जानिए हसीन वादियों में बसे नैनीताल के बारेमें | History of Nainital

Nainital

जब भी हम हिल स्टेशन के बारे में बात करते हैं तो हमारे मन में सबसे पहला ख्याल नैनीताल – Nainital का आता है। और नैनीताल की हसीन वादियों को याद करते ही मन अपने आप सूकून और आनंद से भर जाता है। नैनीताल का नाम यहां मौजूद ताल के नाम पर रखा गया है जिसे यहां के लोग नैनी झील भी कहते हैं। नैनीताल गर्मियों और सर्दियों दोनों ही मौसम में घूमने के लिए भारत के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है। और यही कारण है कि नैनीताल में देश विदेश से घूमने आने वाले पर्यटकों की संख्या काफी ज्यादा है।

Nainital – नैनीताल में बहुत से पर्यटन स्थल है जहां पर्यटक घूम सकते हैं। लेकिन नैनीताल केवल अपनी हसीन वादियों की खूबसूरती और खूबसूरत पर्यटन स्थल के लिए ही फेमस नहीं है। नैनीताल के मशूहर होने की एक वजह नैनीताल का इतिहास – History of Nainital भी है।

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जानिए हसीन वादियों में बसे नैनीताल के बारेमें – History of Nainital

नैनीताल भारत के उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित है। नैनीताल पहले एक हिल स्टेशन नहीं था नैनीताल को हिल स्टेशन साल 1841 में अंग्रेजो ने बनाया था। दरअसल साल 1814 से साल 1816 तक चले ऐंग्लो नेपाली युदध के बाद अंग्रेजों ने कुमाऊँ को अपने आधीन कर दिया था। इसके बाद साल 1841 में नैनीताल की बेहतरीन खूबसूरती को देखते हुए इसे हिल स्टेशन में तब्दील किया गया। और यही वजह है कि नैनीताल में अंग्रेजों दारा बनाए कई चर्च और स्कूल आज भी मौजूद है।

नैनीताल का धार्मिक इतिहास – Religious history of Nainital

जैसा कि हम सभी जानते है उत्तराखंड को देवों की भूमि यानी देव भूमि कहा जाता है। और नैनीताल का इतिहास भी देवों की इस भूमि से जुड़ा है। हिंदु धर्म में स्कंद पुराण के मानस खण्ड के अनुसार नैनीताल वो ताल है जिसे ऋषि पुलस्त्य, ऋषि अत्रि और ऋषि पुलह ने बनाया था।

यहां की प्रसिद्ध कहानियों के अनुसार ये तीनों ऋषि नैनीताल आए थे लेकिन इस स्थान पर कहीं भी पानी न मिलने पर इन तीनों ऋषिओं ने तिब्बत की मानसरोवर झील से पानी लाकर यहां एक गड़्ढा खोदकर इस ताल को बनाया था। और जैसा कि मान्यता है मानसरोवर झील में स्नान करने से सभी रोगों से छुटकारा मिलता है उसी तरह नैनीताल झील में भी स्नान करने से पुण्य मिलता है साथ ही सभी तरह के त्वचा रोगों से छुटकारा मिलता है।

ताल तों ऋषियों ने बनाया फिर इसका नाम नैनीताल कैसे पड़ा आप यही सोच रहें होंगे। दरअसल कथाओं के अनुसार इसी स्थान पर भगवान शिव की पहली पत्नी सती की आँख गिरी थी जो 64 शक्तिपीठों से एक हैं। जिस वजह से इस ताल का नाम नैनीताल कहा जाने लगा। नैनीताल के पास ही नंदा देवी का मंदिर भी है और हर साल इस मंदिर में मेला भी लगता है। जिसमें कुमाऊं संस्कृति की बेहतरीन झलक देखने को मिलती है।

नैनीताल में घूमने की जगहें – Tourist Places in Nainital

नैनीताल चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा शहर है जिसके बीच में बहुत ही खूबसूरत ताल है जिसे नैनीताल कहते हैं। नैनीताल के आसपास बहुत सी सुंदर – सुंदर बाजारें और पर्यटन स्थल है नैनीताल के पास ही नंदा देवी का बहुत ही सुंदर मंदिर है। इसके अलावा नैनीताल के पास ही चीनी पिक है जहां से हिमालय साफ नजर आता है। नैनीताल में बहुत खूबसूरत जू और बर्ड सेंचुरी भी है नैनीताल से 2 किलोमीटर की दूर पर भीमताल है। जिसकी खूबसूरती नैनीताल से कम नहीं है।

वहीं यहां से 23 किलोमीटर दूर सात ताल, 12 किलोमीटर की दूरी पर खुरपा ताल और नकुचिया ताल है। इन नौ तालों को साथ देखने का नजरा ही अलग होता है। साथ ही पहाड़ों के बीच इन खूबसूरत तालों के आसपास चहचाहती सुदंर सुंदर चिंडियां भी देखने को मिलती है तो आपको प्रकृति के ओर भी करीब ले जाती है।

