लॉकडाउन के बारे में निबंध तौर पर जानकारी

Essay on Lockdown

वैश्विक महामारी के इतिहास से हम में से शायद सभी लोग परिचित नहीं होंगे, पर तक़रीबन विश्व के सभी क्षेत्र और तपके के लोगो ने इसकी मार को बहुत बार झेला है।

लगभग हर सौ साल के अंतराल में इस तरह की आपदा से दुनिया को त्रासदी के दौर से गुजरना पड़ा है।जिसमे जान माल का नुकसान तो हुआ ही साथ साथ हर बार एक नया सबक मानव जाती को मिला, पर आज स्थिती थोड़ी अलग तथा अत्यंत गंभीर और संवेदनशील देखने को मिल रही है।

जी हा आजके मौजूदा हालात में एक तरफ इंसानी जान कोरोना या “कोविड-१९” के जानलेवा विषाणु से तो लड़ रही है।पर साथमे मन को हैरान करनेवाला दृश्य ये है के विषाणु के फैलाव को रोकने के लिए हमें खुदको घरो में कैद करने जैसे हालात पैदा हुए है। जिसे हम आम भाषा में लॉकडाउन या ‘तालाबंदी’ कहते है।

सचमे इससे बुरा और क्या हम और आप देख सकते है, जहा अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बादी के कगार पे है। साथ मे सभी लोग जीवन जिने की आजादी खो बैठे है, उसमे भी हर वक़्त सिर्फ विषाणु के बाधा का डर।

इसी महत्वपूर्ण और गंभीर विषय को प्राथमिकता देकर ये खास लेख आपके लिए लाए है, जिसमे निबंध के तौर पर लॉकडाउन संबंधी कुछ खास मुद्दों को आपके सामने उजागर करेंगे।

लॉकडाउन के बारे में निबंध तौर पर जानकारी – Essay on Lockdown in Hindi

Essay on Lockdown
Essay on Lockdown

‘लॉकडाउन’ का अर्थ क्या होता है?- What is Lockdown?

इस विषय को ठीक तरह से समझने से पूर्व हमें शुरुवात में इस शब्द का अर्थ समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जैसे के लॉक डाउन सचमे होता क्या है। शायद आपको पता होगा के कोरोना का विषाणु सबसे पहले चीन देश में पाया गया था, जहा इसके फैलाव और उत्पत्ती से दुनिया अंजान थी।

एक और दुनिया के अन्य देश जहा अपने क्रियाकलापों में व्यस्त थे, वहा दुसरे ओर चीन इस विषाणु से लड़ रहा था।

जब निष्कर्षो और शुरुवाती अनुमान ये तय हुआ की ये विषाणु न केवल जानलेवा है बल्कि संक्रामक है और अत्यंत तेजी से एक इन्सान से दुसरे इन्सान में इसका फैलाव होता है।

तो इस स्थिती में दुनियाभर के लगभग सभी प्रमुख देशो ने इसके फैलाव के श्रुंखला को तोड़ने के मकसद से, लोगो को एक दुसरे के संपर्क में आने पर रोक लगाने हेतु सभी बाजार, कार्यालयीन कामकाज, तथा यातायात पर रोक लगाने का फैसला किया।

उसका नतीजा ये हुआ के लोग केवल जहा मौजूद थे वहा ही उन्हें रहना पड़ा। घरमे रहना जैसे अनिवार्य हुआ मतलब आप चाहकर भी कही आना जाना नहीं कर सकते हो इस स्थिती को ‘तालाबंदी’ या ‘लॉकडाउन’ संबोधन दिया गया।

केवल एक विषाणु ने बहुत सारी जाने ली और जो जीवित है उन्हें भय और असुरक्षितता के माहौल में जिने पर मजबूर किया। आगे हम जानेंगे के प्रशासन द्वारा लिया गया लॉक डाउन का प्रारूप क्या था, इसका आम इन्सान के जीवन पर क्या असर हुआ इत्यादी।

महामारी के शुरुवाती दिनों में लॉकडाउन का प्रारूप – Early Days Lock down Situation In Pandemic

जैसा के आपको बताया गया है के कोरोना यानि के कोविड-१९ विषाणु का चीन से दुनिया के अन्य देशो में फैलाव होना शुरू हुआ था।और इसके संक्रामक होने की खबर ने सभी प्रमुख देशो को करवाई के सख्त रुख अपनाने पे विवश कर दिया था। जिसमे सबसे पहला कदम लिया गया के अंतरराष्ट्रीय यातायात पर रोक लगाई गई थी।

