इतिहास की सबसे चर्चित सलीम-अनारकली की प्रेम कहानी

नाम (Name) मिर्ज़ा नूरउददिन बैग मोहम्मद खान सलीम (जहांगीर)
जन्म (Birthday) 31 अगस्त 1569, फतेहपुर सीकरी, मुग़ल साम्राज्य
पिता का नाम (Father Name) अकबर
माता (Mother Name) हरका बाई या जोधा बाई (मरियम-उज़-जमानी)
शासन काल 1605 से 1627
मृत्यु (Death) 28 अक्टूबर 1627, राजोरी, कश्मीर

  सलीम, मुगल सम्राज्य में अकबर और मरियम उज्जमानी के संतान के रुप में पैदा हुए थे। सलीम शुरु से ही बेहद शौकीन और रंगीन मिजाज के थे। वे मुगल बादशाह अकबर के सबसे चहेते संतान थे, दरअसल काफी मिन्नतों और मुरादों के बाद उनका जन्म हुआ था।

बाद में सलीम को जहांगीर की उपाधि दी गई थी, जिसका अर्थ था, दुनिया को जीतने वाला। जहांगीर उर्फ सलीम, एक बेहद प्रसिद्ध एवं प्रभावशाली मुगल बादशाह थे, जिन्होंने अपनी विवेकशीलता और बुद्धिमानी से मुगल सम्राज्य का काफी विस्तार किया था।

इसके अलावा जहांगीर ने अपने शासनकाल में कला को भी काफी महत्व दिया था, इसी वजह से उनके शासनकाल को चित्रकला का स्वर्णकाल भी कहा गया है। सलीम को हिन्दी, उर्दू, फारसी, अरबी, ब्रजभाषा समेत कई भाषाओं का बेहतरीन ज्ञान था। इसके अलावा मुगल दरबारन अनारकली के साथ उनका रिश्ता और उनके प्रेम भी इतिहास में काफी चर्चित है।

अकबर की इकलौती संतान होने की वजह से शहजादे सलीम लाड़प्यार में काफी जिद्दी स्वभाव के हो गए थे, जिसके चलते अकबर ने उन्हें अनुशासन और तहजीफ सिखाने के लिए फोज के साथ भी भेज दिया था। आपको बता दें कि मुगल सम्राट अकबर और जहांगीर के रिश्ते शुरु से ही अच्छे नहीं थे। वहीं बाद में अकबर ही अपने बेटे सलीम और प्यार के बीच दीवार बन गए थे।

अनारकली का जीवन परिचय एक नजर में – Anarkali History in Hindi

नाम (Name) शरीफउननिस्सा एवं नादिरा बेगम (अनारकली)
माता (Mother Name) नूर खान अर्गन
पेशा  मुगल दरबार में नृतिका
धर्म  इस्लाम
मृत्यु (Death) 1599, लाहौर, पाकिस्तान
स्मारक  अनारकली का मकबरा (Tomb of Anarkali)

अनारकली, नादिरा के रुप में ईरान से आईं थी। वे अपनी सादगी और खूबसूरती के लिए पहचानी जाती थी, उन्हें जो भी एक बार देखता था, उनकी खूबसूरती का कायल हो जाता था। वहीं जब शहजादे सलीम ने भी पहली बार नादिरा बेगम को मुजरा करते देखा, तब वे भी उनकी सुंदरता के कायल हो गए थे और उन्हें अपना दिल दे बैठे थे।

वहीं बाद में उन्होंने ही अपने मुगल दरबार में नादिरा को अनारकली के नाम से नवाजा था, इसके बाद दोनों का प्रेम परवान चढ़ गया और नादिरा, अनारकली के रुप में इतिहास में प्रसिद्ध हो गईं।

सलीम-अकबर की मशहूर प्रेम-कहानी – Salim Anarkali Love Story

मुगल सम्राट अकबर की इकलौती संतान होने की वजह से सलीम वैभव-विलास में पले-बढ़े थे, जो कि रंगीन मिजाज के थे। उन्होंने करीब 20 शादियां की थी। हालांकि, कई शादियां उनकी राजनैतिक कारणों की वजह से भी हुईं थी।

