दादा-दादी पर निबंध – Essay on Grandparents in Hindi

Essay on Grandparents in Hindi

वे लोग बेहद खुशनसीब होते हैं जिन्हें अपने दादा-दादी और नाना-नानी के साथ रहने का मौका मिलता है और उनके अंदर न सिर्फ अच्छे संस्कार विकसित होते हैं बल्कि उन्हें अपार प्यार और स्नेह भी मिलता है। दादी-दादी घर से सबसे बड़े, आदरणीय और सम्मानीय सदस्य होते हैं, जिनके फैसले परिवार के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। वहीं दादा-दादी का अपने नाती-पोतें के साथ एक अलग रिश्ता होता है।

घर के सारे सदस्यों का प्यार एकतरफ और दादा-दादी का प्यार एक तरफ होता है। दादा-दादी न सिर्फ मम्मी-पापा के डांट देने पर अपने प्यार-दुलार से बच्चों का मूड सही कर देते हैं बल्कि उन्हें प्यारी-प्यारी परियों की कहानियां सुनाकर उनके बचपन को और भी ज्यादा हसीन बना देते हैं।

दादा-दादी और पोता-पोती का अटूट बंधन और मजबूत रिश्ते पर कई बार प्रतियोगी परीक्षा अथवा निबंध प्रतियोगिता पर निबंध लिखने के लिए कहा जाता है, इसलिए आज हम आपको अपने इस पोस्ट में अलग-अलग शब्द सीमा पर दादा-दादी के विषय पर निबंध उपलब्ध करवा रहे हैं, जिसका चयन आप अपनी जरूरत के मुताबिक कर सकते हैं –

Essay on Grandparents in Hindi

दादा-दादी पर निबंध – Essay on Grandparents in Hindi

दादा-दादी, नाना-नानी घर से सबसे बड़े एवं सम्मानीय सदस्य होते हैं। इसलिए घर के सभी लोगों के मन में इनके लिए अलग भावना होती है और सब इनका आदर करते हैं। घर से हर काम को इनकी सलाह से पूरा किया जाता है, क्योंकि इनके घर के लिए गए हर फैसले अहम होते हैं, इन्हें दुनिया का काफी अच्छा तुर्जुबा होता है और लोगों की बेहतर पहचान होती है।

इसलिए वे अपने अनुभव और तर्जुबे को अपने बच्चों को पोता – पोता से सांझा करते हैं और उन्हें दुनिया के बारे में मुखातिब करवाते हैं और उन्हें सही सलाह देकर सही मार्ग पर चलने की शिक्षा देते हैं।

इसके साथ ही घर में अनुशासन को बनाए रखने के लिए प्रेरणा देते हैं और अनुशासन के महत्व को अपने पोता-पोती को बताते हैं।

वहीं जब माता-पिता अपने कामों में व्यस्त रहते हैं तो दादा-दादी ही होते हैं जो पोता-पोती को भरपूर समय देते हैं और उनके अंदर अच्छे संस्कारों का विकास करते हैं साथ ही उन्हें भारतीय संस्कृति एवं परंपरा के महत्व को बताते हैं और उनके अंदर नैतिक मूल्यों एवं कर्तव्यों की भावना का विकास करने में उनकी मद्द करते हैं।

जो बच्चे अपने दादा-दादी के संपर्क में रहते हैं उनके अंदर रिश्तों की अहमियत और प्रेम, सम्मान की भावना कूट-कूट कर भरी होती है, क्योंकि दादा-दादी बच्चों को सभी से प्रेम करने और रिश्तों के महत्व को बेहद अच्छे तरह से समझाते हैं।

दादा-दादी, घर की रौनक होते हैं और अपने पोता – पोती को उनके माता-पिता से भी ज्यादा प्यार करते हैं और उन्हें अच्छी कहानियां सुनाकर उनके बचपन को और भी ज्यादा बेहतर बनाते हैं।

वहीं आज की युवा पीढ़ी सुंयुक्त परिवार में रहना नहीं पसंद करती है, सेपरेट परिवार में रहना एक ट्रेंड सा बनता जा रहा है। जिसके चलते आज के बच्चों को दादा-दादी और नाना – नानी का प्यार नहीं मिल पाता है।

वहीं इस बात को हर माता-पिता को जरूर समझना चाहिए और अपने बच्चों को दादा-दादी के पास रहने का मौका देना चाहिए ताकि उन्हें दादा-दादी का भरपूक प्यार मिल सके, क्योंकि दादा-दादी के प्यार के बिना बचपन अधूरा होता है।

दादा-दादी पर निबंध – Dada Dadi par Nibandh

प्रस्तावना

दादा-दादी और पोता-पोती का अटूट रिश्ता होता है। इस रिश्ते से कई भावनात्मक भावनाएं जुड़ीं रहती हैं। इनके बीच का प्रेम और बंधन काफी मजबूत होता है। वहीं जिस घर में दादा-दादी होते हैं, उस घर का अलग ही माहौल होता है, ऐसे घरों के रिश्तों में प्यार और सम्मान की भावना होती है और आपसी रिश्ते काफी मजबूत होते हैं साथ ही बच्चों के अंदर संस्कार भरे होते हैं।

