A. P. J. Abdul Kalam Biography | ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जीवनी

A. P. J. Abdul Kalam Biography

”अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा।”

डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम आजाद भारत के 11वें एवं पहले गैर राजनीतिज्ञ राष्ट्रपति थे। उनके द्धारा भारत देश की प्रगति के लिए किए गए महत्वपूर्ण और उत्कृष्ट कामों की वजह से आज भी देश उन्हें याद करता है, उनके प्रति आज भी सभी देशवासियों के हृदय में अपूर्व सम्मान है। वे जनता के सबसे चहेते और लोकप्रिय राष्ट्रपति थे।

इसके साथ ही वे एक मशहूर भारतीय एयरोस्पेस वैज्ञानिक भी थे, जिन्होंने तकनीकी और विज्ञान के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर भारत को एक नई दिशा दी। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आजाद जी देश के ऐसे महान व्यक्ति थे, जिन्होंने सर्वप्रथम देश में ‘अग्नि’ मिसाइल को उड़ान दी।

इसलिए उन्हें भारत के मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। अब्दुल कलाम जी दूरदर्शी सोच वाले प्रख्यात वैज्ञानिक, महान व्यक्तित्व वाले एक प्रभावशाली वक्ता एवं ईमानदार और कुशल राजनैतिज्ञ थे। वे हर किसी की जीवन के लिए एक प्रेरणा हैं, उन्होंने अपने जीवन में संघर्ष की कड़ी कसौटियों से गुजरकर सफलता की असीम ऊंचाईयों को छुआ है।

उनके प्रेरणात्मक विचार आज भी लाखों युवाओं के अंदर आगे बढ़ने का जोश और जज्बा पैदा करते हैं, आइए जानते हैं भारत के इस प्रभावशाली और महामहिम व्यक्तित्व डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम आजाद जी  के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में – A. P. J. Abdul Kalam

भारत के मिसाइल मैन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम आजाद का जीवन परिचय – A. P. J. Abdul Kalam Biography in Hindi

वास्तविक नाम (Real Name) अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम
जन्मतिथि (Birthday) 15 अक्टूबर 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडू, ब्रिटिश भारत
पिता का नाम (Father Name) जैनुलाब्दीन मारकयार
माता का नाम (Mother Name) आशिमा जैनुलाब्दीन
विवाह (Wife Name) अविवाहित
शैक्षणिक योग्यता (Education) 1954 में, मद्रास विश्वविद्यालय से एफिलिएटेड सेंट जोसेफ कॉलेज से फिजिक्स से ग्रेजुएशन
मृत्यु तिथि (Death) 27 जुलाई 2015, शिलांग, मेघालय, भारत

एपीजे अब्दुल कलाम जी का जन्म, परिवार एवं प्रारंभिक जीवन – A.P.J Abdul Kalam Information in Hindi

15 अक्टूबर, साल 1931 को तमिलनाडु में रामेश्वरम के धुनषकोड़ी गांव में एक मछुआरे के घर में ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जी जन्में थे। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था। वे जैनुलअबिदीन और अशिअम्मा की सबसे छोटी संतान थे।

अब्दुल कलाम जी के पिता जी मछुआरों को नाव किराए पर देकर किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। अब्दुल कलाम जी से बड़े तीन भाई और 1 बहन थे। घर की माली हालत सही नहीं होने की वजह से अब्दुल कलाम जी को शुरुआत से ही काफी संघर्ष करना पड़ा था।

लेकिन वे इन कठिनाइयों से कभी घबड़ाए नहीं बल्कि सच्चे दृढ़संकल्प और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ते रहे और आगे चलकर उन्होंने अपने जीवन में असीम सफलताएं हासिल की।

पढ़ाई-लिखाई के लिए करना पड़ा काफी संघर्ष – APJ Abdul Kalam Education

बेहद गरीब घर में पैदा होने की वजह से अब्दुल कलाम जी को अपनी पढ़ाई के लिए भी काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता था। वे अखबार बेचकर जो भी पैसे कमाते थे, उससे अपनी स्कूल की फीस भरते थे। अब्दुल कलाम जी ने अपनी शुरुआती शिक्षा रामनाथपुरम स्च्वार्त्ज़ मैट्रिकुलेशन स्कूल से पूरी की।

इसके बाद साल 1950 में उन्होंने तिरूचिरापल्ली के सेंट जोसेफ्स कॉलेज से फिजिक्स विषय से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने 1954 से 1957 तक मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एरोनिटिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।

इस तरह कठिन परिस्थितियों में उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी, और बाद में देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के पद पर सुशोभित हुए और भारत के सबसे मशहूर वैज्ञानिक के रुप में अपनी पहचान बनाई।

