सबसे मूल्यवान हीरा “कोहिनूर” | Kohinoor Diamond History In Hindi

Kohinoor Diamond History In Hindi

जब हीरे की बात की जाए तो दुनिया के सबसे प्राचीन और मूल्यवान कोहिनूर हीरे – Kohinoor Diamond को कोई कैसे भूल सकता है। वास्तव में इसे कोह-ए-नूर कहा जाता है, जो एक पर्शियन शब्द है जिसका अर्थ रोशनियों के पहाड़ से है।

कोहिनूर हीरा (Kohinoor Hira), दुनिया का सबसे अधिक प्रसिद्ध बेशकीमती हीरा है, जिस पर कई देश अपना हक जता चुके हैं। हालांकि वर्तमान में यह हीरा ब्रिटेन के राजसी परिवार के पास है। इतिहासकारों के मुताबिक यह हीरा भारत के आंध्रप्रदेश के गोलकुंडा खनन क्षेत्र से प्राप्त हुआ है।

यही नहीं इस हीरे के श्रापित होने का अंधविश्वास भी जुड़ा है। यदि आप इस हीरे के बारे में और कुछ जानना चाहते है तो हम यहाँ आपको कोहिनूर हीरे के बारे में बताने जा रहे है –

कोहिनूर हीरे का इतिहास और इससे जुड़ कुछ दिलचस्प एवं रोचक तथ्य   – Kohinoor Diamond History In Hindi

Kohinoor Diamond

कोहिनूर हीरे की जानकारी एक नजर में – Kohinoor Diamond Information

हीरे का मूल भार (Kohinoor Diamond Weight)793 कैरेट
वर्तमान में कहां है (Where Is Kohinoor Diamond Now)ब्रिटेन के राजपरिवार के पास
कोहिनूर का अर्थ (Kohinoor Meaning)‘रोशनी का पहाड़’, प्रकाश का पर्वत या रोश्नी की श्रंखला
सर्वप्रथम कहां मिला था (Where Was Kohinoor Diamond Found)आंध्रप्रेदश के गोलकुंडा क्षेत्र में मिला था।

कोहिनूर हीरे का रोचक इतिहास – Kohinoor Hira Ka Itihas

दुनिया के इस प्रसिद्ध रत्न कोहिनूर हीरे का इतिहास 5 हजार से भी ज्यादा सालों से पुराना है। कोहिनूर का अर्थ ”रोश्नी के पहाड़” से है। इस बेशकीमती हीरे को कई देशों ने अपना होने का दावा किया है, हालांकि, वर्तमान में कोहिनूर हीरा ब्रिटेन के एक राजपरिवार के पास है, जिसे लंदन के टेम्स नदी के किनारे बने इस विशाल किले में सुरक्षित रखा गया है।

महाभारत के काल के इस सबसे प्रसिद्ध और बेशकीमती हीरे का उल्लेख सबसे पहले संस्कृत भाषा में किया गया था। इसे सर्वप्रथम ‘स्यामंतक’ के नाम से जाना गया था। हालांकि, कुछ विद्धान स्यामंतक और कोहिनूर हीरे को एक-दूसरे से अलग बताते हैं तो कई इतिहासकार स्यामंतक को कोहिनूर के सामान बताते हैं, इस बारे में विद्धान एकमत नहीं थे –

सर्वप्रथम मालवा के सम्राट  के पास था कोहिनूर – Kohinoor Diamond Story

करीब 1304 ईसवी तक इस हीरे को मालवा के सम्राट की देखरेख में सुरक्षित रखा गया। इतिहासकारों की माने तो इस प्रसिद्ध कोहिनूर हीरे को समरकंद के नगर में करीब 300 साल तक सुरक्षित रखा गया था।

कोहिनूर को बताया गया था श्रापित – Kohinoor Diamond Curse

1306 ईसवी के दौरान इस बेशकीमती हीरे को लेकर एक बेहद दिलचस्प एवं अंधविश्वास से भरा कथन प्रसिद्ध था, जिसके अनुसार, अगर कोई भी आदमी इस सबसे मशहूर हीरे को पहनेगा, तो उसके पास राजपाठ और सभी सुख-सुविधाएं तो रहेंगी, लेकिन वो कभी भी खुश नहीं रह पाएगा, अर्थात कई तरह के दोषों एवं दुखों स घिर जाएगा।

ऐसा माना जाता था कि, इस प्रसिद्ध हीरे को सिर्फ कोई महिला या फिर देवता ही धारण कर सकते हैं।

अलाउद्दीन खिलजी के पास भी रहा कोहिनूर:

14वीं शताब्दी में जब दिल्ली का सम्राट अलाउद्दीन खिलजी था, उस समय यह हीरा मगुल सम्राट अलाउद्दीन खिलजी के पास भी रहा।

‘बाबरनामा’ में कोहिनूर का जिक्र:

दुनिया के इस सबसे खूबसूरत, विशाल एवं बेशकीमती हीरे का जिक्र सर्वप्रथम मुगल वंश के संस्थापक बाबर ने अपने अपने लेख ”बाबरनामा”  में किया था। उन्होंने इसके माध्यम से बताया था कि उन्हें यह बेशकीमती हीरा उनके बेटे मुगल सम्राट हुमायूं ने दिया था।

