भारतीय रुपये की कुछ रोचक अनसुनी बातें | Interesting Facts about Indian Currency

हर देश का अपना चलन होता है। उसी तरह भारत का भी एक चलन है जिसे भारतीय रूपया कहा जाता है। भारतीय रुपये के बारे में बहुत सारी जानकारी है जो बहुत लोगो को पता नहीं। भारतीय रुपये की ऐसी ही कुछ रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी – Interesting Facts about Indian Currency निचे दी गयी है।

Interesting Facts about Indian Currency

भारतीय रुपये की कुछ रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी – Interesting Facts about Indian Currency

कागज के नोट सबसे पहले 18 वी शताब्दी मे जारी किये गए थे। बैंक ऑफ़ हिंदुस्तान, जनरल बैंक ऑफ़ बंगाल और बंगाल बैंक ने पहली बार कागज के नोट जारी
किये थे।

भारत सरकार ने पहली बार विक्टोरिया पोर्ट्रेट सीरीज वाले बैंकनोट जारी किये थे। मगर कुछ कारणवश सुरक्षितता को ध्यान में रखते हुए इन सीरीज के नोटों को बिच में ही बंद कारण पड़ा था और सन 1867 में उनकी जगह पर अंडरप्रिंट सीरीज जारी की गयी।

अगर आपके पास 51 % फटा नोट है तो आप इस नोट को बैंक में नए नोट से बदल सकते हैं।

हमारे देश में एक रुपये की नोट और सिक्के पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर रहते क्यों की इसकी छपाई करने का अधिकार केवल भारत सरकार को है। मगर एक रूपए को छोडके अन्य सभी नोट छापने का अधिकार केवल भारतीय रिज़र्व बैंक के पास है।

लगभग सभी लोग यही समझते हैं कि नोट कागज के होते हैं लेकिन असल में ये बात सही नहीं है नोट कॉटन(Cotton) और कॉटन रग(Cotton Rag) के मिश्रण का बना होता है, यही कारण है की नोट भीगने पर गलता नहीं है।

बैंकनोट पर कुल 17 भाषाए दिखाई देती है जिसमे की 15 भाषाए नोट के भाषा पैनल में ही दिखाई देती है और नोट के बिलकुल बीचोबीच हिंदी मुख्य रूप से दिखती है और नोट के पीछे की बाजु में इंग्लिश भाषा नजर आती है।

आज़ादी के बाद सिक्के तांबे के बनते थे, उसके बाद 1964 में एल्युमिनियम के और 1988 में स्टेनलेस स्टील के बनने शुरू हुए।

नोटों पर Serial Number इसलिए डाला जाता हैं ताकि रिज़र्व बैंक को पता रहे कि इस समय Market में कितनी currency हैं।

According to RBI, भारत हर साल 2000 करोड़ currency के नोट छापता हैं।

जो लोग अंधे होते है उन्हें नोट को पहचानने में किसी तकलीफ का सामने ना करना पड़े इसके लिए बैंक नोट के बाये की दिशा में अलग अलग तरह की सतह से ऊपर थोड़ी सी प्रिंट बनायीं गयी है जिसकी वजह से जल्दी में समझ आता है की कौनसी सी नोट कितने रुपये की है। 1000 रूपये की नोट पर डायमंड, 500 की नोट पर वर्तुलाकार चिन्ह, 100 रुपये की नोट पर त्रिकोण, 50 रुपये की नोट पर चौकोन, 20 रुपये की नोट पर आयत का चिन्ह देखने को मिलता है। लेकिन 10 रूपये की नोट पर किसी भी तरह का कोई भी चिन्ह दिखाई नहीं देता।

आपने कभी इस बात पर गौर किया है, की नोट पर साल के निचे अलग अलग तरह के चिन्ह दिखाई देते है। सभी चिन्ह दर्शाते है की उन्हें कहा से लिया गया।
सुरक्षा कारणों की वजय से आपको नोट के serial नंबर में I J O X Y Z अक्षर नहीं मिलेंगे।

