाला भी कहा गया है।

भारतेंदु हरीशचंद्र के अनुवाद के अनुसार उनके पिता नंद के राजा महानंदा और उनकी माता मोरा थी, इसी वजह से उनका उपनाम मौर्य पड़ा। जस्टिन ने यह दावा किया था की चन्द्रगुप्त एक नम्र प्रवृत्ति के शासक थे। वही दूसरी ओर नंद को प्रथित-कुल मतलब प्रसिद्ध और खानदानी कहा गया है। वही बुद्धिस्ट महावंशो ने चन्द्रगुप्त को मोरिया का वंशज (क्षत्रिय) बताया है।

महावंशटिका ने उन्हें बुद्धा के शाक्य वंश से जोड़े रखा, ऐसे वंशज से जिनका सम्बन्ध आदित्य से भी था।

बुद्धिस्ट परम्पराओ में चन्द्रगुप्त मौर्य क्षत्रिय समुदाय के ही सदस्य थे और उनके बेटे बिन्दुसार और बड़े बेटे प्रचलित बुद्धिस्ट अशोका भी क्षत्रिय वंशज ही माने जाते है। संभवतः हो सकता है की साक्य रेखा से उनका सम्बन्ध स्थापित हुआ हो। (क्षत्रिय की साक्य रेखा को गौतम बुद्धा का वंशज माना जाता है और अशोका मौर्य ने अपने अभिलेख में खुद को बुद्धि साक्य बताया था।) मध्यकालीन अभिलेख में मौर्य का सम्बन्ध क्षत्रिय के सूर्य वंश से बताया गया है।

अपनी जन्मभूमि छोड़कर चली आने वाली मोरिय जाति का मुखिया चंद्रगुप्त के पिता था। दुर्भाग्यवश वह सीमांत पर एक झगड़े में मारे गये और उनका परिवार अनाथ रह गया। उसकी अबला विधवा अपने भाइयों के साथ भागकर पुष्यपुर (कुसुमपुर पाटलिपुत्र) नामक नगर में पहुँची, जहाँ उसने चंद्रगुप्त को जन्म दिया।

सुरक्षा के विचार से इस अनाथ बालक को उसके मामाओं ने एक गोशाला में छोड़ दिया, जहाँ एक गड़रिए ने अपने पुत्र की तरह उसका पालन-पोषण किया और जब वह बड़ा हुआ तो उसे एक शिकारी के हाथ बेच दिया, जिसने उसे गाय-भैंस चराने के काम पर लगा दिया।

कहा जाता है कि एकसाधारण ग्रामीण बालक चंद्रगुप्त ने राजकीलम नामक एक खेल का आविष्कार करके जन्मजात नेता होने का परिचय दिया। इस खेल में वह राजा बनता था और अपने साथियों को अपना अनुचर बनाता था। वह राजसभा भी आयोजित करता था जिसमें बैठकर वह न्याय करता था। गाँव के बच्चों की एक ऐसी ही राज सभा में चाणक्य ने पहली बार चंद्रगुप्त को देखा था।

बौद्ध रचनाओं में कहा गया है कि ‘नंदिन’ के कुल का कोई पता नहीं चलता (अनात कुल) और चंद्रगुप्त को असंदिग्ध रूप से अभिजात कुल का बताया गया है।

चन्द्रगुप्त मौर्य भारत के ऐसे प्रथम शासक थे, जिन्होंने न केवल यूनानी, बल्कि विदेशी आक्रमणों को पूर्णत: विफल किया तथा भारत के एक बड़े भू-भाग को सिकन्दर जैसे महत्त्वाकांक्षी यूनानी आक्रांता के आधिपत्य से मुक्त कराया।

विस्तृत शासन व्यवस्था के होते हुए भी उन्होंने भारत को राजनीतिक एकता प्रदान की। उनकी प्रशासनिक व्यवस्था इतनी सुदृढ़, सुसंगठित थी कि अंग्रेजों ने भी इसे अपना आदर्श माना।

