जीवन पर कविता – Hindi Poems on Life

Hindi Poems on Life

जीवन का मतलब क्या हैं ये आज तक कोई नहीं जान सका, इसका अर्थ हर कोई अपने अपने तरीकेसे लेता हैं लेकिन जीवन यानि सुख दुःख, धुप छाव कभी असफ़लता तो कभी सफलता क्या ये सब ही जीवन हैं। दोस्तों आज हम जीवन पर कविता – Hindi Poems on Life लाये हैं आशा हैं आपको जरुर पसंद आयेंगी।

Hindi Poems on Life
Hindi Poems on Life

जीवन पर कविता – Hindi Poems on Life

Hindi Poems on Life 1

“ये ज़िन्दगी”

जीने की चाह सभी को होती है सदा।
ये ज़िन्दगी नये सपने संजोती है सदा।।
अपने अरमानों को हम सजाएँ।
इन्हें और भी खूबसूरत बनाएँ।।
बन जाये बेहतर आज, कल अपना।
सदा शांति से गुज़रे हर पल अपना।।
अपनी गलती को हम सुधारें।
अच्छी दृष्टि से सबको निहारें।।

~ संजय

Hindi Poems on Life 2

“चलना चाहते हैं”

हम राह को बदलना नहीं चाहते हैं,
हम राह बनाना चाहते हैं…
जो खुद पथ के राही हो,
वो सिर्फ राह चलना चाहते हैं…
जिंदगी की सफर खत्म नहीं होती,
वो सिर्फ चलती ही रहती है…
भले हम रूक जाये खुशी से,
वो दुःख में भी चलते रहते हैं…
भाग्य मंदिर जाकर नहीं बदलते हैं,
भाग्य तो खुद ही बनते हैं…
और जो कर्मवीर होते हैं,
वो भाग्य के भरोसे नहीं रहते हैं…
रास्ते कभी कठिन नहीं होते,
वह तो सीधे – सरल होते हैं…
जो यह जानकर भी आगे न बढ़े,
कसम से! वो बड़े मुर्ख होते हैं…

~ आदित्यराज

Hindi Poems on Life 3

“जीवन और शतरंज”

जीवन और शतरंज में
आता नहीं है ठहराव कहीं भी
हारे हुए सिपाही के
न रहते हुए भी
चलते रहते हैं ये
अनवरत ही।
कौन किसे कब मात देगा
ये कहना मुश्किल है
मगर ये सच है कि
बैठे हैं घातिये हर ओर
घात लगाकर।
हर कदम पर
सतर्क रहते लड़ना होगा
यह नियम है
भावनाओं के आवेश में
मुश्किल हो जाता है
खेल और भी
एक हल्की सी चूक पर
समर्थ होते हुए भी
बजीर पिट जाता है
मात्र प्यादे से ही।
होता है आकंलन
सही और गलत का
खेल की समाप्ति पर
हार – जीत
यश-अपयश
और चलते है दौर
मंथन के भी।
चौकोर शतरंज की विसात पर
मरे हुए प्यादे
हाथी, घोड़े
पुनः खड़े हो जाते हैं
बाजी ख़त्म होने पर
नए खेल के लिए।
किन्तु
जीवन-शतरंज की विसात पर
नहीं लौटता है कोई भी
एक बार चले जाने के बाद
रह जाती है शेष
मात्र स्मृतियाँ ही
जीवन और शतरंज में
अंतर है मात्र
इतना सा ही।

~ मनोज चौहान

Hindi Poems on Life 4

“जीवन का मार्ग”

मैं जिसमें चुन -चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो हर मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
एक भूलभूलैया सा नज़र आता है खुद की आँखों में,
मै अपनी नज़रों में ही खो जाती हूँ।
जीवन किसी रेल सा गुजरता है,
मैं किसी पुल की भाँति कंपकंपाती हूँ।
मै जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
मैं जब तेरे बारे में सोचती हूँ ,
फिर दुनियाँ भूल जाती हूँ।
मेरे हर गम में साथ तेरा है,
तेरे होने से खुश सवेरा है।
तु जो हँसता है मुझे हँसाने की खातिर,
मैं दर्द में भी हँस देती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
तेरी आँखों में नज़र आता है स्वप्न मेरा,
जो मै हर रात सोते जगते देखती हूँ।
पर जब ओझल तू हो जाता है,
हर स्वप्न बुलबुले की तरह मिट जाता है।
मैं भी अपनी नादानी समझकर फिर गहरी नींद में सो जाती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।

~ कविता यादव

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