दिल्ली के शनि धाम मंदिर का इतिहास | Shani dham Temple History

Shani dham Temple

भारत की राजधानी दिल्ली में शनि धाम मंदिर है और इसकी खास बात यह है की शनि देव की जो मूर्ति है वो दुनिया में सबसे उची मूर्ति है। शनि देव का यह मंदिर एक और खास बात के लिए जाना जाता है।

Shani Dham Temple

दिल्ली के शनि धाम मंदिर का इतिहास – Shani dham Temple History

अक्सर कोई भी देवता हो उसका एक वाहन सुनिश्चित होता है। मगर जब शनि धाम के शनि देव की बात आती है तो कुछ अलग ही देखने को मिलता है। इस मंदिर में आने पर, आपको शनि देव केवल एक ही वाहन पर दिखाई नहीं देंगे बल्की हर नयी जगह पर हर नए वाहन के साथ में शनि देव नजर आयेंगे।

कभी शनि देव भैस पर विराजमान नजर आयेंगे। तो किसी और जगह पर गिद्ध जैसे विशाल पक्षी पर बैठे नजर आयेंगे। और हर जगह पर वो अलग अंदाज में बैठे नजर आयेंगे।

31 मई, 2003 में अनंत श्री विभूषित जगत गुरु शंकराचार्य जी महाराज ने शनि देव की सबसे बड़ी मूर्ति का अनावरण किया था। उसी दिन से शनि देव का यह मंदिर भक्तो के लिए आकर्षण का मुख्य विषय बन गया है।

शनि देव की सबसे बड़ी मूर्ति का अनावरण करने से पहले श्री शनि धाम पीथादेश्वर संत शिरोमणि शनि चरनुरागी दत्ती मदन महाराज राजस्थान जी ने सौ करोड़ बत्तीस लाख शनि देव के पवित्र मंत्रो का जप एक पवित्र बाग में किया था।

शनि धाम मंदिर विश्व में एक ऐसा मंदिर है जहापर शनी देव की दुनिया की सबसे उची मूर्ति पाई जाती है। इस मंदिर में जो शनि देव की जो पत्थर की मूर्ति है वो कुदरती पत्थर की मूर्ति है, उस पत्थर की मूर्ति किसी ने अपने हातो से नहीं बनाया। शायद इसी वजह से दुनिया के सारे भक्तो के लिए यह मंदिर आकर्षण का मुख्य केंद्र बन चूका है।

ऐसा कहा जाता है की यहाँ पर जो भी शनि देव की पूजा करता है, उसके सारे पाप धुल जाते है। मंदिर की सुरक्षा को नजर में रखते हुए कोई भी बाहर का सामान या वस्तु मंदिर में ले जाने की इजाजत नहीं है।

मंदिर में जितना भी पैसा जमा होता उसे अच्छे काम के इस्तेमाल में लाया जाता है। जब कोई भी भक्त मंदिर के परिसर में आता है तो वो किसी दुसरे इन्सान से बोलता नहीं बल्कि बड़ी शांति के साथ भगवान के नाम का जाप करता है।

शनि धाम मंदिर की वास्तुकला – Shani Dham Temple Architecture

शनि देव की मूर्ति के अलावा भी अन्य देव और देवी की मुर्तिया भी यहापर देखने को मिलती है। यहाँ के आश्रम में एक बहुत ही बड़ा पुस्तकालय और एक संशोधन का केंद्र भी है। यहापर ज्योतिष, आयुर्वेद, योग और तंत्र से जुड़े सारे सवालों के जवाब बड़ी आसानी से मिल जाते है।

रथेर ऋषि राजस्थानी यहापर आये हर भक्त के सवाल के जवाब देने के लिए यहापर हमेशा मौजूद रहते है। शनि धाम के पूर्वी दिशा में शनि देव की चमकती हुई मूर्ति दिखाई देती है। इस मंदिर के सारे दरवाजे पश्चिम की दिशा में आते है।

उत्तर और दक्षिण दोनों ही दिशा में शनि देव की विभिन्न मुर्तिया दिखाई देती है जिनेम शनि देव अलग अलग तरह के वाहनों पर दिखाई देते है। शनि शिला के दाये और बाये में भैरव देव की भी मुर्तिया दिखाई देती है।

शनि शिला के पूर्वी दिशा में एक बहुत ही बड़ा भवन है जिसमे 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापन की गयी है। इस भवन के सबसे ऊपर शनि देव की धातु के बहुत बड़ी मुर्तिया भी दिखाई देती है।

