कमल मंदिर रोचक इतिहास | Lotus Temple History In Hindi

Lotus Temple History In Hindi

भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित लोटस टेम्पल अपनी अद्भुत वास्तुकला और अद्धितीय शिल्पकारी के लिए यहां के प्रमुख आर्कषण केन्द्रों में से एक है।

इस मंदिर को भारतीय उपमहाद्धीप का मदर टेम्पल भी कहा जाता है। वहीं यह भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से भी एक है। दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक इस मंदिर की खूबसूरती को देखने आते हैं। कमल के फूल के आकार में बना यह लोटस टेम्पल अपनी खूबसूरती के लिए बहुत सारे आर्किटेक्चरल अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।

साल 1986 में बने इस खूबसूरत टैम्पल के दर्शन करने के लिए किसी भी धर्म का व्यक्ति आ सकता है। यह मंदिर सुख, शांति और पवित्रता का प्रतीक भी माना जाता है। आपको बता दें कि लोटस टेम्पल को कनाडा के पर्शियन आर्किटेक्ट फरिबोर्ज सहबा ने डिजाइन किया था। वहीं इस मंदिर के परिसर में बना सुंदर फूलों का बगीचा भी है।

कमल मंदिर एक बहाई उपासना मंदिर है, जहां न कोई भगवान की प्रतिमा रखी गई है, और ना ही इधर किसी तरह की पूजा-अर्चना होती है, यहां लोग सिर्फ अपनी मन की शांति के लिए आते हैं और घंटों बैठकर यहां की खूबसूरती का आनंद लेते हैं। आपको बता दें कि लोटस टेम्पल को विश्व के 7 बहाई मंदिरों में से आखिरी मंदिर माना जाता है। चलिए जानते हैं लोटस टेम्पल से जुड़ी कुछ ऐसे ही खास और दिलचस्प बातें –

कमल मंदिर रोचक इतिहास – Lotus Temple History In Hindi

Lotus Temple History In Hindi

लोटस टेम्पल के बारे में संक्षिप्त विवरण – Lotus Temple Information

कहां स्थित है लोटस टेम्पल (Kamal Mandir Kaha Hai) नई दिल्ली, भारत
कब हुआ निर्माण (When Built Lotus Temple) 24 दिसंबर, 1986
लोटस टेम्पल को किसने डिजाइन किया (Who Built Lotus Temple) कनाडा के पर्शियन आर्किटेक्ट फरिबोर्ज सहबा ने।

लोटस टेम्पल का इतिहास – Lotus Temple History

बहाई धर्म की आस्था से जुड़ा राजधानी दिल्ली के नेहरू प्लेस के पास स्थित लोटस टेम्पल का निर्माण बहाई धर्म के संस्थापक बहा उल्लाह ने करवाया था। आपको बता दें कि कमल के फूल के आकार की तरह बने इस लोटस टेम्पल का निर्माण काम नवंबर, 1986 में पूरा हुआ था, जिसका उद्घाटन 24 दिसंबर, 1986 को किया गया था, जबकि आम पब्लिक के लिए इस मंदिर को  नए साल पर 1 जनवरी 1987 को खोला गया है।

लोटस टेम्पल के निर्माण में करीब 10 साल का लंबा समय लग गया था। लोटस टेम्पल बहाई धर्म के दुनिया में स्थित 7 प्रमुख मंदिरों में से एक है। इसके अलावा बहाई धर्म के अन्य मंदिर कम्पाला, सिडनी, इल्लिनॉइस, फ्रैंकपर्ट, विलमेट, पनामा, अपिया में हैं। लोटस टेम्पल अपने अद्धितीय वास्तुशिल्प और अनूठी डिजाइन के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।

इस मंदिर को कनाडा में रहने वाले एक मशहूर पर्शियन वास्तुकार फरीबर्ज सहबा ने तैयार किया था। यह मंदिर भारत की सर्वधर्म समभाव की अनूठी संस्कृति को दर्शाता है, यह हर धर्म से जुड़े लोगों के लिए खुला हुआ है। यह भारत की आधुनिक वास्तुकला का एक नायाब नमूना है।