चन्द्रगुप्त मौर्य एक निडर योद्धा थे। उन्हें चन्द्रगुप्त महान के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने भारत का अधिकतर भाग अपने मौर्य साम्राज्य में शामिल कर लिया था। वे हमेशा से ही भारत में एकता लाना चाहते थे और आर्थिक रूप से भारत का विकास करना चाहते थे।

मौर्य कालीन भारत आज भी एक विकसित भारत के रूप में याद किया जाता है।

भारतीय इतिहास के इस महान शासक को कोटि-कोटि नमन।

Books on Chandragupta Maurya

Read More:

  1. सम्राट अशोक मौर्य
  2. चाणक्य का इतिहास
  3. मौर्य शासक बिन्दुसार का इतिहास

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88 COMMENTS

  1. tum sabhi ne kabhi kshatriyon ke 36 kulo ke bare me padha h? chandragupt shakya wansh ka tha jo ki suryawansh ki ek shakha hai. Aur shakya bhagwan ram ke putra kush se sambandhit hai jinko kushwaha/kachwaha kaha jata hai. suryawansh ki wanshawali padho.

    • Ujwal Yewale sir,

      suryagupta ke bare me hamare pass abhi janakari uplabdha nahi hain. lekin koshish karenge jald se jald unke bare me update karane ki. Aap hamse jude rahe.

  2. Achha hua ye comments padne ke liye, chandra gupt nahi hai agar vo apnne bare m ye comments padte to pakka hi behosh ho jate kitna confused kar diya unki biography ko

  3. चंद्रगुप्त का पालन एक पशु पालक के परिवार मे हुआ था इसमे कोई विवाद नही है। एक महानायक को सभी अपनी जाति से जोडकर देखते है। आईये कुछ अन्य तथ्यो पर भी गौर करे। शास्त्रो मे दी गई वर्ण व्यवस्था के अनुसार कृषि व पशुपालन वैश्य समुदाय का काम था। बालक का जन्म किसी भी जाति मे हो नामकरण के समय पालने वाले पिता की जाति ही बालक की जाति मानी जाती थी। ऐसे सैकडो उदाहरण हमारे शास्त्रो मे भरे पडे है। दूसरा तथ्य यह है कि वर्ण व्यवस्था बनने के बाद से गुप्त टाईटिल केवल वैश्य समाज के लोग ही प्रयोग करते थे।
    आचार्य चाणक्य यनि विष्णुगुप्त को भी ब्राहमण लेखको ने ब्राहमण सिद्ध कर दिया।

  4. Bhailog aap sab thoda aur adhura jankari ke hisab se bolte ho…..

    Chandragupt Maurya Nayee vansh se the iski pushthi v itihaskar TM Dhanaraju ki book se milta hai…aur dusari bat chankya ki to chankya ek lalchi aur pakhandi tha..apni lalach ke karan hi magadh me nand raja se milne gya tha….bideshi aakraman ki chetawani dene ke bahane se per itihas ko padho to sikander ne porus ki sena pe aakraman kiya tha aur jit liya tha padmanand ke time nhi jab chankya ne magadh ja ke mahapadmanand ko bataya tha…..aur kuch bharat ke itihaskar ne sanch aane nhi diya……o to bideshi itihaskar the jinke karan nanda maurya itihas me ek sath nam liye jate hai.

    mudrarakshasha me v bataya gya hai chandragupta maurya nand ke putra the

    shayad kuch log …chandragupt gupta aur chandragupta maurya ke nam se confuse ho gye hai..

    • O bhai
      pahle history thode dhang se pad ke aa
      fir surely comment kr

      kisi ne sahi kaha adhoora gyaan bahut ghatak hota hai.

    • Pahle tum apni confusion ko dur Karo letrly bad m dusro ko bolna itne bade aadrsh logo ko lalchi pakhandi bolne mai sharm nhi aayi

    • nandini koi character nhi tha , Chandragupta ki patno ka naam durdhara tha, star plus waale chandranandini ka show mai kaafi kuch galat bta rhe h

  5. Isme Chandra gupt Ki sister ke baare Mei to btaya hi niii yadi unke baare Mei hi to please share kijiye puraano ke anusaar unki sister bhi thi uske baare Mei nhi to btaaai….??????