हालांकि जब सलीम की नजर अपने पिता मुगल बादशाह अकबर के दरबार में नृतिका अनारकली उर्फ नादिरा पर पड़ी थी तो पहली बार उन्हें देखते ही वे अनारकली की खूबसूरती के दीवाने हो गए थे और उन्हें अपना दिल दे बैठे। दरअसल, अनारकली इतनी सुंदर थीं कि उनके सुंदरता के चर्चे पूरे लाहौर में थे।

वहीं अनारकली जितनी ज्यादा खूबसूरत थी, उतनी ही अच्छी नृतिका भी थी, एक बार जो कोई भी उन्हें डांस करते देख लेता था, उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाता था। इसके बाद सलीम ने खुश होकर अनारकली को अपने दरबार की नृतिका घोषित कर दिया था, जो कि शाही दरबार में शानदार नृत्य में मुगल बादशाहों का मनोरंजन करती थीं।

वहीं बाद में सलीम ही ने उनकी खूबसूरती और नाचने के गुण को देखते हुए उन्हें ”अनारकली” नाम दिया था। वहीं जब शहजादे सलीम ने अनारकली के हुस्न और सादगी से प्रभावित होकर उनके सामने अपने प्यार का इजहार किया था, तो शुरुआत में अनारकली ने यह सोचकर उनसे मना कर दिया कि वे एक नृतिका और शहजादे के बीच प्रेम-संबंध नहीं हो सकता, लेकिन बाद में वे ज्यादा समय तक खुद को सलीम के बेपनाह मोहब्बत से दूर नहीं रख सकीं और बाद में अनारकली भी सलीम को बेइंतहा प्यार करने लगीं।

इस तरह दोनों के प्यार का सिलसिला शुरु हुआ और धीमे-धीमे उनका प्यार परवान चढ़ने लगा। वहीं दोनों के बीच सब कुछ सही चल रहा था, तभी सलीम की बेगम नूरजहां ने उन दोनों को देख लिया और वे नहीं चाहती थीं कि सलीम उर्फ जहांगीर उनके सिवाय किसी अन्य को मोहब्बत करे।

इसलिए नूरजहां ने इसके खिलाफ षणयंत्र रखा और दोनों की प्रेमप्रसंग की खबर मुगल सम्राट अकबर को दे दी। वहीं जब मुगल बादशाह अकबर को उनके बेटे सलीम और हुस्न की मल्लिका अनारकली की लव स्टोरी के बारे में पता चला तो वे काफी क्रोधित हो गए, क्योंकि अकबर नहीं चाहते थे कि मुगल शहजादे सलीम का नाम एक नृतिका से जोड़ा जाए। अकबर सलीम और अनारकली के रिश्ते के बिल्कुल खिलाफ थे।

अकबर, मुगल सल्तनत की इज्जत को लेकर चिंतित थे और इसलिए उन्होंने सलीम और अनारकली को अलग-अलग करने की ठान ली। फिर क्या था, मुगल सम्राट अकबर ने अपने बेटे सलीम को अनारकली के साथ प्रेम संबंध तोड़ने और उससे कभी नहीं मिलने की हिदायत दी, लेकिन सलीम भी अनारकली से बेइंतहा मोहब्बत करते थे, इसलिए उन्होंने अपने पिता की एक बात नहीं सुनी और अनारकली के साथ अपने प्रेम-संबंध को बरकरार रखा।

जिसके चलते अकबर और सलीम के आपसी रिश्ते और अधिक बिगड़ गए और बाद में दोनों के बीच जंग की स्थिति तक बन गई। वहीं सलीम, अनारकली के प्यार में इतना खो गए थे कि उन्होंने अपने पिता के खिलाफ बगावत करनी शुरु कर दी। तो वहीं दूसरी तरफ मुगल सम्राट अकबर ने भी अनारकली को मौत की सजा देने का ऐलान कर दिया।

इसके लिए अनारकली की चारों तरफ तलाश की जाने लगी, लेकिन सलीम के हितैषियों ने पहले ही अनारकली को लाहौर से कहीं दूर ले जाकर छिपा दिया था। वहीं सलीम, अच्छी तरह समझ गए थे कि उनके पिता ही उनके और अनारकली के प्यार के असली दुश्मन हैं इसलिए उन्होंने अपने पिता अकबर के खिलाफ सेना तैयार की और जंग का आगाज कर दिया, हालांकि मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना के आगे सलीम उर्फ जहांगीर को हार का सामना करना पड़ा।

