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हिमाचल प्रदेश दर्शनीय स्थल | Himachal pradesh tourism

Himachal Pradesh tourism

भारत देश में स्थित एक राज्य जिसका नाम है हिमाचल प्रदेश उस का जो शाब्दिक अर्थ है वो है ‘बर्फीले पहाड़ो का प्रांत’। हिमाचल प्रदेश को ‘देवभूमि’ के नाम से भी जाना जाता है।

हिमाचल प्रदेश भारत के उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित है। ये राज्य 56,019 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसके साथ ही ये पूर्व में तिब्बत, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखंड, दक्षिण-पश्चिम में पंजाब (भारत) और दक्षिण में उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों से घिरा हुआ है।

हिमाचल प्रदेश को 1971 में 25 जनवरी को भारत का अट्ठारवां राज्य बनाया गया था। इसकी जो राजधानी है वो है ‘शिमला’ और दूसरी राजधानी है ‘धर्मशाला’।

हिमाचल प्रदेश दर्शनीय स्थल – Himachal pradesh tourism
Himachal pradesh tourism

हिमाचल प्रदेश का खान-पान – Himachal Pradesh Food

हिमाचल प्रदेश का जो खान-पान है वो बहुत ही सादा है। जैसा कि हिमाचल के नाम से ही पता चलता है कि ये एक बहुत ठंडा प्रदेश है इसीलिए यहां के लोग ठंड से बचने के लिए जानवरों के मांस को भी अपने भोजन में शामिल करते हैं।

पर यहां के ज्यादातर जो लोग हैं वो शाकाहारी हैं और मौसमी फलों को ही अपना आहार बनाते हैं। ये एक पर्यटन स्थल है इसीलिए जैसे-जैसे लोगों का यहां आना जाना होता है यहां के लोग भी उसी प्रकार का खानपान करते हैं।

हिमाचल प्रदेश की जलवायु – Himachal Pradesh Weather

हिमाचल प्रदेश की अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरह का तापमान देखने को मिलता है। यहां कहीं बर्फ तो कहीं गर्मी का अनुभव होता है। हिमाचल में तीन ऋतुएं होती हैं और वो हैं- ग्रीष्म ऋतु, शरद ऋतु और वर्षा ऋतु।

  • ग्रीष्म ऋतु- स्थानीय भाषा में तौंदी के नाम से जानी जाने वाली ये ऋतु अप्रैल से जून तक हिमाचल में रहती है।
  • शरद ऋतु- स्थानीय भाषा में हयून्द के नाम से जानी जाने वाली ये ऋतु हिमाचल में अक्टूबर से मार्च तक छाई रहती है।
  • वर्षा ऋतु- इस ऋतु में हिमाचल का जो मौसम होता है वो आर्द्र होता है। हर साल 160 सेंटीमीटर के आसपास प्रदेश में वर्षा होती है।

कैसे पहुंचे हिमाचल प्रदेश – How to reach Himachal Pradesh

हिमाचल प्रदेश पहुँचना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। वहाँ पहुँचने के लिए व्यक्तियों के पास बस, ट्रेन और फ्लाइट की सुविधाएं मौजूद हैं।

  • हवाई जहाज से:

इस राज्य में तीन हवाई अड्डे हैं और तीनों ही घरेलू हवाई अड्डे हैं।हालांकि, यहाँ अभी तक एक भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नहीं है। यहाँ एक और हवाई अड्डा है जिसका अभी निर्माण कार्य चल रहा है।

कागड़ा जिले में गगगल हवाई अड्डा, जुम्बारटी का शिमला में और कुल्लू घाटी में भुंतर हवाई अड्डा रखा गया है। आमतौर पर ये सारे हवाई अड्डे दिल्ली और चंडीगढ़ के हवाई अड्डों से जुड़े हुए हैं।

  • ट्रेन से:

हिमाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर रेलवे ट्रैक की भी सुविधा उपलब्ध है और राज्य के जो प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं वो हैं- शिमला, पठानकोट और जोगिंदर नगर।

  • बस से:

हिमाचल प्रदेश में तीन राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। हिमाचल का सड़क मार्ग काफी अच्छा है और यहाँ कि सड़कें ही यहाँ की जीवनरेखा है। राज्य के सड़क मार्गों ने कुल 28,210 किमी की कुल लंबाई के साथ जिला से जिले तक अच्छा संचार किया है।