  6. Chandragupta thakur the OK unki ma ka naam Mora tha isliye unke naam ke age more lgta h jb ap logo ko kuch pta nhi hota h to comment mt kiya kro AGR thakur hote ho kuch pta bhi hote

    • बुद्धिस्ट परम्पराओ में चन्द्रगुप्त मौर्य क्षत्रिय समुदाय के ही सदस्य थे और उनके बेटे बिन्दुसार और बड़े बेटे प्रचलित बुद्धिस्ट अशोका भी क्षत्रिय वंशज ही माने जाते है। संभवतः हो सकता है की साक्य रेखा से उनका सम्बन्ध स्थापित हुआ हो। (क्षत्रिय की साक्य रेखा को गौतम बुद्धा का वंशज माना जाता है और अशोका मौर्य ने अपने अभिलेख में खुद को बुद्धि साक्य बताया था।) मध्यकालीन अभिलेख में मौर्य का सम्बन्ध क्षत्रिय के सूर्य वंश से बताया गया है।

  7. Chandragupt ki story bahut achhi lagti h.is samay in pr based ek serial chandarnandini Star plus pe 10.30pm,2.30pm and 5.00pm time per deta h.OK bye friends.

  8. The Sad part is, We only study for those Individual who fight for their Own territory…Not for the whole country(Bharat Desh)
    If you are going to Open History, the First King was Chandragupt who tried to make Ek Bharat Desh.
    But There are still many people do not able to digest this , so they started to discuss about his Caste and other irrelevant thing, which is not true at all.

  9. श्रवणबेलगोला से मिले शिलालेखों के अनुसार, चंद्रगुप्त अपने अंतिम दिनों में जैन-मुनि हो गए| चन्द्र-गुप्त अंतिम मुकुट-धारी मुनि हुए, उनके बाद और कोई मुकुट-धारी (शासक) दिगंबर-मुनि नही हुए | अतः चन्द्र-गुप्त का जैन धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है। स्वामी भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोल चले गए। वहीं उन्होंने उपवास द्वारा शरीर त्याग किया। श्रवणबेलगोल में जिस पहाड़ी पर वे रहते थे, उसका नाम चंद्रगिरि है और वहीं उनका बनवाया हुआ ‘चंद्रगुप्तबस्ति’ नामक मंदिर भी है।

  10. चंद्रगुप्त मौर्य के वंशादि के बारे में अधिक ज्ञात नहीं है। हिंदू साहित्य पंरपरा उसके नंदों से संबद्ध, बताती है। जैन परिसिष्टपर्वन्‌ के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य मयूरपोषकों के एक ग्राम के मुखिया की पुत्री से उत्पन्न थे। मध्यकालीन अभिलेखों के साक्ष्यानुसार मौर्य सूर्यवंशी मांधाता से उत्पन्न थे। बौद्ध साहित्य में मौर्य क्षत्रिय कहे गए हैं। महावंश चंद्रगुप्त कोमोरिय (मौर्य) खत्तियों से पैदा हुआ बताता है। दिव्यावदान में बिंदुसार स्वयं की मूर्धाभिषिक्त क्षत्रिय कहते हैं। सम्राट अशोक भी स्वयं को क्षत्रिय बताते हैं। महापरिनिब्बान सुत्त से 5 वी शताब्दी ई 0 पू 0 उत्तर भारत आठ छोटे छोटे गाणराज्यों में बटा था। मोरिय पिप्पलिवन के शासक, गणतांत्रिक व्यवस्थावाली जाति सिद्ध होते हैं। पिप्पलिवन ई.पू. छठी शताब्दी में नेपाल की तराई में स्थित रुम्मिनदेई से लेकर आधुनिक देवरिया जिले के कसया प्रदेश तक को कहते थे। मगध साम्राज्य की प्रसारनीति के कारण इनकी स्वतंत्र स्थिति शीघ्र ही समाप्त हो गई। यहीं कारण था कि चंद्रगुप्त का मयूरपोषकों, चरवाहों तथा लुब्धकों के संपर्क में पालन हुआ। परंपरा के अनुसार वह बचपन में अत्यंत तीक्ष्णबुद्धि था, एवं समवयस्क बालकों का सम्राट् बनकर उनपर शासन करता था।