हुमायूं ने पानीपत की लड़ाई में लोदी वंश के शासक इब्राहिम को हरा दिया था, जिसके बाद ग्वालियर के सम्राट ने हुंमायूं को कोहिनूर हीरा गिफ्ट किया था, और फिर हुमायूं ने यह हीरा अपने पिता बाबर  को उपहार में दे दिया था। वहीं इसे ”बाबर का हीरा” बताया गया था।

शाहजहां के मयूर सिंहासन में जड़ा था कोहिनूर:

17वीं सदी में मुगल सम्राट बाबर के पड़पोते, शाहजहां ने  कई कीमती रत्नों और जवाहरतों से सजा ‘मयूर सिंहासन’ बनवाया था, जिसमें कोहिनूर हीरे को भी लगाया गया था। इस सिंहासन को देखने विश्व के अलग-अलग कोने से जौहरी आते थे और इसकी प्रशंसा करते थे।

मुगल सम्राट औरंगेजेब ने भी की थी कोहिनूर की सुरक्षा:

इसके बाद शाहजहां के उत्तराधिकारी एवं बाबर के वंशज औरंगेजब ने दुनिया के इस प्राचीन एवं बेशकीमती हीरे की सुरक्षा की थी, हालांकि, उनकी देखरेख में यह प्रसिद्ध हीरा 793 कैरेट की जगह सिर्फ 186 कैरेट का रह गया था। फिर औरंगजेब ने इस मशहूर हीरे को अपने पोते मुहम्मद शाह को सौंप दिया था।

परिसया के महाराजा नादिर शाह का कोहिनूर पर कब्जा:

इसके बाद करीब 1739 में जब परिसया के महाराजा नादिर शाह अपनी भारत यात्रा पर आए थे। वे मुगल सुल्तान मुहम्मद शाह के राज्य पर अपना अधिकार स्थापित करना चाहते थे। इस उद्देश्य के साथ उन्होंने महमूद पर हमला कर उन्हें पराजित कर दिया, और फिर मुगल सम्राट मुहम्मद की संपत्ति पर अपना अधिकार जमा लिया एवं इस प्रसिद्ध हीरे को भी अपने कब्जे में ले लिया।

इसके बाद नादिह शाह ने दुनिया के इस बेशकीमती हीरे को कोहिनूर नाम दिया था। हालांकि, इस प्रसिद्ध हीरे को प्राप्त करने के बाद नादिर शाह ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह सके, 1747 ईसवी में  राजनैतिक लड़ाई के चलते  नादिर शाह की हत्या करवा दी गई।

जिसके बाद जनरल अहमद शाह दुर्रानी ने इस मशहूर हीरे को अपने अधीन ले लिया। फिर 1813 ईसवी में अहमद शाह के वंशज शाह शुजा दुर्रानी के पास यह बेशकीमती कोहिनूर हीरा आ गया, जिसके बाद उन्होंने इस हीरे को सिक्ख समुदाय के संस्थापक राजा रंजीत सिंह को दे दिया था।

दरअसल, इस कीमती कोहिनूर हीरे के बदले में राजा रंजीत सिंह ने शाह शुजा को अफगानिस्तान की राजगद्दी वापस लाने में मद्द की थी।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का कोहिनूर पर कब्जा – British East India Company captured Kohinoor

1849 ईसवी में द्धितीय एंग्लो-सिक्ख युद्ध में ब्रिटिश सेना ने  राजा रंजीत सिंह को हरा दिया था, और राजा रंजीत सिंह के राज्य और पूरी संपत्ति पर अपना अधिकार जमा लिया था। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने लाहौर में इस बेशकीमती कोहिनूर हीरे को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के राजकोष में स्थानांतरित कर दिया गया था।

इसके बाद दुनिया के इस सबसे प्राचीन और बेशकीमती हीरे को ब्रिटेन भेज दिया गया। कुछ इतिहासकारों की माने तो इस दौरान दुनिया के इस सबसे बड़े हीरे की रक्षा करने वालों ने इसे खो दिया था, हालांकि कुछ समय बाद इस हीरे को फिर से एक दास द्धारा लौटाए जाने की बात कही जाती है। फिर बाद में 1850 ईसवी में इस चमचमाते हुए हीरे को इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया को दे दिया गया था।

महारानी विक्टोरिया ने कोहिनूर को दिया नया स्वरुप:

इसके बाद विश्व के इस विशाल कोहिनूर हीरे को क्रिस्टल पैलेस में प्रदर्शित किया गया, उस समय यह करीब 186 कैरेट का बताया जाता है। जिस समय कोहिनूर को प्रदर्शित किया गया था, तब इसकी चमक उस दौर के अन्य रत्नों के मुकाबले काफी फीकी दिखी थी।

जिसे देखकर काफी निराशा हुई, लेकिन फिर इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया ने इस हीरे को एक नया आकार एवं स्वरुप देने का फैसला लिया।

