योगमाया मंदिर का इतिहास | Yogmaya Temple

योगमाया मंदिर – Yogmaya Temple

दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध और पवित्र योगमाया देवी का मंदिर बहुत पुराने समय का मंदिर है। योगमाया देवी भ्रम निर्माण करने वाली देवी है। योगमाया मंदिर को जोगमाया नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर देवी योगमाया को समर्पित है। देवी योगमाया भगवान श्री कृष्ण की बहन है।

Yogmaya Temple

योगमाया मंदिर का इतिहास – Yogmaya Temple

इतिहास में ऐसा बताया गया है की इस मंदिर का निर्माण महाभारत के दौरान पांडवो ने किया था। योगमाया मंदिर को सबसे पहली बार पुनर्निर्माण करने का मुग़ल बादशाह अकबर 2 (1806-1837) के शासनकाल में करवाया गया था। बादशाह अकबर 2 के कहने पर लाला सेठमल ने इस मंदिर के निर्माण का काम शुरू कर दिया था।

ऐसा भी कहा जाता है की गजनवी का बादशाह गजनी ने इस मंदिर को गिरा डाला था और पूरी तरह से तहस नहस कर दिया था।

मगर इस मंदिर को फिर से बनवाने का काम राजपूत राजा हेमू ने करवाया था। अभी जो मंदिर दिल्ली में स्थित है उसका निर्माण 19 वी शताब्दी में करवाया गया था।

इस मंदिर की देखभाल करने के लिए लगभग 200 लोग कार्यरत है और वो सभी पूरी निष्ठा और खुद की इच्छा के अनुसार ही काम करते है।

योगमाया मंदिर के बारे में ऐसा भी कहा जाता है बहुत सालों पहले करीब सैकड़ो वर्ष पहले के पूर्वज इस मंदिर की देखभाल करते थे, हर दिन वो देवी की पूजा करते थे, प्रसाद बाटते थे, मंदिर को हमेशा साफसुथरा रखते थे और दिन में दो बार देवी का श्रृंगार करने का काम करते थे।

पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा कहा जाता है की जब अभिमन्यु को जयद्रथ ने मार डाला था तो उसकी मृत्यु के बाद भगवान कृष्ण और अर्जुन इस मंदिर में देवी के दर्शन करने के लिए आये थे।

अर्जुन ने इसी मंदिर में कसम खायी थी की दुसरे दिन के शाम तक वो जयद्रथ को मार डालेगा। भगवान कृष्ण और अर्जुन देवी का आशीर्वाद लेने के लिए ही इस मंदिर में आये थे।

देवी के चमत्कारिक शक्ती के कारण ही युद्धभूमि में भ्रम पैदा करनेवाला सूर्य ग्रहण हुआ था और इस सूर्य ग्रहण के कारण ही अर्जुन को जयद्रथ को मारने में मदत मिली थी।

योगमाया मंदिर में मनाये जाने वाले त्यौहार – Yogmaya Temple Festival

फूलवालों की सैर- Phoolwalon ki sair Festival:

इस त्यौहार के नाम से ही पता चलता है की यह उत्सव फूलो का त्यौहार है। इस त्यौहार को महरौली के क़ुतुब साहिब दरगाह और योगमाया मंदिर के परिसर में बड़े जोरो से मनाया जाता है। इस त्यौहार के दौरान पतंग उड़ाई जाती है, कुश्ती खेली जाती है, कवाली गाई जाती है।

इस त्यौहार के दौरान कथक, कवाली जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किये जाते है।

महाशिवरात्रि – Maha Shivaratri:

महाशिवरात्रि का यह त्यौहार फरवरी या फिर मार्च के महीने में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। सभी हिन्दू धर्मं के लोग इस महाशिवरात्रि के त्यौहार को बड़े आनंद के साथ मनाते है।

महाशिवरात्रि के इस पावन पर्वपर सभी लोग महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के लिए उपवास रखते है और दिन भर उनके नाम का जप करके भगवान के भजन और मंत्र को दोहराते है।

इस पवित्र त्यौहार के मौके पर सभी लोग भगवान शिव के मंदिर को चारो तरफ़ से सुशोभित करते है और दिनभर भगवान के नाम का जप करते है और सुबह और शाम के वक्त भगवान की आरती भी की जाती है।

नवरात्री का त्यौहार – Navaratri:

नवरात्री का उत्सव साल में दो बार मनाया जाता है। इस त्यौहार को पहले गर्मी के शुरुवाती दिनों में मनाया जाता है और बाद में फिर ठंडी के शुरुवात में मनाया जाता है।