दादा-दादी के प्यार और स्नेह के बिना हर बच्चे का बचपन अधूरा है, क्योंकि उनका प्यार और स्नेह बेमिसाल होता है।

दादा-दादी और पोता-पोती के बीच प्यार और रिश्ता:

दादा-दादी और पोती-पोते के बीचे एक अलग बॉन्ड होता है। जिसमें सिर्फ प्यार ही प्यार होता है। जो बच्चे संयुक्त परिवार में रहते हैं, दादा-दादी, नाना-नानी के साथ उनके बचपन की मीठी कहानियां और मीठी यादें जुड़ी होती हैं।

वहीं जब उनके माता-पिता अपने-अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं, उस दौरान दादा-दादी ही होते हैं जो माता-पिता से ज्यादा अपने पोता-पोती का ख्याल रखते हैं और उनके बेहतर विकास के लिए उनका पालन-पोषण करते हैं। वहीं दादा-दादी के साथ रहने से बच्चों के अंदर कई ऐसे गुणों का विकास होता है, जिनके बारे में हम आपको नीचे बता रहे हैं –

दादा-दादी के पास रहने से इन गुणों का होता है विकास:

  • अच्छे संस्कारों का विकास होता है।
  • अनुशासन की भावना विकसित होती है।
  • रिश्तों का महत्व समझने में मद्द मिलती है।
  • प्रेम – सम्मान की भावना का विकास होता है।
  • रिश्तों में मजबूती आती है।
  • जीवन में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलता है।
  • बचपन को सही तरीके से जीने का मौका मिलता है।
  • शारीरिक और मानसिक दोनों रुप से विकास होता है।
  • सही पालन-पोषण में मद्द मिलती है।

सेपरेट फैमिली में रहकर भी दादा-दादी से इन तरीकों से रख सकते हैं अपने रिश्ते मजबूत:

कई फैमिली ऐसी होती हैं जिन्हें अपने करियर के चलते अपने माता – पिता से दूर जाकर किसी अन्य शहर में बसना पड़ता है। ऐसे में उनके बच्चों को दादा-दादी का प्यार नहीं मिल पाता है।

वहीं व्यस्ततता के चलते हर हफ्ते जाकर अपने बच्चों को उनके दादा-दादी से मिलवाना मुमकिन नहीं है, लेकिन इन आासान तरीकों की मद्द से अपने बच्चों को दादा-दादी के प्यार, स्नेह में बांधने और उनके आपसी रिश्तों को मजबूत जरूर किया जा सकता है –

  • सैपरेट फैमिली में रहने वाले समय-समय पर बच्चों के दादा-दादी को घर में रहने के लिए बुलाएं।
  • वीडियो कॉल अथवा वॉइस कॉल के माध्यम से दादा-दादी से बच्चों को रोजाना बात करवाना न भूलें।
  • ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स अथवा पोस्ट के जरिए दादा-दादी के लिए बच्चों से गिफ्ट भिजवाएं, इससे रिश्तें और भी ज्यादा मजबूत होते हैं।
  • बच्चों को दादा-दादी के प्रति उनकी भावनाओं को उकेरने का मौका दें और उसमें अपना सहयोग करें।

दादा-दादी के कर्तव्य:

  • अपने पोता-पोती की सही देखभाल करने में सहयोग करें।
  • पोता-पोती से दूर रहकर भी संपर्क बनाए रखें।
  • बड़प्पन न दिखाएं, बच्चों की तरह पेश आएं।
  • सख्ती से पेश न आएं।
  • हमेशा अच्छी सलाह दें।
  • अच्छे संस्कार डालने में मद्द करें।

पोता-पोती के कर्तव्य:

  • दादा-दादी के सेवा में तत्पर रहें।
  • दादा-दादी की भावनाओं का रखें ख्याल।
  • दादा-दादी का आदर-सम्मान करें।
  • दादा-दादी, नाना-नानी से संपर्क बनाए रखें।
  • दादा-दादी की जरूरतों को पूरा करने में उनकी मद्द करें।
  • दादा-दादी के बताए गए मार्गों का अनुसरण करें और उनकी बात को गहराई से समझने की कोशिश करें।
  • समय-समय पर दादा-दादी के साथ आउटिंग पर जाएं।
  • दादा-दादी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करने की कोशिश करें।
  • दादा-दादी को समय-समय पर उनके खास दिनों पर गिफ्ट देना नहीं भूलें।

उपसंहार

दादा-दादी और पोता-पोती के बीच एक बेहद प्यार भरा रिश्ता होता है। इसलिए आज की युवा पीढ़ी को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और अपने बच्चों को संयुक्त परिवार प्रणाली से अलग कर उन्हें दादी-दादा के प्यार से वंचित नहीं करना चाहिए, बल्कि यह कोशिश करनी चाहिए की उनके बच्चों को दादा-दादी का अपार प्यार और स्नेह मिल सके क्योंकि दादी-दादा और नाना-नानी का प्यार और स्नेह बेमिसाल होता है, उनके प्यार के बिना हर बच्चे का बचपन अधूरा होता है।

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