जिन भी मार्गो से एक देश से अन्य देश में सफ़र होता था उसे पूरी तरह बंद कर दिया गया इसमें हवाई यात्रा, जलमार्ग से यातायात तथा नजदीकी पडोसी देशो से सड़क के रास्ते से आने जाने पे रोक इत्यादि अहम निर्णय लिए गए।

इनका नतीजा ये हुआ बहुत से लोग गैर देश में फ़स गए या तो उन्हें मजबूरन वहा रहना पड़ा, साथमे देश के अन्दर भी यातायात और दैनिक क्रियाकलापों पर निर्बंध दिखाई पड़े।

कुल मिलाके स्थिती ये बनी के हर देश में लोगो का एक जगह से दुसरे जगह जाना भी मुश्किल हुआ, लोगो को रोजमर्ना के आवश्यक चीजो के लिए मानो जैसे संघर्ष की स्थिती उत्पन्न हुई।

लॉकडाउन का मकसद जहा फैलाव को रोकने का था वही कुछ लापरवाह लोगो की वजह से शुरुवाती दिनों में भारी मात्रा में संक्रमित मरीज हर देश में पाए गये।

उसके प्रमुख कारण ये भी थे के शुरुवात में लोगो को ना ही ठीक तरह से इस विषाणु संबंधी जानकारी थी ना ही इस तरह घरमे बंद जिन्दगी गुजारने की आदत थी।

सरकारी यंत्रणा बार बार प्रसार माध्यम और सुचना तकनिकी सेवाओ द्वारा लोगो को विषाणु के बारे में सतर्क करने में जुटी थी। वही दूर दरास्त के लोग इस विषय में मानो अंजान और असंवेदशील दिखाई पड़ रहे थे।

सबसे बेहाल थे उस वर्ग के लोग जो अत्यंत कष्ट और संघर्षपूर्ण जीवन रोज जीते आए है, उनके हाथ के रोजगार तो गए ही थे साथमे उन्हें ऐसे जगह रहना पड़ा जहा गुजारा करने के लिए आवश्यक चीजे भी मिलना उन्हें मुश्किल सा होता गया।

फिर भी सरकारी यंत्रणा और राज्यों के प्रशासनिक व्यवस्थाओ द्वारा ऐसे लोगो को जिने के लिए पर्याप्त अनाज और रहने संबंधी मदद देना बादमे शुरू हुआ था।

एक तरफ कुछ समझदार लोग सड़क पर प्रशासनिक यंत्रणा को सहयोग कर रहे थे तो कुछ असंवेदनशील और अत्यंत लापरवाह लोग हर रोज बेवजह सडको पर घूमते दिखाई पड़ रहे थे।

नतीजा ये हुआ के शुरुवात में सरकारी यंत्रणा और सुरक्षाकर्मियो को ऐसे लोगो पर बल का प्रयोग भी करना पड़ा।जो के ना चाहते हुए भी सुरक्षाकर्मियो को करना पड़ा क्योंकि लोगो के अज्ञान और नासमझी का प्रदर्शन हर रोज की बात हो गई थी।

बादमे वो कड़े रुख का दौर भी आया जिसमे लोगो को देश के बाहर जाना तो दूर देश के अन्दर और नगर, चौराहे और शहर के अंदर भी घुमने फिरने पर पाबंदी आई। सही मायने में इसे हम खुदके ही घरमे इंसान कैद होने की स्थिती कह सकते है।

लॉकडाउन का आम लोगो के जिन्दगी पर क्या बुरा असर हुआ – Lock Down Bad Effects On Common Peoples Life

अबतक आपको लॉकडाउन का प्रारूप भलीभांति समझ में आया होगा, अगले चरण में जानते है के इतने कड़े निर्बंध और संघर्ष की स्थिती का आम इंसान पर क्या असर हुआ था।

जहा इंसान सभी तरह से जकडा गया हो और कोई अन्य रास्ता भी ना दिखाई पड़े इस स्थिती में बजाय घरमे शांत रहने के और अन्य रास्ता आम लोगो को नजर नहीं आ रहा था।

अत्यंत गरीब वर्ग के लोग दो वक़्त के खाने के लिए मदद पर निर्भर दिखाई पड़ रहे थे, तो कुछ घरो में अकाल मृत्यु का तांडव शुरू था जिसमे मन को सुन्न करने वाली स्थिती पैदा हुई थी।

शुरुवाती आकड़ो में सभी प्रमुख देशो के ज्यादातर जनसँख्या को कोविड-१९ विषाणु ने अपनी जकड़ में लिया था, जिसमे सभी वर्ग और आयु के लोग मृत्यु की भेंट चढ़ गये।

