जिस शब्द से तेलंगाना शब्द की उत्पत्ति हुईं वो त्रिलिंग देश | Trilinga Kshetras

तेलंगाना शब्द की उत्पत्ति Trilinga Kshetras – त्रिलिंग देश के नाम से हुईं हैं जिसे “तीन लिंगो का देश” के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू मान्यताओ के अनुसार शिवजी तीन पर्वतों पर लिंग के रूप में उतरे थे, जिनमे मुख्य रूप से तेलंगना का कलेश्वरम, रायलसीमा का श्रीसैलम और भिमेश्वरम शामिल है, जिसे द्रक्षरामं भी कहा जाता है। कहा जाता है की तेलंगना शब्द की उत्पत्ति भी तेलिंगना, तेलिंगा, त्रिलिंगा से ही हुई है।
Trilinga Kshetras

जिस शब्द से तेलंगाना शब्द की उत्पत्ति हुईं वो त्रिलिंग देश – Trilinga Kshetras

तेलगु व्याकरण किताब आंध्र कौमुदी में यह बताया गया है की आंध्र विहाऊ में एक विशाल दीवार का निर्माण किया गया है, जो श्री सैलम, भीमेश्वर और कलेश्वरम को महेंद्र पहाडियों से जोडती है। यहाँ पर भगवान शिव त्रिशूल लेकर बैठे है। आंध्र विहाऊ में दिव्य स्वर्गदूत विशालकाय असुर निशम्भु से तक़रीबन 13 युगों तक लडे और उसका अंत कर गोदावरी नदी के तट को ही अपना निवास स्थान बना लिया। तभी से तेलगु देश को त्रिलिंगम का नाम दिया गया है।

श्रीसैलम – Srisailam:

श्रीसैलम श्री मल्लिकार्जुन मंदिर भारत के आंध्रप्रदेश राज्य के श्रीसैलम में भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है। श्रीसैलम श्री मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से भी एक है। श्री मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर प्रमुख देवता शिवलिंग का ही घर है। साथ ही इस मंदिर को भगवान शिव के 18 महा शक्ति पीठो में से भी एक माना जाता है।

कलेश्वरम – Kaleshwaram:

कलेश्वरम मंदिर को दक्षिणा गंगोत्री के नाम से भी जाना जाता है, जो तेलंगना की सीमा और महाराष्ट्र की गोदावरी नदी के तट पर बना हुआ है। कलेश्वरम मंदिर में पूजे जाने वाले मुख्य देवता भगवान शिव है। मंदिर के विशेष आकर्षणों में मंदिर में पाए जाने वाले दो पवित्र शिवलिंग है। इन दो शिवलिंगों को भगवान शिव और मृत्यु के देवता भगवान यम की उपमा दी जाती है। और मंदिर के देवता को कालेश्वर मुक्तेश्वर स्वामी कहा जाता है।

भीमेश्वरम उर्फ़ द्रक्षरामं – Bhimeswaram:

द्रक्षरामं मंदिर आंध्रप्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के दक्षिणा काशी नाम से प्रसिद्ध गाँव में स्थित है। आंध्रप्रदेश में बने भगवान शिव के पंचराम क्षेत्रो में से भी यह एक है। भाग के मुख्य देवता भगवान शिव है, जिन्हें भगवान भीमेश्वर स्वामी के नाम से भी जाना जाता है, मंदिर में भगवान शिव का पवित्र ज्योतिर्लिंग है।

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