चौमहल्ला पैलेस हैदराबाद | Chowmahalla Palace Hyderabad

Chowmahalla Palace – चौमहल्ला पैलेस हैदराबाद राज्य के निज़ाम का ही एक महल है। यह पैलेस हैदराबाद शहर के चारमिनार के पास बना हुआ है। यह आसफ साम्राज्य की गद्दी और हैदराबाद के निज़ाम का अधिकारिक घर हुआ करता था। बाद में यह महल निज़ाम के उत्तराधिकारी बरकत अली खान मुकर्रम जाह की प्रॉपर्टी बना रहा।

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चौमहल्ला पैलेस हैदराबाद – Chowmahalla Palace Hyderabad

उर्दू, हिंदी में चार (चौ) का अर्थ 4 होता है और पर्शियन में भी चहर का अर्थ चार होता है और उर्दू एवं हिंदी में भी महल का अर्थ पैलेस से होता है, इसीलिए इसका नाम चौमहल्ला रखा गया। निज़ाम के प्रवेश और गवर्नर जनरल के रिसेप्शन से लेकर सभी औपचारिक समारोह का आयोजन यही किया जाता है।

यूनेस्को का सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का एशिया पेसिफिक मेरी अवार्ड भी 15 मार्च 2010 को चौमहल्ला पैलेस को ही दिया गया। यूनेस्को के प्रतिनिधि ताकाहिको माकिनो ने अधिकारिक रूप से पट्टिका और प्रमाण पंटर रानी इसरा को दे दिया था, जो सुल्तान की भूतपूर्व पत्नी और प्रिंस मुकर्रम जाह बहादुर की GPA धारक भी थी।

चौमहल्ला पैलेस का इतिहास – Chowmahalla Palace History:

जब सलाबत जंग ने 1750 में इसके निर्माणकार्य की शुरुवात की तो इसका निर्माणकार्य अफज़ल अद-दव्लाह, आसफ जाह के समय में 1857 से 1869 के बीच पूरा हुआ।

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अपने आकार और लालित्य के लिए यह एक अद्वितीय पैलेस है। इस महल के निर्माणकार्य की शुरुवात 18 वी शताब्दी में हुई और कयी वर्षो बाद यह जाके एक विशेष और अद्वितीय आकार में बनकर पूरा हुआ। पैलेस में 2 विशाल आँगन के साथ एक दरबार हॉल, फाउंटेन और बाग़-बगीचे भी है। वास्तव में यह महल 45 एकर (1,80,000 मीटर वर्ग) में बना हुआ है, लेकिन सिर्फ 12 एकर (49,000 मीटर वर्ग) ही आज बचा हुआ है।

उत्तरी आँगन:

महल के इस भाग में बारा इमाम नामक कमरों का एक लंबा कॉरिडोर है, जिसका मुख पर्व की तरफ बने सेंट्रल फाउंटेन और पूल की तरफ है।

पैलेस में मुघल डोम और मेहराब और बहुत से पर्शियन तत्व जैसे दरबार हॉल (खिलाफत मुबारक) में किया गया अलंकृत प्लास्टर। उस समय हैदराबाद में बनी इस बिल्डिंग की यही विशेषता थी।
बारा (बड़ा) इमाम की विपरीत दिशा में शीशे से बनी एक बिल्डिंग भी है। किसी समय इस कमरे का उपयोग महेमान गृह के रूप में किया जाता था।

दक्षिणी आँगन:

यह महल का प्राचीनतम भाग है और यहाँ अफज़ल महल, महताब महल, तहनियत महल और आफताब महल नामक चार पैलेस है। इसका निर्माण नियोक्लासिक शैली में किया गया है।

घंटा घर (क्लॉक टावर) – Clock Tower:

चौमहल्ला पैलेस के मुख्य द्वार के उपर बनी घडी को खिलाफत घडी भी कहा जाता है। यह घडी लगभग 251 वर्षो से चल रही है। हर हफ्ते विशेष मैकेनिक घडी की देखरेख करते है।

खिलाफत मुबारक:

यह चौमहल्ला पैलेस का दिल है। हैदराबाद के लोग इसका काफी सम्मान करते है, क्योकि यही आसफ जाही साम्राज्य की गद्दी हुआ करती थी। विशाल पिल्लरो से अलंकृत यह दरबार हॉल शुद्ध मार्बल से बना हुआ है, जिसपर शाही गद्दी तख़्त-ए-निशान का भी निर्माण किया गया है। यही निज़ाम अपने दरबार, समारोह और दूसरी धार्मिक गतिविधियों का आयोजन करते थे। महल के 19 शानदार झुमारो को कुछ ही समय पहले शाही हॉल में पुनः स्थापित किया गया।

रोशन बंगला:

माना जाता है की छठा निज़ाम यही रहता था और इस बिल्डिंग का नाम उनकी अम्मी रोशन बेगम के नाम पर रखा गया।

कौंसिल हॉल:

बिल्डिंग में विविध हस्तलिपि और बेशकीमती किताबो का दुर्लभ संग्रह है। निज़ाम अक्सर अपने महत्वपूर्ण अधिकारियो और विशेष महेमानो से यहाँ मिलते थे। वर्तमान में यह हॉल अस्थायी प्रदर्शनी का स्थान है।

वर्तमान निज़ाम (बरकत अली खान मुकर्रम जाह) और उनके परिवार ने चौमहल्ला पैलेस – Chaumala Palace को बहाल कर जनवरी 2005 में सार्वजानिक जनता के लिए खुला रखने का निर्णय ले लिया था। महल को पहले आँगन से पूर्व गौरव में बहाल करने के लिए तक़रीबन 5 साल का समय लग गया था।

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