एक अन्य कमरे में शनि देव से जुडी बहुत ही खास ज्योतिष की किताबे सभी भक्तो को देखने के लिए उपलब्ध करायी गयी है। शनि धाम से बिलकुल पश्चिम दिशा में शनि देव भैस और गिद्ध पर बैठे हुए दिखाई देते है। शनि देव की दो मूर्ति के दाई दिशा में हनुमानजी की मूर्ति भी स्थापित की गयी है।

हनुमानजी की यह मूर्ति दक्षिण की दिशा में खड़ी दिखाई देती है। इसके विपरीत दिशा में भक्तो के लिए नहाने की सुविधा की गई है। भवन के पश्चिम दिशा में एक और बड़ा भवन है। उस भवन में कई सारी धार्मिक विधिया होती रहती है और ध्यान से जुडी सारी सभाए भी उसी भवन में आयोजित की जाती है। उस बड़े से भवन में अर्धनारीश्वर की पूर्व में मुख करके एक मूर्ति है।

शनिधाम मंदिर में मनाये जाने वाले कुछ उत्सव – Some Festivals Celebrated at The Shanadham Temple

नवरात्रि पूजा

नवरात्री पूजा जिसे सभी दुर्गा पूजा भी कहा जाता है। यह उत्सव दुर्गा देवी के नौ अवतारों की पूजा करने के लिए मनाया जाता है। नवरात्रि का त्यौहार पुरे नौ दिन तक मनाया जाता है। नौ दिनों तक शक्ति देवता की पूजा की जाती है ताकि हमसबपर देवी की कृपादृष्टि बनी रहे।

दीपावली पूजा:

दिपावली का त्यौहार रोशनी, जगमगाहट का त्यौहार होता है। यह उत्सव सम्रद्धि और सम्पति की देवता मा लक्ष्मी की पूजा करने के लिए मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है की दीपावली के पर्व पर जो भी देवी लक्ष्मी की पूजा करता है तो देवी उसे शांति और सम्रद्धि का आशीर्वाद देती है। दिपावली के दिन श्याम के समय देवी की परंपरा अनुसार भक्तिभाव से पूजा की जाती है।

शनि अमावस्या के दिन विशेष पूजा:

हर शनि अमावस्या के दिन शनि धाम मंदिर में ‘पित्र दोष’ और ‘काल सर्प दोष’ की विधि पूरी की जाती है। ऐसे मौके पर शनि देव को तेल चढ़ाकर तेलाभिषेक किया जाता है।( इस अवसर पर शनि देव को सरसों के तेल से स्नान किया जाता है।)

कैसे पहुचे शनिधाम मंदिर – How Shanidham Temple Reaches

रस्ते से – देश के सभी तरह के रस्ते और राष्ट्रीय मार्ग दिल्ली से जुड़े है। कश्मीरी गेट का आंतरराज्य बस टर्मिनस, काले खान बस टर्मिनस और आनंद विहार टर्मिनस यह सभी दिल्ली के बस स्टेशन है। सरकारी और निजी सभी तरह की बस सेवाए दिल्ली में मौजूद है। यहापर सरकारी और निजी टैक्सी की भी सुविधा की गयी है।

रेलगाड़ी से – भारत के सभी छोटे मोटे रेल स्टेशन से दिल्ली जुडी है। नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन, पुराणी दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन यह तीन दिल्ली के रेलवे स्टेशन है।

हवाई जहाज से – भारत के सभी शहर और परदेश के भी शहरों से दिल्ली का हवाई अड्डा जुड़ा है। सभी मुख्य हवाई अड्डे दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जुड़े है। यहाँ का घरेलु हवाई अड्डा देश के सभी हवाई अड्डो से अच्छी तरह से जुड़ा है।

अभी तक आप सभी जान ही चुके होंगे की इस शनि धाम मंदिर की शनि देव की मूर्ति दुनिया में सबसे उची मूर्ति है। मगर क्या आप इस मंदिर की एक और खास बात जानते हो, शायद नहीं। जब आप इस शनि धाम जैसे पवित्र मंदिर में आते हो तो आपको केवल शनि देव के ही दर्शन नहीं होते बल्की शनि देव दर्शन के साथ साथ आपके भारत के पुरे 12 ज्योतिर्लिंग के भी दर्शन हो जाते है।

इसका मतलब एक साथ आपके शनि देव और भगवान शिव के दर्शन हो जाते है। ऐसे दो महान देवता के दर्शन एक साथ करने का मौका बार बार नहीं मिलता। जो भी यहापर आये उसने इस मंदिर को भेट देकर इन महान देवता के एक साथ दर्शन करने का मौका गवाना नहीं चाहिए।

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