आख़िर क्या होता है साइबर क्राइम | What is Cyber Crime

Cyber Crime

आज के युग को आधुनिक युग कहा जाता है क्योंकि आज के समय में तकनीक के क्षेत्र में दुनिया ने इतनी ज्यादा तरक्की कर ली है जिसकी शायद एक समय में कल्पना करना भी मुश्किल था। आज के समय में तकनीकी विकास के कारण लोगों के बीच की दूरियां भी पूरी तरह खत्म हो चुकी है आप घर बैठे दूसरे देश या दूसरे राज्य में बैठे अपने दोस्त, परिवार जनों से आसानी से बात कर सकते है चैट कर सकते है और वीडियो कॉल भी कर सकते है।

इसके अलावा सोशल मीडिया के कारण आज के समय में लोग उन लोगों को भी ढ़ूढ लेते है जिनसे किसी कारण वो दूर हो गए थे इसके अलावा आजकल लोग अनजान लोगों के साथ भी दोस्ती कर लेते है। हालांकि हर बार अनजान व्यक्ति से दोस्ती करना गलत नहीं होता। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि अनजान व्यक्ति पर जल्दी विश्वास करने से अक्सर लोग मुसीबत में पड़ जाते है।

इसी तरह सोशल साइटस और कंप्यूटर के कई ओर भी ओर नुकसान है जो अक्सर लोगों के अस्तित्व, आर्थिक स्थिति, मान सम्मान को हानि पहुंचाते है। कंप्यूटर और सोशल साइटस के जरिए होने वाले अपराधों को कानून की भाषा में साइबर क्राइम – Cyber Crime कहा जाता है।

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आख़िर क्या होता है साइबर क्राइम – What is Cyber Crime

जब कोई अपराध कंप्यूटर और इंटरनेट, सोशल साइटस के जरिए होता है उसे साइबर क्राइम कहते है। साइबर क्राइम के जरिए किसे अकाउंट से पैसे चोरी करना, किसी महत्वपूर्ण वेबसाइट का डाटा चोरी करना, किसी जानकारी को मिटाना या उसमें फेरबदल करना शामिल है। इसके अलावा सोशल साइटस के जरिए किसी को ब्लैकमैल करना, किसी की अश्लील तस्वीरें या वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करना या फिर किसी के मान सम्मान को ठेस पहुंचाना साइबर क्राइम कहलता है। स्पैम ईमेलिंग, फिशिंग, हैंकिग, वायरस डालना और कई तरह के साइबर क्राइम होते है।

साइबर क्राइम के लिए सूचना तकनीक कानून 2000 के अंतर्गत प्रावाधान – IT Act 2000

सूचना तकनीक कानून 2000 के अंतर्गत अलग – अलग तरह के साइबर क्राइम के लिए अलग – अलग धाराओं है जैसे किसी कंप्यूटर से छेड़छाड़ की कोशिश धारा 65 और कंप्यूटर हैक कर करने की कोशिश धारा 66 के तहत दर्ज किए जाते है, वहीं प्रतिबंधित सूचनाएं यानी ऐसी सूचनाएं जिन्हें देने की इजाजत न हो उन्हें किसी ओर को संवाद के जरिए भेजना धारा 66A, ऑनलाइन किसी की पहचान चोरी करना धारा 66B, साइबर आंतकवाद धारा 66एफ के तहत दर्ज किया जाता है।

इसके अलावा किसी की निजता भंग करना, इलैक्ट्रोनिक गैजेट चोरी करना, आपत्तिजनक सूचनाएं प्रकाशित करना, इंटरनेट या दूसरे किसी इलेक्ट्रॉनिक मीडिय के जरिए अश्लील वीडियो, तस्वीरें प्रकाशित करने के लिए अलग अलग धाराएँ है। जिनके अंतगर्त अपराधी को सजा और जुर्माने का अधिकार है। आपको बता दें आईपीएस यानी भारतीय दण्ड संहिता में साइबर अपराधों के लिए अलग से प्रवाधान है।

भारतीय दण्ड संहिता में साइबर क्राइम से जुड़े प्रवाधान – Cyber Law in India

भारती दण्ड संहिता में साइबर फ्रॉड के लिए धारा 420, ईमेल का गलत उपयोग आईपीसी धारा 500, वैब जैंकिग के लिए आईपीसी की धारा 383 के तहत दर्ज किए जाते है इसके अलावा दवाइयों कि ऑनलाइन ब्रिकी भी साइबर क्राइम में आता है जिसके लिए आईपीसी में एनडीपीएस एक्ट है इसके अलावा ऑनलाइन हथियारों को खरीदाना और बेचना भी अपराध है इसके लिए आईपीसी में आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया जाता है।

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