भारत की पहली महिला ड़ॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी की जिंदगी के बारे में…

Anandi Gopal Joshi

साहस और संघर्ष से भरी आनंदी गोपाल जोशी की जिंदगी की कहानी दिल छू जाने वाली है। आनंदी गोपाल जोशी का प्रभावशाली व्यक्तित्व उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो बड़े-बड़े सपने तो देखती हैं लेकिन समाज और परिवार के डर से उनके सपने घर की चार दीवारी में ही कैद रहते हैं।

जिस दौर में महिलाओं तो क्या पुरुषों की शिक्षा को भी इतना महत्व नहीं दिया जाता था,और महिलाओं की शिक्षा किसी सपने से कम नहीं थी, उस दौर में आनंदी गोपाल जोशी ने अपने सपने को साकार करने के लिए विदेश में जाकर डॉक्टरी की डिग्री हासिल की और महज 21 साल की उम्र में साल 1886 में डॉक्टर की डिग्री हासिल कर न सिर्फ देश का मान भी बढ़ाया बल्कि बाकी लोगों के लिए एक मिसाल भी कायम की।

आखिर किस घटना से उनकी दिलचस्पी मेडिकल के क्षेत्र में बढ़ी और उन्होंने ड़ॉक्टर बनने का फैसला लिया, और इस मुकाम को पाने के लिए उन्हें किन-किन संघर्षों का सामना करना पड़ा । इन सभी सवालों के जवाब और उनके जीवन के बारे में इस आर्टिकल में दिया गया है जो कि इस प्रकार हैं –

First Woman Doctor in India Anandi Gopal Joshi

भारत की पहली महिला ड़ॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी की जिंदगी के बारे में – First Woman Doctor in India Anandi Gopal Joshi

पूरा नाम (Name)आनंदी गोपाल जोशी
जन्म (Birth)31 मार्च, 1865
जन्मस्थान (Birthplace)पुणे, महाराष्ट्र
मृत्यु26 फ़रवरी, 1887
मृत्यु स्थानपुणे, महाराष्ट्र
पतिगोपाल राव जोशी
विद्यालयवुमन्स मेडिकल कॉलेज ऑफ़ पनेसिलवेनिया, अमेरिका
शिक्षाडॉक्टर्स इन मेडिसिन
प्रसिद्धिभारत की प्रथम महिला डॉक्टर
(First Woman Doctor in India)

आनंदी गोपाल जोशी का जन्म और शुरुआती जीवन – Anandi Gopal Joshi Biography

भारत की इस प्रथम महिला डॉक्टर 31 मार्च, 1865 को महाराष्ट्र के ठाणे जिला के कल्याण में एक मराठी रुढ़िवादी परिवार में जन्मी थी। उनका परिवार एक ऐसा परिवार था जो कि जो कि सिर्फ संस्कृत पढ़ना जानता था।

बचपन में आनंदी गोपाल जोशी के परिवार वाले इन्हें यमुना कहकर पुकारते थे। इनके पिता एक जमींदार थे, वहीं उस दौरान ब्रिटिश शासकों द्वारा महाराष्ट्र में ज़मींदारी प्रथा खत्म किए जाने के बाद उनके परिवार की हालत बेहद खराब हो गई थी।

आनंदी गोपाल जोशी का विवाह और उनकी शिक्षा – Anandi Gopal Joshi Husband

उस समय बाल विवाह की प्रथा थी, ऐसे में आनंदी जोशी के परिवार वालों ने महज 9 साल की उम्र में उनकी शादी उनसे 20 साल बड़े विधुर गोपाल राव जोशी के साथ कर दी। शादी के बाद यमुना का नाम बदलकर आनंदी रख दिया गया और वे आनंदी गोपाल जोशी के नाम से जानी जाने लगीं।

आपको बता दें कि उनके पति गोपाल राव जी पोस्ट ऑफिस में काम करते थे और वे एक उच्च विचारों और नारी शिक्षा को बढ़ावा देने वाले व्यक्ति थे। आनंदी बाई को शिक्षा हासिल करवाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

वह घटना जिसने आनंदी गोपाल जोशी को बनाया ड़ॉक्टर – First Woman Doctor in India

अपनी शादी के कुछ समय बाद 14 साल की उम्र में आनंदी गोपाल जोशी को मां बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने बेटे को जन्म दिया लेकिन दुर्भाग्यवश, महज 10 दिनों के अंदर ही इलाज के अभाव में उनके बेटे ने दम तोड़ दिया।

जिसके बाद अपने बच्चे को खोने का आनंदी राव को गहरा सदमा लगा और इस घटना ने उन्हें झकझोक कर रख दिया। इसके बाद उन्होंने भारत में महिलाओं और बच्चे के इलाज के बारे में सोचा। जिसके बाद उनकी दिलचस्पी मेडिकल के क्षेत्र में बढ़ी और उन्होंने शिक्षा हासिल कर डॉक्टर बनने की ठान ली।