एक प्रख्यात वैज्ञानिक के तौर पर कलाम जी – APJ Abdul Kalam as a Scientist

अद्भुत प्रतिभा वाले व्यक्तित्व अब्दुल कलाम जी ने अपनी पढ़ाई  पूरी करने के बाद रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) में एक वैज्ञानिक के तौर पर काम कर अपने करियर की शुरुआत की। हमेशा कुछ नया और बड़ा करने की चाहत रखने वाले कलाम जी ने अपने वैज्ञानिक करियर की शुरुआत में ही एक छोटे से हेलीकोप्टर का डिजाइन तैयार कर लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ा था।

वहीं इसमें कुछ दिनों तक नौकरी करने के बाद वे ‘इंडियन कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च’ के सदस्य भी रहे। फिर साल 1962 में वे भारत के महत्वपूर्ण संगठन- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़े। फिर सन् 1962 से 1982 के बीच वे इस अनुसंधान से जुड़े और कई अहम पदों पर कार्यरत रहे। इसके बाद अब्दुल कलाम जी को भारत के सेटैलाइट लॉन्च व्हीकल परियोजना के निदेशक के पद का कार्यभार र्सौंपा गया।

अब्दुल कलाम जी ने यहां प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर रहते हुए भारत में अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान SLV-3 बनाया, जिसे साल 1980 में पृथ्वी की कक्षा के पास स्थापित किया गया। कलाम जी की इस सफलता के बाद उन्हें भारत के अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बना दिया गया।

विलक्षण प्रतिभा के धनी कलाम जी ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल की डिजाइन तैयार की एवं भारतीय तकनीक का इस्तेमाल कर अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें बनाकर विज्ञान के क्षेत्र में न सिर्फ अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और भारत को तकनीकी रुप से संपन्न राष्ट्र बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इसके बाद सन् 1992 से लेकर दिसंबर 1999 में डॉक्टर अब्दुल कलाम आजाद जी ने भारत के रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार के तौर पर काम किया। वहीं इस दौरान अटल वाजपेयी जी की केन्द्र में सरकार थी। और इसी समय दूसरी बार एपीजे अब्दुल कलाम जी की देखरेख में राजस्थान के पोखरण में सफलापूर्वक परमाणु परीक्षण किए गए और इसी के साथ भारत परमाणु हथियार बनाने वाला, परमाणु शक्ति से संपन्न और समृद्ध देशों में शुमार हो गया।

भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के तौर पर काम कर चुके  अब्दुल कलाम जी ने भारत में विज्ञान के क्षेत्र मे विकास और तरक्की के लिए विजन 2020 दिया। साल 1982 में डॉक्टर एपीज अब्दुल कलाम जी को डिफेंस रिसर्स डेवलपमेंट लेबोरेट्री का डायरेक्टर (DRDL) बना दिया गया। इसी दौरानअन्ना यूनिवर्सिटी द्धारा उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि से भी नवाजा गया।

यह वह समय था जब एपीजे अब्दुल कलाम आजाद ने डॉ. वीएस अरुणाचलम के साथ इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके अलावा इसी दौरान आजाद साहब की अध्यक्षता में स्वदेशी मिसाइलों के विकास के एक कमेटी भी बनाई गई थी। वहीं सबसे पहले एक सीमित एवं मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल बनाने पर जोर दिया गया। इसके बाद पृथ्वी से हवा में मार करने वाली टैंकभेदी मिसाइल और रिएंट्री एक्सपेरिमेंट लॉन्च वेहकिल (रेक्स) बनाने पर जोर डाला गया।

दूरदर्शी सोच रखने वाले कलाम जी के नेतृत्व में सन् 1988 में पृथ्वी, साल 1985 में त्रिशूल और 1988 में ‘अग्नि’ मिसाइल का परीक्षण किया गया। इसके अलावा अब्दुल कलाम जी की अध्यक्षता में  आकाश, नाग नाम की मिसाइलें भी बनाईं गईं।

साल 1998 में एपीजे अब्दुल कलाम जी ने रुस के साथ मिलकर भारत ने ब्रह्रोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम करने की शुरुआत की। आपको बता दें कि ब्रह्रोस एक ऐसी मिसाइल है, जिसे आकाश, पृथ्वी और समुद्र कहीं पर भी दागा जा सकता है। इसी साल उन्होंने ह्रद्य चिकित्सक सोमा राजू के साथ मिलकर एक सस्ता ”कोरोनरी स्टेंट” का विकास किया, जिसे कलाम-राजू स्टेंट नाम दिया गया।

