स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरक प्रसंग | Prerak Prasang Of Swami Vivekananda

Prerak Prasang In Hindi Of Swami VivekanandaPrerak Prasang In Hindi Of Swami Vivekananda

स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से कुछ प्रेरक प्रसंग | Prerak Prasang Of Swami Vivekananda

प्राचीन भारत से लेकर वर्तमान समय तक यदि किसी शक्सियत ने भारतीय युवाओ को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है तो वो है स्वामी विवेकानंद. विवेकानंद एक ऐसे व्यक्तिमत्व है जो देश के हर युवा के लिये आदर्श बन सकते है. उनकी कही एक भी बात पर यदि कोई अमल कर ले तो शायद उसे कभी जीवन में असफलता व् हार का मुह न देखना पड़े. आइये आज स्वामी विवेकानंदजी के जीवन के प्रेरक प्रसंग के बारे में जानते है.

1) Prerak Prasang In Hindi Of Swami Vivekananda:

एक बार स्वामी विवेकानंद हिमालय की यात्रा पर थे तभी उन्होंने वहा एक वयोवृद्ध आदमी को देखा जो बिना कोई आशा लिये अपने पैरो की तरफ देख रहा था और आगे जानेवाले रास्ते की तरफ देख रहा था.

तभी उस इंसान स्वामीजी से कहा, “हेल्लो सर, अब इस दुरी को कैसे पार किया जाये, अब मै और नही चल सकता, मेरी छाती में दर्द हो रहा है.” स्वामीजी शांति से उस इंसान की बातो और सुन रहे थे और उसका कहना पूरा होने के बाद उन्होंने जवाब दिया की,

“निचे अपने पैरो की तरफ देखो. तुम्हारे पैरो के निचे जो रास्ता है वो वह रास्ता है जिसे तुमने पार कर लिया है और यह वही रास्ता था जो पहले तुमने अपने पैरो के आगे देखा था, अब आगे आने वाला रास्ता भी जल्द ही तुम्हारे पैरो के निचे होंगा.” स्वामीजी के इन शब्दों ने उस वयोवृद्ध इंसान को अपने लक्ष्य को पूरा करने में काफी सहायता की.

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2) Swami Vivekananda Ke Prerak Prasang:

एक बार स्वामी विवेकानंद किसी देश में भ्रमण कर रहे थे. अचानक, एक जगह से गुजरते हुए उन्होंने देखा पुल पर खड़े कुछ युवाओं को नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बन्दूक से निशाना लगाते देखा. किसी भी युवक का एक भी निशाना सही नहीं लग रहा था.

तब उन्होंने ने एक युवक से बन्दूक ली और खुद निशाना लगाने लगे. उन्होंने अंडे पर पहला निशाना लगाया और वो बिलकुल सही लगा, फिर एक के बाद एक उन्होंने कुल 10 निशाने लगाए. और सभी बिलकुल सटीक लगे, ये देख युवक दंग रह गए और उन्होंने पुछा – स्वामी जी, भला आप ये कैसे कर लेते हैं? आपके सारे निशाने बिलकुल सटीक कैसे लग गये?

स्वामी विवेकनन्द जी बोले असंभव कुछ भी नहीं है, तुम जो भी कर रहे हो अपना पूरा दिमाग उस समय उसी एक काम में लगाओ. अगर तुम किसी चीज पर निशाना लगा रहे हो तो तम्हारा पूरा ध्यान सिर्फ अपने निशाने के लक्ष्य पर होना चाहिए. तब तुम अपने लक्ष्य से कभी चूकोगे नहीं.

यदि तुम अपना पाठ पढ़ रहे हो तो सिर्फ पाठ के बारे में सोचो. मेरे देश में बच्चो को यही पढाया जाता है.

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3. Swami Vivekananda Prerak Prasang In Hindi:

एक बार स्वामी विवेकानंद ट्रेन में यात्रा कर रहे थे. उन्होंने अपने हातो में राजा द्वारा उपहार में दी गयी घडी पहनी थी.
वही उनके पास में कुछ लडकिया भी बैठी थी जो स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा का मजाक उड़ा रही थी.तभी उन्होंने स्वामीजी का मजाक उड़ाने की ठानी.

उन्होंने स्वामीजी को उनकी घडी उन्हें देने को कहा और यदि उन्होंने नहीं दी तो वे सुरक्षाकर्मी से कहेंगे की स्वामीजी उनके साथ शारीरिक शोषण कर रहे थे. ऐसा कहते हुए उन्होंने स्वामीजी को धमकाया.

तभी स्वामीजी ने बहरा होने का नाटक किया और लडकियों से वे जो कुछ भी चाहती है उसे लिखकर देने को कहा. लडकियों ने वो जो कुछ भी चाहती है वो लिखा और स्वामीजी को दे दिया.

तभी स्वामीजी बोले,

“सुरक्षाकर्मी को बुलाइये, मुझे शिकायत करनी है.”
इस तरह विवेकानंद हमेशा सतर्क और चालाक रहते थे.

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4. Prerak Prasang Of Vivekananda:

स्वामीजी के जीवन में घटित इस घटना के बारे में हमें पक्का नही पता, पर एक ऐसा प्रसंग सुना है की-
स्वामी विवेकानंद जब जापान गये तो उन्हें धुंडने पर भी कही फल नही मिले (फल के नाम के बारे में नही पता), तभी उन्होंने खुद से कहा, शायद हमें यहाँ वह फल नही मिलेगा.

तभी वहा खड़े एक लड़के ने स्वामीजी के इन शब्दों को सुन लिया, सुनते ही वह दौड़ा और स्वामीजी के पास फलो से बड़ी बास्केट लेकर आया और कहा की, “कभी किसी को ये मत कहना की जापान में फल नही मिलते.”
सिख – देशभक्ति

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