वहीं उस समय भारत में ऐलोपैथिक डॉक्टरी की पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं थी, इसलिए उन्हें पढ़ाई करने के लिए विदेश जाना पड़ा था, उनके इस फैसले में उनके पति गोपाल राव जी ने उनका पूरा समर्थन किया था।

रुढि़वादी समाज का झेलना पड़ा विरोध

वहीं जिस समय आनंदी गोपाल जोशी ने डॉक्टर की डिग्री हासिल करने का फैसला लिया, उस दौर में महिलाओं को पढ़ाई-लिखाई की भी इजाजत नहीं थी, जिसकी वजह से उन्हें समाज में काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

दरअसल, रुढ़िवादी हिन्दू समाज उनके इस फैसले के विरोध में थी और यह बिल्कुल नहीं चाहती थी कि एक विवाहित हिन्दू महिला विदेश जाकर डॉक्टरी की पढ़ाई करे, क्योंकि समाज के लोगों को इस बात का शक था कि विदेश जाकर, आनंदी गोपाल जोशी और उनके पति अपना धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लेंगे।

वहीं जब इस बात की भनक आनंदी गोपाल राव जोशी को लगी तो उन्होंने सिरमपुर कॉलेज के हॉल में लोगों को जमा करके अपना पक्ष उनके सामने रखा और लोगों को महिला डॉक्टर की जरूरत के बारे में समझाया।

उन्होंने लोगों को यह भी बताया कि वह केवल डॉक्टर की उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए अमेरिका जा रही हैं, उनका कोई धर्म परिवर्तन करने का और विदेश में नौकरी करने का इरादा नहीं हैं बल्कि उनका मकसद भारत में लोगों की सेवा करने का है, क्योंकि भारत में एक भी महिला डॉक्टर नहीं है, जिसके चलते इलाज के अभाव में सैकड़ों महिलाओं और बच्चों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।

उनके इस इरादे को जानकर लोग उनके प्रभावित हुए और उनके इस फैसले में सपोर्ट करने लगे, इसके बाद देश के लोगों ने उनकी डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए उनकी मद्द के लिए हाथ आगे बढ़ाए।

आनंदी राव का अमेरिका का संघर्ष भरा सफर

भारतीय समाज का किसी तरह विरोध झेलने के बाद जब वह अपने डॉक्टर बनने का सपना साकार करने के लिए साल 1885 में अमेरिका पहुंची। और इसके बाद उन्होंने अपनी शिक्षा के लिए वुमन्स मेडिकल कॉलेज ऑफ़ पनेसिलवेनिया, अमेरिका में आवेदन किया, जिसके बाद उन्हें इस कॉलेज में एडमिशन के लिए अनुमति दे दी गई।

इस तरह उन्होंने 11 मार्च 1886 में अपनी शिक्षा पूरी कर एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसन) की उपाधि हासिल की। लेकिन अमेरिका में भी समस्याओं ने उनका पीछा नहीं छोड़ा, वहां न सिर्फ रहने के लिए उन्हें कई तरह की परेशानी उठानी पड़ी, बल्कि वहां की हांड कंपाने वाली ठंड और वहां के खान-पान को स्वीकार नहीं कर पाने की वजह से उनकी तबीयत लगातार खराब होती चली गई और वे ट्यूबरक्लोसिस की चपेट में आ गई।

लेकिन बिगड़ती सेहत भी आनंदी गोपाल जोशी के डॉक्टर बनने के सपनों के बीच में नहीं आ सका और इस तरह उन्होंने असंभव को भी संभव कर अमेरिका में अपनी डिग्री हासिल की और भारत की पहली महिला डॉक्टर बनी।

इसके बाद वह भारत वापस लौट आईं और अपने मकसद को पूरा करने के लिए लोगों की सेवा में लग गईं। उन्होंने अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल, प्रिंसलि स्टेट ऑफ़ कोल्हापुर में एक महिला डॉक्टर के रूप में चार्ज ले लिया, लेकिन इसके कुछ ही दिनों बाद वह टीबी जैसी बीमारी का शिकार हो गई, जिससे 26 फ़रवरी, 1987 को महज 22 साल की अल्पायु में उनका निधन हो गया।

इस तरह भारत में महिलाओं और बच्चे के लिए मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाने के मकसद से वह अपने पूरे जीवन भर संघर्ष करती रहीं और भारत की पहली महिला डॉक्टर बनी। उनके सम्मान में इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च एंड डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और लखनऊ के एक गैर सरकारी संस्थान ने मेडिसन के क्षेत्र में आनंदीबाई जोशी सम्मान देने की शुरुआत की।

इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने इनके नाम पर युवा महिलाओं के लिए एक फेलोशिप प्रोग्राम की भी शुरुआत कर उन्हें विशेष सम्मान दिया।

आऩंदी गोपाल जोशी का व्यक्तित्व वाकई प्रेरणा स्त्रोत है, जिनसे हर किसी को प्रेरणा लेने की जरूरत है।

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