जिसके बाद अकबर ने अपने ही बेटे सलीम को बंदी बना लिया और उनके सामने रिहाई के दो शर्ते रखीं या तो वे अनारकली को उन्हें सौंप दे या फिर अपनी जान दे दें। वहीं सलीम, अनारकली को इस हद तक प्यार करते थे, कि उन्हें अपनी मोहब्बत के आगे अपनी जान की परवाह नहीं थी, इसलिए वे मरने के लिए तैयार हो गए।

हालांकि, जब शहजादे सलीम की मरने की भनक अनारकली को लगी, तब उन्होंन खुद को मुगल सम्राट अकबर को सौंप दिया और सलीम की रिहाई के लिए अकबर से विनती की। जिसके बाद मुगल सम्राट अकबर ने अनारकली को जिंदा दीवार में चुनाव देने की दर्दनाक सजा सुनाई और इस दर्दनाक सजा देने से पहले अनारकली की आखिरी ख्वाहिश पूछी।

जिसके बाद अनारकली ने अपनी जिंदगी की आखिरी रात मुगलआजम सलीम के साथ उनकी मल्लिकाहिन्दुस्तान बनकर गुजारने की इच्छा रखी। क्योंकि मुगल शहंशाह सलीम ने अनारकली से वादा किया था कि वे मरने से पहले उन्हें अपनी मल्लिकाहिन्दुस्तान बनाएंगे। इसके बाद मुगल सम्राट अकबर, अनारकली की अंतिम इच्छा को पूरी करने की इजाजत दे दी, फिर मरने से पहले दोनों ने एक साथ अपनी रात गुजारी।

और इसके अगले ही दिन अनारकली को सजा के मुताबिक जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया। इस तरह इस रात के बाद से सलीम और अनारकली दोनों हमेशाहमेशा के लिए एक-दूसरे से जुदा हो गए, लेकिन उन दोनों की प्रेम कहानी हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अमर हो गई।

हालांकि कुछ इतिहासकार इसे लेकर यह भी बताते हैं कि, अनारकली की मां नूर खान अर्गन जो कि मुगल दरबार में एक बेहद अच्छी नृतिका थी, और उनके नृत्य से प्रभावित होकर एक बार मुगल बादशाह अकबर ने उनसे कुछ भी मांगने का वचन दिया था, जब नूर खान ने कुछ नहीं मांगा था, लेकिन जब उन्हें अकबर द्धारा अपनी बेटी को इतनी दर्दनाक सजा देते देखा तब उन्होंने अकबर को उनका वचन याद करवाते हुए अपनी बेटी अनारकली की जिंदगी मांगी, जिसके बाद ऐसा माना जाता है कि अकबर ने अपने वचन को पूरा करते हुए एक सुरंग के माध्यम से अनारकली को लाहौर के बाहर भेज दिया और अनारकली से वचन लेता है कि वो कभी भी मुगल शहंशाह सलीम से नहीं मिलेगी।

इस तरह सलीम और अनारकली दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए, लेकिन दोनों की बेमिसाल मोहब्बत की दांस्ता हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अमर हो गई।

अनारकली की कब्र और मकबरा – Tomb of Anarkali

शहजादे सलीम ने अपने पिता अकबर की मौत के बाद पाकिस्तान के लाहौर में उसी जगह पर अनारकली का मकबरा बनवा दिया था, जहां पर अनारकली को दीवार पर जिंदा चुनवाया गया था। वहीं इस मकबरे पर अनारकली की मौत की तारीख 1599 और इस मकबरे का निर्माण पूरा होने की तारीख 1615 लिखी हुई है।

वहीं जहां पर अनारकली का यह भव्य मकबरा बना हुआ है, वहां पर आज भी बाजार लगता है, और यह मार्केट लेडीज सामान खरीदने के लिए काफी मशहूर है। यह बाजार पुराना अनारकली मार्केट और नया अनारकली मार्केट दो हिस्सों में बंटा हुआ है।

