उदयगिरी किले का इतिहास | Udayagiri Fort History

Udayagiri Fort

उदयगिरी किला नेल्लोर जिले के उदयगिरी मंडल का एक शहर है। यह शहर भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में आता है।

यह शहर विजयनगर के साम्राज्य का हिस्सा था और उस वक्त पेम्मासनी नायक वहा का राजा था। इस शहर को राजा ने पूरी तरह से दृढ़ कर दिया था और विकास भी किया था।

Udayagiri Fort उदयगिरी किले का इतिहास – Udayagiri Fort History

इस शहर का इतिहास 14 वि शताब्दी से शुरू होता है। लागुला गजपति ने बनवाया हुआ यह उदयगिरी का किला पूरी तरह से सुरक्षित था।

उदयगिरी किले में कोई भी इतनी आसानी से आ नहीं सकता था। पूर्व की और जंगलसे और और पश्चिम में रास्ते से ही उदयगिरी किले के भीतर जाना मुमकिन था। इस किले को हासिल करने के लिए कृष्ण देव राय ने करीब 18 महीने लड़ाई लड़ी और गजपति के प्रतापरुद्र को युद्ध में हरा दिया था।

गजपति और विजयनगर के साम्राज्य के दौरान किले को और भी बड़ा बनाने का काम किया गया था। पूरा शहर और उसके आजूबाजू की 1000 फीट की पहाड़ी को सभी तरफ से दीवारों से महफूज की गयी थी।

इस किले में तेरा इमारते थी, जिनमेसे आठ इमारते पहाड़ी पर थी और बाकि की पाच इमारते निचे वाले हिस्से में थी। इस किले में बहुत सारे सुन्दर मंदिर और बाग भी थे।

विजयनगर का साम्राज्य ख़तम होने के बाद यह गोलकोंडा के मुखिया के हाथ में चला गया था। पहाड़ी के ऊपर एक मस्जिद है जिसमे दो फारसी शिलालेख मिले है जिससे यह पता चलता है की शेख हुसैन ने इस मस्जिद का निर्माण करवाया था, वो गोलकोंडा के सुलतान अब्दुल्लाह के मुखिया थे।

उसके बाद में यह अर्काट के नवाब के नियंत्रण में चला गया था। उसने मुस्तफा अली खान को जागीर का ख़िताब दिया था। सन 1839 तक इस किले नियंत्रण उसके वंशज के ही हाथों में था लेकिन उनके देशद्रोह के कारण नवाब ने उन्हें निकाल दिया था और उन्हें चेंगलपेट भेज दिया था।

इस जगह को इतिहास में बहुत ही महत्त्व है। जो दीवारे इस शहर के चारो और थी वो आज लगभग ग़ायब हो चुकी है लेकिन इनमेसे कुछ दीवारे आज भी पश्चिम की पहाड़ी में देखने को मिलती है।

इस किले में कुल तेरा इमारते थी जिन्मसे आठ पहाड़ी पर थी और बाकि की पाच पहाड़ी के निचे थी। इन दीवारों में भीतर के हिस्से में कई पुराने मंदिर, महल और कब्रों के अवशेष पाए जाते है।

पहाड़ी का हिस्सा काफ़ी उचा होने कारण वहा तक पहुचना किसी के लिए आसान काम नहीं था क्यु की पहाड़ी लगभग 1000 फीट उचाई पर थी और किले पर पहुचने के लिए हर रास्ते पर सैनिक तैनात किए गए थे।

इस किले में चिन्ना मस्जिद और पेद्दा मस्जिद भी है। 18 वी शताब्दी एक महान सूफी संत रहमतुलाह नायब रसूल ने इसी जगह पर समाधी ली थी। हर साल यहापर रबी उल अवल महीने के 26 वे दिन संडल का त्यौहार मनाया जाता है।

उदयगिरी किले की वास्तुकला – Udayagiri Fort Architecture

किले को एक बडेसे पत्थर पर बनाया गया है और उसके आजूबाजू में दूर दूर तक फैली हुई छोटी पहाड़ी है।

एक डच एडमिरल युस्ताचिस डे लानोय और उसकी बीवी और बच्चे की कब्र आज भी किले में देखने को मिलती है।

डे लानोय को किले में ही दफनाया गया था और बाद में उसके लिए वहापर एक चर्च भी बनवाया गया था। डे लानोय के कब्र के ऊपर का पत्थर आज भी वहा पर देखने को मिलता है। उसकी कब्र पर तमिल और लैटिन भाषा में कुछ लिखा है। उसकी पत्नी और लडके की कब्र भी वहापर ही है।

पुरातत्व विभाग के लोगों ने कुछ ही समय पहले किले के अन्दर भूमिगत रास्ता भी खोजा है।

तमिलनाडू वुड्स कार्यालय ने किले को कुछ ही समय पहले बाग में परिवर्तित कर दिया है। डे लानोय की कब्र को भारतीय पुरातत्व विभाग ने पुरातत्व स्थलों में स्थान दिया है।

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2 COMMENTS

    • धन्यवाद, रमेश जी हमें यह जानकर अच्छा लगा कि आपको हमारा पोस्ट पसंद आया। उदयगिरी किला का इतिहास बेहद रोचक है और इसका अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। हम आगे भी आापके लिए इस तरह के पोस्ट अपलोड करते रहेंगे यकीकन आपको हमारे ज्ञानवर्धक पोस्ट जरूर पसंद आएंगे।

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