रहीम के दोहे हिंदी अर्थ सहित | Rahim Ke Dohe In Hindi

रहीमदास के दोहे – Rahim Ke Dohe हम सभी को सदियों से प्रेरित करते आये हे, लेकिन ये कुछ किताबों तक ही सीमित है… हमने यहा कुछ चुनिन्दा रहीम के दोहे हिंदी अर्थ सहित – Rahim Ke Dohe With Meaning आपके लिए पब्लिश किये है… जो बहुत अच्छी सिख देते हे… जरुर पढ़े और अपने दोस्तों को Share करे…

Rahim Ke Dohe
Rahim Ke Dohe With Image

रहीम के दोहे हिंदी अर्थ सहित – Rahim Ke Dohe In Hindi

दोहा :- “जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं रहीम घटी जाहिं. गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुःख मानत नाहिं.”
अर्थ :- रहीम अपने दोहें में कहते हैं की किसी भी बड़े को छोटा कहने से बड़े का बड़प्पन कम नहीं होता, क्योकी गिरिधर को कान्हा कहने से उनकी महिमा में कमी नहीं होती.

दोहा :- “जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग. चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग.”
अर्थ :- रहीम ने कहा की जिन लोगों का स्वभाव अच्छा होता हैं, उन लोगों को बुरी संगती भी बिगाड़ नहीं पाती, जैसे जहरीले साप सुगंधित चन्दन के वृक्ष को लिपटे रहने पर भी उस पर कोई प्रभाव नहीं दाल पाते.

दोहा :- “रहिमन धागा प्रेम का, मत टोरो चटकाय. टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय”
अर्थ :- रहीम ने कहा की प्यार का नाता नाजुक होता हैं, इसे तोड़ना उचित नहीं होता. अगर ये धागा एक बार टूट जाता हैं तो फिर इसे मिलाना मुश्किल होता हैं, और यदि मिल भी जाये तो टूटे हुए धागों के बीच गाँठ पद जाती हैं.

दोहा :- “दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं. जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के नाहिं”
अर्थ :- रहीम कहते हैं की कौआ और कोयल रंग में एक समान काले होते हैं. जब तक उनकी आवाज ना सुनायी दे तब तक उनकी पहचान नहीं होती लेकिन जब वसंत रुतु आता हैं तो कोयल की मधुर आवाज से दोनों में का अंतर स्पष्ट हो जाता हैं.

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दोहा :- “रहिमन ओछे नरन सो, बैर भली न प्रीत. काटे चाटे स्वान के, दोउ भाँती विपरीत.”
अर्थ :- गिरे हुए लोगों से न तो दोस्ती अच्छी होती हैं, और न तो दुश्मनी. जैसे कुत्ता चाहे काटे या चाटे दोनों ही अच्छा नहीं होता.

दोहा :- “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारी. जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारी.”
अर्थ :- बड़ी वस्तुओं को देखकर छोटी वास्तु को फेंक नहीं देना चाहिए, जहां छोटीसी सुई कम आती हैं, वहां बड़ी तलवार क्या कर सकती हैं?

दोहा :- “समय पाय फल होता हैं, समय पाय झरी जात. सदा रहे नहीं एक सी, का रहीम पछितात.”
अर्थ :- हमेशा किसी की अवस्था एक जैसी नहीं रहती जैसे रहीम कहते हैं की सही समय आने पर वृक्ष पर फल लगते हैं और झड़ने का समय आने पर वह झड जाते हैं. वैसेही दुःख के समय पछताना व्यर्थ हैं.

दोहा :- “वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग. बाँटन वारे को लगे, ज्यो मेहंदी को रंग.”
अर्थ :- रहीमदास जी ने कहा की वे लोग धन्य हैं, जिनका शरीर हमेशा सबका उपकार करता हैं. जिस प्रकार मेहंदी बाटने वाले पर के शरीर पर भी उसका रंग लग जाता हैं. उसी तरह परोपकारी का शरीर भी सुशोभित रहता हैं.

