बुढ़ीमाई का इतिहास | Budhi Mai History

Budhi Mai

बिहार के वैशाली जिले का एक गाव है। यहाँ एक प्रसिद्ध मंदिर हैं जिसे बुढ़ीमाई मंदिर कहा जाता हैं। यह यात्रियों के लिए एक बहुत ही अच्छा स्थान है। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर बहुत अहम माना जाता है। यह मंदिर दुर्गा देवी को समर्पित है।

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बुढ़ीमाई का इतिहास – Budhi Mai History

इतिहासकारों का ऐसा मानना है की 6 वी शताब्दी में यह शहर दुनिया का सबसे पहला गणतंत्र शहर था। उस वक्त चुनाव करके प्रतिनिधि चुने जाते थे। कोल्हुआ में जो स्तूप बना हुआ है उसके बाजु में ही एक बहुत बड़ा स्तंभ खड़ा है। गौतम बुद्ध के प्रवचन और निर्वाण की याद में उसे बनवाया गया था।

धार्मिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक दृष्टि से वैशाली बहुत ही महत्वपूर्ण है और इसी वजह से यहाँ पर एक बार अवश्य आना चाहिए। अशोक स्तम्भ, बुढ़ीमाईमंदिर, बुद्ध स्तूप, राज विशाल का गढ़ यह सभी वैशाली शहर की प्रमुख विशेषताए है।

वैशाली महोत्सव के लिए वैशाली बहुत ही प्रसिद्ध है, वैशाली महोत्सव के दिन भगवान महावीर का जन्म दिन मनाया जाता है। यहाँ का सोनेपुर मेला भी काफी प्रसिद्ध है जो वैशाली से करीब 35 किमी की दुरी पर मनाया जाता है। पेंटिंग्स, पत्थरों की मुर्तिया यह सब वहापर देखने को मिलता है।

वैशाली की कला और शिल्प का काम भी बहुत प्रसिद्ध है जिनमे सबसे खास लाख की चुडिया और घरपर बनाये गए खिलौने होते है। यहाँ का “सिक्की का काम” भी विशेष रूप से प्रसिद्ध है। वैशाली यहाँ के लिच्ची के लिए भी बहुत मशहूर है।

बुढ़ीमाई के परिसर में यहापर हर साल जुलाई और अगस्त महीने में बुढ़ीमाई मेला आयोजित किया जाता है। मेले के दौरान पुरे बिहार से लोग यहापर आते है। लोग उस मेले का पूरा आनंद उठाते है।

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