विज्ञान के क्षेत्र में अब्दुल कलाम जी के द्धारा किए गए महत्वपूर्ण योगदान और सफलताओं के बाद उनका नाम दुनिया के सबसे मशहूर वैज्ञानिकों में गिना जाने लगा और उनकी ख्याति ‘मिसाइल मैन’ के रुप में  दुनिया के चारों कोनों में फैल गई। वहीं विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए उन्हें कई बड़े पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।

देश के सबसे पहले गैरराजनीतिज्ञ राष्ट्रपति के रुप में अब्दुल कलाम – APJ Abdul Kalam as President

भारत की ‘अग्नि’ मिसाइल को उड़ान देने वाले मशहूर वैज्ञानिक अब्दुल कलाम आजाद जी द्धारा भारत को एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाने एवं विज्ञान एवं भारतीय अनुसंधान एवं रक्षा के क्षेत्र में उनके द्धारा दिए गए महत्वपूर्ण योगदान देने की वजह से वे दुनिया भर में इतने मशहूर हो गए कि राजनैतिक जगत में कई राजनैतिक पार्टियां भी भी उनके नाम को भुनाने के जुगत में लग गईं।

एपीजे अब्दुल कलाम जी की प्रसिद्धि को देखते हुए सन 2002 में NDA की गठबंधन सरकार ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए उन्हें अपना एक मजबूत उम्मीदवार के तौर पर खड़ा किया, वहीं एपीजे की राष्ट्रपति उम्मीदवारी को विपक्ष ने बिना किसी विरोध के स्वीकार कर लिया। इसके बाद राष्ट्रपति के चुनाव में कलाम साहब जी ने अपने विरोधी लक्ष्मी सहगल को भारी वोटों से हराकर विजय प्राप्त की और फिर साल 2002 में देश के 11वें राष्ट्रपति के पद की शपथ ली।

इसी के साथ कलाम साहब देश के ऐसे पहले राष्ट्रपति बने जिनका राष्ट्रपति बनने से पहले राजनीति से कोई वास्ता नहीं था, इसके साथ ही वे देश के पहले ऐसे वैज्ञानिक थे, जो इस पद पर सुशोभित हुए, राष्ट्रपति के पद की कमान संभालने के साथ ही उन्होंने देश के सभी वैज्ञानिकों का सीना फक्र से चौड़ा कर दिया।

इसके साथ ही अब्दुल कलाम जी देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के पद पर सुशोभित होने वाले ऐसे तीसरे राष्ट्रपति थे, जिन्हें इस पद पर बैठने से पहले भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ”भारत रत्न” से सम्मानित किया गया था। इससे पहले डॉ. जाकिर हुसैन और डॉ राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनने से पहले इस सम्मान से नवाजा जा चुका था।

वहीं राष्ट्रपति बनने के बाद भी वे अपने स्तर पर लोगों से मिलते रहते थे, आम लोगों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते थे। वहीं कई पत्रों का जबाव तो वे खुद अपने हाथों से लिखकर देते थे, इसलिए उन्हें ”जनता का राष्ट्रपति” (पीपुल्स प्रेसीडेंट) भी कहा गया। डॉ. अब्दुल कलाम जी के मुताबिक, राष्ट्रपति के रूप में उनके द्वारा लिए गए सबसे मुश्किल फैसलों में लाभ के कार्यालय के बिल पर हस्ताक्षर करना था।

यही नहीं साल 2001 में संसद हमलों में दोषी पाए गए कश्मीरी आतंकवादी अफजल गुरू समेत 21 में से 20 लोगों की दया याचिकाओं के भाग्य के फैसलों की निष्क्रियता के लिए अब्दुल कलाम जी को एक राष्ट्रपति रूप में काफी आलोचनाएं भी सहनी पड़ी थीं।

राष्ट्रपति पद छोड़ने का बाद का सफर – APJ Abdul Kalam after President

भारत की ‘अग्नि’ मिसाइल को उड़ान देने वाले मशहूर वैज्ञानिक अब्दुल कलाम आजाद जी ने अपने 11वें राष्ट्रपति के तौर पर 5 साल तक अपनी सेवाएं देने के बाद भी वे अपने काम के प्रति उतने ही ईमानदारी और निष्ठा के साथ समर्पित रहे। राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद वे टीचिंग, रिसर्च, लेखन, सार्वजनिक सेवा जैसे कार्यों में अपनी पूरी मेहनत और ईमानदारी से जुट गए।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, शिलांग, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट इंदौर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट अहमदाबाद जैसे इंस्टीट्यूट से गेस्ट प्रोफेसर के तौर पर जुड़े रहे। अब्दुल कलाम  जी ने IIT हैदराबाद, अन्ना यूनिवर्सिटी एवं बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) में भी इंर्फोमेशन टेक्नोलॉजी का विषय पढ़ाया था।