सलीम और अनारकली पर बनी मशहूर फिल्में – Salim Anarkali Movie

सलीम और अनारकली के बेमिसाल प्रेम कहानी पर कई फिल्में भी बनाई जा चुकी हैं, जो कि इस प्रकार है

  • फिल्म- मुगल-ए-आजम – Mughal-E-Azam

सलीम और अनारकली की अमर प्रेम कहानी पर बॉलीवुड की मशहूर एवं सुपरहिट फिल्म मुगल-ए-आजम बनाई जा चुकी है। यह फिल्म साल 1960 में रिलीज की गई थी,यह उस दौर की सबसे अधिक महंगी एवं क्लासिक फिल्म थी, जिसे बनाने में करीब 1 करोड़ रुपए की लागत खर्च हुई थी। वहीं इस फिल्म ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा पर राज किया था। वहीं इस फिल्म में कलाकारों ने भी बेहतरीन अभिनय किया था।

वहीं इस अमर प्रेम की कहानी पर बनी फिल्म ने बड़ी संख्या में लोगों को अपनी तरफ आर्कषित किया था, वहीं आज भी दर्शकों के दिल में इस फिल्म के लिए अपार प्यार और सम्मान है। आपको बता दें कि इस सुपरहिट फिल्म में अनारकली का किरदार बॉलीवुड की मशहूर एवं सबसे खूबसूरत एक्ट्रेस मधुबाला ने निभाया था, जबकि सलीम का किरदार बॉलीवुड के ट्रेजिडी मैन दिलीप कुमार साहब ने बेहद शानदार ढंग से अदा किया था।

वहीं इस फिल्म में मुगल सम्राट अकबर का रोल फेमस एक्टर पृथ्वी राजकपूर ने निभाया था, इन किरादारों ने अपने अभिनय से लोगों के दिल में अपने लिए एक अलग जगह बना ली थी। वहीं इस फिल्म का गाना ”प्यार किया तो डरना क्या” काफी मशहूर हुआ था, यह गाना आज भी लोगों द्धारा खूब पसंद किया जाता है।

  • फिल्म ”अनारकली” – Anarkali 1953

साल 1953 में फिल्म ”अनारकली” रिलीज हुई थी, इस फिल्म को नंदलाल और जसवंतलाल ने बनाया था। जिसमें प्रदीप कुमार ने सलीम का किरदार निभाया था, जबकि बीना रॉय ने अनारकली का रोल अदा किया था।

  • फिल्म ”लव्स ऑफ मुगल प्रिंस” – The Loves of a Mughal Prince

साल 1927 में सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म ”लव्स ऑफ मुगल प्रिंस” बनी थी, इस फिल्म को प्रफुल्ल रॉय द्धारा बनाया था। इस फिल्म में सलीम का किरदार सावन सिंह जबकि अनारकली का रोल सीता देवी ने निभाया था।

  • सलीम-अनारकली की प्रेम कथा पर आधारित टीवी धारावाहिक – Salim Anarkali Serial

सलीम-अनारकली की बेमिसाल प्रेम कहानी को न सिर्फ बड़े पर्दे पर दिखाया गया है, बल्कि इनके प्रेम कहानी पर बेस्ड कई टीवी धारावाहिक भी बनाए गए हैं। कलर्स टीवी पर इनकी प्रेम कहानी पर आधारिक एक टीवी सीरियल ”दास्तां-ए-मोहब्बत सलीम-अनारकली” भी टेलीकास्ट किया जा चुका है।

निखिल सिन्हा ने इस टीवी शो को टेलीकास्ट किया था, जबकि इस सीरियल में छोटे पर्दे की एक्ट्रेस सोनारिका भदोरिया ने अनारकली और शाहिर शेख ने सलीम का किरदार निभाया था। इसके अलावा कई किताबों में भी सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी का जिक्र देखने को मिलता है।

इस तरह से इन दोनों की प्रेम कहानी को कई लेखकों ने अपनी-अपनी काल्पनिक सोच का चौला पहनाया है, लेकिन इनकी प्रेम कहानी कल्पना और वास्तविकता के बीच के अंतर को खत्म करती है। हालांकि, लाहौर में बना अनारकली का मकबरा भी इस कहानी के ईर्द-गिर्द घूमता है। वहीं सलीम-अनारकली की प्रेम कहानी से हर सच्चे आशिक को अपने प्यार के लिए कुर्बानी एवं त्याग की भावना रखने की सीख लेनी चाहिए।

