केरल का इतिहास और जानकारी | Kerala History information

Kerala – केरल, मालाबार समुद्री सीमा पर स्थित दक्षिण भारतीय राज्य है। केरल जनसँख्या के हिसाब से भारत के 13 वा सबसे बड़ा राज्य है। राज्य को 14 जिलो में विभाजित किया गया है और थिरुवनंथापुरम राज्य की राजधानी है। थिरुवनंतपुरम राज्य का सबसे बड़ा शहर भी है।

Kerala

केरल का इतिहास और जानकारी – Kerala History information

चेरा साम्राज्य केरल के पहला मुख्य साम्राज्य था। आम युग (CE और AD) में दक्षिण में आय साम्राज्य और उत्तर में एज्हिमाला साम्राज्य की स्थापना की गयी थी। 3000 BCE से ही यह क्षेत्र मुख्य मसाला निर्यातक रहा है। राज्य के व्यापार में महत्व को प्लिनी के कार्यो में देखा जा सकता है।

15 वी शताब्दी में मसालों के व्यापार ने पुर्तगाली व्यापारियों को केरल आने के लिए आकर्षित किया और भारत में यूरोपीय उपनिवेशण के सारे रास्ते साफ़ हो गये। 20 वी शताब्दी के शुरू में, भारतीय स्वतंत्रता अभियान के समय केरल में दो प्रांतीय राज्य थे – त्रावण कोर राज्य और कोची साम्राज्य।

1949 में थिरु-कोच्ची नामक राज्य के निर्माण के लिए इन्हें मिला दिया गया। केरल के उत्तरी भाग में मालाबार क्षेत्र, ब्रिटिश भारत में मद्रास प्रान्त का भाग था, जो आज़ादी के बाद मद्रास राज्य का भाग बना।

राज्य पुनर्गठन एक्ट, 1956 के तहत वर्तमान केरल राज्य का निर्माण मद्रास राज्य के मालाबार जिले, थिरु-कोच्ची राज्य और कासरगोड तालुका और दक्षिण कनारा को मिलाकर किया गया।

आठवी शताब्दी में चेरा के प्राचीन साम्राज्य के विभाजन के बाद पहली बार केरल राज्य का एकीकरण किया गया। आज केरल के लोग पारंपरिक जीवन जीते है और समृद्ध संस्कृति और विरासत के साथ ख़ुशी से जीवन जीते है।

केरल में 1 नवम्बर के दिन को केरालाप्पिरवी (केरल का जन्मदिन) दिवस के नाम से मनाते है। इसे मलयालम दिवस के नाम से भी जाना जाता है।

केरल के जिले – Districts of kerala

केरल में कुल 14 जिले है, जिनमे से हर एक जिला अद्वितीय गंतव्य और प्रलोभन के लिए प्रसिद्ध है।

  • थिरुवनंतपुरम
  • कन्नूर
  • अलाप्पुज्हा
  • कासरगोड
  • कोट्टयम
  • इडुक्की
  • थ्रिस्सुर
  • कोल्लम
  • पलक्कड़
  • पठानमथित्ता
  • मलप्पुरम
  • कोज्हिकोड़े
  • एर्णाकुलम
  • वायनाड

केरल का धर्म – Religion of Kerala

भारत के दुसरे राज्यों की तुलना में केरल का अनुभव थोडा साम्प्रदायिक है। राज्य की आधे से ज्यादा जनसँख्या हिन्दू धर्म को मानती है, इसके बाद इस्लाम और क्रिस्चियन धर्म की बारी आती है। मलप्पुरम जिले को छोड़कर बाकी सभी जिलो में हिन्दू धर्म के लोगो की संख्या ज्यादा है, मलप्पुरम जिले में मुस्लिम जनजाति के लोगो की संख्या ज्यादा है। भारत के केरल राज्य में सर्वाधिक क्रिस्चियन समुदाय के लोग रहते है।

पौराणिक किंवदंतियों के अनुसार केरल की उत्पत्ति हिन्दू धर्म से हुई। केरल ने भारत को बहुत से संत और स्मारक दिए है। हिंदुत्व और अद्वैत दर्शन का प्रसार करने वाले आदिशंकराचार्य एक धार्मिक दर्शनशास्त्री थे, जिनका सम्बंध केरल से है।