नैनीताल में घूमने लायक और जगहें – More Best Places to Visit Nainital

  • नैनी झील

इस जगह की जान है नैनी झील जो की बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है। इस झील का पानी हमेशा आपको हरा और एकदम शांत दिखाई देगा। नैनी झील में आप बोटिंग का पूरा मजा ले सकते हैं। झील के किनारे शांति से बैठकर मनमोहक दृश्यों को देखना अपने आप में अद्भुत होता है। आपको नैनीताल में इस झील पर जरूर जाना चहिये।

  • इको केव

यहाँ पर एक जगह इको केव जहाँ पर बहुत सारे गुफाएं हैं। प्राचीन इतिहास की कई सारी चीजे अपने अंदर समेटे हुए हैं। इनके अंदर जाने पर आपको लगता है जैसे किसी अलग दुनिया में आप आ गए हो। सबसे ख़ास बात है की मौसम कोई सा भी हो ये गुफाएं हमेशा ठंडी रहती है। इस जगह आपको एक बार घूमना चहिये।

  • राज भवन

एक भव्य भवन जो की पुराने कल्चर के हिसाब से बना है। यह उत्तराखंड के गवर्नर का निवास है। देश के कुछ ही गवर्नर हाउस है जो आमजनता के लिए खुले होते हैं और ये उनमे से एक है। 220 एकड़ में फैले इस गवर्नर हाउस को देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं। विशाला भवन और उसके चारो तरफ बड़ा मैदान और हरियाली देखकर आपका मन खुश हो जाएगा। आपको एक बार नैनीताल की इस जगह जरूर जाना चहिये।

  • नैना देवी मंदिर

नैनी झील के पास स्थित नानिना देवी का मंदिर इस जगह की एतिहासिक दरोहर है। कहते हैं इसी मंदिर के नाम पर यहाँ का नाम नैनीताल रखा गया। झील के किनारे बसे अद्भुत मंदिर और उसमे की गई कलाकृतियाँ बहुत आकर्षक है। आपको एक बार नैना माता के दर्शन करने चहिये।

  • हनुमान गरही

नैनीताल की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक हैं ये जगह। इसकी स्थापना नीम किरोली बाबा ने की थी जो की एक दैवीय शक्ति से युक्त थे। यह एक हनुमान मंदिर है जो की 1951 फिट ऊँची चोटी पर स्थित है। यहाँ से एक अद्भुत नजारा आपको दिखाई देता है। इसके साथ ही आपको एक बेहतर जगह भी घूमने को मिलती है। नैनीताल जा रहे हैं तो इस जगह जरूर जाएँ।

  • वेधशाला

यह देश की अबसे बेहतर वेधशालाओ में से एक है। नैनीताल की वेधशाला में जाकर आप आसमान में होने वाली हर एक छोटी बड़ी घटना को आसानी से देख सकते हैं। इसकी सबसे ख़ास बात है की यह बहुत पुरानी है और उतनी ही नई तकनीको वाली। आपको इस जगह जरूर घूमने जाना चहिये।

  • स्नो व्यू

नैनीताल से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित इस जगह का नजारा तो देखते ही बनता है। यह जगह उंचाई पर स्थित है और आपको भव्य नजारे का दर्शन करवाती है। सूरज का उगना और उसका अस्त होना शायद ही यहाँ से बढ़िया कहीं दिखाई देता हो। आपको इस जगह एक बार जरूर घूमकर आना चहिये।

  • मॉल रोड

यह नैनी झील के किनारे चलने वाली एक सड़क है। एक चौड़ी सड़क जिसे मॉल रोड कहा जाता है। यहाँ की सबसे खास बात है की आपको खाने पीने की सभी सुविधाएँ मिल जाएगी। यह शहर के दो छोरो को आपस में जोडती है। नैनीताल में इस जगह जरूर जाना चहिये।

नैनीताल जाने का सही समय – Best Time to Visit Nainital

नैनीताल प्रकृतिक खूबसूरती का अद्भुत उदाहरण है हालांकि कभी – कभी प्रकृति कहर भी ढहाती है जैसा कि यहां हर साल बरसात के मौसम में देखने को मिलता है। नैनीताल में हर साल भारी बारिश होती है। जिसके कारण भूस्खलन भी होता है इसलिए जहां तक हो सकें बरसात में नैनीताल में जाने से बचें।

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Nowadays, our society facing lots of social, political problems only because of lack of information and knowledge as a writer giving the right information and to aware people about their rights laws and social issues is my first responsibility... I always try to aware people and informed them ...my all write-ups only based on media reports, books and other secondary and primary source of information .......

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