दोहा :- “बिगरी बात बने नहीं, लाख करो कीं कोय. रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय.”
अर्थ :- इन्सान को अपना व्यवहार सोच समझ कर करना चाहिये क्योकी किसी भी कारण से यदि बात बिगड़ जाये तो उसे सही करना बहोत मुश्किल होता हैं जैसे एक बार दूध ख़राब हो गया तो कितनी भी कोशिश कर लो उसे मठ कर मख्खन नहीं निकाला जा सकता.|

दोहा :- “रूठे सृजन मनाईये, जो रूठे सौ बार. रहिमन फिरि फिरि पोईए, टूटे मुक्ता हार.”
अर्थ :- यदि माला टूट जाये तो उन मोतियों के धागे में पीरों लेना चाहिये वैसे आपका प्रिय व्यक्ति आपसे सौ बार भी रूठे तो उसे मना लेना चाहिये.

दोहा :- “जैसी परे सो सही रहे, कही रहीम यह देह. धरती ही पर परत हैं, सित घाम औ मेह.”
अर्थ :- रहीम कहते हैं की जैसे धरती पर सर्दी, गर्मी और वर्षा पड़ती तो वो उसे सहती हैं वैसे ही मानव शरीर को सुख दुःख सहना चाहिये.

दोहा :- “खीर सिर ते काटी के, मलियत लौंन लगाय. रहिमन करुए मुखन को, चाहिये यही सजाय.
अर्थ :- रहीमदस जी कहते हैं की खीरे के कड़वेपण को दूर करने के लिये उसके उपरी सिरे को काटने के बाद उस पर नमक लगाया जाता हैं. कड़वे शब्द बोलने वालो के लिये यही सजा ठीक हैं.

दोहा :- “रहिमन अंसुवा नयन ढरि, जिय दुःख प्रगट करेड़, जाहि निकारौ गेह ते, कस न भेद कही देई.”
अर्थ :- आसू आखों से बहकर मन का दुःख प्रगट कर देते हैं, रहीमदास जी कहते हैं की ये बिलकुल सत्य हैं की जिसे घर से निकाला जायेंगा वह घर का भेद दुसरों को ही बतायेंगा.

दोहा :- “रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय. सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी लैहैं कोय.”
अर्थ :- अपने मन के दुःख को मन के अंदर ही छिपा कर रखना चाहिये क्योकी दुसरों का दुःख सुनकर लोग इठला भले ही लेते है उसे बाट कर काम करने वाले बहोत कम लोग होते हैं.

दोहा :- “छिमा बड़न को चाहिये, छोटन को उतपात. कह रहीम हरी का घट्यौ, जो भृगु मारी लात.”
अर्थ :- उम्र से बड़े लोगों को क्षमा शोभा देती हैं, और छोटों को बदमाशी. मतलब छोटे बदमाशी करे तो कोई बात नहीं बड़ो ने छोटों को इस बात पर क्षमा कर देना चाहिये. अगर छोटे बदमाशी करते हैं तो उनकी मस्ती भी छोटी ही होती हैं. जैसे अगर छोटासा कीड़ा लाथ भी मारे तो उससे कोई नुकसान नहीं होता.

दोहा :- “तरुवर फल नहीँ खात हैं, सरवर पियहि न पान. कही रहीम पर काज हित, संपति संचही सुजान.”
अर्थ :- पेड़ अपने फ़ल खुद नहीं खाते हैं और नदियाँ भी अपना पानी स्वयं नहीं पीती हैं. इसी तरह अच्छा व्यक्ति वो हैं जो दुसरों को दान के कार्य के लिये अपनी संपत्ति को खर्च करते हैं.

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दोहा :- “दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय. जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे होय.”
अर्थ :- दुःख में सभी लोग भगवान को याद करते हैं. सुख में कोई नहीं करता, अगर सुख में भी याद करते तो दुःख होता ही नही.

दोहा :- “खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान. रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान.”
अर्थ :- सारा संसार जानता हैं की खैरियत, खून, खाँसी, ख़ुशी, दुश्मनी, प्रेम और शराब का नशा छुपाने से नहीं छुपता हैं.