यहा जीवन की जंग भी ऐसे विषाणु से शुरू थी जिसको ना ही खुली आँखों से कोई देख सकता था।ना ही कोई इसपे कारगर दवाई मौजूद थी और आज भी इस विषाणु पर दवाई मौजूद नहीं है ये कटु सत्य है।

कुल मिलाके माने तो लॉक डाउन संक्रमण को रोकने की कोशिश थी पर इस विषाणु का तबसे लेकर अबतक कोई भी असरदार इलाज मौजूद नहीं हो सका।

बहुत से लोगो के रोजगार छीन लिए गये तो बहुत सारे लोगो पर जमा पूंजी को लुटाकर जीवन जिने की नौबत इस लॉक डाउन के समय में आई।

मानसिक निराशता का मंजर , आत्मविश्वास की कमी, महीनो घरो में बिना व्यस्तता के जीवन जिने की आदत ने लोगो के अन्दर के उत्साह, कार्यकुशलता और सक्रियता को मानो ख़त्म सा कर दिया था।

इन सभी चीजो का परिणाम बादमे दिखाई देने लगा के बहुत सारे लोग जीवन के प्रति नकारात्मकता के सर्वोच्च भाव में गए जिसमे बहुत सारे लोग आत्महत्या इत्यादि भाव से भी गुजरे। क्योंकि घरके बाहर विषाणु का भय और घरमे करने लायक कुछ काम भी नहीं बचा था।

कुछ लोग छोड़ दिए जाये तो इस लॉकडाउन में लगभग सभी ने जीवन का सबसे लंबे छुट्टी के पलो का अनुभव किया, जहा कुछ भी तय नहीं था के जिन्दगी कब करवट बदलेगी और सब सही होगा।

छोटे बच्चे और बड़े बुजुर्ग इन सभी को सबसे ज्यादा इस विषाणु का खतरा बताया गया था तो इन लोगो का घरसे निकलना कई महीनो तक संभव ही नहीं था।

पाठशालाए एवं महविद्यालय बंद और तो और बहुत सारी अंतिम परीक्षाये भी इस समय में टाल दी गई , मानो के एक ऐसे दिन इस लॉक डाउन ने दिखाए को जिसकी कल्पना किसी ने भी सपने में भी कभी भी की नहीं होगी।

डॉक्टर आए दिन संक्रमित लोगो को जान पर खेलकर बचाने में लगी थी तो दुसरे और बहुत सारे पुलिस , नर्सेस और डॉक्टर इस विषाणु की चपेट में आये थे।

एक तरह के नकारात्मकता का वातावरण चहु ओर देखने को मिल रहा था। जिसमे इस विषाणु से जिनके भी घरमे किसी व्यक्ति की मृत्यु होती थी उनको अपने करीबी के अंतिम दर्शन भी करना मुश्किल हुआ था, उनका जो भी अंतिम क्रियाकरम होता था वो प्रशासन के द्वारा किया जाता था।

हर जगह अस्पताल मरीजो से भरे पड़े थे जहा ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर मरीज के इलाज हेतु बेड के लिए संघर्षपूर्ण स्थिती बन गई थी।इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत और परेशानी केवल आम इंसान भुगत रहा था, एक हद तक सरकारी यंत्रणा भी इन समस्याओ का हल निकालने के लिए जूझ रही थी।

लॉकडाउन के समय सैनीटाईजर का इस्तेमाल, हैण्डवॉश करना, मास्क पहनना मानो हर इंसान के जीवन की प्राथमिकता बन गई थी। कुल मिलाके इस प्रकार का मंजर हर आम इंसान के जीवन में था।

लॉकडाउन में सरकार द्वारा आम नागरिको के लिए जारी किये गए दिशा निर्देश एवं सुचनाए – Government Instructions And Advisory About Lock down Precautions.

यहाँ आपको कुछ प्रमुख सरकारी सुचना एवं निर्देश संक्षिप्त में दे रहे है जो लॉक डाउन के वक़्त हम सभी दिन रात सुनते आये है एवं काफी प्रसिद्ध हुए है।

