प्राचीन सिंधु घाटी का सबसे रहस्यमयी महानगर- मोहनजोदड़ो

Mohenjo-daro in Hindi

मोहन जोदड़ो एक बहुत ही मशहूर जगह है जो पाकिस्तान के सिंध प्रांत में आती है। इस जगह पर सिंधु संस्कृति के कुछ अवशेष पाए गए है।

दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से मोहन जोदड़ो एक है। सिंधु संस्कृति के सबसे बड़े शहरों में मोहन जोदड़ो का नाम शामिल किया जाता है। जहां लोग आज से हजारों साल पहले एक स्वस्थ, सभ्य एवं बेहतर जिंदगी जी रहे थे।

मोहनजोदड़ो का मतलब ”मुर्दो का टीला” होता है, जो कि दक्षिण एशिया के सबसे पुराना शहर माना जाता है। योजनाबद्ध तरीके से बने इस शहर की खोज भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा की गई थी। इसे ”हड़प्पा संस्कृति” भी कहा जाता है।

मोहनजोदड़ो विश्व की सबसे प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है। सिंधु संस्कृति के मुख्य शहरों में मोहन जोदड़ो, लोथल, कालीबंगन, धोलावीरा और राखिगढ़ी आते है। तो आइए जानते हैं सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों एवं इसके विनाश के कारणों के बारे में –

प्राचीन सिंधु घाटी का सबसे रहस्यमयी महानगर- मोहनजोदड़ो का इतिहास – Mohenjo Daro History in Hindi

Mohenjo-daro

विश्व की सबसे विकसित और प्राचीन सभ्यता मोहन जोदड़ो की प्रमुख विशेषताएं – Mohenjo Daro Specification

पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई से मिले कुछ अवशेषों के आधार पर मोहनजोदड़ो का सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे प्राचीनतम एवं विकसित नगर होने का पता चला था।

खोज के दौरान यह पता लगा कि कई हजार साल पहले बसा मोहनजोदड़ो योजनाबद्ध तरीके से बनाया गया था, जहां लोग बेहद सभ्य, स्वस्थ एवं स्वस्थ तरीके से जीवन यापन करते थे।

”मोहनजोदड़ो”, सिंधु घाटी सभ्यता की एक यह भी एक अन्य विशेषता थी कि लोगों को गणित का ज्ञान भी था।

खुदाई से प्राप्त सभी एक सी साइज की ईंटों से यह पता लगाया था कि उस समय के लोगों को आज की तरह मापना, जोड़ना, घटाना, सब आता था एवं एक ही वजन और साइज की ईंटे थीं।

खुदाई के दौरान मिले सबूतों के आधार पर यह भी पता लगाया गया कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को खेती की भी अच्छी जानकारी थी।

वहीं उस समय गेंहूं और जौ दो प्रमुख फसलें थीं। आपको बता दें कि उस दौरान काले पड़ गए गेहूं को आज भी संभालकर रखा गया है।

पुरातत्विक विभाग के कुछ खोजकर्ताओं के मुताबिक उस दौरान के लोगों को आज की वस्त्र आदि पहनने का ज्ञान था।

खुदाई के दौरान कुछ गर्म और सूती कपड़े भी मिले थे। जिससे यह पता चलता है कि लोग मौसम के मुताबिक कपड़े आदि पहनते थे।

विश्व के सबसे प्राचीनतम एवं विकसित सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता के लोग धातु एवं सोने-चांदी के गहने आदि भी पहनते थे।

सिंधु घाटी सभ्यता, आज की तरह ही विकसित थी, उस दौरान लोग यात्रा के लिए यातायात साधन जैसे भैंसागाड़ी, बैलगाड़ी आदि का इस्तेमाल करते थे।

कुछ खोजकर्ताओं एवं पुरातत्ववेत्ताओं के मुताबिक सिंधु घाटी सभ्यता के लोग आज की तरह डांसिग, म्यूजिक एवं स्पोर्ट्स आदि के भी शौकीन थे। खुदाई के दौरान कुछ म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट एवं खेल-खिलौनी भी प्राप्त हुए हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को फैशन आदि करने का भी उचित ज्ञान था एवं उस दौरान चिकित्सक भी होते थे। दरअसल खुदाई के दौरान मिले कंघी, साबुन, क्रीम एवं दवाइयां भी प्राप्त हुईं थी।

सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई के दौरान कई ऐसे स्थान और अवशेष मिले हैं, जिससे पता चलता है वहां लोग आपस में प्रेम, भाईचारे और मिलजुल रहते थे एवं युद्ध का कोई भी नामोनिशान नहीं था।

मोहनजोदड़ो के कई अवशेषों को आज भी दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में संरक्षित किया गया है।

मूल्यवान कलाकृति – Mohenjo Daro Valuable artwork

इस शहर की खुदाई के दौरान कई सारी मुर्तिया मिली है जिसमे एक प्रसिद्ध नाचती हुई लड़की की कांस्य की मूर्ति पाई गयी और साथ में कुछ पुरुषो की भी मुर्तिया मिली। वो सभी पुरुषो की मुर्तिया पर नक्काशी का काम किया गया है वो सभी रंगीन है।

कुछ का मानना है की पुरुष की मूर्ति राजा की है तो दुसरो का मानना है वो मूर्तिकला और धातु विज्ञान की परिपक्वता है।

मोहनजोदड़ो से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण एवं रहस्यमयी तथ्य – Facts About Mohenjo Daro