दोहा :- “जो रहीम ओछो बढै, तौ अति ही इतराय. प्यादे सों फरजी भयो, टेढ़ों टेढ़ों जाय.”
अर्थ :- लोग जब प्रगति करते हैं तो बहुत इतराते हैं. वैसे ही जैसे शतरंज के खेल में ज्यादा फ़र्जी बन जाता हैं तो वह टेढ़ी चाल चलने लता हैं.

दोहा :- “चाह गई चिंता मिटीमनुआ बेपरवाह. जिनको कुछ नहीं चाहिये, वे साहन के साह.”
अर्थ :- जिन लोगों को कुछ नहीं चाहिये वों लोग राजाओं के राजा हैं, क्योकी उन्हें ना तो किसी चीज की चाह हैं, ना ही चिन्ता और मन तो पूरा बेपरवाह हैं.

दोहा :- “जे गरिब पर हित करैं, हे रहीम बड. कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग.”
अर्थ :- जो लोग गरिब का हित करते हैं वो बड़े लोग होते हैं. जैसे सुदामा कहते हैं कृष्ण की दोस्ती भी एक साधना हैं.

दोहा :- “जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय. बारे उजियारो लगे, बढे अँधेरो होय.”
अर्थ :- दिये के चरित्र जैसा ही कुपुत्र का भी चरित्र होता हैं. दोनों ही पहले तो उजाला करते हैं पर बढ़ने के साथ अंधेरा होता जाता हैं.

दोहा :- “रहिमन वे नर मर गये, जे कछु मांगन जाहि. उतने पाहिले वे मुये, जिन मुख निकसत नाहि.”
अर्थ :- जो इन्सान किसी से कुछ मांगने के लिये जाता हैं वो तो मरे हैं ही परन्तु उससे पहले ही वे लोग मर जाते हैं जिनके मुह से कुछ भी नहीं निकलता हैं.

दोहा :- “रहिमन विपदा ही भली, जो थोरे दिन होय. हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय.”
अर्थ :- संकट आना जरुरी होता हैं क्योकी इसी दौरान ये पता चलता है की संसार में कौन हमारा हित और बुरा सोचता हैं.

दोहा :- “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर. पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर.”
अर्थ :- बड़े होने का यह मतलब नहीं हैं की उससे किसी का भला हो. जैसे खजूर का पेड़ तो बहुत बड़ा होता हैं लेकिन उसका फल इतना दूर होता है की तोड़ना मुश्किल का कम है.

दोहा :- “रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर. जब नाइके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर.”
अर्थ :- जब बुरे दीन आये तो चुप ही बैठना चाहिये, क्योकी जब अच्छे दिन आते हैं तब बात बनते देर नहीं लगती.

दोहा :- “बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय. औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय.”
अर्थ :- अपने अंदर के अहंकार को निकालकर ऐसी बात करनी चाहिए जिसे सुनकर दुसरों को और खुद को ख़ुशी हो.

दोहा :- “मन मोटी अरु दूध रस, इनकी सहज सुभाय. फट जाये तो न मिले, कोटिन करो उपाय.”
अर्थ :- मन, मोती, फूल, दूध और रस जब तक सहज और सामान्य रहते हैं तो अच्छे लगते हैं लेकिन अगर एक बार वो फट जाएं तो कितने भी उपाय कर लो वो फिर से सहज और सामान्य रूप में नहीं आते.

प्रेरणादायक रहीम के दोहे – Preranadayak Rahim Ke Dohe

दोहा :- “रहिमन ओछे नरन सो, बैर भली न प्रीत. काटे चाटे स्वान के, दोउ भांति विपरीत.”
अर्थ :- कम दिमाग वाले व्यक्तियों से ना दोस्ती और ना ही दुश्मनी अच्छी होती हैं. जैसे कुत्ता चाहे काटे या चाटे दोनों को विपरीत नहीं माना जाता है.