इसके अलावा कलाम जी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर के फेलो, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी तिरुवनंतपुरम के वाइस चांसलर और चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी में एरोस्पेस इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर अपनी जिंदगी के आंखिरी पलों तक काम करते रहे।

अब्दुल कलाम जी हमेशा देश की प्रगित और विकास के बारे में सोचने वाले शख्सिसयत थे, जिन्होंने देश के युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने एवं भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के उद्देश्य से उनके लिए ”व्हाट कैन आई गिव” पहल की भी शुरुआत की थी।

इसके साथ ही आपको बता दें कि देश के हर नागरिक के दिल में अपने लिए प्यार और सम्मान जगाने वाले कलाम जी को छात्रों से खास लगाव था। वहीं अब्दुल कलाम जी के इस खास लगाव को देखते हुए देखकर संयुक्त राष्ट्र ने उनके जन्मदिन को ‘विधार्थी दिवस’ (World Students’ Day) के रुप में मनाने का भी फैसला लिया है।

एपीजे अब्दुल कलाम जी की किताबें – APJ Abdul Kalam Books

भारत के एक महान वैज्ञानिक, कुशल राजनैतिक और प्रख्यात टीचर होने के साथ-साथ अब्दुल कलाम जी एक महान लेखक भी थे, अब्दुल कलाम जी को शुरु से ही लिखने का शौक था, वहीं उनके द्धारा लिखी कुछ प्रसिद्ध किताबों के बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं, जो कि इस प्रकार है –

  • ‘इंडिया 2020: अ विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम’,
  • ‘इग्नाइटेड माइंडस: अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’,
  • ‘विंग्स ऑफ़ फायर: ऐन ऑटोबायोग्राफी’,
  • ‘इंडोमिटेबल स्पिरिट’
  • ‘मिशन इंडिया’
  • एडवांटेज इंडिया
  • ”यू आर बोर्न टू ब्लॉसम”
  • ‘इन्सपायरिंग थोट्स’
  • ”माय जर्नी”
  • ”द ल्यूमिनस स्पार्क्स”
  • रेइगनिटेड

अब्दुल कलाम जी को सम्मान और उपलब्धियां – APJ Abdul Kalam Awards

डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम आजाद जी द्धारा तकनीकी और विज्ञान में दिए गए उनके महत्वपूर्ण योगदान एवं समाज में उनके द्धारा किए गए महत्वपूर्ण कामों के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न समेत पदम भूषण, पदम विभूषण समेत कई बड़े पुरस्कारों से सम्म्मानित किया गया।

इसके साथ ही उनके सम्माम में दुनिया की 35 से भी ज्यादा यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजा। अब्दुल कलाम जी को मिले पुरस्कारों की लिस्ट नीचे दी गई है –

अब्दुल कलाम जी को मिले पुरस्कारों की लिस्ट:

पुरस्कार मिलने का वर्ष पुरस्कार
वर्ष 1997 भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।
वर्ष 1990 भारत सरकार द्धारा पद्म विभूषण से नवाजा गया
साल 1981 भारत सरकार द्धारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया
साल 2011 IEEE होनोअरी मेंबरशिप (मानद सदस्यता)
साल 1997 इंदिरा गांधी पुरस्कार से नवाजा गया।
साल 1998 भारत सरकार द्धारा वीर सावरकार पुरस्कार
साल 2000 चेन्नई के अलवर रिसर्च सेंटर ने रामानुजन पुरस्कार से सम्मानित किया
साल 2015 संयुक्त राष्ट्र ने कलाम जी की जयंती को “विश्व छात्र दिवस”के रुप में मान्यता दी।

 

एपीजे अब्दुल कलाम जी का सरल स्वभाव एवं प्रेरक व्यक्तित्व भारत के मिसाइल मैन के नाम से पहचाने जाने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आजाद जी ने अपने प्रेरक और प्रभावशाली व्यक्तित्व का प्रभाव हर भारतीय पर छोड़ा था। बहुमुखी प्रतिभा वाले कलाम साहब बेहद सौम्य एवं सरल स्वभाव वाले व्यक्ति थे, जो हर काम को बेहद बुद्दिमानी और संजीदगी के साथ उसके मुकाम तक पहुंचाते थे।