  1. दो गज की दुरी रखे / आपस में सुरक्षित अंतर रखिये
  2. मास्क पहनना ना भूलिए, किसी भी स्वच्छ कपडे को मास्क के तौर पर मुह और नाक ढकने के लिए इस्तेमाल करे ये आवश्यक है।
  3. समय समय पर हैण्डवॉश से हाथ धोना ना भूले।
  4. अपना और अपने घर के बच्चे एवं बुजुर्गो का खयाल रखिए, खुदको और उनको कोरोना से बचाए।
  5. आवश्यक चीजो के लिए ही पूर्ण सावधानी के साथ घरसे बाहर निकले, आपके अडोस पड़ोस में कोई कोरोना से बाधित व्यक्ति है तो सरकार को सूचित करे।
  6. साँस लेने में तकलीफ हो या फिर तेज बुखार जैसे लक्षण नजर आए तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में खुदकी कोरोना संबंधी जाँच कराये।
  7. कोरोना संबंधी लक्षण का व्यक्ति जाँच और इलाज करने से लापरवाही करे या मना करे तो अपने जिला, नगर निगम एवं सरकारी इलाज केंद्र से जुड़े लोगो को तुरंत इस बात की जानकारी दे।
  8. याद रखे हमें कोरोना से लड़ना है, उसके मरीज से नहीं।

इत्यादी।

लॉकडाउन का सरकारी यंत्रणा एवं सरकार पर  हुआ असर- Affects Of Lock down On Government and Its System.

जैसा के लॉक डाउन की वजह से सभी व्यापारीक गतिविधिया रुक गई थी इसके अलावा बहुत सारे उत्पादन के क्षेत्र से जुड़े फैक्टरियों को बंद करना पड़ा था। इसके अलावा बहुत सारे निजी कम्पनियों को ताले लग गए थे इन सबका मिला जुला परिणाम पूर्णतः देश की अर्थव्यवस्था पे पड़ा।

आज तक लगभग सभी प्रमुख देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह अस्तव्यस्त हुयी दिखाई पड़ रही है, जहा जीवन के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण चीजे भी बाजार में महँगी हो गई है।

जीडीपी का स्तर बुरे तरीके से निचले स्तर तक पहूच गया है, कच्चे तेल में भारी बढ़ोतरी के कारण बाजार में पेट्रोल और डिझेल के दरो में काफी वृध्दि हुई है।

सरकार का सबसे ज्यादा धन इस कोरोना काल में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में खर्च हुआ है, साथ साथ गरीब वर्ग के लोगो को भोजन और अन्य सुविधा भी सरकार द्वारा कोरोना आपत्ती काल में दी गई।

जिसका कुल मिलाके के सम्पूर्ण भर सरकार पर पड़ा है, सरकार के सामने ढेर सारी चुनौतिया आने वाले भविष्य में रहेगी। जिसमे नए रोजगार निर्माण के साथ कर्ज में डूबे पुराने सरकारी एवं निम्न सरकारी क्षेत्र को उभारने का दायित्व भी शामिल है।

अर्थव्यवस्था को गति देना एवं नए परियोजनाओ को लागु करना भी चुनौती भरा कार्य रहेगा, इसमें आर्थिक दुर्बल घटक भी नजर अंदाज नहीं किये जा सकते जिनपर सबसे ज्यादा लॉकडाउन के बुरे प्रभाव हुए है।

लॉकडाउन के फायदे – Benefits Of Lock down

लॉक डाउन की स्थिती ने मानवता को एक सबक दिया है जो प्रत्येक मनुष्य को हर पल जीवन में याद रहेगा, कुछ सकारात्मक पहलुओ पर नजर डाले तो हमें कुछ बाते स्पष्ट रूप से जान पड़ती है जैसा के ;

  1. जो लोग जीवन में फासलों में जी रहे थे या इसके आदी हो गए थे उन लोगो को लॉकडाउन की स्थिती कही ना कही नजदीक ले आई है। अपनों को लोग करीब से समय देने लगे है जो के लॉक डाउन में बगैर इसके किसीके पास कोई रास्ता भी नहीं बचा था।
  2. जिन घरो में माता-पिता दोनों नौकरी करते है उनके बच्चे अक्सर अपने माता पिता से लाड प्यार को तरसते थे। या यु कहे तो उतना पर्याप्त समय उनके माता पिता को काम की वजह से अक्सर मिल नहीं पाता था, इस लॉक डाउन में सबसे ज्यादा ऐसे लोगो ने अपने परिवार के सदस्य के साथ खुशनुमा वक़्त बिताया। जो के याद रखने लायक पल बन गए, और शायद फिर कभी ऐसा वक़्त लोगो को मिल पाता या मिल पायेगा।
  3. लोगो को स्वछता एवं पर्यावरण में मौजूद ऑक्सीजन वायु का मूल्य कही ना कही तो ध्यान आया होगा, और ये आना चाहिए ये जरुरी है। लॉक डाउन में ऑक्सीजन की कमी स्पष्ट सन्देश है के आपको जीवन में नैसर्गिक तौर पर प्राप्त चीजो का आदर एव मूल्य करना आना चाहिए। ये चीजे प्राणवायु के तौर पर क्यों कहलाई जाती है शायद इस इस बात से आजतक कोई इतना वाकिफ हुआ होगा जो लॉक डाउन और कोरोना ने सिखाया है।
  4. डॉक्टर और सुरक्षाकर्मीयो ने जो हौसला और हिम्मत लॉकडाउन में दिखाई है उनसे बहुत सारे लोगो ने सिखा होगा के ये लोग हमारे जीवन में क्या महत्व रखते है। इसलिए इन लोगो के प्रति आपके बरताव में जरुर परिवर्तन आना जरुरी है।
  5. लॉक डाउन में बहुत सारी पुरानी यादे ताजा हो गई जिसमे लोगो ने घरमे बैठकर पुराने सीरियल का मजा उठाया एवं उन पलो को जिया शायद जिनसे वे बहुत दूर या आगे निकल चुके थे।