बसों और निजी टैक्सियों द्वारा व्यक्ति हिमाचल प्रदेश पहुँच सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थल – Himachal Pradesh Tourist Places

हिमाचल प्रदेश में जो सबसे खास है वो है यहां के पर्यटन स्थल। यहाँ की सुंदरता में लोग जाते ही बस खो जाते हैं। हिमाचल प्रदेश में पर्यटन उद्योग को भी उच्च प्राथमिकता दी गई है।

इसके विकास के लिए ही यहाँ तीन हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और तीन राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। इसके साथ ही यहां जनोपयोगी सेवाएं, जलापूर्ति और जन स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध हैं। यहाँ पर आने वाले लोगों के लिए जो प्रमुख आकर्षण हैं वो निम्नलिखित हैं-

कुल्लू – Kullu

हिमाचल प्रदेश में स्थित एक शहर, ‘कुल्लू’ जो पहले ‘कुलंथपीठ’ के नाम से जाना जाता था, एक बहुत ही खूबसूरत पर्यटन स्थल है। कुलंथपीठ नाम का जो अर्थ है वो है ‘रहने योग्य दुनिया का अंत’। भारत में ‘देवताओं की घाटी’ नाम से भी प्रसिद्ध है हिमाचल राज्य की ये कुल्लू घाटी।

दुनियाभर में ये ‘सिल्वर वैली’ के नाम से प्रख्यात है।  यहाँ की जो खूबसूरती है वो देखते ही बनती है। हरियाली से ये शहर लोगों के मन को मोह लेता है। ये शहर विज नदी के किनारे स्थित है। यहाँ के मंदिर और सेब के बाग हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर खींच लाते हैं।

साथ ही यहाँ बहुत सारे एडवेंचरस स्पोर्ट्स भी हैं।  कुल्लू की जो चीज़ सबसे ज्यादा दिल को लुभाती है वो है यहाँ पर मनाया जाने वाला रंग-बिरंगा दशहरा। यहाँ हर साल दशहरा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और इसमें शामिल होने के लिए बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं। कुल्लू शहर के जो पर्यटन स्थल में शामिल जगहें हैं वो निम्न हैं-

बिजली महादेव मंदिर – Bijli Mahadev

ये भारत का प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह जगह समुद्र स्तर से 2450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ये मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है इसीलिए भगवान के दर्शन पाने के लिए लोगों को कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। इस मंदिर के बारे में बहुत सारी बातें बताई जाती हैं।

इस मंदिर में एक ध्वज है। कहा जाता है कि जब बिजली कडकती है तो उस ध्वज में तरंगें उठती हुई दिखाई देतीं हैं और लोग उसे भगवान का आशीर्वाद मानते हैं।

  • यह मंदिर कुल्लू मुख्य शहर से4 किमी की दूरी पर है। यहाँ पहुँचने के लिए आप प्राइवेट टैक्सी की सुविधा ले सकते हैं।
  • समय-सारणी-6:00AM से 8:00PM रोजाना। यहाँ घूमने में 2 से 3 घंटे का समय लग जाता है।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

रघुनाथजी मंदिर – Raghunath Temple

ये मंदिर बहुत ही सुंदर है। कहा जाता है कि जिस राजा ने इस मंदिर को बनवाया था उन्होंने इसलिए इसको बनवाया था क्योंकि उनसे एक बहुत ही बड़ी भूल हो गई थी और एक मंदिर को बनवाकर ही वो अपनी भूल का प्रायश्चित करना चाहते थे।

  • यह मंदिर कुल्लू शहर के निकट मनाली में स्थित है। कुल्लू से इस मंदिर की दूरी2 किमी की है। आप प्राइवेट टैक्सी एवं बस की सुविधा यहाँ पहुँचने के लिए ले सकते हैं।
  • समय-सारणी- 6:00AM से 8:00PM रोजाना।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

