आख़िर कैसे हुई मानवों की उत्पत्ति…

History of Human Evolution

इंसान क्या है? कैसे वह पृथ्वी पर आया?  उसका इतिहास क्या है? क्या वास्तव में बंदर था  आज का इंसान? ऐसे अनेक सवाल हर मनुष्य के मन में अपने जीवन काल के दौरान आते ही हैं। पर इस विषय पर धर्म और विज्ञान के द्वारा सटीक जवाब नहीं मिल पायें हैं। इसी कारण वैज्ञानिकों और धर्म गुरुओं के बीच में इस मुद्दे को लेकर बहस भी होती रहती है। विज्ञान और धर्म अपने-अपने तरीके से मानव शरीर की रचना के पीछे तथ्य देते हैं।

आख़िर कैसे हुई मानवों की उत्पत्ति – History of Human Evolution

History of Human Evolution

वैज्ञानिक दृष्टि से मानव की उत्पत्ति – Human Evolution in Science

विज्ञान ने मानव जाति के आविष्कार को समझने के लिए कई प्रयास किये हैं जिसके सफल परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। विज्ञान के अनुसार मानव का इतिहास समुंद्र से जुड़ा है। सबसे पहले पानी में रहने वाली प्रजातियों ने जन्म लिया जैसे मछली, पानी में रहने वाले कीटाणु आदि।

धीरे धीरे समय का चक्र बढ़ता रहा। जल एवं थल में रहने वाले जीव आये और अपना जीवन यापन करने लगे ये जीव थे जैसे मेंढ़क, केकड़ा आदि। समय बदलता रहा और प्रकृति अपना काम कर रही थी कभी बाढ़ तो कभी सूखा, जीवो की जन्म और मृत्यु हो रही थी।

इसी दौर में कई प्रजातियां विकसित हुई और कईंयों का नामो निशान खत्म हो गया है। यह क्रम ऐसे ही चलता रहा और डायनासोर, वानर, चिम्पैंजी, वनमानुष आये और इसके बाद हुआ दो पैर वाले मनुष्य का विकास।

वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार बंदर ही मानव जाति के रचनाकर है। सोचने समझने की शक्ति से धीरे – धीरे बंदर जैसा प्राणी दो पैरों का इस्तेमाल करना सीख गया और पृथ्वी से जुड़े पेड़ों के फल, सब्जियाँ  तोड़कर अपनी भूख को शांत करने लगा।

बंदर वाली बुद्धि का विकास होने लगा और यह एक मनुष्य का रूप लेने में सक्षम होने लगा और चार पैरों का उपयोग छोड़ दो पैरों की सहायता से चलने फिरने लगा। अब यह मानव शरीर के सभी अंगों का प्रयोग करने लगा था। पूँछ किसी इस्तेमाल में ना आने की वजह से खत्म हो गयी पर मानव शरीर की रीढ़ की हड्डी के अंतिम छोर पर उसके अवशेष अब भी पाये जाते हैं।

इस प्रकार मानव समाज का विकास होता गया और मानव एक बुद्धिजीवी जीव बन गया है जिसने अपना जीवन सरल करने के लिए अपनी शैतानी बुद्धि का उपयोग कर के प्रकृति द्वारा दिये गए उपहारों से छेड़छाड़ करने के लिए भी उतारु हो गया है।

धर्म की दृष्टि से मनुष्य जाति का जन्म – Religion in Human Evolution

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मानव बंदरो का विकसित रूप नहीं है। पौराणिक ग्रंथो के अनुसार बंदर और मानव जाति की उत्पत्ति में भिन्नता है। इतिहास की तुलना में आज के इंसान के ढांचे में थोड़े बहुत बदलाव अवश्य आये हैं। जैसे लम्बाई, आयु, रंग रूप आदि लेकिन मानव जैसा प्राचीन काल में दिखता था वैसा ही आज भी दिखता है। जिस प्रकार पृथ्वी पर ओर जीवों की प्रजातियां मिलती हैं उसी प्रकार मानव जाति की भी कई प्रजातियां हैं जो आज भी विद्यमान हैं।

धर्म के अनुसार मानव संसार की रचना भगवान द्वारा की गयी है। इस संसार में जो इंसान सबसे पहले आया था। उसी ने मानव जाति को जन्म दिया था पर अब एक और पहेली सामने आती है कि वह पहला इंसान आखिर कौन था?

इस पहेली को भी हिन्दू धर्म अनुसार सुलझाया जा चूका है। हिन्दू धर्म के मुताबिक संसार में सबसे पहला जीवन लेने वाला महान शख़्स “मनु” था। जिसके आधार पर ही इस जाति का नाम मानव जाति पड़ा था।

“मनु” कौन था? – Who was “Manu”?

  • पुराण में है जिक्र –

एक पौराणिक कथा के अनुसार “मनु” की रचना खुद ब्रह्मा जी द्वारा की गयी थी। इस कथा में बताया गया है कि मानव संसार के लिए भगवान ब्रह्मा जी ने दो लोगो को बनाया था, एक नर और नारी। भगवान ब्रह्मा ने जिन दो आत्माओं को संसार की रचना के लिए बनाया था। उसमें से जो नर था “मनु” और नारी थी “शतरूपा”। ब्रह्मा जी के इन प्रयासों से कहा जा सकता है कि ब्रह्मा जी ही इस संसार के पालन हार हैं और समस्त मानव जाति के पूर्वज हैं।

“मनु” शब्द के ही पर्यायवाची शब्द संस्कृत भाषा का मनुष्य और अंग्रेजी भाषा का मैन है।

  • ईसाई धर्म की बाइबल में भी है “मनु”

मनु का उल्लेख ईसाई धर्म की बाइबल में भी है। बाइबल के अनुसार भी मानव संसार की रचना भी ईश्वर द्वारा ही की गयी है। बाइबल में बताया गया है कि ईश्वर के शरीर से एक परछाई ने जन्म लिया था और इस परछाई को “एडम” नाम दिया गया। इन दोनों धर्म की कथाओं से इस नतीजे पर पहुंचने में आसानी होती है की मानव संसार के रचियता मनु ही है अथार्त भगवान ने ही मानव जाति की रचना की है।

अतः विज्ञान के तथ्यों से धर्म के तथ्य बिल्कुल विपरीत हैं। विज्ञान के अनुसार सृष्टि की रचना भगवान ने नहीं की है बल्कि बंदरो द्वारा मानव जाति की रचना हुई है।

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2 COMMENTS

    • शुक्रिया किरन जी, मानवों की उत्पत्ति का इतिहास बेहद रोचक रहा है, वैज्ञानिक दृष्टि से इसके अलग कारण बताए गए हैं जबकि धर्म की दृष्टि से इसके अलग कारण है। फिलहाल हमारी टीम को यह जानकर खुशी हुई कि आपको हमारा यह लेख पसंद आया।

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