विश्व के इस बेशकीमती कोहिनूर हीरे को 1852 ईसवी में डच के जौहरी मिस्टर कैंटॉर को दिया गया, जिसके बाद उन्होंने इसे फिर से उतना चमकदार और आर्कषित बनाने के लिए इस हीरे को ओवल शेप में काटकर 105.6 कैरेट का कर दिया, यह हीरा 3.6cm*3.2cm*1.3cm के आकार का कर दिया गया।

आपको बता दें कि इस दौरान इस हीरे को सबसे पहली बार काटा गया था, इससे पहले कभी इस हीरे को नहीं काटा गया था। इसके बाद इस कोहिनूर हीरे को इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के ताज में जड़ दिया गया।  यह ताज ब्रिटेन की महारानियों द्धारा पहना जाता है।

आपको बता दें कि ही इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के बाद इस कोहिनूर से जड़े ताज को महारानी एलेक्जेंडर ( एडवर्ड VII की पत्नी ) एवं उसके बाद महारानी मेरी और एलिजाबेथ द्धारा पहना गया था।

वर्तमान में कहां है कोहिनूर हीरा – Kohinoor Hira Kaha Hai

वर्तमान में दुनिया के यह सबसे मशहूर एवं प्राचीन हीरा ब्रिंट के राजसी परिवार के पास है, जो कि इसकी अमूल्य धरोहर है। कोहिनूर जड़े ताज को लंदन के टेम्स नदी के किनारे बने एक विशाल किले में सुरक्षित रखा गया है।

आपको बता दें कि विशाल किले का निर्माण 1078 में विलियम द कॉकरर ने करवाया था, वहीं अब यह राजसी परिवार तो इस किले में नहीं रहता, लेकिन प्राचीन और बेशकीमती रत्न, जवाहरात एवं कोहिनूर हीरा इसी में रखा गया है।

भारत ने ब्रिटेन से की थी कोहिनूर वापस करने की मांग – India Demands Britain To Return Kohinoor Diamond 15 अगस्त, 1947 में देश को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने के बाद से ही भारत ने इस बेशकीमती हीरे को ब्रिटेन से वापस  लाने की कवायद शुरु कर दी थी, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने कोहिनूर पर अपना अधिकार बताते हुए हीरा देने से इंकार कर दिया था।

सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान ने भी कोहिनूर पर अपना हक जमाया था, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने पाकिस्तान की यह दलील सिरे से खारिज खारिज कर दी।

कोहिनूर से जुड़े कुछ दिलचस्प एवं रोचक तथ्य – Kohinoor Diamond Facts

  • कोहिनूर, विश्व का सबसे मशहूर एवं प्राचीन हीरा है. यह हीरा काकतिया वंश के शासनकाल के दौरान भारत के  आंध्र प्रदेश राज्य  के गोलकोंडा ख़नन क्षेत्र से प्राप्त हुआ था।
  • विश्व का यह बेशकीमती हीरा मूल रुप से 793 कैरेट का था, लेकिन अब यह सिर्फ 105.6 कैरेट का रह गया है, जबकि इसका वजन सिर्फ 21.6 ग्राम है।
  • कोहिनूर के बारे में पहली जानकारी 1304 ईसवी के आसपास मिली थी, जिसके मुताबिक यह हीरा तब मालवा के सम्राट महलाक देव के अधीन था।
  • दुनिया के इस सबसे मशहूर हीरे से अंधविश्वास भी जुड़ा हुआ है। एक हिन्दू लेख के मुताबिक, कोई भी इस बेशकीमती हीरे को धारण करने वाला पुरुष विशाल राज्य, धन, दौलत, संपत्ति तो प्राप्त करता है, लेकिन कभी भी खुश नहीं रह पाता है। जबकि अगर कोई महिला इस हीरे को धारण करती है तो कोई भी कुप्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • 1852 में इंगलैंड की महारानी विक्टोरिया ने हीरे की चमक को कम होते देख इसे ओवल साइट में कटवा दिया था, जिसके बाद यह 108.93 कैरेट में कट गया। इसके बाद यह महारानी विक्टोरिया के ताज पर जड़ दिया गया था।
  • रानी विक्टोरिया की मौत के बाद कोहिनूर को एडवर्ड की सातवीं पत्नी क्वीन एजेक्जेंड्रा के मुकुट में स्थापित किया गया था। इसके बाद इस हीरे को 1911 में क्वीन मैरी के मुकुट में लगा दिया था फिर इसके बाद कोहिनूर हीरा को क्वीन एलिजाबेथ के मुकुट में जड़ दिया गया था।
  • देश को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद सन् 1953 में भारत ने ब्रिटेन से कोहिनूर को वापस देने की मांग की, लेकिन इंग्लैंड ने इसे देने से मना कर दिया। इसके साथ ही पाकिस्तान ने भी इस बेशकीमती हीरे पर अपना हक जमाया था, लेकिन यह हीरा अभी भी ब्रिटेन में ही सुरक्षित रखा गया है।

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