  11. Pahli bat Chandragupta Maurya ko caste mat baato wah desk ke nayak the air survir nayak rahenge …….aur rahi baat koeri caste ki wah ek kisan jaati hai wah up bihar me bahut adhik payi jati hai wah koi Maurya vansh se dur dur tak koi Lena dena nhi hai. Mauryan were suryavanshi yodha Jo aaj ke rajput hair……

    • vijay singh jee apko history ki utini gyan nhi h , Suryavansi yodha yadav bhi kahlaye , batt rahi chandra gupt ki jatti ki , to padh lijiyega jo samudaye ka mukhiya hota tha woo moor ka pankh lagata tha ,keval vahi laga sakta h joo nandvansi yadav kahlate the , aur chandra gupta bhi yadav tha , lekin ………………………lekin MAHAN LOGO KI JATTI NHI BATANI CHAHIYE ,KYUKI MAHAN HONE PER WOO SABHI KA CHAHNEWALA HO JATE H , UNLOG SE GYAN MILTA …………..( RAJPUT KI KOI KHATII NHI HAI KAHI BHI , OR JO H WOO H DOGLEPAN KI ……JANKARI K MUTABIK RAJA MANSINGH…. RAJA SURDHAN SINGH …..ITNA HI KAFFI H EXAMPLE K LIYE ……KYU KI WEB SITE PE BAHUT SE LOG PADHTE H ,SIKAYAT KARNA GALAT BATTT H SO SECRETE HI RAHNE DIJIYE.

  12. सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य गडरिए (धनगर) केहलाए क्योंकी वह भेड चरवाहों के समाज के थे
    Shepherd Boy Chandragupt Maurya

    • aap google par ja kar Chandragupta Maurya k history k bare mai jaroo read kar na bro or youtube par jaana or 1 bar Chandragupta Maurya k name sai seral hai 2year old jaroor watch kar na aap ko kafhi knowledge oh ge bro

      Chandragupta ka name Maurya un ki mata moora k nam par pada

  13. ham ko ye jankari mili hai ki chandra gupt maurya “HAZARAT IMAM HUSSAIN” ke sadhu bhai hote hai. jo H. IMAM HUSSAIN ki wife H. BANU A.S. thi unki sister se chandra gupt mourya ne shadi ki thi.

    inki history jo aapke pas ho to please net pe rakkhe. kyu ki ye history bahoot kam log jante hai.

    • my ibrahim kolsawala bro phle Chandragupta Maurya k bare mai aap shuru sai read kare tabhi aap ko pure jankri ho ge mere raa a mai aap YOUTUBE par ja a aur ush par search kare Chandragupta Maurya k name sai aap ko seral melai ga ush seral mai sabh ok dekhaya gya hai tho aap use must watch kare
      ok dear

  14. बहुत ही अच्छी जानकारी दी है महान सम्राट चंद्रगुप्त मोर्य की

  15. Well done , जो प्रांतीय शासक अपने पगडी मे मोर पंख लगाया करते थे ।एसे लोग मोरया कहलाते थे । ऊनमे से ही एक थे चन्द्र गुप्त के पिता ।

