महान भौतिक विज्ञानी सर न्यूटन | Sir Isaac Newton Biography in Hindi

“प्रत्येक क्रिया की बराबर और एक विपरीत प्रतिक्रिया होती है.” Sir Isaac Newton

Isaac Newton

पूरा नाम – आइज़क न्यूटन
जन्म – 4, जनवरी 1643
जन्मस्थान – वूल्स्थोर्पे मनोर
माता  – हन्ना
पिता  – आइज़क न्यूटन सीनियर

महान भौतिक विज्ञानी सर न्यूटन – Sir Isaac Newton Biography in Hindi

सर न्यूटन एक अंग्रेजी भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ थे. वे एक प्रभावशाली वैज्ञानिक थे जिनके सिद्धांतो ने भौतिकी और गणित को नयी ऊंचाई प्रदान की. उन्होंने गुरुत्वाकर्षण का नियम और गति के सिद्धांत की खोज की. उनका शोध पत्रक “फिलोसोफी नेचुरेलीस प्रिन्सिपिया मथेमेटिका” सन 1687 में प्रकाशित हुआ, जिसमे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण एवं गति के नियमो की व्याख्या की गयी थी और इस प्रकार चिरसम्मत भौतिकी (क्लासिकल भौतिकी) की नीव रखी गयी. विज्ञान के इतिहास में किताब अपने आप में सबसे प्रभावशाली किताब है.

अपनी इस किताब में न्यूटन ने सार्वत्रिक गुरुत्व और गति के तीन नियमो का वर्णन किया जिसने अगली तीन शताब्दियों के लिये भौतिक ब्रह्माण्ड के वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया. न्यूटन ने दर्शाया की पृथ्वी पर वस्तुओ की गति और आकाशीय पिंडो की गति का नियंत्रण प्राकृतिक नियमो के समान समुच्चय के द्वारा होता है, इसे दर्शाने के लिये उन्होंने ग्रहीय गति केपलर के नियमो तथा अपने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के बीच निरंतरता स्थापित की. इस प्रकार से सूर्य केन्द्रीयता और वैज्ञानिक क्रांति के आधुनिकीकरण के बारे में पिछले संदेह को दूर किया.

Isaac Newton ने यांत्रिकी में संवेग तथा कोणीय संवेग दोनों के संरक्षण के सिद्धांतों को स्थापित किया. प्रकाशिकी में, उन्होंने पहला व्यवहारिक परावर्ती दूरदर्शी बनाया और इस आधार पर रंग का सिद्धांत विकसित किया कि एक प्रिज्म श्वेत प्रकाश को कई रंगों में अपघटित कर देता है जो दृश्य स्पेक्ट्रम बनाते हैं. उन्होंने शीतलन का नियम दिया और ध्वनि की गति का अध्ययन किया. गणित में, अवकलन और समाकलन कलन के विकास का श्रेय गोटफ्राइड लीबनीज के साथ न्यूटन को जाता है. उन्होंने सामान्यीकृत द्विपद प्रमेय का भी प्रदर्शन किया और एकफलन के शून्यों के सन्निकटन के लिए तथा कथित “न्यूटन की विधि” का विकास किया और घात श्रृंखला के अध्ययन में योगदान दिया.

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वैज्ञानिकों के बीच न्यूटन की स्थिति बहुत शीर्ष पद पर है, ऐसा ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी में 2005 में हुए वैज्ञानिकों के एक सर्वेक्षण के द्वारा प्रदर्शित होता है, जिसमें पूछा गया कि विज्ञान के इतिहास पर किसका प्रभाव अधिक गहरा है, न्यूटन का या एल्बर्ट आइंस्टीन का. इस सर्वेक्षण में न्यूटन को अधिक प्रभावी पाया गया. न्यूटन अत्यधिक धार्मिक भी थे, हालाँकि वे एक अपरंपरागत ईसाई थे, उन्होंने प्राकृतिक विज्ञान, जिसके लिए उन्हें आज याद किया जाता है, की तुलना में बाइबिल हेर्मेनेयुटिक्स पर अधिक लिखा. बाद में न्यूटन रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष भी बने. न्यूटन ने ब्रिटिश सरकार की वार्डन और मास्टर ऑफ़ द रॉयल मिंट बनकर सेवा की.

न्यूटन जैसे महान वैज्ञानिक का जीवन हमें दर्शाता है की कमजोर शुरुवात और दुनिया भर के विरोध के बावजूद धुन का पक्का व्यक्ति कुछ भी कर गुजर सकता है. हमें भी इनसे सीख लेते हुए सामने आने वाली मुश्किलों से घबराये बिना निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिये और एक दिन अपने सपनो को साकार करना चाहिये.

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