अभी जो बैंक नोट जारी किये जाते है उन्हें महात्मा गांधी सीरीज के नोट कहा जाता है। 1996 में महात्मा गांधी सीरीज के बैंक नोट पहली बार जारी किये गए थे।

आरबीआई ने सबसे बड़ी 10,000 रुपये की नोट पहली बार 1938 में जारी की थी और फिर से 1954 में भी बनाई थी। मगर इन बड़ी नोटों पर 1946 और 1978 में पाबन्दी लगाई गयी थी।

केंद्र सरकार जीन नोटों को बनाने को कहता उन सभी नोटों को भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है उसमे फिर 5,000 और 10,000 रुपये के नोट शामिल है। मगर आर बी आई एक्ट 1934 में एक नया कानून बनाया गया जिसके अनुसार 10,000 के ऊपर की कोई भी नोट जारी नहीं की जा सकती।

औपचारिक रूप से भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना सन 1935 में की गयी और उसे भारत सरकार के सभी नोट जारी करने के अधिकार दिए गए। आरबीआई ने पहली बार छटा किंग जॉर्ज पोर्ट्रेट वाली पाच रुपये की नोट जारी की थी।

इतिहास में आरबीआई ने सबसे बड़ी 10,000 रूपये की नोट जारी की थी। 1000 रूपये की नोट और 10,000 रुपये की नोट 1938 और 1946 में दौरान इस्तेमाल की जाती थी मगर बाद में इनपर बंदी लगाई गयी।

जब देश को आजादी मिली थी तो उस वक्त रुपये को आने में गिना जाता था। उस समय 16 आने को मिलाकर 1 रुपया बनता था। एक आने को भी और 4 पैसे और 12 पाई में गिना जाता था। अभी रुपये को पैसे में गिना जाता और 100 पैसे मिलाने के बाद 1 रुपया बनता है। भारतीय रुपये का दशमलवकरण सन 1947 में किया गया। इसमे भारतीय रुपये को 100 ‘नया पैसा’ में गिनने की शुरुवात की गयी। मगर 1964 में इस ‘नया’ शब्द का इस्तेमाल करना बंद कर दिया गया।

आजादी मिलने के बाद में पहली बार एक रुपये के नोट जारी किये गए थे।

लेकिन सन 1954 में 1,000 रूपये, 5,000 और 10,000 की नोट को फिर से व्यवहार में लाया गया। मगर बाद में फिर से 1978 में इनपर पाबन्दी लगाई गयी।

2010 मे पहली बार 75 रुपये, 100 रूपये और 1000 रूपये के सिक्के बनाये गए लेकिन वह सब सिक्के स्मारक सिक्के के रूप में बनाये गए। उन्हें इसलिए बनाया गया था क्यों की उस साल भारतीय रिज़र्व बैंक के 75 साल पुरे हुए थे साथ ही रवीन्द्रनाथ टागोर के 100 साल और ब्रिहदेश्वर मंदिर को पुरे 1000 हुए थे।

2010 में भारतीय रूपया को यह चिन्ह दिया गया। इस चिन्ह को बनाने का सारा श्रेय डी। उदय कुमार को ही दिया जाता है। इस चिन्ह को देवनागरी वर्ण “र” से बनाया गया है। इस चिन्ह को बनाने के लिए लैटिन वर्ण “आर” और देवनागरी वर्ण “र” का इस्तेमाल किया गया तब जाकर भारतीय रूपए को यह चिन्ह मिल सका। इस चिन्ह में जो समानांतर लाइन दिखाई गयी वह भारतीय तिरंगे को दर्शाने का काम करती है।

कॉइनेज एक्ट 2011 के तहत 1000 रुपये तक के सिक्के जारी किये जा सकते है।

1 पैसा, 2 पैसे, 3 पैसे, 5 पैसे, 10 पैसे, 20 पैसे और 25 पैसे को 30 जून 2011 को पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

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