आधे खिले कमल के आकार में संगमरमर की करीब 27 बेहद सुंदर पंखुड़ियों से बने इस भव्य कमल मंदिर के निर्माण में करीब 1 करोड़ डॉलर की लागत आई थी। वहीं करीब 26 एकड़ जमीन में बना यह मंदिर की आर्कषक डिजाइन को देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं।

लोटस टेंपल की अद्भुत वास्तुकला एवं आर्कषक डिजाइन – Lotus Temple Architecture

एकता और शांति का प्रतीक माने जाने वाला दिल्ली का लोटस टेम्पल आधा खिला हुआ कमल के फूल की डिजाइन के रुप में बना हुआ है, जो कि देखने में बेहद आर्कषक और मनोरम लगता है। इसकी खूबसूरती की वजह से ही यह दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। इस टेंपल की वास्तुकला को आधुनिक वास्तुशिल्प का उत्कृष्ट नमूना भी माना जाता है। वहीं कमल की आकृति में इसे लोटस टेंपल कहा जाता है।

पार्शियन आर्किटेक्ट फरबर्ज सहबा द्धारा बनाए बहाई धर्म के इस प्रसिद्ध मंदिर में सभी धर्म के लोग शांति और सुकून प्राप्त करने के लिए यहां आते हैं। आपको बता दें कि भारतीय सुंदरता की मिसाल माने जाने वाले करीब 26 एकड़ के क्षेत्रफल में बना यह मंदिर आधे खिले हुए कमल के फूल की आकृति में संगममरमर की 27 पंखुड़ियों से बनाया गया है, जो कि 3 चक्रों में व्यवस्थित है और यह चारों तरफ से बेहद आर्कषित 9 दरवाजों से घिरा हुआ है।

आर्क के आकार में बने यह दरवाजे कोणाकार, बेलनाकार और सादे आकार में बने हुए हैं, जिसकी आर्कषक बनावट पर्यटकों का ध्यान अपनी तरफ खींचती है। इस मंदिर की लंबाई करीब 40 मीटर है। इस मंदिर के 9 कोने हैं, वहीं 9 के सबसे बड़े अंक होने की वजह से ऐसी मान्यता है कि, यह कमल मंदिर एकता, अखंडता और विस्तार को प्रदर्शित करता है।

इस मंदिर के मध्य में एक बेहद भव्य हॉल बनाया गया है, जहां करीब ढाई हजार लोग एक साथ बैठकर प्रार्थना कर सकते हैं और मानिसक सुकून, शांति एवं सादगी प्राप्त कर सकते हैं। इस मंदिर में निर्धारित समय पर होने वाली प्रार्थना में हिस्सा लेने के लिए हजारों लोग रोजाना यहां आते हैं। लोटस टेम्पल में हर घंटे में 5 मिनट के लिए विशेष प्रार्थना आयोजित की जाती है।

इस मंदिर में ऊंची आवाज में या फिर जोर-जोर से प्रार्थना करने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा किसी भी तरह की संगीत के वाद्य यंत्रों को भी यहां बजाने की इजाजत नहीं है। इस मंदिर के परिसर में बेहद सुंदर बड़े-बड़े घास के मैदान, सफेद विशाल भवन भी है। इसके अलावा मंदिर में साल 2003 में एक सूचना केन्द्र भी स्थापित किया गया था, इस सूचना केन्द्र में इस मंदिर का मुख्य सभागार है, जहां  करीब 400 लोग एक साथ बैठकर शांत मन से प्रार्थना कर सकते हैं।

मंदिर में स्थित सूचना केन्द्र, लोटस टेम्पल के निर्माण और इसके इतिहास के साथ-साथ बहाई धर्म और उसके सिद्धान्तों के बारे में जानकारी देता है। इसके साथ ही भारत के इस प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक लोटस टेम्पल में दो छोटे-छोटे सभागार भी हैं, जिसमें करीब 70 सीटें हैं। लोटस टेम्पल में एक ऑडियो विजुअल रूम और लाइब्रेरी भी है, जहां पर्यटकों के लिए कई धार्मिक पुस्तकें भी रखी गई है। इस मंदिर में किसी भी देवता की कोई प्रतिमा मौजूद नहीं है, और न ही ईधर आज तक किसी तरह का पूजा और अनुष्ठान किया गया है।

