“इरा सिंघल” लाखों लोगों के लिए हैं एक प्रेरणा!

Ira Singhal Biography

”मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है ”

इन्हीं पंक्तियों को चरितार्थ करती हैं आईएएस इरा सिंघल। इरा सिंघल ने अपने  कड़ी मेहनत, सच्ची लगन और ईमानदारी के बल पर सफलता का ये मुकाम हासिल किया है और आज वे हर किसी के लिए एक मिसाल बनी हुई हैं।

Ira Singhal

“इरा सिंघल” लाखों लोगों के लिए हैं एक प्रेरणा – Ira Singhal Biography

इरा सिंघल ने अपने जज्बे और कठोर दृढ़संकल्प के आगे कभी अपनी दिव्यांगता को आड़े नहीं आने दिया। उन्होनें अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बनाया और वे सफलता की सीढ़ी चढ़ती गईं।

वैसे तो IAS बनने का ख्वाब कई लोग देखते हैं लेकिन कुछ चुनिंदा लोग ही होते हैं, जो अपने ख्वाबों को हकीकत में बदल पाते हैं। उन्हीं कुछ चुनिंदा लोगों में एक हैं इरा सिंघल, जिन्होनें न सिर्फ अपने सपनों को हककीत में बदला बल्कि बाकी लोगों के लिए भी एक उदाहरण पेश किया।

यहां तक पहुंच पाना इरा के लिए इतना आसान नहीं था। उनकी जिंदगी में एक के बाद एक कठोर संघर्ष आए, लेकिन उन्होनें कभी हिम्मत नहीं हारी। यहां तक कि तीन बार IRS में सेलेक्शन होने के बाद भी उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई फिर भी इरा के अपने सपनों को पूरी करने जिद ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी और निरंतर अपने लक्ष्य को पाने के प्रयास में लगी रहीं।

इरा सिंघल आज हर किसी के लिए मिसाल है। UPSC सिविल सर्विस एग्‍जाम 2014 की टॉपर इरा सिंघल की कहानी से हर कोई प्रेरणा ले सकता है। शारीरिक रूप से विकलांग होने के बावजूद वो UPSC की जनरल कैटगरी में टॉप करने वाली देश की पहली प्रतिभागी हैं।

UPSC Civil Service की परीक्षा में इरा ने अपनी प्रतिभा का बखूबी प्रदर्शन किया और जनरल केटेगरी में उन्होनें UPSC में सबसे ज्यादा अंक हासिल किए। इरा सिंघल, साल 2014 में आयोजित सिविल सर्विस की परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाली पहली विकलांग महिला है जिन्होंने विपरीत परिस्थियों में भी आईएएस की परीक्षा में सफलता हासिल की।

और इरा ने उन लोगो के लिए मिसाल कायम की जो अपनी कमियों का अपनी कमजोरी मान लेते हैं और अपने हुनर को साबित नहीं कर पाते।

इरा सिंघल का करिअर – Ira Singhal Career

IRS में चयन होने के बाद भी नहीं मिली नौकरी

यूं तो इरा इतनी प्रतिभाली थी कि इन्हें पहले ही कई प्राइवेट कंपनी में नौकरी पहले ही मिल चुकी थी। लेकिन शायद इरा का मकसद नौकरी कर सिर्फ पैसा कमाना नहीं था। दरअसल वे बचपन से कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे दूसरों की जिंदगी में फर्क पड़े।

इसलिए उन्होनें आईएएस ऑफिसर बनने की ठानी। इसी मकसद से उन्होनें साल 2010 में  सिविल सर्विस की परीक्षा भी दी, और तब उन्‍हें 815वीं रैंक मिली थी, रैंक के हिसाब से उनका सेलेक्शन आईआरएस में हुआ, लेकिन उन्हें पोस्टिंग नहीं दी गई।

वहीं जब उन्होनें इसके बारे में जानने की कोशिश की तो पाया कि उनकी विकलांगता की वजह से उन्हें सर्विस नहीं दी गई। जरा आप सोचिए, जिसने यहां तक पहुंचने में कड़ी मेहनत की हो लेकिन उसे उसका हक ही छीन लिया जाए तो कितनी पीड़ा होती होगी।

वहीं दर्दभरी पीड़ा से गुजरी हैं इरा सिंघल जो पहले से ही विकलांगता की वजह से कई मुसीबतों का सामना कर रही थी, लेकिन उनका दर्द तब और भी ज्यादा बढ़ गया जब सरकारी विभाग ने ही उनके साथ भेदभाव किया।

दरअसल शारीरिक रूप से उन्हें विकलांग बताकर डीओपीटी ने उनकी नियुक्ति में अड़ंगा लगा दिया था और ये सिर्फ उनके साथ ही नहीं हुआ था, बल्कि कई और भी लोग ऐसे थे जिन्हें भी ये सर्विस नहीं दी गई। जिसके बाद इरा सिंघल ने अपने हक के लिए और दूसरों को भी इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ी और सेंट्रल एडमिनिस्‍ट्रेटिव ट्रिब्‍यूनल में केस दायर किया।

