काशीबाई बाजीराव बल्लाल का जीवन परिचय

Kashibai Ballal in Hindi

भारतीय इतिहास में अनेक विरो की गौरव गाथाएँ वर्णित है जिनका विश्वभर के इतिहासकार ने आदर और गौरवपूर्ण शब्दों में बहुत से जगहों पर उल्लेख किया है। पर भारत के इतिहास में ना केवल नरवीर हुए बल्कि कुछ प्रसिध्द रणांगनाये भी हुई है,जो ना केवल प्रशासन कौशल रखती थी बल्कि वक्त आने पर उन्होने युध्दभूमि में भी दुश्मन के विरुध्द युद्ध लड़ा था। इनमे शामिल रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, रजिया सुलतान आदि का उल्लेख करना अवश्यप्राय बन जाता है। यहाँ आप मराठा साम्राज्य के ऐसेही एक साहसी और कर्तव्यशाली रानी के बारे में पढ़ेंगे जिन्हे ‘काशीबाई’ के नामसे भारतीय इतिहास में आदर के साथ जाना जाता है।

मराठा साम्राज्य को पेशवाओ ने उस बुलंदी पर लाया था, जहाँ चहुओर दूर लगभग मराठाओ का शासन कायम हुआ था, काशीबाई पेशवाओ के सबसे प्रभावशाली शासक बाजीराव प्रथम की पहली पत्नी थी, जिन्होंने एक पत्नी होने के नाते शासक बाजीराव को यथापूर्ण आवश्यक योगदान भी दिया था।

ऐसे कर्तव्यपरायण, साहसी और धर्मनिष्ट रानी के जीवन परिचय पर हम इस लेख के माध्यम से रौशनी डालेंगे जिसमे आपको काशीबाई बल्लाल के बारे में बहुत से पहलुओं पर जानने को मिलेगा।

काशीबाई बाजीराव बल्लाल का जीवन परिचय। Biography of Kashibai in Hindi

काशीबाई बल्लाल के बारे में – Important Basic Information About Kashibai Ballal History in Hindi

संपूर्ण नाम (Full Name)काशीबाई बाजीराव बल्लाल
जन्म (Date of Birth)१९ अक्टूबर १७०३।
पिता का नाम (Father Name)महादजी कृष्णा जोशी।
माता का नाम (Mother Name)शुबाई।
भाई -बहनकृष्णराव चासकर(भाई)।
जन्मस्थान (Birth Place)चासकमान गाँव, पुणे जिला (महाराष्ट्र)
पति का नाम (Spouse) बाजीराव बल्लाल (बाजीराव पेशवा प्रथम)
संतान (Children’s Name)बालाजी बाजीराव (पेशवा नानासाहेब), रघुनाथ राव, जनार्दन, रामचंद्र।
अन्य नाम (Other Name)काशी, लाडुबाई, पेशविनबाई।
मृत्यु (Death)२७ नवंबर १७५८।
मृत्युस्थान (Death Place)सातारा(महाराष्ट्र)

काशीबाई के प्रारंभिक जीवन के बारे में जानकारी – Early Life Information About Kashibai

महाराष्ट्र राज्य के पुणे जिले में तत्कालीन मराठा साम्राज्य के अधीन आनेवाले एक छोटेसे गाँव चासकमान में १९ अक्टूबर १७०३ में काशीबाई का ब्राह्मण परिवार में जन्म हुआ था, उनके पिता का नाम महादजी कृष्ण जोशी और माता का नाम शुबाई था। एक धनी और खुशहाल परिवार में जन्म होने के कारण काफी ज्यादा लाड और प्यार के साथ इनका बचपन गुजरा था। इसी वजह से काशीबाई को अन्य नाम लाडूबाई के नामसे भी पुकारा जाता था, काशीबाई को एक भाई भी थे जिनका नाम कृष्णराव था।