यह सभी धर्म के लोगों के लिए खुला हुआ है। यह मंदिर भारत की अनेकता एवं एकता के सिद्धांत को प्रदर्शित करता है। इस मंदिर की सुंदर बनावट की वजह से इसे 20वीं सदी का ताजमहल भी कहा जाता है। वहीं दुनिया के 7 आश्चर्यों में एक ताजमहल के बाद लोटस टेम्पल एक प्रमुख पर्यटन और दर्शनीय स्थल है। अपनी अनूठी वास्तुशिल्प के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर के बीचों-बीच एक तालाब भी है, जिस पर देखने पर ऐसा लगता है कि मानों पानी में कमल का फूल तैर रहा हो। 

कमल मंदिर की खूबसूरती को बढ़ा रहे मार्बल पत्थर को ग्रीस से मंगवाया गया था। वहीं इस मंदिर के निर्माण के लिए इस्तेमाल किए गए पत्थरों को लेकर कई इतिहासकारों का यह भी कहना है कि इस मंदिर की जटिल डिजाइन की वजह से इस मंदिर को बनाने में करीब 10 हजार अलग-अलग आकार के संगमरमर के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। कमल मंदिर को करीब 700 इंजीनियर, कामगार, कलाकारों और तकनीशियनो ने मिलकर भव्य और आर्कषक रुप दिया है। दिल्ली में स्थित यह बेहतरीन और सबसे शानदार इमारत ने अपनी अद्धितीय वास्तुशिल्प के लिए कई आर्किटेक्चरल अवॉर्ड भी प्राप्त किए हैं।

इसके अलावा करीब  125 से भी ज्यादा अखबारों में इसके आर्कषण को प्रकाशित भी किया जा चुका है। इसे आइकोनिक प्रतीक के तौर पर भी जाना जाता है। अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए ब्रिटेन और अमेरका जैसे शक्तिशाली देशों के द्धारा लोटस टेम्पल को  अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

बहाई समुदाय के प्रमुख धार्मिक केन्द्रों में से एक है लोटस टेम्पल – Baha i Temple India

दिल्ली में स्थित लोटस टेम्पल को बहाई समुदाय के महत्वपूर्ण धार्मिक केन्द्रों में से एक माना जाता है। लोटस टेम्पल, विश्व के सात बहाई केन्द्रों में से अंतिम एवं एशिया महाद्धीप का इकलौता बहाई केन्द्र हैं। बहाई धर्म के अन्य 6 केंद्र फ्रैंकफर्ट, पनामा शहर, सिडनी, कंपाला, वेस्ट समोआ, इल्लिनॉइस में स्थित है।

लोटस टेम्पल से बहाई समुदाय के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है, हालांकि, इस मंदिर में किसी भी तरह की मूर्ति पूजा पर रोक है, यहां सभी धर्मों के लोग लोग मन की शांति और सुकून प्राप्त करने के लिए आते हैं। आपको बता दें कि बहाई पंथ सन् 1844 में ईरान में बहाउल्लाह द्धारा स्थापित किया गया एक नवीनतम और स्वतंत्र धर्म माना जाता है, जो कि एकता और अखंडता पर जोर देता है।

बहाई धर्म के मुताबिक विश्व के सभी मानव धर्मों का एक ही मूल है। बहाई धर्म का पालन करने वाले लोग इसके संस्थापक बहाउल्लाह को मुहम्मद, बुद्ध, कृष्ण, ईसा मसीह, आदि का अवतार और उनकी वापसी मानते हैं। एकीकरण पर जोर देने वाले बहाई धर्म के अनुयायी दुनिया के कोने-कोने में इसका प्रचार-प्रसार करने में जुटे हुए हैं।

आपको बता दें कि यह नवीनतम धर्म किसी भी तरह की मूर्ति पूजा एवं मौलवी, पादरी, पुजारी, धर्म गुरु आदि में विश्वास नहीं करता है और ना ही जाति, धर्म, रंग, भाषा, वर्ग, आदि किसी भी तरह के पूर्वाग्रहों को मानता है।