कुल मिलाके लॉकडाउन ने किसी को ख़ुशी तो किसी को गम दिया, जिसमे सभी को एक अच्छा सबक भी मिला के जीवन में आपदाए आती है पर संयम और हौसलों से उनका सामना करने की उर्जा भी खुदमें संचयित करनी पड़ती है।

आशा करते है लॉकडाउन पर दिए गए निबंध को पढ़ते समय आपको काफी अहम् चीजो एवं तथ्यों के विषय में जानकारी मिली होगी और ये आपको काफी पसंद आया होगा।

हमारे अन्य विषयों पर बने जानकारीपूर्ण लेख पढने के लिए अधिक से अधिक लेख अवश्य पढ़े। हमसे जुड़े रहने के लिए धन्यवाद ………………

इस विषय पर अधिकतर बार पूछे गये सवाल – FAQ

१. लॉक डाउन क्यों लगाया गया था?

जवाब: कोरोना विषाणु यानि के कोविड- १९ विषाणु एक संक्रमण से फैलने वाला विषाणु है, इसकी श्रुंखला तोडने के मकसद से लोगो का आपस में संपर्क रोकने हेतु लॉक डाउन लगाया गया था।

२. क्या कोरोना के विषाणु को नष्ट करने हेतु कोई दवाई मिल गई है?

जवाब: इस तरह की कोई भी दवाई अब तक दुनिया के किसी भी देश को बनाने में सफलता नहीं हासिल हुई है। हालाकि रोग का प्रतिकार करने की शक्ती बढ़ाने हेतु कुछ दवाए मौजूद है।

३. कोरोना के विषाणु का नाम क्या है?

जवाब: कोविड- १९।

४. कोरोना का फैलाव किन प्रमुख चिजो से होता है?

जवाब: संक्रमण बाधित मरीज के द्वारा छिकने से, खासने से, थूक द्वारा, या स्पर्श द्वारा भी इस विषाणु का फैलाव होता है।

५. कोरोना को रोकने के लिए किन प्रमुख चीजो का पालन करना आवश्यक होता है?

जवाब: मास्क पहनना, समय समय पर हाथ धोना, खासते एवं छिकते समय मुह को ढकना, तथा एक दुसरे से लगभग कुछ अंतर तक दुरी बनाकर रखना जैसे चीजो का पालन इस विषाणु के फैलाव को रोकने हेतु कारगर होता है।जिनका आपने अवश्य पालन करना चाहिए।

६. संपूर्ण भारत में प्रथम लॉक डाउन कब लगाया गया था?

जवाब: २४ मार्च २०२०।

७. भारतभर में प्रथम लॉक डाउन कितनो दिनों के लिए लगाया गया था?

जवाब: २१ दिनों के लिए।

८. कोरोना विषाणु की उत्पत्ती और फैलाव कौनसे देश से हुआ था?

जवाब: चीन।

९. हाथ साफ रखने के लिए किन चीजो का इस्तेमाल कोरोना के खिलाफ फायदेमंद साबित होता है?

जवाब: हैण्ड सैनिटायजर हाथो पर मलना, हैण्डवॉश से या किसी भी साबुन से समय समय पर अधिक बार हाथ धोना कोरोना के खिलाफ हाथ साफ रखने के लिए फायदेमंद साबित होता है।

१०. कोरोना महामारी से पूर्व कौनसी वैश्विक महामारी ने दुनिया को हताहत एवं सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त किया था?

जवाब: साल १९१८ में आये स्पेनिश फ्लू ने विश्व को बहुत ज्यादा क्षति पहुचाई थी।

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