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Salim Anarkali Ki Prem Kahani

इतिहास में जोधाअकबर, हीररांझा की तरह सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी की भी मिसाल दी जाती हैं। दोनों की प्रेम कहानी इतिहास की सबसे चर्चित प्रेम कहानी है, जिसकी चर्चा आज भी लोगों द्वारा की जाती है।

हालांकि, सलीमअनारकली की प्रेम कहानी को कई इतिहासकार सत्य मांगते हैं तो कई इसे महज लेखक की कल्पना बताते हैं। फिलहाल, सलीम-अनारकली की लव स्टोरी पर कई फिल्में और टीवी सीरियल भी बन चुके हैं। तो आइए जानते हैं इस मशहूर अमर प्रेम कहानी के बारे में

इतिहास की सबसे चर्चित सलीमअनारकली की प्रेम कहानी – Salim Anarkali Story in Hindi

Salim Anarkali Story सलीमअनारली की प्रेम कहानी को जानने से पहले सलीम और अनारकली दोनों के बारे में जानना जरूरी है, तो आइए जानते हैं दोनों के संक्षिप्त जीवन परिचय एक नजर में

सलीम का संक्षिप्त जीवन परिचय एक नजर में – Salim History in Hindi

नाम (Name) मिर्ज़ा नूरउददिन बैग मोहम्मद खान सलीम (जहांगीर)
जन्म (Birthday) 31 अगस्त 1569, फतेहपुर सीकरी, मुग़ल साम्राज्य
पिता का नाम (Father Name) अकबर
माता (Mother Name) हरका बाई या जोधा बाई (मरियम-उज़-जमानी)
शासन काल 1605 से 1627
मृत्यु (Death) 28 अक्टूबर 1627, राजोरी, कश्मीर

  सलीम, मुगल सम्राज्य में अकबर और मरियम उज्जमानी के संतान के रुप में पैदा हुए थे। सलीम शुरु से ही बेहद शौकीन और रंगीन मिजाज के थे। वे मुगल बादशाह अकबर के सबसे चहेते संतान थे, दरअसल काफी मिन्नतों और मुरादों के बाद उनका जन्म हुआ था।

बाद में सलीम को जहांगीर की उपाधि दी गई थी, जिसका अर्थ था, दुनिया को जीतने वाला। जहांगीर उर्फ सलीम, एक बेहद प्रसिद्ध एवं प्रभावशाली मुगल बादशाह थे, जिन्होंने अपनी विवेकशीलता और बुद्धिमानी से मुगल सम्राज्य का काफी विस्तार किया था।

इसके अलावा जहांगीर ने अपने शासनकाल में कला को भी काफी महत्व दिया था, इसी वजह से उनके शासनकाल को चित्रकला का स्वर्णकाल भी कहा गया है। सलीम को हिन्दी, उर्दू, फारसी, अरबी, ब्रजभाषा समेत कई भाषाओं का बेहतरीन ज्ञान था। इसके अलावा मुगल दरबारन अनारकली के साथ उनका रिश्ता और उनके प्रेम भी इतिहास में काफी चर्चित है।

अकबर की इकलौती संतान होने की वजह से शहजादे सलीम लाड़प्यार में काफी जिद्दी स्वभाव के हो गए थे, जिसके चलते अकबर ने उन्हें अनुशासन और तहजीफ सिखाने के लिए फोज के साथ भी भेज दिया था। आपको बता दें कि मुगल सम्राट अकबर और जहांगीर के रिश्ते शुरु से ही अच्छे नहीं थे। वहीं बाद में अकबर ही अपने बेटे सलीम और प्यार के बीच दीवार बन गए थे।

अनारकली का जीवन परिचय एक नजर में – Anarkali History in Hindi

नाम (Name) शरीफउननिस्सा एवं नादिरा बेगम (अनारकली)
माता (Mother Name) नूर खान अर्गन
पेशा  मुगल दरबार में नृतिका
धर्म  इस्लाम
मृत्यु (Death) 1599, लाहौर, पाकिस्तान
स्मारक  अनारकली का मकबरा (Tomb of Anarkali)