दोहा :- “ रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सुन. पानी गये न ऊबरे, मोटी मानुष चुन.”
अर्थ :- इस दोहे में रहीम ने पानी को तीन अर्थों में प्रयोग किया है, पानी का पहला अर्थ मनुष्य के संदर्भ में है जब इसका मतलब विनम्रता से है. रहीम कह रहे हैं की मनुष्य में हमेशा विनम्रता होनी चाहिये. पानी का दूसरा अर्थ आभा, तेज या चमक से है जिसके बिना मोटी का कोई मूल्य नहीं. पानी का तीसरा अर्थ जल से है जिसे आटे से जोड़कर दर्शाया गया हैं. रहीमदास का ये कहना है की जिस तरह आटे का अस्तित्व पानी के बिना नम्र नहीं हो सकता और मोटी का मूल्य उसकी आभा के बिना नहीं हो सकता है, उसी तरह मनुष्य को भी अपने व्यवहार में हमेशा पानी यानी विनम्रता रखनी चाहिये जिसके बिना उसका मूल्यह्रास होता है.

दोहा :- “रहिमन विपदा हु भली, जो थोरे दिन होय. हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय.”
अर्थ :- यदि संकट कुछ समय की हो तो वह भी ठीक ही हैं, क्योकी संकट में ही सबके बारेमें जाना जा सकता हैं की दुनिया में कौन हमारा अपना हैं और कौन नहीं.

दोहा :- “पावस देखि रहीम मन, कोईल साढ़े मौन. अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछे कौन.”
अर्थ :- बारिश के मौसम को देखकर कोयल और रहीम के मन ने मौन साध लिया हैं. अब तो मेंढक ही बोलने वाले हैं तो इनकी सुरीली आवाज को कोई नहीं पूछता, इसका अर्थ यह हैं की कुछ अवसर ऐसे आते हैं जब गुणवान को चुप छाप रहना पड़ता हैं. कोई उनका आदर नहीं करता और गुणहीन वाचाल व्यक्तियों का ही बोलबाला हो जाता हैं.

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  1. सूरदासजी के दोहे हिंदी अर्थ सहित
  2. कबीरदास के दोहे हिंदी अर्थ सहित
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  4. रहीमदास जी का जीवन परिचय

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25 COMMENTS

  1. Very useful website. Thanks for posting the Dohas with their Hindi meaning.

    Could you please send me the meanings for the Dohas….
    . anuchit uchit Rahim laghu
    . amrit aise vachan me Rahimat
    . ekai saadhe sab saadhe
    . asamai pare Rahim kahi
    . anjan diyo toh kikiri

  2. हम सिर्फ इतने दोहो या संतवाणी से संतूष्ट नही हुए, हमे आपसे बडी उम्मीद है की आप हमारे लिए और संतवाणी के साथ खुष करेंगे.

    • जी हा रमेश जी, इस लेख में कुछ ही समय में और नए रहीम के दोहे हिंदी अर्थ सहित जोडें जायेंगें… आप हमसें जुड़े रहे.

  3. Kindly provide with meaning of more dohas. . The one I wanted I didn’t got that .. but still you tried your best … kindly provide that too. …😟😟

  4. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति। बिपति कसौटी जे कसे, सोई सांचे मीत ॥

  5. Aapka Bahot Dhanyavad,
    Main Hindi me Rahim Ke Dohe Aur Vo Bhi Arth Ke Sath Bahot Dino Se Dhund Raha Tha. Aaj Meri Vo Khoj Puri Ho Gayi. Raheem Ke Dohe Hame Achchi Sikh Dete Hain.
    So Good Website Hai Ye Bakai……Sir Apki Koyibhi Post Padne Ke Baad Bohot Accha Motivation Milta Hain Kai Chize Hain Jo Main Smjne Ke Baad Bhi Janne Ke Baad Bhi Nahi Krta Par Jab Is Site Ka Koi Bhi Article Padu To Meri Sari Problem Slove Hoti Huyi Nazar Aati Hain…thnxxx sir

    • Thanks Manish Ji, Aap hamse jude rahe…. Kuchh hi samay me isme or Rahim das ke dohe Jode jayenge… agar apako hamara ye lekh achha laga to jarur facebook page ko like kare…

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