सुप्रसिद्ध कुल्लू दशहरा – Kullu Dussehra

कुल्लू शहर का जो दशहरा है वो दुनियाभर में बहुत प्रसिद्ध है। एक बहुत ही के फेमस डॉयलोग है कि लोगो की सोच जहाँ खत्म होती है वहीं मेरी सोच शुरू होती है। ऐसी ही कुछ खास बात यहाँ के दशहरे के साथ भी है।

यहाँ दशहरा तब शुरू होता है जब दुनियाभर का दशहरा समाप्त हो चुका होता है और यहाँ का दशहरा इतना हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है कि भारत देश का हर एक व्यक्ति इस दशहरे में शामिल होना चाहता है।

मनाली – Manali

मनाली, ‘मनु के घर’ के नाम से जाना जानेवाला ये शहर दुनिया का सबसे लोकप्रिय हिलस्टेशन है। यहाँ के पहाड़ों को देखकर इंसान ऐसा महसूस करता है कि मानो वो जन्नत में हो। मनाली में गर्मियों के मौसम भी दुनियाभर से हज़ारों पर्यटक आते हैं।

सब गर्मी से छुटकारा पाने के लिए मनाली आकर यहाँ की ठंडी हवाओं और वादियों के बीच खो जाना चाहते हैं। प्राकृतिक सुंदरता के साथ लोग यहाँ पर एडवेंचरस खेलों का भी आनंद लेते हैं।

मनाली हिंदुओं का पवित्र तीर्थस्थल भी माना जाता है। इसके जो प्रमुख पर्यटक स्थल हैं वो निम्न हैं-

अर्जुन गुफा – Arjun Gufa Manali

ये वही गुफा है जिसमें महाभारत के अर्जुन ने तपस्या की थी। जिसकी वजह से उन्हें पशुपति अस्त्र की प्राप्ति हुई थी। दूर-दूर से लोग इस गुफा को देखने के लिए आते हैं।

  • यह गुफ़ा मनाली मुख्य शहर से 21 किमी की दूरी पर है, वही कुल्लू मुख्य शहर से इसकी दूरी 23 किमी की है। यहाँ पहुचने के लिए प्राइवेट टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है।
  • समय-सारणी- यह गुफा 24 घंटे खुला रहता है, परन्तु यहाँ भ्रमण हेतु 7:00AM-2:00PM का समय उचित माना जाता है। यहाँ घूमने में 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है।
  • प्रवेश-निशुल्क।

ओल्ड मनाली – Old Manali

मनाली से 3 किमी उत्तर पश्चिम में स्थित है ओल्ड मनाली। ओल्ड मनाली अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यहां के जो बगीचे हैं वो बहुत ही खूबसूरत हैं और यहाँ के प्राचीन गेस्ट हाउस बहुत प्रसिद्ध हैं।

  • यहाँ घूमने में 2 से 3 घंटे का समय लग जाता है।

मनु मंदिर – Manu Temple

माना जाता है कि मनु ने इसी मंदिर में आकर ध्यान लगाया था। इसलिए ये काफी प्रसिद्ध है।

  • यह मंदिर मनाली मुख्य शहर से5किमी की दूरी पर स्थित है। वहीं अगर बात की जाए कुल्लू मुख्य शहर की तो वहाँ से इस मंदिर की दूरी 45.8 किमी की है। आप प्राइवेट टैक्सी का सहारा लेकर इस मंदिर तक आसानी से पहुँच सकते हैं।
  • संचालन का समय- 6:00AM-8:00PM
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

व्यास कुंड – Vyas Kund

व्यास कुंड के चारों तरफ पत्थर ही हैं। इसमें एकदम स्वच्छ और हाथों को सुन्न कर देने वाला ठंडा पानी बहता है। लोग यहाँ इसकी सुंदरता को देखने के लिए आते हैं।

  • यह कुंड मनाली मुख्य शहर से7 किमी की दूरी पर स्थित है, वही कुल्लू मुख्य शहर से इसकी दूरी 60.8 किमी की है। यहां पहुँचने के लिए प्राइवेट टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है।
  • समय-सारणी- 6:00AM-6:00PM रोजाना। यहाँ घूमने में 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

हिडिम्बा मंदिर – Hadimba Temple Manali

भीम की पत्नी हिडिम्बा का ये मंदिर लकड़ी से बना हुआ है। हर साल मई के महीने में यहाँ एक बड़े उत्सव का आयोजन किया जाता है।