काशीबाई के पिता महादजी ने मराठा साम्राज्य के प्रमुख शासक छत्रपति शाहू को बहुत बार विपरीत परिस्थिति में मदद की थी उसी के लिए छत्रपति द्वारा इन्हे कल्याण प्रान्त का सूबेदार बनाया गया था, इसके अलावा महादजी तत्कालीन समय में उस प्रान्त के एक बड़े साहूकार भी हुआ करते थे। इत्यादि कारणों से महादजी के शुरू से मराठा शासन से अच्छे संबंध थे, इसके तहत पेशवाओ के परिवार के साथ आगे चलकर महादजी के घर के विवाह संबंध स्थापित हुए।

काशीबाई – बाजीराव प्रथम का विवाह तथा संताने – Marriage of Kashibai – Bajirao First and Their Child’s

आयु के १७ वे साल में काशीबाई का विवाह पेशवा साम्राज्य के सबसे साहसी और वीर शासक बाजीराव प्रथम के साथ साँसवड नामक जगह पर ११ मार्च १७२० को सम्पूर्ण विधि विधान के साथ सम्पन्न हुआ था, बाजिराव और काशीबाई के बिच काफी मधुर और प्रेमपूर्ण संबंध थे, काशीबाई पेशवा बाजिराव प्रथम की प्रथम पत्नी थी।

अपने पति को काशीबाई ने आयु के अंतिम क्षण तक यथासंभव समर्पण और सहयोग दिया था, काशीबाई ने ना केवल पारिवारिक बल्कि शासन सम्बन्धी जिम्मेदारियों को भी पति के राज्य में मौजूद ना होने के दौरान संभाला था। काशीबाई और पेशवा बाजीराव प्रथम को कुल चार संताने हुई थी जो के सभी पुत्र थे जिनके क्रमशः नाम बालाजी बाजीराव (पेशवा नानासाहेब), रघुनाथ राव, रामचंद्र राव और जनार्दन राव थे।

इनके कुल चार संतानो में से दो संतानो की काफी कम आयु में मृत्यु हुई थी जिनमे रामचंद्र और जनार्दन शामिल थे, बाजीराव के बाद अगले पेशवा शासक के रूप में पेशवा नानासाहेब ने मराठा साम्राज्य की गद्दी संभाली थी।

काशीबाई- पेशवा बाजीराव प्रथम और मस्तानी – Kashibai and Mastani Relationship

शुरू में बाजीराव और काशीबाई के बिच संबंध काफी प्रेमपूर्ण और मधुर थे, इसके अलावा बाजीराव ने काशीबाई को काफी ज्यादा आदर और अधिकार भी दिए थे। इसके चलते बहुत बार बाजीराव के युध्द मुहीम में होने के समय राज्य के शासन की अधिकतर जिम्मेदारियों को काशीबाई बखूबी निभाती थी, बाजीराव के प्रति काशीबाई का समर्पण, प्रेम और विश्वास बहुत अधिक था, इसलिए वह अपने पति को अपना गुरुर मानती थी।

काशीबाई और बाजिराव के संबंध में खटास तब पैदा हुई जब बाजीराव ने बुंदेलखंड के शासक छत्रसाल की पुत्री मस्तानी से विवाह कर लिया था, तत्कालीन समय में एक से अधिक विवाह होना आम सी बात थी पर इस घटना ने काशीबाई के मानो गुरुर पर ही चोट कर दी थी।

हालांकि इतिहास के अनुसार काशीबाई ने मस्तानी के साथ कभी भी सौतन की तरह बरताव नहीं किया था, इतना ही नहीं पेशवा बाजीराव और मस्तानी के मृत्यु पश्चात इनके पुत्र शमशेर बहादुर प्रथम का भी काशीबाई ने अच्छी तरह से खयाल रखा तथा उसे राज्य में अच्छे पद पर स्थान दिया था।

पेशवा बाजीराव प्रथम के मृत्यु पश्चात काशीबाई का जीवन – Kashibai Life After Death of Bajirao Peshawa First.

