“बार्डोली सत्याग्रह” ऐतिहासिक किसान आंदोलन

Bardoli Satyagraha in Hindi

भारतीय स्वाधीनता संघर्ष के इतिहास मे कुछ प्रमुख आंदोलन काफी महत्वपूर्ण रहे जिन्होने ना केवल अंग्रेजी हुकुमत को हिला दिया बल्की भारतीय जनता की एकता के रूप मे ये आंदोलन उभर कर सामने आये।

इन आंदोलन मे शामिल कुछ खास आंदोलन जैसे के सविनय कानून भंग, असहकार आंदोलन, दांडी मार्च, छोडो भारत आंदोलन प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलन के तौर पर भारत के लगभग सभी हिस्सो मे पहुचे थे। आज हम आपको ऐसेही एक खास आंदोलन की जानकारी इस लेख के माध्यम से देनेवाले है, जिसे किसान आंदोलन के रूप मे जाना जाता है।

हम बात कर रहे है ‘बार्डोली सत्याग्रह’ की जिसने सरदार पटेल और महात्मा गांधी के सक्षम नेतृत्व की पहचान समस्त विश्व को कराई थी।यहा आप इस आंदोलन से जुडी हर महत्वपूर्ण बातो को बारिकियो से जान पायेंगे।

“बार्डोली सत्याग्रह” ऐतिहासिक किसान आंदोलन – Bardoli Satyagraha in Hindi

Bardoli Satyagraha in Hindi
Bardoli Satyagraha in Hindi

बार्डोली सत्याग्रह के बारे में एक नजर में – Information About Bardoli Movement

आंदोलन का नाम बार्डोली सत्याग्रह आंदोलन (Bardoli Satyagraha)
आंदोलन के प्रमुख नेता सरदार वल्लभभाई पटेल, महात्मा गांधी
आंदोलन का साल (Bardoli Satyagraha Date) साल १९२८
आंदोलन की प्रमुख मांग कृषी पर लगने वाला सालाना टैक्स २२ प्रतिशत से घटाकर कम कर दिया जाए
आंदोलन का नतीजा किसानो का कृषी संबंधी टैक्स घटाकर २२ प्रतिशत से ६.०३ प्रतिशत तक कम हुआ

बार्डोली मे सत्याग्रह आंदोलन करने के पीछे की वजह – Causes of Bardoli Satyagraha

यहा विस्तार से चर्चा करेंगे उन प्रमुख कारणो की जिसने बार्डोली मे बडे स्तर पर सत्याग्रह आंदोलन को जन्म दिया।

  • बार्डोली गुजरात का वो इलाखा था जो पहले से ही सुखे,अकाल,तथा बाढ की मार से जुझ रहा था, आये दिन आपदाओ ने यहा के किसान और मोल मजदुरी करने वाले लोगो का जिना काफी मुश्कील कर दिया था। खेती से संबंधित गुजारा करने वाले लोगो की स्थिती संभलना तो दूर दिन-ब-दिन और बद से बदतर हो रही थी।
  • इसी बीच प्रांतिक ब्रिटीश शासन द्वारा साल १९२८ मे खेती पे लगने वाले सालाना करप्रणाली मे भारी बदलाव कर दिये थे, तत्कालीन बुरे परिस्थितियो के बावजुद खेती पे लगने वाले करो मे सरकार द्वारा २२ प्रतिशत तक बढोतरी कर दी थी।
  • जो किसान और गरीब वर्ग बुरे आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा थे उनके रोजगार साधन पे भारी मात्रा मे कर लगाने से स्थानिक जनता और किसान और अन्य वर्गो मे ब्रिटीश सरकार के विरुध्द काफी ज्यादा गुस्सा और असंतोष फैला हुआ था।
  • इस कर प्रणाली को हटाकर किसानो को राहत देने के विषय मे पहले ही प्रांतिक शासन और बॉम्बे प्रेसिडेन्सी को न्यायिक मांग संबंधी याचिका दाखिल की गई थी पर ब्रिटीश सरकार के तरफ से कोई भी समाधान पूर्वक कदम नही उठाया गया था। दुसरे और किसान काफी आक्रोश और गुस्से मे थे और साफ तौर पर वो इस करप्रणाली को बर्खास्त करने की मांग कर रहे थे।