अनारकली, नादिरा के रुप में ईरान से आईं थी। वे अपनी सादगी और खूबसूरती के लिए पहचानी जाती थी, उन्हें जो भी एक बार देखता था, उनकी खूबसूरती का कायल हो जाता था। वहीं जब शहजादे सलीम ने भी पहली बार नादिरा बेगम को मुजरा करते देखा, तब वे भी उनकी सुंदरता के कायल हो गए थे और उन्हें अपना दिल दे बैठे थे।

वहीं बाद में उन्होंने ही अपने मुगल दरबार में नादिरा को अनारकली के नाम से नवाजा था, इसके बाद दोनों का प्रेम परवान चढ़ गया और नादिरा, अनारकली के रुप में इतिहास में प्रसिद्ध हो गईं।

सलीम-अकबर की मशहूर प्रेम-कहानी – Salim Anarkali Love Story

मुगल सम्राट अकबर की इकलौती संतान होने की वजह से सलीम वैभव-विलास में पले-बढ़े थे, जो कि रंगीन मिजाज के थे। उन्होंने करीब 20 शादियां की थी। हालांकि, कई शादियां उनकी राजनैतिक कारणों की वजह से भी हुईं थी।

हालांकि जब सलीम की नजर अपने पिता मुगल बादशाह अकबर के दरबार में नृतिका अनारकली उर्फ नादिरा पर पड़ी थी तो पहली बार उन्हें देखते ही वे अनारकली की खूबसूरती के दीवाने हो गए थे और उन्हें अपना दिल दे बैठे। दरअसल, अनारकली इतनी सुंदर थीं कि उनके सुंदरता के चर्चे पूरे लाहौर में थे।

वहीं अनारकली जितनी ज्यादा खूबसूरत थी, उतनी ही अच्छी नृतिका भी थी, एक बार जो कोई भी उन्हें डांस करते देख लेता था, उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाता था। इसके बाद सलीम ने खुश होकर अनारकली को अपने दरबार की नृतिका घोषित कर दिया था, जो कि शाही दरबार में शानदार नृत्य में मुगल बादशाहों का मनोरंजन करती थीं।

वहीं बाद में सलीम ही ने उनकी खूबसूरती और नाचने के गुण को देखते हुए उन्हें ”अनारकली” नाम दिया था। वहीं जब शहजादे सलीम ने अनारकली के हुस्न और सादगी से प्रभावित होकर उनके सामने अपने प्यार का इजहार किया था, तो शुरुआत में अनारकली ने यह सोचकर उनसे मना कर दिया कि वे एक नृतिका और शहजादे के बीच प्रेम-संबंध नहीं हो सकता, लेकिन बाद में वे ज्यादा समय तक खुद को सलीम के बेपनाह मोहब्बत से दूर नहीं रख सकीं और बाद में अनारकली भी सलीम को बेइंतहा प्यार करने लगीं।

इस तरह दोनों के प्यार का सिलसिला शुरु हुआ और धीमे-धीमे उनका प्यार परवान चढ़ने लगा। वहीं दोनों के बीच सब कुछ सही चल रहा था, तभी सलीम की बेगम नूरजहां ने उन दोनों को देख लिया और वे नहीं चाहती थीं कि सलीम उर्फ जहांगीर उनके सिवाय किसी अन्य को मोहब्बत करे।

इसलिए नूरजहां ने इसके खिलाफ षणयंत्र रखा और दोनों की प्रेमप्रसंग की खबर मुगल सम्राट अकबर को दे दी। वहीं जब मुगल बादशाह अकबर को उनके बेटे सलीम और हुस्न की मल्लिका अनारकली की लव स्टोरी के बारे में पता चला तो वे काफी क्रोधित हो गए, क्योंकि अकबर नहीं चाहते थे कि मुगल शहजादे सलीम का नाम एक नृतिका से जोड़ा जाए। अकबर सलीम और अनारकली के रिश्ते के बिल्कुल खिलाफ थे।