इस नवरात्री के त्यौहार को तीन तीन दिनों में बाटकर मनाया जाता है हर तीन दिनों में आदि शक्ती दुर्गा देवी की पूजा की जाती है और देवी को विभिन्न तरह के आभूषण और सुन्दर वस्त्रो से सजाया जाता है।

इस शुभ अवसर पर पुरे देश में से श्रद्धालु भक्त देवी के दर्शन करने के लिए मंदिर में आते है और बड़े आनंद के साथ इस त्यौहार को मनाते है।

योगमाया मंदिर की संरचना – Yogmaya Temple Architecture

इस मंदिर का सन 1827 में पुनर्निर्माण करवाया गया था. इस मंदिर के शुरुवात में ही बडासा भवन है और उसके आगे मुख्य गर्भगृह है जिसमे देवी योगमाया की मूर्ति स्थापित की गयी है। काले पत्थरसे बनी देवी की यह मूर्ति 2 फीट चौड़ी (0.6 मीटर) और 1 (0.3 मीटर) फूट खोल संगमरमर के कुवे में रखी गयी है।

देवी का यह मंदिर 17 फीट वर्ग (5.2 मीटर) का है और इसके ऊपर एक बडासा छत बनाया गया है और उस छत के भी ऊपर एक छोटासा शिखर भी स्थित है।

योगमाया मंदिर में शिखर के अलावा भी एक सुन्दर गुबंद भी देखने को मिलता है। देवी की मूर्ति को आभूषण और सुन्दर वस्त्रो से सजाया गया है। देवी की मूर्ति के ठीक ऊपर दो पंखे लगाये गए है। इस मंदिर के चारो ओर जो दीवार है वो 400 फीट वर्ग (121.9 मीटर) की है और इस दीवार में चारो कोनोमे चार बड़े बड़े स्तंभ स्थापित किये गए है।

इस मंदिर के परिसर में सूद मल के कहने पर 22 स्तंभों का निर्माण भी करवाया गया था। इस मंदिर को शुरुवात में लाल पत्थरों से बनवाया गया था लेकिन बादमे इन लाल पत्थरो को निकालकर उनकी जगह पर संगमरमर को लगाया गया था।

इस मंदिर का जो मुख्य स्तम्भ है वो 42 फीट उचा है और उसके ऊपर ताम्बा से बना हुआ शिखर विराजमान है।

भक्तों द्वारा जो फुल और प्रसाद देवी को चढ़ाया जाता है उसे देवी के सामने रखे 18 इंच वर्ग और 9 इंच उचे संगमरमर के टेबल पर रखा जाता है। जब देवी की पूजा और आरती की जाती उस वक्त मंदिर में घंटी बजाने पर पाबन्दी है।

देवी के सामने शराब और मांस प्रसाद के रूप में चढ़ाना बिलकुल मना है क्यों की देवी योगमाया को बहुत ही दृढ़ देवी के रूप में माना जाता है।

बहुत साल पहले इस मंदिर के खुले परिसर में लोहे का पिंजरा हुआ करता था और उसमे दो पत्थरों के बाघ भी रखे जाते थे।

यह पिंजरा करीब 8 फीट वर्ग (2.4 मीटर) और 10 फीट (3 मीटर) उचा है लेकिन अब इस पिंजरे को खुली दिवरो के नजदीक में रखा गया है। इस खुली दीवार और मंदिर के बिच में जो रास्ता है उसके ऊपर छत बनाया हुआ है और इस पुरे रास्ते में छत में घंटिया लगायी गयी है।

योगमाया मंदिर तक कैसे पहुंचे – How to reach Yogmaya Temple

योगमाया देवी का मंदिर दिल्ली रेलवे स्टेशन से केवल 10 किमी की दुरी पर है। महाभारत के प्राचीन समय के इस मंदिर को देखने के लिए एक बार अवश्य आना चाहिए।

योगमाया देवी भगवान श्री कृष्ण की बहन है। योगमाया देवी का मंदिर दिल्ली के सभी मंदिरों से बिलकुल अलग है। योगमाया मंदिर की देवता को बहुत ही शुद्ध और पवित्र माना जाता है।

उसके पीछे की वजह भी काफी दिलचस्प है क्यों की देवी योगमाया की मूर्ति को एक कुवे में स्थापित किया गया है। यह कुवा भी काफी आकर्षक है। इस कुवे को संगमरमर से बनाया गया है। सभी भक्त जब मंदिर में प्रवेश करते है तो वो सभी कुवे में स्थापित किये गए देवी योगमाया के दर्शन करते है।

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