उपरोक्त दिये गये सभी प्रमुख मुद्दो ने बार्डोली मे जन आंदोलन को जन्म दिया, हालाकि साल १९२२ से स्थानिक स्तर पर छोटे बडे किसान आंदोलन कल्याण जी और कुंवर जी नामक मेडता बन्धुओ द्वारा यहा होते रहे।

पर साल १९२८ मे सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व मे हुये आंदोलन ने किसानो की दिशा और दशा को ही बदल दिया, जिसके बाद आये सकारात्मक परिणामो पर हम आगे चर्चा करेंगे।

बार्डोली सत्याग्रह – सरदार पटेल और महात्मा गांधी का योगदान – Bardoli Satyagraha was Led by Mahatma Gandhi & Sardar Patel

Sardar Vallabhbhai Patel Bardoli Satyagraha
Sardar Vallabhbhai Patel Bardoli Satyagraha

सरदार पटेल जी महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आंदोलन से काफी पहले से जुडे हुये थे, तथा गांधीजी के विचारो का उनपर काफी प्रभाव भी था। इसके अलावा सरदार पटेल जी ने गुजरात के खेडा इलाके मे पहले ही किसानो के हक मे आंदोलन को सफलता पूर्वक चलाया था। जिसके मद्दे नजर गुजरात के स्थानिक कार्यकर्ता नरहरी पारीख, मोहनलाल पंड्या और रवी शंकर व्यास ने बार्डोली के स्थानिक लोगो और किसानो से चर्चा कर उनके समस्याओ को समझा।

तत्कालीन परिस्थिती मे किसानो के इन सभी समस्याओ को सरदार वल्लभभाई पटेल को बताया गया, उस समय सरदार पटेल ने हाल फिलहाल मे ही अहमदाबाद के मुन्सिपल प्रेसिडेंट के तौर पर सेवा कार्यभार भी पुरा किया था।

किसानो के इस संवेदनशील मुद्दे पे पटेल जी ने गहराई से ध्यान दिया और बॉम्बे के गवर्नर को इस अनुचित कर प्रणाली संबंधी पत्र भी लिखा जिसमे उन्होने बढे हुये टैक्स को बर्खास्त करने की मांग की।

इसका कोई समाधान पूर्वक नतीजा नही आया इसके बजाय बॉम्बे के गवर्नर ने सरदार पटेल जी के पत्र को अनदेखा कर टैक्स को हटाने से साफ इनकार कर दिया।

इसके बाद ब्रिटीश सरकार ने स्थानिक किसानो के साथ अडोस पडोस के गाव के लोगो को पुलिस द्वारा धमकाना शुरू किया जिसमे सरकार ने सूचना जारी की, जो भी किसान इस टैक्स को जमा करने से इनकार करेंगे उनके जमिनो को सरकार द्वारा निलाम किया जायेगा, साथ ही उनकी अन्य संपत्ति जैसे जानवर इत्यादि को जब्त किया जायेगा।

इस घटना के बाद सरदार पटेल जमिनी स्तर पर कार्य मे जूट गये उन्होने बार्डोली और आस पास के गावो के लोगो से संपर्क अभियान शुरू कर दिया,जिसमे भारी मात्रा मे किसानो को जोडा गया।

महात्मा गांधी की प्रेरणा और सरदार पटेल के मजबूत नेतृत्व की बदौलत बार्डोली मे बडे स्तर पर किसान आंदोलन को शुरू किया गया। इसमे महिला, पुरुष और बुजुर्गो से लेकर सबका सहयोग मिलना शुरू हुआ, सरकार से प्रमुखता से मांगे रखी गयी की किसी भी हाल मे टैक्स को घटाकर किसानो के हक़ मे फैसला लिया जाये और उन्हे राहत दी जाये।

