हर्ष और उल्लास का त्योहार “ओणम” – Onam Festival in Hindi

Onam in Hindi

भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। भारत की विविधता में एकता ही इसकी पहचान है। यहां कई अलग-अलग जाति, धर्म, लिंग, सभ्यता के लोग रहते हैं। वहीं कुछ त्योहार ऐसे हैं, जिन्हें पूरे देश में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है, जबकि कुछ त्योहारों को देश के कुछ हिस्सों अथवा राज्यों में ही अपनी-अपनी संस्कृति एवं रीति-रिवाज के साथ बनाने की परंपरा है, वहीं उन्हीं त्योहारों में से एक है, दक्षिण भारत के केरल में मनाए जाने वाला “ओणम” का त्योहार।

Onam

हर्ष और उल्लास का त्योहार “ओणम” – Onam Festival in Hindi

ओणम का पर्व दक्षिण भारत में मनाए जाने वाला प्रमुख त्योहार है। इस त्योहार को केरल के लोग बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं और इस पर्व को लेकर खास तैयारी करते हैं।

इस खास त्योहार को राजा महाबली के सम्मान में बनाया जाता है। ओणम के पर्व को मनाने के पीछे कई धार्मिक एवं पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई हैं।

दक्षिण भारत का प्रमुख त्योहार ओणम को प्रमुख कृषि त्योहार के रुप में भी जाना जाता है, क्योंकि इस समय दक्षिण की फसलों की कटाई का अच्छा समय होता है। वहीं इस दौरान किसान अपनी अच्छी फसलों की अच्छी पैदावार और संपन्नता देखकर खुश होते हैं जिसका जश्न वे ओणम के त्योहार के रुप में मनाते हैं।

इसके अलावा ओणम को मलयालम त्योहार भी कहा जाता है। इस पर्व के मौके पर केरल राज्य में 4 दिन का सार्वजनिक अवकाश रहता है। ओणम के पर्व के दौरान दक्षिण भारत को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और विशेष तरह के सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसकी रौनक को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

वहीं ओणम की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसे नेशनल फेस्टिवल भी घोषित किया गया है।

मलयालम पर्व ओणम को कब मनाते हैं ? – When is Onam Celebrated

ओणम के इस खूबसूरत एवं पावन पर्व को मलयालम कैलेंडर के मुताबिक पहले महीने “चिंगम मास” के थिरुवोनम नक्षत्र में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

जो कि हर साल अगस्त और सितंबर माह के दौरान पड़ता है। चिंगम के मास को सिम्हा और अवनी माह भी कहा जाता है। सम्राट महाबली के सम्मान में मनाया जाने वाला यह त्योहार हस्त नक्षत्र से शुरु होकर श्रवण नक्षत्र तक करीब 4 से 10 दिनों तक चलता है।

ओणम के त्योहार के दौरान पूरे दक्षिण भारत, धार्मिक भावनाओं एवं वातावरण से ओतप्रोत होता है।

ओणम का त्योहार क्यों मनाते हैं और क्या है इसका महत्व? – Why is Onam Celebrated

दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले इस प्रमुख पर्व ओणम को लेकर कई धार्मिक एवं पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इस त्योहार से प्रमुख रुप से, अपनी प्रजा से अत्याधिक प्रेम करने वाले और भक्त प्रहलाद के पोते सम्राट महाबली एवं भगवान विष्णु के पांचवे अवतार ‘वामन’ की कथा जुड़ी हुई है।

ऐसी मान्यता है कि हर साल चिंगम माह के थिरुवोनम नक्षत्र में सम्राट महाबलि अपने राज्य की प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए केरल राज्य में आते हैं, इसलिए उनके स्वागत और सम्मान में केरल राज्य के लोग ओणम के इस पर्व को खास तरीके से मनाते हैं, इस त्योहार से जुड़ी धार्मिक कथा इस प्रकार है –

ओणम से जुड़ी राजा महाबली एवं भगवान विष्णु की प्रसिद्ध धार्मिक कथा – Onam Festival Story

अपने दादा और भक्त प्रहलाद की तरह, सम्राट महाबली भी भगवान विष्णु के सच्चे एवं अन्नय साधक थे, जो कि अपने राज्य की प्रजा से अत्याधिक प्रेम करते थे। सम्राट महाबली के अंदर दया, परोपकार, सदभाव और प्रेम कूट-कूट कर भरा था।

उनके यशस्वी, पराक्रमी और न्यायप्रिय होने की वजह से उनका सम्राज्य विशाल होता चला गया। वहीं एक असुर कुल में जन्म लेने के बाद भी महाराज महाबली का सम्राज्य धरती से लेकर स्वर्ग तक फैल गया।

उनके राज्य की जनता सम्राट महाबली को अपना भगवान मानती थी। वहीं असुर सम्राज्य का विस्तार होने के कारण बाकी देवी-देवताओं ने भगवान विष्णु जी को महाबली को सबक सिखाने के लिए धरती पर प्रकट होने के लिए कहा।

जिसके बाद चिंगम मास के महीने में भगवान विष्णु के पांचवे अवतार “वामन” धरती लोक पर प्रकट हुए।

वहीं जब एक बार सम्राट महाबली अपने सबसे ताकतवर शस्त्र को बचाने एवं अपनी शक्ति को कायम रखने के लिए अश्वमेज्ञ यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे थे, तब वामन देव इस यत्र में शामिल होने के लिए सम्राट महाबलि के पास पहुंचे।

ब्राह्मण के बेटे होने के नाते सम्राट ने उनका जमकर स्वागत-सत्कार किया और उनके मनचाही वस्तु मांगने के लिए कहा।

