चारमीनार का इतिहास | Charminar History

Charminar – चारमीनार का निर्माण 1591 CE में हुआ था, भारत के तेलंगाना राज्य के हैदराबाद शहर में बनी यह ईमारत एक स्मारक और मस्जिद है। वर्तमान में यह स्मारक हैदराबाद की वैश्विक धरोहर बनी हुई है और साथ ही चारमीनार भारत के मुख्य स्मारकों में भी शामिल है।

Charminar

चारमीनार का इतिहास – Charminar History In Hindi

चारमीनार का निर्माण मुसी नदी के पूर्वी तट पर किया गया है। चारमीनार के बायीं तरफ लाड बाज़ार और दक्षिण तरफ मक्का मस्जिद है। आर्कियोलॉजिकल एंड आर्किटेक्चरल ट्रेज़र में इसे “स्मारकों की सूचि” में भी शामिल किया गया है। चारमीनार का इंग्लिश नाम उर्दू शब्द चार और मीनार के रूपांतर से बना हुआ है, इसका इंग्लिश नाम “फोर टावर” है।

इस स्मारक को लेके इतिहास में कई पौराणिक कथाये है।

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) के अनुसार, चारमीनार के बारे फ़िलहाल यह रिकॉर्ड दर्ज किया गया है की, “चारमीनार के निर्माण की वजह की बहोत सी कथाये है। जबकि बहोत से लोगो का यह मानना है प्लेग की बीमारी का संक्रमण रोकने के लिये चारमीनार को शहर के मध्य में बनाया गया है।” उस समय यह एक गंभीर बीमारी थी, जिससे इंसान मर भी सकता था। कहा जाता है की मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने यह मस्जिद बनवाकर यहाँ प्रार्थना की थी।

17 वी शताब्दी के एक फ्रेंच यात्री जीन दे थेवेनोट के अनुसार चारमीनार का निर्माण 1591 CE में किया गया था, मतलब दुसरे इस्लामिक सहस्त्र वर्ष (1000AH) में किया गया था। इस्लामिक देशो में इसे एक पर्व के रूप में मनाया जाता है, इसीलिये कुतुब शाह ने पर्व को मनाने के लिये हैदराबाद शहर का चुनाव किया और वहा चारमीनार का निर्माण किया गया।

इतिहासकार मसूद हुसैन खान का कहना है की चारमीनार का निर्माणकार्य 1592 में पूरा हुआ था और हैदराबाद शहर की खोज 1591 में की गयी थी। किताब “डेज ऑफ़ द बीलव्ड” के अनुसार कुतुब शाह ने 15८९ में चारमीनार का निर्माणकार्य शुरू किया था, इसका निर्माण उन्होंने उसी जगह पर किया था जहा उन्होंने अपनी भविष्य की रानी भागमती को पहली बार देखा था और रानी के इस्लाम धर्म में परिवर्तित होने के बाद उन्होंने शहर का नाम हैदराबाद रखा था। लेकिन इस कहानी को इतिहासकारों और विद्वानों ने झूटी बताया था, लेकिन स्थानिक लोगो का इस कहानी पर काफी विश्वास था।

चारमीनार का इतिहास / Charminar History :

कुतब शाही साम्राज्य के पाँचवे शासक सुल्तान मुहम्मद कुली कुतब शाह ने 1591 में चारमीनार को बनवाया था। अपनी राजधानी गोलकोंडा को हैदराबाद में स्थानान्तरित करने के बाद उन्होंने हैदराबाद में चारमीनार का निर्माण करवाया। चारमीनार के वजह से आज हैदराबाद को वैश्विक पहचान मिली है।

चारमीनार का क्षेत्र गोलकोंडा बाजार से जुड़ा हुआ है। पुराने हैदराबाद शहर का निर्माण चारमीनार के वजह से ही किया गया था और तभी से हैदराबाद शहर के केंद्र में चारमीनार स्थित है। चार मीनार की चार मीनारों के पास ही शहर बसा हुआ था। चारमीनार के उत्तर में चार कमान और चार द्वार है। कुतब शाही साम्राज्य के पाँचवे शासक सुल्तान मुहम्मद कुली कुतब शाह ने 1591 में चारमीनार को बनवाया था।

अपनी राजधानी गोलकोंडा को हैदराबाद में स्थानान्तरित करने के बाद उन्होंने हैदराबाद में चारमीनार का निर्माण करवाया। चारमीनार के वजह से आज हैदराबाद को वैश्विक पहचान मिली है। बाद में हैदराबाद शहर को विकसित करने के लिये पर्शियन आर्किटेक्ट को भी बुलाया गया था। और तभी चारमीनार के आस-पास मस्जिद और मदरसा का निर्माण भी किया गया था। चारमीनार का निर्माण इंडो-इस्लामिक कला के आधार पर किया गया था।

चारमीनार के बारे में कुछ रोचक बाते – Charminar Interestings Facts :

1. इमारत में बनी चार मीनार की वजह से इसकी खूबसूरती में चार चाँद लग जाते है।

2. कहा जाता है की चारमीनार की चार मीनारे इस्लाम के पहले चार खलीफो का प्रतिक है।

3. मुहम्मद कुली कुतब शाह ने 1591 में इसका निर्माण किया था।

4. कहा जाता है की उसका निर्माण करने के बाद मुहम्मद कुली ने वहा अल्लाह से प्रार्थना की थी।

5. असल में मस्जिद चारमीनार के सबसे उपरी मंजिल पर बनी हुई है।

6. चारमीनार में पत्थरो की बालकनी के साथ ही एक छत और दो गैलरी भी है जो छत की तरह दिखाई देती है।

7. चारो मीनारों को एक विशिष्ट रिंग से चिन्हित किया गया है जिसे हम बाहर से देख सकते है।

8. मीनार की मुख्य गैलरी में 45 लोगो के प्रार्थना करने जितनी जगह है।

9. चारमीनार हैदराबाद की मुख्य इमारतो में से एक है।

10. उपरी मंजिल पर जाने के लिये आपको 149 हवाई सीढियाँ चढ़ने की जरुरत होगी। सभी मीनारे 149 हवाई सीढियो से पृथक की गयी है।

11. मीनार की हर तरफ एक बड़ा वक्र बना हुआ है जो 11 मीटर फैला और 20 मीटर ऊँचा है।

12. कहा जाता है की चारमीनार और गोलकोंडा किले के बिच एक गुप्त मार्ग भी बना हुआ है, जो पहले कुली कुतब शाह की राजधानी थी और आपातकालीन समय में इस गुप्त मार्ग से राजघराने के लोगो को सुरक्षित रूप से एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता था। लेकिन आज भी उस गुप्त द्वार की वास्तविक जगह किसी को नही पता है।

13. हर एक वक्र पर एक घडी लगी हुई है जो 1889 में बनायी गयी थी।

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4 COMMENTS

  1. Mujhe Eaitihasik Vastu Ke Bareme Janane Bahot Interest Hain Aur Aapki Site Mere Liye Bahot Faydemanda Sabit Huyi, Sir Mujhe Hawa Mahal ‘Palase Of The Winds’ Ke Jankari Chahiye Kripaya Aap Mujhe Eske Bareme Jankari De………….

    • ओम,

      Kuch hi dino me apake liye Hawa Mahal ki janakari yah par aa jayengi…. Hamase jude rahe…

      Dhanyvad.

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