अकबर, मुगल सल्तनत की इज्जत को लेकर चिंतित थे और इसलिए उन्होंने सलीम और अनारकली को अलग-अलग करने की ठान ली। फिर क्या था, मुगल सम्राट अकबर ने अपने बेटे सलीम को अनारकली के साथ प्रेम संबंध तोड़ने और उससे कभी नहीं मिलने की हिदायत दी, लेकिन सलीम भी अनारकली से बेइंतहा मोहब्बत करते थे, इसलिए उन्होंने अपने पिता की एक बात नहीं सुनी और अनारकली के साथ अपने प्रेम-संबंध को बरकरार रखा।

जिसके चलते अकबर और सलीम के आपसी रिश्ते और अधिक बिगड़ गए और बाद में दोनों के बीच जंग की स्थिति तक बन गई। वहीं सलीम, अनारकली के प्यार में इतना खो गए थे कि उन्होंने अपने पिता के खिलाफ बगावत करनी शुरु कर दी। तो वहीं दूसरी तरफ मुगल सम्राट अकबर ने भी अनारकली को मौत की सजा देने का ऐलान कर दिया।

इसके लिए अनारकली की चारों तरफ तलाश की जाने लगी, लेकिन सलीम के हितैषियों ने पहले ही अनारकली को लाहौर से कहीं दूर ले जाकर छिपा दिया था। वहीं सलीम, अच्छी तरह समझ गए थे कि उनके पिता ही उनके और अनारकली के प्यार के असली दुश्मन हैं इसलिए उन्होंने अपने पिता अकबर के खिलाफ सेना तैयार की और जंग का आगाज कर दिया, हालांकि मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना के आगे सलीम उर्फ जहांगीर को हार का सामना करना पड़ा।

जिसके बाद अकबर ने अपने ही बेटे सलीम को बंदी बना लिया और उनके सामने रिहाई के दो शर्ते रखीं या तो वे अनारकली को उन्हें सौंप दे या फिर अपनी जान दे दें। वहीं सलीम, अनारकली को इस हद तक प्यार करते थे, कि उन्हें अपनी मोहब्बत के आगे अपनी जान की परवाह नहीं थी, इसलिए वे मरने के लिए तैयार हो गए।

हालांकि, जब शहजादे सलीम की मरने की भनक अनारकली को लगी, तब उन्होंन खुद को मुगल सम्राट अकबर को सौंप दिया और सलीम की रिहाई के लिए अकबर से विनती की। जिसके बाद मुगल सम्राट अकबर ने अनारकली को जिंदा दीवार में चुनाव देने की दर्दनाक सजा सुनाई और इस दर्दनाक सजा देने से पहले अनारकली की आखिरी ख्वाहिश पूछी।

जिसके बाद अनारकली ने अपनी जिंदगी की आखिरी रात मुगलआजम सलीम के साथ उनकी मल्लिकाहिन्दुस्तान बनकर गुजारने की इच्छा रखी। क्योंकि मुगल शहंशाह सलीम ने अनारकली से वादा किया था कि वे मरने से पहले उन्हें अपनी मल्लिकाहिन्दुस्तान बनाएंगे। इसके बाद मुगल सम्राट अकबर, अनारकली की अंतिम इच्छा को पूरी करने की इजाजत दे दी, फिर मरने से पहले दोनों ने एक साथ अपनी रात गुजारी।

और इसके अगले ही दिन अनारकली को सजा के मुताबिक जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया। इस तरह इस रात के बाद से सलीम और अनारकली दोनों हमेशाहमेशा के लिए एक-दूसरे से जुदा हो गए, लेकिन उन दोनों की प्रेम कहानी हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अमर हो गई।

हालांकि कुछ इतिहासकार इसे लेकर यह भी बताते हैं कि, अनारकली की मां नूर खान अर्गन जो कि मुगल दरबार में एक बेहद अच्छी नृतिका थी, और उनके नृत्य से प्रभावित होकर एक बार मुगल बादशाह अकबर ने उनसे कुछ भी मांगने का वचन दिया था, जब नूर खान ने कुछ नहीं मांगा था, लेकिन जब उन्हें अकबर द्धारा अपनी बेटी को इतनी दर्दनाक सजा देते देखा तब उन्होंने अकबर को उनका वचन याद करवाते हुए अपनी बेटी अनारकली की जिंदगी मांगी, जिसके बाद ऐसा माना जाता है कि अकबर ने अपने वचन को पूरा करते हुए एक सुरंग के माध्यम से अनारकली को लाहौर के बाहर भेज दिया और अनारकली से वचन लेता है कि वो कभी भी मुगल शहंशाह सलीम से नहीं मिलेगी।