जिसके बाद वामन जी ने सम्राट महाबली से तीन पग भूमि मांग ली। महादानी एवं महाप्रतापी सम्राट महाबली ने उनका यह वचन स्वीकार कर लिया।

लेकिन जैसे ही सम्राट ने वामन देव को अपना हिस्सा लेने के लिए कहा तभी वामन देव अपने विशाल रुप में आ गए, जिनके पहले कदम में पूरी पृथ्वी समां जाती है, दूसरे पग में वे पूरे स्वर्गलोक को नाप देते हैं और जब उनके तीसरे कदम के लिए सम्राट महाबलि के पास देने के लिए कुछ भी नहीं बचता तो वचन के पक्के सम्राट महाबलि अपने वचन को पूरा करने के लिए अपना सर वामन देवता के कदमों के नीचे रख देते हैं।

और ऐसा करते ही राजा महाबली धरती के पाताललोक में समां जाते हैं। वहीं उनके पाताललोक में जाने से पहले विष्णु के अ्वतार वामन, सम्राट महाबली को उनकी प्रजा से अत्याधिक लगाव की वजह से साल में एक दिन अपनी प्रजा से मिलने का वरदान देते हैं और चिंगम मास के दौरान महाबली अपने राज्य की प्रजा से हर साल मिलने आते हैं, इसलिए तभी से महादानी और उदार सम्राट महाबली के सम्मान में दक्षिण भारत में ओणम का त्योहार मनाया जाने लगा। इस त्योहार को केरल में सभी धर्मों के लोग धूमधाम से मनाते हैं।

कैसे मनाते हैं ओणम का पर्व और इसे मनाने का तरीका – How is Onam Celebrated

ओणम के इस खास पर्व को दक्षिण भारत में विशेष तरीके से मनाया जाता है। सुख-समृद्धि के इस त्योहार पर दक्षिण भारत में हर घर में खास तरीके से पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजन एवं तरह-तरह के मीठे पकवान तैयार किए जाते हैं।

इसके साथ ही इस मौके पर प्रतिभोज का भी खासा महत्व है। करीब 10 दिनों तक चलने वाले इस त्योहर की तैयारियां यहां के लोग कई दिन पहले से ही शुरु कर देते हैं।

इस मौके पर लोग अपने-अपने घरों में सुंदर रंगोली बनाते हैं और रंग-बिरंगे फूलों से अपने घर को खास तरीके से सजाते हैं। इसे केरल की लोकल भाषा में पक्कम कहा जाता है।

ओणम के इस खास पर्व की प्रमुख धूम कोच्ची के थ्रिक्कारा मंदिर में देखने को मिलती है। यहां इस मौके पर खास क्रायकर्मों का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश के लोग शरीक होते हैं।

ओणम के पर्व के दौरान मंदिर में विशेष तरह की पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही यहां लगने वाला मेला पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

इसके अलावा ओणम के त्योहार में कथकली नृत्य, सर्प नौका दौड़ के साथ कई लोकगीत के कार्यक्रमों एवं सांस्कृतिक क्रार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। दस दिन तक चलने वाले इस त्योहार में हर दिन विशेष क्रार्यकर्मों का आयोजन होता है। इसके साथ ही इस त्योहार पर दान करने का भी खास महत्व है।

10 – 12 दिनों तक रहती है ओणम पर्व का उत्सव –

ओणम के खास पर्व की रौनक दस दिन तक दिखाई देती है –
• पहला दिन को अथं के रुप में संबोधित किया जाता है, इसका खास महत्व है ऐसी मान्यता है कि इस दिन राजा महाबली पाताल से केरल जाने की तैयारी करते हैं। तभी से इस पावन पर्व की शुरुआत हो जाती है।
• दूसरे दिन चिथिरा होता है, इस दिन से फूलों का कालीन ( पुक्क्लम ) की बनाने की शुरुआत की जाती है।
• तीसरे दिन को चोधी होता है, इस दिन पूक्कलम में 4-5 तरह के फूलों की लेयर बनाई जाती है।
• चौथे दिन को विशाकम के रुप में मनाते हैं, इस दिन का अपना एक अलग महत्व है, इस दिन तरह-तरह के सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
• पांचवे दिन को अनिज्हम के रुप में मनाया जाता है, इस दिन नौका प्रतियोगिता के लिए नाव की रेस की तैयारी की जाती है।
• छठवां दिन थिक्रेता होता है, इस दिन से ओणम पर्व की छुट्टियां मिलनी शुरु हो जाती हैं।
• सातवां दिन मूलम होता है, जिसमें मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
• आठवां दिन पूरादम होता है, जिसमें दानवीर सम्राट महाबली एवं भगवान विष्णु के पांचवे अवतार वामन देव की प्रतिमा घरों में स्थापित की जाती हैं।
• नौवां दिन उठादोम होता है, यह बेहद खास दिन होता है, इस दिन सम्राट महाबलि केरल में प्रवेश करते हैं।
• दसवां दिन थिरुवोनम होता है, जो कि काफी अहम दिन होता है, यह मुख्य ओणम का पर्व होता है। इस दौरान वामन देवता और महाबली की प्रतिमा को नदी में विर्सजित किया जाता है। इस पर्व की रौनक देखते ही बनती है।

ओणम का पर्व प्रेम, सम्मान, सदभाव, आदर, उमंग एवं खुशियों का त्योहार है। इस त्योहार पर केरल की रौनक को देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। वहीं फसलों की कटाई से संबंधित होने की वजह से इस त्योहार को इस राज्य की सुख-समृद्धि से भी जोड़ा जाता है।

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