  • आधुनिक पाकिस्तान में सिंधु नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित मोहनजोदड़ो का सिंधी भाषा में अर्थ- मृतकों का टीला होता है।
  • सबसे पहले मोहनजोदड़ो की खोज पुरातत्व विभाग के सदस्य एवं मशहूर इतिहास राखलदास बनर्जी द्वारा साल 1922 में की गई थी।
  • इसकी खोज और खुदाई के काम को काशानाथ नारायण ने आगे बढ़ाया। जिसके बाद खुदाई से प्राप्त अवशेषों के आधार पर इसकी खोज की गई।
  • सिंधु घाटी सभ्यता को इतिहासकारों द्वारा प्रागैतिहासिक काल में रखा गया है।
  • सिंधु घाटी सभ्यता और मोहनजोदड़ो में घरों में पक्की-पक्की ईंटों से बने स्नानघर और शौचालय बने होते थे।
  • मोहनजोदड़ो सभ्यता में लोग धरती को अन्न, फल उपलब्ध करवाने वाली उर्वरता की देवी मानते थे और धरती की पूजा करते थे।
  • विश्व की सबसे प्राचीनतम और सभ्य सिंधु घाटी सभ्यता में लोग आज ही तरह ही प्रकृति प्रेमी हुआ करते थे एवं पेड़, नदियों एवं भगवान की पूजा करते थे। इसके कुछ प्रमाण खुदाई के दौरान प्राप्त हुए हैं। शिव पूजा, सूर्य आराधना एवं स्वास्तिक चिंह के भी कई प्रमाण मिले हैं।
  • सिंधु घाटी सभ्यता के लोग मछली पकड़ते थे, जंगली जानवरों का शिकार करते थे एवं व्यापार भी करते थे।
  • सिंधु घाटी सभ्यता अर्थात मोहनजोदड़ो नगर का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यहां नारियों को मान-सम्मान दिया जाता था एवं नारी पूजा को भी बल दिया जाता था।
  • सिंधु सभ्यता में पर्दा-प्रथा एवं वेश्यावृत्ति होने के भी कुछ प्रमाण मिले हैं।
  • मोहनजोदड़ो का इतिहास काफी गर्वपूर्ण है, हालांकि कुछ रहस्य भी जुड़े हुए हैं। इससे जुड़ा एक रहस्य यह है कि मोहनजोदड़ो में पहली बार पहुंचने पर वैज्ञानिकों को कुछ मानव, जानवरों एवं पक्षियों के कंकाल मिले थे। जिसके बाद इस नगर को ”मौत का टीला” भी कहा गया।

मोहनजोदड़ो के विनाश के कारण – Mohenjo Daro Real Story

खोजकर्ताओं और वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके विनाश के कारण प्राकृतिक आपदा और जलवायु में बदलाव के कारण मानते हैं।

कुछ वैज्ञानिकों के मुताबिक सिंधु नदी में आई बाढ़ की वजह से यह तबाह हो गया तो कई लोग इसके विनाश का कारण भयंकर भूकंप बताते हैं।

इसके अलावा कुछ वैज्ञानिक खोज में मिले नरकंकालों के आधार पर इसके विनाश का कारण किसी बड़े विस्फोट को भी मानते हैं।

आपको बता दें कि मोहनजोदड़ो को कुछ खोजकर्ताओं के द्धारा महाभारत काल से भी जोड़ा गया है। और इस नगर की तबाही का कारण गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा द्धारा छोड़ा गया ब्रहास्त्र भी बताया गया है।

इसके अलावा यहां पर एक नहीं बल्कि दो ब्रहास्त्र छोड़ने की बात वैज्ञानिकों के व्दारा कही जाती है।

ऐसा कहा जाता है कि जब अश्वत्थामा ने पिता की मौत की खबर सुनकर गुस्से में पांडवों का विनाश करने के लिए ब्रहास्त्र छोड़ने की योजना बनाई तब अर्जुन ने उसका पीछा किया, जिनके भय से अश्वत्थामा ने अर्जुन पर ही ब्रहास्त्र छोड़ दिया, जिसके बाद इस वार को रोकने के लिए अर्जुन ने भी ब्रहास्त्र छोड़ा।

जिसकी वजह से सिंधु घाटी सभ्यता एवं महा विकसित मोहनजोदड़ो नगर का विनाश हो गया।

दरअसल, इस ब्रहास्त्र को आधुनिक युग में बनाए गए न्यूक्लियर बम की तरह बताया जाता है। इसलिए इसको तबाही की मुख्य वजहों में से एक माना जाता है।

मोहनजोदड़ो पर बनी फिल्म – Mohenjo Daro Movie

मोहनजोदड़ो पर फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें बॉलीवुड के मशहूर एक्टर ऋतिक रोशन और पूजा हेगड़े ने लीड रोल निभाया है। इस फिल्म को आशुतोष गवारीकर के निर्देशन में बनाया गया है।

वहीं मोहनजोदड़ो के पुरात्तविक महत्व को देखते हुए इसे यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज की लिस्ट में भी शामिल किया है।

वहीं खुदाई से मिले कुछ प्रमाण के आधार पर यह कहा जाता है कि मोहनजोदड़ो एक विकसित एवं सभ्य सभ्यता थी, जो कि इतिहास को गौरवपूर्ण बनाता है। वहीं हम सभी को इसके इतिहास से सीखने की जरूरत है।

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3 COMMENTS

  1. भारत के लोग लड़ते रहते है इस बात को लेकर हमे क्या करना इतिहास की बाते लेकर……..
    मै तो वर्तमान में चलता हु….
    हिन्दू सभ्यता प्राचीन है तो Mohenjoddo वहा क्या कर रहा था…
    ये मोहेंजोड़दो भगवान् श्रीकृष्ण काल का है क्योकि हिन्दू धर्म ही सभ्यतायो की देनी है…

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