अपने आयु के अंतिम दिनों में बाजीराव अत्यधिक बीमार रहने लगे थे उस समय एक कर्तव्यपरायण पत्नी की तरह काशीबाई ने पति की सेवा की थी, बाजीराव के मृत्यु तक काशीबाई उनके साथ सेवा में थी तथा मृत्यु शय्या तक एक पत्नी के सारे दायित्व को उन्होंने हर प्रकार से पूरा किया था ।

 

ईसवी सदी १७४० को बाजीराव प्रथम की मृत्यु के पश्चात कुछ दिनों बाद मस्तानी की भी मृत्यु हुई थी, इस घटना के बाद काशीबाई के जीवन में बहुत ज्यादा परिवर्तन हुआ। अपना अधिकतर समय काशीबाई ने धार्मिक गतिविधियों में व्यस्त कर दिया था, तथा साल १७४९ को उन्होंने सोमेश्वर शिवमंदिर का भी पुणे जिले में निर्माण कराया जो आज भी अत्याधिक प्रसिध्द माना जाता है।

इतिहास के दस्तावेजों अनुसार एक तीर्थस्थल यात्रा के लिए काशीबाई ने तत्कालीन समय में १ लाख रूपये तक खर्चा कर दिया था जिसमे उन्होंने लगभग १०,००० यात्रियों को यात्रा कराई थी। सौतेले पुत्र शमशेर बहादुर का काशीबाई ने मस्तानी के मृत्यु के पश्चात अच्छी तरह से पालन पोषण किया तथा उसे सभी प्रकार से राज्य और युद्ध निति हेतु प्रशिक्षित भी करवाया था।

काशीबाई की मृत्यु – Kashibai Death

पति की मृत्यु के पश्चात काशीबाई अधिकतर समय राज्य से बाहर व्यतीत करने लगी थी, जिसमे धार्मिक गतिविधियों हेतु वह लगभग चार साल तक बनारस में भी रही थी। इसिके चलते २७ नवंबर १७५८ को महाराष्ट्र के सातारा नामक स्थान पर काशीबाई की मृत्यु हो गई थी, तत्कालीन समय में सातारा को मराठा साम्राज्य का केन्द्रस्थान माना जाता था।

इस प्रकार से जीवन के अंतिम समय तक धर्म, शासन व्यवस्था और पत्नी धर्म की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने वाली रानी के रूप में इतिहास में काशीबाई बल्लाल को पहचाना जाता है। पेशवा और मराठा साम्राज्य के इतिहास में काशीबाई को एक जिम्मेदार, धर्मनिष्ट और सक्षम रानी के रूप में माना जाता है, जिनके द्वारा पैतृक गाँव में निर्माण किये गए शिव मंदिर को आज भी श्रद्धालु और इतिहास प्रेमी लोग भेंट देने आते है।

अबतक आपने इस प्रकार से काशीबाई बल्लाल के जीवन से जुडी सभी महत्वपूर्ण बातो को जाना, हमें पूरा विश्वास है के दी गई जानकारी आपको काफी पसंद आयी होगी इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुँचाने हेतु उन तक लेख को अवश्य साझा करे, हमसे जुड़े रहने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।

काशीबाई बल्लाल से संबंधित अधिकतर बार पूछे जाने वाले सवाल – Frequently asked questions about Kashibai

Q. पेशवा बाजीराव की प्रथम पत्नी का नाम क्या था? (What was the name of Bajirao peshawa first wife?)

जवाब: काशीबाई बाजीराव बल्लाल।

Q. काशीबाई बल्लाल और बाजीराव बल्लाल के संतानो के नाम क्या थे? (what are the names of Kashibai and Bajirao Ballal children’s?)

जवाब: बालाजी बाजीराव (पेशवा नानासाहेब), रघुनाथराव, रामचंद्रराव, जनार्दनराव।

Q. काशीबाई बल्लाल का जन्म कहाँ पर हुआ था? (Where did kashibai ballal born?)

जवाब: चासकमान गाँव, पुणे जिला (महाराष्ट्र)

Q. उम्र के कौनसे आयु में काशीबाई बल्लाल की मृत्यु हुई थी? (On which age did kashibai ballal died?)

जवाब: ५५ वे साल में।

Q. किस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल का निर्माण काशीबाई बल्लाल ने किया था? (Which famous religious place was built by Kashibai Ballal?)

जवाब: भगवान शिव से जुड़े धार्मिक स्थल सोमेश्वर शिवमंदिर का निर्माण काशीबाई बल्लाल ने करवाया था।

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