लोटस टैम्पल के कुछ रोचक, दिलचस्प तथ्य एवं महत्वपूर्ण तथ्य – Facts About Lotus Temple

दिल्ली में स्थित लोटस टेम्पल से जुड़ी कुछ रोचक और दिलचस्प बातें इस प्रकार हैं –

  • दिल्ली के नेहरू प्लेस में स्थित लोटस टेम्पल बहाई धर्म की आस्था से जुड़ा एक पवित्र और धार्मिक स्थल है। जिसकी स्थापना बहा-उल्लाह ने की थी। जबकि कनाडा के रहने वाले मशहूर वास्तुकार फरीबर्ज सहबा ने इसका डिजाइन तैयार किया था।
  • कमल मंदिर में बने इसके भव्य प्रार्थना सभागार में एक बार में करीब ढाई हजार लोग आ सकते हैं।
  • अपनी अद्भुत वास्तुशिल्प के लिए मशहूर इस लोटस टेम्पल को देखने रोजाना करीब 10 हजार लोग आते हैं।
  • लोटस टेम्पल एशिया महाद्धीप का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां मूर्ति पूजा नहीं होती है, यह मंदिर प्रभु की उपस्थिति में विश्वास रखता है एवं यह सभी धर्मों के लिए खुला हुआ है। यह मंदिर ”अनेकता में एकता’ के सिद्धांत को यथार्थ रुप देता है एवं सभी धर्मों का आदर करता है।
  • करीब 42 मीटर लंबा यह प्रसिद्ध कमल मंदिर दुनिया के बहाई समुदाय के 7 प्रमुख स्थलों में से एक है। भारत के अलावा बहाई धर्म के अन्य स्थल पनामा, अपिया, विलेमेट, सिडनी, कंपाला, फ्रैंकफर्ट आदि शहरों में स्थित है।
  • आधे खिले हुए कमल के फूल के आकार के बने इस मंदिर ने अपनी अद्भुत वास्तुशिल्प और डिजाइन के लिए कई आर्किटेक्चरल अवॉर्ड भी जीते हैं। दुनिया के कोने-कोने से लोग इसकी खूबसूरती को देखने आते हैं।
  • 1986 में निर्मित आधुनिक वास्तुशिल्प पर आधारित इस कमल मंदिर को मॉडर्न भारत अर्थात 20वीं सदी का ताजमहल भी कहा जाता है।
  • दिल्ली के प्रमुख आर्कषणों में से एक यह कमल मंदिर करीब 40 मीटर लंबा है और चारों तरफ से 9 तालाबों से घिरा हुआ है।
  • विश्व के सात बहाई केन्द्रों में से एक लोटस टेम्पल के 9 दरवाजे एवं 9 कोने हैं, जिसे लेकर यह माना जाता है कि 9 सबसे बड़ा नंबर है जो कि विस्तार, एकता एवं अखंडता को प्रदर्शित करता है।
  • करीब 26 एकड़ के क्षेत्रफल में बने इस मंदिर को करीब 700 टेक्नीशियन, इंजीनियर और कलाकारों ने मिलकर बनाया है।
  • कमल के आकार में बने हुए इस मंदिर में 27 खड़ी हुईं कमल के फूल की पंखुड़ियां बनी हुई हैं, जिसे जंग से बचाने के लिए इसके शेल्स को स्टील से गेल्वनाइज्ड किया गया है।
  • यह मंदिर अपने शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, यहां जोर-जोर से प्रार्थना करना या फिर किसी तरह का संगीत बजाने की अनुमति नहीं है।
  • लोटस टेम्पल में बनी लाइब्रेरी में लोग बैठकर कई धार्मिक किताबें भी पढ़ सकते हैं।
  • आधुनिक वास्तुशैली से निर्मित इस आर्कषक कमल मंदिर की सुरक्षा को लेकर इसे कांच और स्टील से बनी छत से कवर किया गया है, वहीं गिलास की कवर की वजह से इस मंदिर के मुख्य हॉल में नैचुरल प्रकाश भी आसानी से आता है।
  • मंदिर को कमल के फूल के आकार देने का यह एकमात्र उद्देश्य है कि कमल सभी धर्मों के लोगों के लिए पवित्र और पूजन्य है, इसलिए यहां सभी धर्मों के लोग मन की शांति प्राप्त करने के लिए आते हैं।