कलाम जी ने अपने जीवन में कठिन परिस्थितयों में पूरी हिम्मत और धैर्य के साथ कठोर संघर्षों का सामना किया और आगे बढ़ने का लक्ष्य लेकर वे ईमानदारी और निष्ठा के साथ आगे बढ़ते रहे और देश के एक मशूहर वैज्ञानिक और पहले गैरराजनैतिज्ञ राष्ट्रपति बनकर सभी के प्रेरणास्त्रोत बने।

देश में अग्नि मिसाइल की उडा़न भरने वाले कलाम जी के  महान विचार और प्रखर वाकशक्ति हर किसी को मंत्र-मुग्ध करती थी और नौ जवानों के दिल में कुछ नया करने का जोश भरती थी। उनकी दूरदर्शी सोच का अंदाजा उनके द्दारा लिखी गईं किताबों और उनके महान विचारों द्धारा लगाया जा सकता है।

कलाम जी का कहना था कि –

”सपने वो नहीं है जो आप सोते वक्त देखें, बल्कि सपने वो हैं जो आपको नींद नहीं आने दें” इसके अलावा उनके द्धारा दिए गए कई अन्य ऐसे अनमोल विचार हैं, जो युवाओं के अंदर उनकी जिंदगी में आगे बढ़ने का जज्बा पैदा करती हैं, और अपने लक्ष्य को पाने के लिए प्रेरित करते हैं –

एपीजे अब्दुल कलाम जी के महान विचार – APJ Abdul Kalam Thoughts

  • ”अगर आप अपने किसी प्रयास में FAIL हो जाएं तो फिर से कोशिश करना बिल्कुल भी न छोड़ें क्योंकि, FAIL का मतलब होता है – First Attempt in Learning.
  • अपनी पहली सफलता के बाद आराम करने के बारे में बिल्कुल भी न सोचें क्योंकि अगर आप दूसरे प्रयास में असफल होंगे, तो सब लोग आपसे यही कहेंगे कि पहली सफलता आपको किस्मत से मिली थी।
  • रचनात्मकता का मतलब एक ही चीज के बारे में अलग-अलग ढंग से सोचना है।
  • अगर तुम भी चाहते हो कि तुम सूरज की तरह चमको, तो इससे पहले सूरज की तरह जलो।
  • हमें अपनी जिंदगी में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और ना ही समस्याओं को खुद को हराने देना चाहिए।
  • शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का।

अब्दुल कलाम जी की मृत्यु – APJ Abdul Kalam Death

भारत को एक परमाणु शक्ति संपन्ना राष्ट्र बनाने वाले अब्दुल कलाम जी को विद्यार्थियों के साथ अपना समय बिताना बेहद अच्छा लगता था। एक एक अध्यापक के रुप में हमेशा विद्यार्थियों की जिज्ञासा को शांत करने की कोशिश में रहते थे।

वहीं 25 जुलाई, सन् 2015 में कलाम जी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, शिलांग (IIM, शिलांग) में एक फंक्शन के दौरान लेक्चर दे रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत शिलांग के हॉस्पिटल में एडमिट किया गया, लेकिन उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं आया और इसी दौरान उन्होंने अपनी जीवन की अंतिम सांस ली।

कलाम जी के शवयात्रा में अपने चहेते राजनेता के अंतिम दर्शन के लिए लाखों की तादाद में भीड़ उमड़ी। कलाम जी का अंतिम संस्कार रामेश्वर में उनके पैतृक गांव में किया गया। इस तरह भारत का यह महान शख्सियत हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गया। हालांकि उनकी तमाम यादें आज भी हर भारतीय के दिल में जिंदा है।

कलाम जी जैसी महान शख्सियत का भारत देश में जन्म लेना भारत के लिए गौरव की बात है। वहीं कलाम जी का संघर्षपूर्ण जीवन और उनके महान विचार हर व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। ज्ञानी पंडित की पूरी टीम की तरफ से भारत के इस महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी को भावपूर्ण श्रंद्धाजली ।।

और अधिक लेख:

  1. अब्दुल कलाम के अनमोल विचार
  2. APJ Abdul Kalam Speech
  3. डॉ एपीजे अब्दुल कलाम पुस्तकें
  4. भारत के राष्ट्रपति और जीवनी
  5. Essay On Apj Abdul Kalam

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25 COMMENTS

  1. अब्दुल कलाम जी बहुत नम्र थे | छात्रों में वों जादा लोकप्रिय थे | इसलिये छात्रोंको प्रश्न पुछने का अवसर देते थे |
    बहुत अच्छा आर्टिकल है |
    धन्यवाद

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