  • यह मंदिर मनाली मुख्य शहर से8 किमी की दूरी पर है, एवं कुल्लू मुख्य शहर से इस मंदिर की दूरी 45.2 किमी की है। आप यहाँ पहुँचने के लिहे प्राइवेट टैक्सी की सुविधा ले सकते हैं।
  • संचालन का समय- 8:00AM-6:00PM रोजाना। यहाँ घूमने में 2 से 3 घंटे का समय लग जाता है।
  • प्रवेश- निशुल्क।

मणिकरण – Manikaran

कुल्लू से करीब 45 किमी दूर मनाली जाने वाले रास्ते में स्थित है मणिकरण। पार्वती जी के जो कर्णफूल थे वो यहाँ पर खो गए थे और तभी से यहाँ का जो जल है वो बहुत ही ज्यादा गर्म हो गया है। ये जल इतना गर्म है कि इसमें चावल और दाल को पकाया जा सकता है।

  • मणिकरण की दूरी कुल्लू मुख्य शहर से3 किमी की है जबकि मनाली मुख्य शहर से इसकी दूरी 84 किमी की है। यहाँ पहुचने के लिए प्राइवेट टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है।
  • संचालन का समय- 5:00AM- 12:00PM एवं 4:00PM-9:00 PM रोजाना। यहाँ घूमने में 1 से 2 घंटे का समय लग जाता है।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

बौद्ध मठ – Buddha Math

कुल्लू घाटी के जितने भी बौद्ध शरणार्थी थे वो सब यहाँ आकर रहने लगे हैं। उन्हीं लोगों की वज़ह से ये स्थान बौद्ध मठ के नाम से  प्रसिद्ध है।

  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

डल झील – Dal Jheel

अरे! डल झील तो कश्मीर में है, ये यहाँ कैसे आ गई? डल झील का नाम पढ़ते ही सभी के मन में ऐसे ही ख्याल आए होंगे। पर अगर एक डल झील कश्मीर में है तो दूसरी हिमाचल के धर्मशाला में है। दूर-दूर से लोग यहाँ इसके हरे-नीले पानी को देखने आते हैं।

  • यह झील धर्मशाला मुख्य शहर से7 किमी की दूरी पर है। यहाँ पहुचने के लिए आप प्राइवेट टैक्सी की सुविधा ले सकते हैं।
  • संचालन का समय- 7:00AM-8:00PM
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

कुनाल पथरी – Kunal Pathri

ये मंदिर पत्थरों से बना हुआ है। पत्थरों से कारीगरी इतनी बारीकी से की गई है कि इसको देखते ही लोग सब कुछ भूल जाते हैं।

  • यह मंदिर धर्मशाला मुख्य शहर से 5 किमी की दूरी पर है। यहाँ पहुँचने के लिए आप प्राइवेट टैक्सी का सहारा ले सकते हैं।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।
  • संचालन का समय- 7:00AM-8:00PM रोजाना। यहाँ घूमने में लगभग आधे घण्टे का समय लग जाता है।

चामुंडा देवी का मंदिर – Chamunda Devi Temple

चामुंडा देवी का मंदिर कांगड़ा से 24 किमी की दूरी पर है। चामुंडा माता का ये मंदिर हिंदुओं के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से है। ये मंदिर पालमपुर से 20किमी दूर धर्मशाला रोड पर है। यहाँ लोग देवी के दर्शन तो करते ही हैं उसके साथ ही लोग इस मंदिर से धर्मशाला शहर के प्राकृतिक नज़ारों का लुत्फ भी उठाते हैं।

  • यह मंदिर धर्मशाला से8 किमी की दूरी पर है। यहाँ पहुँचने के लिए आप प्राइवेट टैक्सी की सुविधा ले सकते हैं।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

कांगड़ा देवी – Kangra Devi Temple

कांगड़ा देवी 51 शक्ति पीठो में से माँ की वो शक्तिपीठ है जहाँ सती का दाहिना वक्ष गिरा था। यहाँ  पर माँ के तीन पिंडियों की पूजा की जाती है।

