पटना की ऐतिहासिक इमारत “गोल घर” – Golghar, Patna

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इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम ”गोल घर ” बिहार के पटना के पश्चिमी किनारे पर गांधी मैदान के पास स्थित है। अंग्रेजों के शासनकाल में बनी इस ऐतिहासिक इमारत की संरचना अद्भुत और आर्कषक है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

यह पटना के मुख्य आर्कषणों में से एक है, वहीं कई लोग पटना को इस प्रसिद्ध इमारत ”गोल घर” की वजह से ही जानते हैं।

पटना की ऐतिहासिक इमारत ”गोल घर” – Golghar, Patna

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कैसे पड़ा एतिहासिक इमारत “गोल घर” का नाम?

‘गोल घर’ जिसके नाम का शाब्दिक अर्थ है गोलाकर आकृति वाला घर। आपको बता दें कि यह ऐतिहासिक इमारत अपने आकार के कारण बेहद मशहूर है। इस इमारत की खास बात यह है कि इसका निर्माण इस तरह किया गया है कि इसमें कोई भी खंभा नहीं है।

यह चारों तरफ से गोलाकार मोटी दीवारों से बना हुआ है। आपको बता दें कि इसकी गोलाकार संरचना की वजह से ही इस ऐतिहासिक इमारत को “गोल घर” के नाम से जाना जाता है।
”गोल घर” का निर्माण किसने, कब और क्यों किया?

बिहार के पटना में स्थित एतिहासिक और आर्कषक वास्तुकला का अनूठा नमूना गोलघर का निर्माण 20 जुलाई, साल 1786 में ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन जान गार्स्टिन ने अनाज भंडारण के लिए एक गोदाम के रुप में “गोल घर” का निर्माण करवाया था।

दरअसल, 1770 में जब पटना में भयंकर अकाल आया था, उस समय लोगों को खाने के लिए अनाज नहीं मिल पा रहा था, और करीब 1 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हुए थे, इसी को देखते हुए अनाज भंडार करने के लिए तत्कालीन गवर्नर जनरल, वॉरेन हेस्टिंग्स ने ब्रिटिश सेना के लिए गोरघर के निर्माण का आदेश दिया था।

इसके बाद कैप्टन जान गार्स्टिन ने 30 महीनों की कड़ी मेहनत के बाद इस ऐतिहासिक और आर्कषक इमारत का निर्माण करवाया था।

आपको बता दें कि इस ऐतिहासिक इमारत गोल घर की अनाज भंडारण की क्षमता करीब 140000 टन अनाज भरने की थी, लेकिन संयोगवश गोलघर को कभी इसकी अधिकतम क्षमता तक नहीं भरा गया, वहीं इसके बारे में यह भी माना जाता था कि किसी इंजीनियरिंग खामीं की वजह से इस ऐतिहासिक इमारत के गेट अंदर की तरफ खुलते हैं, वहीं अगर इसको पूरी तरह भर दिया जाए, तो इसके गेट नहीं खुलेंगे।

गोलघर की संरचना – Golghar Architecture

वहीं अगर पटना के गोलघर की इमारत की संरचना की बात करें तो, इसके चारों तरफ घुमावदार 145 सीढ़िया बनी हुई है, जिसके सहारे यहां आने वाले पर्यटक नीचे से इसके ऊपरी सिरे तक जा सकते हैं, यहां से पटना शहर के एक बड़ा हिस्से का नजारा दिखता है साथ ही यहां से गांधी मैदान गंगा नदी और आसपास के मनोहारी दृश्यों का अनूठा अनुभव लिया जा सकता है।

यह पटना शहर की सबसे आकर्षण और मनमोहक ऐतिहासिक इमारतों में से एक है, शांतिपूर्ण वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता की वजह से गोलघर पटना शहर के मनोरम स्थानों में से एक है।

इस इमारत की ऊंचाई 29 मीटर (96 फीट) हैं, जबकि इसका आकार 125 मीटर है, वहीं गोलघर दीवारें आधार में 3.6 मीटर चौड़ी हैं। इसके साथ ही गोलघर के शिखर पर करीब 3 मीटर तक ईंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि इसकी बजाय पत्थरों का उपयोग किया गया है।

आपको यह भी बता दें कि गोलघर से सबसे ऊपर शीर्ष पर करीब 7 इंच व्यास का एक छेद अनाज डालने के लिए किया गया था, हालांकि बाद में इस छेद को बंद कर दिया गया था। वहीं प्राचीन समय में गोलघर पटना की सबसे ऊंची इमारतों में से एक थी।

इतिहास में अनाज भंडारण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला “गोल घर” आज पटना में एक टूरिस्ट प्लेस और पिकनिक स्पॉट के तौर पर मशहूर है, वहीं दिसंबर साल 2017 में इस इमारत को एक नया रुप दिया गया था।

इसके साथ ही यहां पर्यटकों को गोल घर की तरफ और ज्यादा आकर्षित करने के लिए यहां लाइट एंड साउंड शो भी दिखाया जाता है, जिससे पिछले कुछ समय में यहां आने वाली पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।

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