जिसके बाद साल 2014 में वह केस जीत गईं और फिर उन्हें हैदराबाद में पोस्टिंग मिली। आपको बता दें कि इरा की हक की लड़ाई में उनके पिता राजेंद्र सिंघल ने नार्थ ब्लॉक से लेकर कैट में मुकदमा करने तक काफी संघर्ष किया। इसके बाद कैट के आदेश पर उन्हें आईआरएस की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया।

वहीं इस लड़ाई के दौरान उन्होनें अपने समय को बर्बाद नहीं किया और अपनी रैंक सुधारने के लिए बार-बार सिविल सर्विस के लिए परीक्षाएं देती रहीं। उन्होनें इस दौरान तीन बार परीक्षाएं दी और तीनों बार उनका चयन आईआरएस में हुआ।

आखिरकार अपने चौथे प्रयास में उन्‍होंने सिविल सर्विस एग्‍जाम की जनरल कैटेगरी में टॉप किया। जिससे उन्होनें साबित कर दिखाया कि वो भले ही शारीरिक तौर पर कमजोर हो, लेकिन मानसिक रूप से वे सामान्य लोगों से कहीं ज्यादा शक्तिशाली हैं।

स्कोलियोसिस से पीड़ित हैं आईएएस इरा

IAS इरा सिंघल, आज जो सबसे लिए एक प्रेरणा बनी हुई है। आपको बता दें वे स्कोलियोसिस से पीड़ित हैं, जिसकी वजह से उनकी रीढ़ की हड्डी प्रभावित है। इसके साथ ही इरा के बाजू भी ढंग से काम नहीं करते हैं। लेकिन इरा जी की दिव्यांगता सफलता के कभी आड़े नहीं आयी।

इसके साथ ही इरा के माता-पिता राजेंद्र सिंघल और अनीता सिंघल ने कभी भी उसकी कामयाबी को लेकर कभी उम्मीद नहीं छोड़ी और हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कैडबरी और कोका कोला कंपनी में भी काम कर चुकी हैं आईएएस इरा

इरा सिंघल बचपन से ही एक प्रतिभाशाली और पढ़ाई में अव्वल रहने वाली छात्रा थी। मेरठ में जन्मी इरा ने अपनी शुरुआती शिक्षा मेरठ के सोफिया गर्ल्स स्कूल में हुई है, उधर भी वे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हीं।

यही नहीं दिल्ली के लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल में भी इरा ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली में धौलाकुआं के आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 2006 में नेताजी सुभाष इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और यहां पर पहले नंबर पर बनी रहीं। बाद में उन्होनें 2008 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से एमबीए किया।

आपको बता दें कि इरा सिंघल की हिन्दी, इंग्लिश के अलावा स्पेनिश लैंग्वेज भी अच्छी कमांड है। पढ़ाई पूरी करने के बाद इरा ने स्‍पेनिश टीचर के तौर पर एक साल नौकरी भी की है।

इसके अलावा वह 2008 से 2010 तक कैडबरी इंडिया लिमिटेड में कस्टम डिवेलपमेंट मैनेजर के तौर पर भी काम कर चुकी है। इसके अलावा कोका कोला कंपनी में भी काम कर चुकी हैं। वर्तमान में इरा कस्‍टम एंड एक्‍साइज डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्‍यू सर्विस में बतौर असिस्‍टेंट कमिश्‍नर काम कर रही हैं।

दूसरों की सहायता करना है इरा का इरादा

आपको बता दें कि इरा सिंघल बचपन से ही मेडिकल फील्ड में जाना चाहती थी ताकि वे दूसरों के काम आ सके लेकिन उनके पिता को लगता था कि वे खुद शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं है जिससे उन्हें मरीजों की सर्जरी करने में दिक्कत होगी। इसलिए वे डॉक्टर तो नहीं बन सकी लेकिन वे अपने सपने को पूरा करने के लिए आईएएस बन गईं।

इरा सिंघल महिलाओं, बच्चों और शारीरिक रूप से असक्षम लोगों के कल्याण के लिए काम करना चाहती है और उनकी मद्द करना चाहती है। इसके साथ ही वे हमेशा दूसरों की मद्द के लिए तैयार रहती हैं।

तमाम संघर्षों के बाद इरा सिंघल ने अपने मजबूत इरादों के बल पर सफलता के इस मुकाम को हासिल किया है और यह भी साबित किया है कि अगर कोई इंसान किसी चीज को करने की ठान ले तो दुनिया की कोई भी चीज उसे सफल होने से नहीं रोक सकती है।

इरा जी की कहानी वाकई प्रेरणात्मक और सराहनीय है। जिस पर आज हर भारतीय को गर्व है। इरा का मानना है कि आपसे बेहतर आपकी प्रतिभा को कोई और नहीं पहचान सकता इसलिए सफल होने के लिए खुद के लिए खुद ही रास्ता बनाओ और अपनी मंजिल खुद तय करो और यही UPSC टॉपर इरा का सक्सेज मंत्र भी हैं।

वहीं आप भी इरा की तरह इस सक्सेज मंत्र को अपनाकर सफल हो सकते हैं और खुद को दुनिया के सामने साबित कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको भी इरा की तरह कुछ करना का जज्बा और जुनून की जरूरत होगी।

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