  • यह मन्दिर धर्मशाला शहर से6 किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ पहुचने के लिए आप प्राइवेट टैक्सी का सहारा ले सकते हैं। इसके अलावा राज्य परिवहन के बसों की सुविधा भी यहाँ पहुचने के लिए उपलब्ध है।
  • समय-सारणी- 5:00AM-8:00PM रोजाना। यहाँ पर घूमने में 1 से 1:30 घंटे का समय लग जाता है।
  • प्रवेश-शुल्क- निःशुल्क।

चिंतपूर्णी देवी मंदिर – Chintpurni Devi Temple

यह मंदिर हिंदुओ का एक प्रसिद्ध मंदिर है। देवी मां के 51 शक्तिपीठो में से चिंतपूर्णी देवी का मंदिर एक है। चिंतपूर्णी मंदिर के चारो दिशाओं में भगवान शिव का मंदिर स्थित है।

  • यह मंदिर धर्मशाला से5 किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ पहुचने के लिए आप प्राइवेट टैक्सी एवं राज्य परिवहन बस की सुविधा ले सकते हैं।
  • समय-सारणी- 5:30AM-9:30PM रोजाना( शीत ऋतु में)
  • एवं 4:00AM-10:00PM रोजाना( ग्रीष्म ऋतु में)
  • प्रवेश-शुल्क- निःशुल्क।

नैना देवी मंदिर – Naina Devi Temple

यह मंदिर भी देवी मां के 51 शक्तिपीठो में से एक है। यह मंदिर शिवालिक पर्वत श्रेणी पर स्थित है। ऐसा माना जाता  है कि यहाँ पर देवी सती के नेत्र गिरे थे।

  • यह मंदिर धर्मशाला से8 किमी की दूरी पर है। यहाँ पहुँचने के लिए प्राइवेट टैक्सी एवं राज्य परिवहन के बस की सुविधा उपलब्ध है।
  • समय-सारणी- 6:00AM-10:00PM रोजाना।
  • प्रवेश शुल्क- निःशुल्क।

धर्मकोट – Dharamkot

धर्मशाला में घूमने के लिए धर्मकोट काफ प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। ये बेहद सुंदर है।

डलहौजी – Dalhousie

कठलोंग, पोट्रेन, तेहरा, बकरोटा और बलुन, इन पांच पहाड़ों के पर स्थित चंबा जिले का हिस्सा है ये डलहौजी। इसका नाम डलहौजी वाइसराय लार्ड डलहौजी के नाम पर रखा गया था।

डलहौजी में देखने को लिए बहुत कुछ है। माना जाता है कि रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी ‘गीतांजलि’ को लिखने की जो प्रेरणा है वो डलहौजी से ही मिली थी। उसके पर्यटन स्थल में जो शामिल है वो निम्न हैं,

लक्ष्मीनारायण मंदिर – Laxminarayan Temple

बहुत ही प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है लक्ष्मीनारायण मंदिर। भगवान विष्णु का ये मंदिर आकर्षक का केंद्र है। मणि महेश यात्रा की शुरुआत इसी मंदिर से शुरू होती है।

  • यह मंदिर डलहौजी से6 किमी की दूरी पर है। यहाँ पहुंचने के लिए प्राइवेट टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।
  • संचालन का समय- सबसे अच्छा दिन का समय। यहाँ घूमने में लगभग 1 घंटे का समय लग जाता है।

पंचफुल्ला – Panchkula

पंचफुल्ला, शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह की समाधि के लिए प्रमुख है।

  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।
  • संचालन का समय- दिन का समय।

मणिमहेश यात्रा – Manimahesh

लक्ष्मीनारायण मंदिर से इस यात्रा की शुरुआत होती है। इस यात्रा के दौरान छड़ी को मणिमहेश झील तक ले जाते हैं और वो झील डलहौजी का प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है।

  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।
  • यात्रा का समय- भाद्रपद मास के अर्धचंद्र के आठवें दिन।

सेंट पैट्रिक चर्च – Saint Patrick Church

ये चर्च डलहौजी का सबसे बड़ा चर्च है। इसकी देखरेख जो है वो जलंधर के कैथोलिक डायोसिस द्वारा की जाती है।

  • यह चर्च डलहौजी मुख्य शहर से 4 किमी की दूरी पर है।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।
  • यहाँ घूमने में लगभग 1 घण्टे का समय लग जाता है।