इस आंदोलन को ब्रिटीश सरकार ने कुचलने के सभी भरसक प्रयास किये पर वे सफल नही हो सके, सरकार के बुरे बर्ताव के विरुध्द बॉम्बे विधान परिषद के सभी भारतीय राजनेताओ ने त्यागपत्र दे दिया जिस से आंदोलन को और बल मिल गया।

महात्मा गांधी ने किसी भी हाल मे किसानो को राहत मिले बगैर आंदोलन ना रोकने की सभी से अपील की। इसका परिणाम ये हुआ के तत्कालीन वाईसराय लॉर्ड इरविन ने पुरे मामले पे जांच कमिटी बनाने के आदेश दिये।

इसके तहत न्यायिक अधिकारी बुमफिल्ड और राजस्व अधिकारी मैक्सवेल ने मामले की जांच कर २२ प्रतिशत टैक्स को गलत करार दिया और इसे तुरंत हटाने की सिफारिश की। और अंततः टैक्स के दरो को ६.०३ प्रतिशत तक घटा दिया गया।

इस प्रकार से बार्डोली के सत्याग्रह को ऐतेहासिक जीत हासिल हुई, और किसान वर्ग मे सरदार पटेल के नेतृत्व की काफी सराहना की गई।

बार्डोली सत्याग्रह ने वल्लभभाई पटेल को बनाया “सरदार” – Bardoli Satyagrah – Vallabhbhai Patel Had becomes a ‘Sardar’

Bardoli Satyagraha Image
Bardoli Satyagraha Image

सरदार पटेल के अथक प्रयास, कुशल नेतृत्व और कुटनीती के बदौलत बार्डोली मे ब्रिटीश सरकार को किसानो की मांगो के सामने घुटने टेकने पडे। वल्लभभाई के कार्य की प्रशंसा करते हुये स्थानिक महिला, कार्यकर्ता और जनता ने उन्हे ‘सरदार’ के नामसे पुकारा। सरदार मतलब कठीण परिस्थितीयो मे भी डटकर साहस से मुकाबला करने वाला तथा उलझन से राहत दिलाने वाला।

इस प्रकार से विभिन्न पाडावो को पार कर बार्डोली के किसानो ने सरदार पटेल जी के नेतृत्व मे आंदोलन सफल कराया और देश और दुनिया के इतिहास मे इस घटना को किसानो के अभूतपूर्व सफल आंदोलन के तौर पर जाना गया।

बार्डोली सत्याग्रह के बारेमें अक्सर पुछे गये सवाल – Bardoli Satyagraha Quiz Questions

  1. बार्डोली सत्याग्रह आंदोलन के पिछे के प्रमुख वजह क्या थी? (Bardoli Satyagraha was Launched Against)

जवाब: ब्रिटीश सरकार द्वारा किसानो के खेती पर सालाना टैक्स मे २२ प्रतिशत तक वृद्धी कर दि गई थी, जो के काफी अन्यायपूर्ण घटना थी इसके विरोध मे बार्डोली मे सत्याग्रह आंदोलन किया गया था।

2. बार्डोली सत्याग्रह आंदोलन कब शुरू किया गया था? (Bardoli Satyagraha Date)

जवाब: साल १९२८ मे।

3. भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी वल्लभभाई पटेल को ‘सरदार’की उपाधी किसने दी थी? (Who gave ‘Sardar’ title to Vallabhbhai Patel?)

जवाब: बार्डोली की महिलाओ ने सरदार पटेल जी को सरदार की उपाधी दी थी।

4. गुजरात के बार्डोली मे सत्याग्रह आंदोलन के समय भारत मे ब्रिटीश वाईसराय कौन था? (Who was the Viceroy in India During Bardoli Satyagrah Movement?)

जवाब: लॉर्ड इरविन।

5. बार्डोली के सत्याग्रह आंदोलन की सफलता क्या रही? (What was the achievement of Bardoli Satyagrah Movement?)

जवाब: ब्रिटीश सरकार को खेती पर २२ प्रतिशत तक बढाए हुये टैक्स को घटाकर ६.०३ प्रतिशत तक कम करना पडा था, ये मुख्य रूप से आंदोलन की सफलता साबित हुई थी।

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