यहाँ चढ़ाया जाता हैं शहीद जवानों के स्मारक को पानी जानिए क्यूँ………

Nelong Valley

कहते है हर पंरपरा के पीछे कोई ना कोई ठोस वजह और एक दिलचस्प कहानी छिपी होती है। लेकिन कई पंपराएं ऐसी होती है जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। लेकिन फिर भी निभाई जाती है।

ऐसी ही एक पंपरा उत्तरकाशी जिले के Nelong Valley – नेलांग घाटी पर ड्यूटी करने वाला जवान भी निभाता है। और ये पंरपरा जितनी अनोखी है उतनी ही लोगों की आंखे खोलने वाली भी। क्योंकि ये पंरपरा लोगों को एहसास कराती है कि हमारी सुरक्षा के लिए हमारे देश के जवान किसी किसी तकलीफ से गुजर जाते है। चलिए आपको बताते है इस अनोखी पंरपरा के बारे में।

Shaheed Smarak Nelong Valley Ghati
Shaheed Smarak Nelong Valley Ghati

यहाँ चढ़ाया जाता हैं शहीद जवानों के स्मारक को पानी जानिए क्यूँ – Nelong Valley

भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित उत्तरकाशी में नेलांग नाम की घाटी है जो उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 110 किमी दूर है। और इस नेलांग घाटी – Nelong Ghati में कोई आबादी नहीं रहते है। क्योंकि यहां पर बहुत बर्फ पड़ती है जिस वजह से यहां रहना संभव नहीं है लेकिन यहां पर भारत तिब्बत सीमा पुलिस और सेना की चौंकियां है। जिस वजह से देश के जवान यहां पर 12 महीने डयूटी पर तैनात रहते है।

गर्मियों तो यहां पर फिर भी डूयटी करना उतना मुश्किल नहीं होता। लेकिन सर्दियों में यहां पर भारी बर्फ पड़ने के कारण जवानों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि यहां तैनात जवानों को पानी भी बर्फ पिघलाकर पीना पड़ता है। और यहां पर निभाई जाने वाली अनोखी पंरपरा भी पानी से ही जुड़ी है।

दरअसल कहानियों के अनुसार साल 1994 में सेना के 64 फील्ड रेजिमेंट के तीन जवान हवलदार झूम प्रसाद गुरंग, नायक सुरेंद्र सिंह और बहादुर यहां पर गश्त पर थे। लेकिन गश्त के दौरान जवानों का पानी खत्म हो गया। और प्यास को बुझाने के लिए जवान नेलांग घाटी से 2 किलोमीटर नीचे आ रहे थे जहां पर पानी का एक स्त्रोत था।

लेकिन आते समय अचानक भारी बर्फ पड़ने तीन जवान बर्फ में दब गए। और उनकी मौत हो गई। कई दिनों तक तलाश करने के बाद सेना को उन जवानों का शव बर्फ में मिला।

माना जाता है इस घटना के कुछ समय बाद जो – जो सैनिक यहां पर गश्त के लिए आए उन सभी के सपने में वो जवान आए और पानी मांगने लगे। जिसके बाद आइटीबीपी ने यहां पर उन जवानों का स्मारक बनाया। तब से जो भी सैनिक या पर्यटक यहां से गुजरते है वो इस स्मारक पर पानी जरुर चढ़ाते है।

हालांकि नेलांग घाटी पर्यटको के लिए साल 2014 से ही खोली गई है। आप इसे अब आप अंधविश्वास कहें या आस्था लेकिन इतना जरुर कहा जा सकता है कि ये स्मारक और प्रथा हमें इस बात का एहसास जरुर दिलाती है कि हमारे जवान हमारे लिए किस किस परिस्थिति से लड़ते है और अपनी जान गंवा देते है।

और शायद यही वजह है यहां पर पानी चढ़ाकर जवान और पर्यटक उनके बलिदान के लिए उनका आभार प्रकट करते है। वैसे आपको बता दें भारत में ये एकलौती जगह नहीं है जहां पर जवान के स्मारक में पानी चढ़ाया जाता है ऐसी ही एक जगह राजस्थान के बियाबान रेगिस्तान में भी है।

जहां पर कुछ जवानों की मौत पानी के अभाव के कारण हुई थी। जिस वजह से वहां पर बीएसएफ ने एक छोटा सा मंदिर बनाया और एक बड़ा सा बर्तन रखा जिसमें आने जाने वाले लोग पानी डालते है और शहीद जवानों को श्रद्धाजंलि देते हैं।

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4 COMMENTS

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