चंबा घाटी – Chamba

चंबा की खूबसूरती को शब्दों में बयां कर पाना आसान नहीं है। इसकी खूबसूरती को लोगों ने फिल्मों में तो देखा ही है पर इसकी असल खूबसूरती का अंदाज़ा तो यहां जाकर इसको देखने के बाद ही लगाया जा सकता है।

इसमें तरह-तरह की संस्कृति का प्रभाव दिखाई देता है। जो यहाँ जाता है वो बस यहाँ सदा के लिए बस जाना चाहता है। चंबा के जो मुख्य आकर्षण हैं वो निम्न हैं,

चंपावती मंदिर – Champavati Temple

कहा जाता है कि यहां की राजा की जो पुत्री थी चंपावती उसी ने अपने पिता को चंबा नगर स्थापित करने के लिए उकसाया था।इस मंदिर में पत्थरों पर खूबसूरत नक्काशी की गई है और छत को पहिएनुमा बनाया गया है।

  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।
  • संचालन का समय- 6:00AM-8:00PM रोजाना। यहाँ घूमने में 1 से 2 घण्टे का समय लग जाता है।

चौगान – Chaugan

ये एक खुला घास का मैदान है। हर साल इस मैदान पर मिंजर मेले को आयोजित किया जाता है। नगर के बीचों बीच स्थित इस मैदान की खूबसूरती मिंजर मेले में देखते ही बनती है।

  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।
  • संचालन का समय- निर्धारित नहीं।

सुई माता मंदिर – Sui Mata Temple

ये जो मंदिर है ये राजकुमारी सुई को समर्पित है। उन्होंने चंबा के निवासियों के लिए अपना जीवन त्याग दिया था।

  • यह मंदिर चम्बा मुख्य शहर से 5 किमी की दूरी पर है।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

शिमला – Shimla

शिमला, हिमाचल प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी है। दुनियाभर में शिमला को ‘पहाड़ों की रानी’ के नाम से जाना जाता है। शिमला का नाम देवी काली के अवतार श्यामला के नाम पर रखा गया। दूर-दूर से लोग शिमला में छुट्टियां बिताने के लिए आते हैं। शिमला के पर्यटन स्थल में निम्न शामिल हैं,

संकट मोचन – Sankat Mochan Temple

शिमला-कालका सड़क मार्ग पर भगवान हनुमान का एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। यहाँ से शिमला की खूबसूरती का आनंद लिया जा सकता है।

  • यह मंदिर शिमला मुख्य शहर से 5 किमी की दूरी पर है। यहाँ जाने के लिए रोपवे का शहर लेना पड़ता है।
  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।
  • संचालन का समय- दिन के समय।

मॉल रोड – Mall Road

शिमला का मुख्य शॉपिंग सेंटर। यहाँ तरह-तरह की चीज़ें मिलती हैं। लोग यहाँ पर घूमने, खाने-पीने आते हैं। ये लोगों के लिए बहुत ही आकर्षण का एक केंद्र है। यह शिमला मुख्य शहर में ही स्थित है।

  • प्रवेश शुल्क- निशुल्क।

कुफरी – Kufri

कुफरी भारत के खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है। ये हिमाचल प्रदेश के दक्षिण हिस्से में स्थित है। यहाँ की झील, बर्फ से ढंकी हुई पहाड़ों की चोटियां, गहरी घाटियां ही यहाँ की खूबसूरती को देखने का कारण हैं।

अपनी खूबसूरती की वजह से ही ये जगह हज़ारों सैलानियों को अपनी ओर खींच लेती है। कुफरी में आप कई तरह के एडवेंचर गेम में  हिस्सा ले सकते हैं।

  • कुफरी शिमला मुख्य शहर से8 किमी की दूरी पर है। प्राइवेट टैक्सी के मदद से पहाड़ी तक पहुचने के बाद यहाँ से कुफरी तक पहुँचने के लिए आपको घोड़े की सवारी करनी पड़ेगी। मुख्य पहाड़ी से कुफरी तक कि दूरी लगभग 2.5 किमी की है।
  • यहाँ भ्रमण करने में 5 से 6 घण्टे का समय लग जाता है।

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