शिक्षक दिवस पर शिक्षक कविता | Poem on Teachers day

Poem on Teachers Day

हमारे कर्म हमें हमेशा हमें आगे बढ़ने में हमें मदत करते हैं लेकिन अगर उसके साथ सही शिक्षा मिल जाये तो उसी कर्म के साथ एक नयी ऊँचाई को छु सकते हैं। और उसी ऊँचाईयों को छु ने के लिए हमारे जीवन में शिक्षा और उसी के साथ शिक्षक का महत्व बहुत ही ज्यादा बढ़ जाता हैं क्योकि की जैसे कुंभार एक मिटटी के घटे को सही आकर देता हैं वाही एक शिक्षक हमें अच्छी शिक्षा देकर हमरे जीवन को सही आकार देता हैं।

5 सितंबर का दिन हर शिक्षक-शिष्य के लिए काफी खास दिन होता है। इस दिन शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए स्कूलों, कोचिंग एवं अन्य शिक्षक संस्थानों पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

इस दौरान शिष्य कविताओं, स्लोगन आदि के माध्यम से शिक्षकों के प्रति आभार जताते हैं एवं उनके प्रति अपने भाव को प्रदर्शित करते हैं।

आज हम यहाँ शिक्षक दिवस पर शिक्षक का महत्व बताने वाली कुछ कविताएं उपलब्ध करवा रहे हैं, जिन्हें न सिर्फ स्कूलों पर आयोजित कार्यक्रमों में सुना सकते हैं, बल्कि आप अपनी सोशल मीडिया साइट्स फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि पर शेयर कर सकते हैं एवं अपने गुरु से दूर रहकर भी उनका आभार प्रकट कर सकते हैं।

शिक्षक दिवस पर शिक्षक कविता – Poem on Teachers day in Hindi

Poem on Teachers day
Poem on Teachers day

Teachers Day Poem

“शिक्षक बिन ज्ञान नहीं”

शिक्षक बिन ज्ञान नहीं रे।
अंधकार बस तब तक ही है,
जब तक है दिनमान नहीं रे॥
मिले न शिक्षक का अगर सहारा,
मिटे नहीं मन का अंधियारा
लक्ष्य नहीं दिखलाई पड़ता,
पग आगे रखते मन डरता।
हो पाता है पूरा कोई भी अभियान नहीं रे।
शिक्षक बिन ज्ञान नहीं रे॥
जब तक रहती शिक्षक से दूरी,
होती मन की प्यास न पूरी।
शिक्षक मन की पीड़ा हर लेते,
दिव्य सरस जीवन कर देते।
शिक्षक बिन जीवन होता ऐसा,
जैसे प्राण नहीं, नहीं रे॥
भटकावों की राहें छोड़ें,
शिक्षक चरणों से मन को जोड़ें।
शिक्षक के निर्देशों को मानें,
इनको सच्ची सम्पत्ति जानें।
धन, बल, साधन, बुद्धि, ज्ञान का,
कर अभिमान नहीं रे, शिक्षक बिन ज्ञान नहीं रे॥
शिक्षक से जब अनुदान मिलेंगे,
अति पावन परिणाम मिलेंगे।
टूटेंगे भवबन्धन सारे, खुल जायेंगे, प्रभु के द्वारे।
क्या से क्या तुम बन जाओगे, तुमको ध्यान नहीं, नहीं रे॥

Poem on Teacher

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के मौके पर 5 सितंबर को पूरे देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है, इस दिन शिष्य अपने गुरुओं के प्रति आदर और सम्मान प्रकट करता है, साथ ही अपने शिक्षकों का धन्यवाद अदा करता है।

जाहिर है कि शिक्षक के बिना मनुष्य के  सफल जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है, अर्थात शिक्षक मनुष्य के जीवन का मुख्य आधार होता है। जो कि शिष्यों के अंदर सोचने, समझने और सीखने की शक्ति विकसित करता है, साथ ही उसे संसारिक चीजों का बोध करवाता है।

शिक्षक के ज्ञान के बिना मनुष्य अपूर्ण माना जाता है और समाज में खड़े रहने लायक नहीं रहता है। शिक्षकों के मार्गदर्शन से ही शिष्य अपने जीवन में आगे बढ़ता है और जीवन में आने वाली चुनौतियां से लड़ने के लिए तैयार होता है। इसलिए शिक्षकों का हर किसी के जीवन में एक अलग स्थान है।

“दीपक सा जलता है शिक्षक”

दीपक सा जलता है शिक्षक
फैलाने ज्ञान का प्रकाश
न भूख उसे किसी दौलत की
न कोई लालच न आस
उसे चाहिए, हमारी उपलब्ध‍ियां
उंचाईयां,
जहां हम जब खड़े होकर
उनकी तरफ देखें पलटकर
तो गौरव से उठ जाए सर उनका
हो जाए सीना चौड़ा
हर वक्त साथ चलता है गुरु
करता हममें गुणों की तलाश
फिर तराशता है शिद्दत से
और बना देता है सबसे खास
उसे नहीं चाहिए कोई वाहवाही
बस रोकता है वह गुणों की तबाही
और सहेजता है हममें
एक नेक और काबिल इंसान को

Shikshak Din Kavita

देश के पहले उप राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति एवं महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरूतनी गांव में हुआ था। उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है।