  16. मौर्य टाईटल लगाने से कोई मौर्य हो जाता है,
    दि ग्रेट पेरियार नायकर
    पहली बात यह कि क्षत्रिय कोई कास्ट नही होती है, क्षत्रिय एक वर्ण है, और दूसरी बात चन्द्रगुप्त मौर्य के कार्यकाल मे लोग कबीले के रूप मे रहते थे, चन्द्रगुप्त मौर्य एक चरवाहा था जो भेड चराता था, वह भेड को चराने जगंलो मे जाया करता था, और चन्द्रगुप्त मौर्य का जादा समय जंगलों मे व्यतीत होता था, और जंगल मोर पंक्षी पाये बहुत पाये जाते थे, चन्द्रगुप्त मौर्य जादा समय जंगलो मे व्यतीत होने के कारण उनको मोरो से अधिक बेहद सम्बन्ध तथा प्यार होने लगा,
    और जिसके कारण वो मोर से मौर्य कहलाये, और मौर्य उनका टाईटल बन गया, और उस समय कोईरी, शाक्य, शैनी, मौर्य, कुशवाहा, इन लोगो का मौर्य टाईटल से कोई लेना देना नही था, और इन लोगो का पेशा साग सब्जी उगाने का काम था, जो आज भी इन लोगो का यह धंधा है, और आज भी साग सब्जी ऊगाने का काम करते है, साग सब्जी ऊगाने वाली जातिया पशुपालन का काम कभी नही करती थी, उस समय मे, पशुपालन का काम सिर्फ गडरिया जाति करती थी, और आज भी यह गडरिया जाति पशुपालन का काम रही है, मौर्य टाईटल लगाने से कोई मौर्य शाक्य शैनी कोईरी नही हो जाता है, चन्द्रगुप्त मौर्य चरवाहा थे इसीलिए इन्हे शेफर्ड ब्याज चन्द्रगुप्त मौर्य बोला गया। और बालक अजा पाल बोला गया, अजा पाल का मतलब होता है भेड़ बकरी चराने वाला? जाति गडरिया.

    • चन्द्रगुप्त मौर्य गड़रिया कब से हो गए dhamu जी।

      चन्द्रगुप्त मौर्य के पिता पिप्पलिवन के मुखिया थे । जो की शाक्य गणराज्य की ही एक शाखा थी । पिप्पलिवन में मोर की अधिकता थी इसी लिए कपिलबस्तु से जो शाक्य पिप्पलिवन में जाकर रह रहे थे उन्होंने अपना टाइटल मौर्य वना लिया।
      मौर्य क्षत्रिय वर्ण में आते हैं
      चन्द्रगुप्त मौर्य के पिता की हत्या घनानंद ने की जो की एक शुद्र राजा था।
      इसी लिए अपने पिता का बदला लेने के लिए चन्द्रगुप्त मौर्य ने घनानंद को मारा।

      ??सूर्यवंशी ओम मौर्य??

    • bhi phle tho tum history ko dhyan sai padho or phir btha na ok mai thume i advise data hu bro
      tum youtube par Chandragupta Maurya k name sai seral hai wo jaroo dekh na tumhre sre galt phme dur ho ja a ge ok my bro pls must watch once

    • आपके के कहे अनुसार तो फिर मुस्लिम समुदाय का जब जन्म हुआ ये लोग भी कबीलों में रहते थे तो आप इनके वारे में क्या कहेंगे

  17. I need pdf files…
    Where could i download that pls reply me..
    I need pdf of Acharya Chankya,Chandragupta Maurya, Ashoka…
    In hindi or Gujarati language..
    Pls give me information where i could find ir

  18. chandra gupta maurya ko samrat mahapadma nand ko beta bataya ja ta h q ki ye nand raja ke up patni mura se utpan hua tha ialiye chandragupta morya ne apne maa ke name par rajye isthapit kiya or mura se morye ho gya

  19. चन्द्र गुप्त को प्रारंभिक युद्ध कला की सिक्षा किसने दी ?

  20. Chandragupta Maurya Ka Birth 354 BC me huwa tha….aur Raj Abhishek 323BC m hua tha…totel shasen kaal unka 24 yrs ka tha..unhone bindu saar ko 298 BC ko shasen sop kr jain dhrem apna liya tha…
    Ab tak to yhi pdti aai hu.. plz help me kya shi hai?…

    • yai aap ki knowledge ok hai shweta g but phle Chandragupta Maurya k bare mai aap shuru sai read kare tabhi aap ko pure jankri ho ge mere raa a mai aap YOUTUBE par ja a aur ush par search kare Chandragupta Maurya k name sai aap ko seral melai ga ush seral mai sabh ok dekhaya gya hai tho aap use must watch kare
      ok dear

  21. Sansad bhavan ke. Get N . 5 per chandrgupt moya ki murti lagee he us per shaf likha he * He is the sefrd (Gadriya) boy * gadriyo me moriya gotra hota he. Esliye sare. Morya buns

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