लोटस टेंपल खुलने का समय – Lotus Temple Timings

आधे खिले हुए कमल के आकार में बना यह बेहद आर्कषक और सुंदर मंदिर हफ्ते में 6 दिन खुला रहता है। इस मंदिर में मंगलवार से लेकर रविवार तक किसी भी दिन श्रद्धालु दर्शन के लिए यहां आ सकते हैं और यहां के पवित्र और शांत वातावरण में सुख की अनुभूति कर सकते हैं। जबकि सोमवार के दिन यह मंदिर बंद रहता है।

गर्मी के मौसम में यह भव्य मंदिर सुबह साढ़े 9 बजे से शाम के साढ़े 6 बजे तक खुलता है, जबकि सर्दी के मौसम में लोटस टेम्पल सुबह 10 बजे से शाम के 5 बजे तक खुला रहता है। इस दौरान लोग यहां आकर सुकून पा सकते हैं।

ऐसे पहुंचे लोटस टेम्पल – How To Reach Lotus Temple

लोटस टेम्पल भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है और दिल्ली से दुनिया के करीब सभी देश एवं सभी राज्यों से अच्छी ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी है। दिल्ली तक लोग सड़क, रेल और वायु किसी भी माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं। अगर पर्यटक बस सुविधा के माध्यम से दिल्ली पहुंच रहे हैं तो दिल्ली की लोकल बसें, मेट्रो स्टेशन आदि की सहायता से बस स्टेशन से लोटस टेम्पल तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

इस मंदिर के सबसे पास कालका जी मेट्रो स्टेशन है, जहां से 5 मिनट की पैदल दूरी पर यह भव्य कमल मंदिर स्थित है। वहीं अगर पर्यटक रेल मार्ग के द्धारा दिल्ली पहुंचते हैं,तो यहां नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन है।

जहां से पब्लिक ट्रांसपोर्ट, बस, मेट्रो ट्रेन, टैक्सी आदि के अलावा निजी वाहन से भी इस मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। जो पर्यटक हवाई मार्ग से दिल्ली पहुंचते हैं, तो एयरपोर्ट से भी शहर के नेहरू प्लेस के पास स्थित लोटस टेम्पल मेट्रो ट्रेन, लोकल बसें, टैक्सी आदि के माध्यम से आसानी से पुहंचा जा सकता है।

कमल मंदिर की कुछ बाते – Few Lines On Lotus Temple

• इस मंदिर का आकार कमल के फुल की तरह है क्योकि कमल को शांति, शुद्धता, प्यार और पवित्रता का प्रतिक माना जाता है।

• बहाई की आस्था और श्रद्धा का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर है कमल मंदिर।

• बहाई धर्म की स्थापना बहा-उल्लाह ने की थी, जो की तेहरान के पर्शियन अमीर आदमी थे. बहाई धर्म के अनुसार भगवान केवल एक ही है।

• कमल मंदिर नयी दिल्ली के कालकाजी इलाके में है।

• इस मंदिर को बनाने में एक दशक से भी ज्यादा का समय लगा है. अंततः 1986 में यह मंदिर सामान्य लोगो के लिये खुला।

• कमल मंदिर को तक़रीबन 700 इंजिनियर, तकनीशियन (Technician), कामगार और कलाकारों ने मिलकर बनाया।

• मंदिर में एक समय में एक साथ 2400 लोग आ सकते है।

• यह मंदिर तक़रीबन 40 मीटर लंबा और 9 तालाब से घिरा हुआ है।

• इस मंदिर को बनाने में जिस मार्बल का उपयोग किया गया है उसे ग्रीस से मंगवाया गया था।

• कमल मंदिर को कनाडा के पर्शियन आर्किटेक्ट फरिबोर्ज़ सहबा ने डिजाईन किया था। इस मंदिर की आकृति कमल जैसी होने के कारण इसे कमल मंदिर या लोटस टेम्पल भी कहा जाता है।

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