राधाकृष्णन ने अपने जीवन में करीब 40 साल तक एक शिक्षक के रुप में काम किया एवं अपने महान विचारों से लोगों को सही मार्गदर्शन दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने समाज को शिक्षक के महत्व को बताया, साथ ही शिक्षा को काफी बढ़ावा दिया था, उनका मानना था कि एक अज्ञानी मनुष्य कभी भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकता है इसलिए हर इंसान के जीवन में एक शिक्षक का होना बेहद जरूरी है।

इसलिए 5 सितंबर यानि कि शिक्षक दिवस के दिन राधाकृष्ण के जीवन के आदर्शों पर चलने की सलाह दी जाती है साथ ही समाज में उत्कृष्ट काम करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है।

वहीं शिक्षक दिवस पर दी गई इन कविताओं के माध्यम से न सिर्फ अपने गुरुओं के प्रति आदर-सम्मान की भावना प्रकट होती है, बल्कि इन कविताओं को सोशल मीडिया साइट्स पर अपलोड कर गुरुओं से दूर रहकर भी उनका आभार प्रकट किया जा सकता है।

इसलिए इन कविताओं को ज्यादा से ज्यादा अपनी सोशल मीडिया साइट्स पर शेयर करने की कोशिश करें, ताकि गुरु-शिष्य को के अनूठे रिश्ते की परंपरा को कायम रखा जा सके।

“शिक्षक”

माँ देती नव जीवन, पिता सुरक्षा करते हैं।
लेकिन सच्ची मानवता, शिक्षक जीवन में भरते हैं।

सत्य न्याय के राह पर चलना, गुरु हमें बताते हैं।
जीवन संघर्षों से लड़ना, गुरु हमें सिखाते हैं।

ज्ञान दीप की ज्योति जला कर, मन आलोकित करते हैं।
विद्या का धन देकर शिक्षक, जीवन सुख से भरते हैं।

गुरु ईश्वर से बढ़ कर हैं, यह कबीर बतलाते हैं।
क्योंकि गुरु ही भक्तों को, ईश्वर तक पहुंचाते हैं।

जीवन में कुछ पाना है तो, गुरु का सम्मान करो।
शीश झूका कर श्रद्धा से तुम, बच्चों उन्हें प्रणाम करो।

“Teachers Day ke Liye Kavita”

शिक्षक दिवस को भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इसे लेकर बच्चों को काफी उत्साह रहता है।इस मौके पर कई अलग-अलग तरह के प्रोग्राम्स का भी आयोजन किया जाता है।

इसके साथ ही इस दिन समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। यह दिन हर शिक्षक एवं शिष्य के लिए बेहद खास दिन होता है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं का आभार प्रकट करते हैं, एवं कविताओं आदि के माध्यम से उनके प्रति अपनी भावनाएं एवं कृतत्रता प्रकट करते हैं साथ ही अपने जीवन में उनकी महत्वता का बखान करते हैं।

यह दिवस गुरु -शिष्य के रिश्ते को और अधिक मजबूती प्रदान करता है। वहीं शिक्षक दिवस पर इस तरह की कविताओं के माध्यम से भावनात्मक तरीके से गुरु -शिष्य के अनूठे रिश्ते के बारे में बताया जा सकता है।

इसलिए ज्यादा से ज्यादा इन कविताओं को सोशल मीडिया साइट्स पर शेयर करें और अपने गुरुओं के प्रति सम्मान प्रकट करें क्योंकि एक शिक्षक ही देश का असली निर्माणकर्ता होता है, जो शिष्यों के जीवन से अंधकार दूर कर ज्ञान का दीप जलाता है।

गुरूदेव के श्रीचरणो मे श्रद्धा सुमन सग वदन
जिनके कृपा नीर से जीवन हुआ चदन
धरती कहती, अबर कहते कहती यही तराना
गुरू आप ही वो पावन नूर है जिनसे रोशन हुआ जमाना
ले गए आप इस स्कूल को उस मुकाम पर, गर्व से उठते है हमारे सर,
हम रहे ना रहे कल, याद आएंगे आपके साथ बिताये हुए पल,
हमे आपकी जरुरत रहेगी हर पल।

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1 COMMENT

  1. TEACHER DAY SPECIAL BASED ON MOVIE SUPER३०

    कभी शिक्षा का ऐसा रूप नहीं देखा है
    जो सुपर ३० फिल्म में दर्शाया है
    उड़ते परिंदो को मिला खुला आसमान है
    हर जज़्बे को मिली कामयाबी की राह है।

    एक गुरु जब शिक्षा की लो जलाता है
    तो क्या सामान्य और उच्च वर्ग को देख के पढ़ाता है
    फिर तो वो एक व्यापारी ही कहलाता है
    जो शिक्षा से कर रहा अपना व्यापार है।

    शिक्षा क्यों पैसो की मोहताज़ है
    क्या इस पर नहीं सबका समान अधिकार है
    फिर क्यों फिर रहे इतने बेरोजगार है
    क्या शिक्षा बन गयी “ऊंची दूकान और फीके पकवान” है।

    शिक्षा दिवस पर बस इतना ही कहना है ——
    law of gravity की तरह शिक्षक करे मागदर्शन है
    newton’s law से ख्वाबो को दे ऊंचा आसमान है
    पेंडुलम की तरह रखे हर वर्ग को एक समान है
    तभी शिक्षा को मिलेगा एक नया आयाम है।
    और गुरु को मिलेगा सच्चा सम्मान है।

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