अशोका के समय में यहाँ बुद्ध धर्म काफी प्रसिद्ध था लेकिन 12 वी शताब्दी से यह भी धूमिल हो गया। कुछ हिन्दू समुदाय जैसे सामंत क्षत्रिय्म अम्बलावासी, नायर, तिय्यास और मुस्लिम मरुमाक्काथायम के नाम से जाने जानी वाली पारंपरिक मैट्रिलिनियल प्रणाली अपनाते थे, जबकि भारत की आज़ादी के बाद यह प्रणाली भी धूमिल हो गयी। भारत के दुसरे राज्यों की तुलना में केरल राज्य में लिंग असमानता की मात्रा ज्यादा है।

केरल की भाषा – language of Kerala

केरल के लोग मलयालम बोलते है। ज्यादातर लोग सामान्य अंग्रेजी समझते है लेकिन कुछ लोग बोल नही पाते। स्थानिक लोग तमिल भाषा का प्रयोग करते है।

केरल की संस्कृति – Culture of Kerala

यहाँ की संस्कृति में आर्यन, द्रविड़ियन, अरब और यूरोपियन संस्कृति की झलक दिखाई देती है। साथ ही भारत और विदेश से आये प्रवासी भारतीयों और विदेशियों का प्रभाव की यहाँ की संस्कृति पर पड़ा है।

केरल के महोत्सव – Festival of Kerala

केरल के बहुत से मंदिरों में साल भर विविध महोत्सवो का आयोजन किया जाता है। महोत्सव के दौरान पवित्र ध्वज का आरोहण किया जाता है और महोत्सव के अंतिम दिन निकाल दिया जाता है। राज्य के मुख्य महोत्सवो में पूरम शामिल है, जिसे थ्रीसुर पूरम के नाम से भी जाना जाता है। “हाथी, आतिशबाजी और विशाल जनता” थ्रिसुर पूरम के मुख्य आकर्षण है।

दुसरे मुख्य महोत्सवो में मकराविलाक्कू, चिनाक्काथूर पूरम नेंमारा वल्लंगी वेला और उत्सवं मंदिर शामिल है। इस दौरान मंदिर के देवता की मूर्ति को पालकी में बिठाकर हाथी के साथ उनका जुलुस निकाला जाता है। जब यह जुलुस लोगो के घर तक पहुचने लगता है तो लोग भगवान को चावल, नारियल और प्रसाद चढाते है। जुलुस में पारंपरिक संगीत जैसे पंचावाद्यम बजाये जाते है।

केरल का पारंपरिक पोशाख – Traditional Costume of Kerala

केरल के पारंपरिक पोशाक को मुंडू और नेरियत्हू कहते है, जो पुरुष और महिला दोनों के लिए है। केरल की महिलाये पारंपरिक रूप से साड़ी और ब्लाउज धारण करती है। केरल मुंडू राज्य में बहुत प्रचलित है और इसे पुरुष धारण करते है।

यह विशेष सफ़ेद / क्रीम रंग की धोती होती है जिसे कमर के पास से पहनते है। सफ़ेद रंग की धोती पर निचे आती हुई एक सुनहरी पट्टी होती है और इस सुनहरे पट्टी की चौड़ाई ही इसकी कीमत निर्धारित करती है। यह एक सुरुचिपूर्वक पोशाक है, जिसका उपयोग अक्सर औपचारिक प्रयोजनों के समय किया जाता है।

महिलाओ का मुंडू नेरियात्हू इसी के समान होता है और इसमें उपरी शाल भी होती है। राज्य में सफ़ेद रंग के कपड़ो को सर्वाधिक महत्त्व दिया गया है। वर्तमान में अलग-अलग रंग के मुंडू और नेरियात्हू बाजार में उपलब्ध है।

केरल और पर्यटन लगभग एक दुसरे पर्यायवाची है। भरपूर उष्णकटिबंधीय हरियाली, नारियल के पेड़, गदगद कर देने वाली पानी पर तैरती नाव, मंदिर, आयुर्वेद की सुगंध, दुर्लभ झीले, नहर और द्वीप इत्यादि केरल को आकर्षित बनाते है। जो लोग दुनिया भर की सैर करना चाहते है उनके लिए केरल का सफल बेहद यादगार होंगा।

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