इस तरह सलीम और अनारकली दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए, लेकिन दोनों की बेमिसाल मोहब्बत की दांस्ता हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अमर हो गई।

अनारकली की कब्र और मकबरा – Tomb of Anarkali

शहजादे सलीम ने अपने पिता अकबर की मौत के बाद पाकिस्तान के लाहौर में उसी जगह पर अनारकली का मकबरा बनवा दिया था, जहां पर अनारकली को दीवार पर जिंदा चुनवाया गया था। वहीं इस मकबरे पर अनारकली की मौत की तारीख 1599 और इस मकबरे का निर्माण पूरा होने की तारीख 1615 लिखी हुई है।

वहीं जहां पर अनारकली का यह भव्य मकबरा बना हुआ है, वहां पर आज भी बाजार लगता है, और यह मार्केट लेडीज सामान खरीदने के लिए काफी मशहूर है। यह बाजार पुराना अनारकली मार्केट और नया अनारकली मार्केट दो हिस्सों में बंटा हुआ है।

सलीम और अनारकली पर बनी मशहूर फिल्में – Salim Anarkali Movie

सलीम और अनारकली के बेमिसाल प्रेम कहानी पर कई फिल्में भी बनाई जा चुकी हैं, जो कि इस प्रकार है

  • फिल्म- मुगल-ए-आजम – Mughal-E-Azam

सलीम और अनारकली की अमर प्रेम कहानी पर बॉलीवुड की मशहूर एवं सुपरहिट फिल्म मुगल-ए-आजम बनाई जा चुकी है। यह फिल्म साल 1960 में रिलीज की गई थी,यह उस दौर की सबसे अधिक महंगी एवं क्लासिक फिल्म थी, जिसे बनाने में करीब 1 करोड़ रुपए की लागत खर्च हुई थी। वहीं इस फिल्म ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा पर राज किया था। वहीं इस फिल्म में कलाकारों ने भी बेहतरीन अभिनय किया था।

वहीं इस अमर प्रेम की कहानी पर बनी फिल्म ने बड़ी संख्या में लोगों को अपनी तरफ आर्कषित किया था, वहीं आज भी दर्शकों के दिल में इस फिल्म के लिए अपार प्यार और सम्मान है। आपको बता दें कि इस सुपरहिट फिल्म में अनारकली का किरदार बॉलीवुड की मशहूर एवं सबसे खूबसूरत एक्ट्रेस मधुबाला ने निभाया था, जबकि सलीम का किरदार बॉलीवुड के ट्रेजिडी मैन दिलीप कुमार साहब ने बेहद शानदार ढंग से अदा किया था।

वहीं इस फिल्म में मुगल सम्राट अकबर का रोल फेमस एक्टर पृथ्वी राजकपूर ने निभाया था, इन किरादारों ने अपने अभिनय से लोगों के दिल में अपने लिए एक अलग जगह बना ली थी। वहीं इस फिल्म का गाना ”प्यार किया तो डरना क्या” काफी मशहूर हुआ था, यह गाना आज भी लोगों द्धारा खूब पसंद किया जाता है।

  • फिल्म ”अनारकली” – Anarkali 1953

साल 1953 में फिल्म ”अनारकली” रिलीज हुई थी, इस फिल्म को नंदलाल और जसवंतलाल ने बनाया था। जिसमें प्रदीप कुमार ने सलीम का किरदार निभाया था, जबकि बीना रॉय ने अनारकली का रोल अदा किया था।

  • फिल्म ”लव्स ऑफ मुगल प्रिंस” – The Loves of a Mughal Prince

साल 1927 में सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म ”लव्स ऑफ मुगल प्रिंस” बनी थी, इस फिल्म को प्रफुल्ल रॉय द्धारा बनाया था। इस फिल्म में सलीम का किरदार सावन सिंह जबकि अनारकली का रोल सीता देवी ने निभाया था।

  • सलीम-अनारकली की प्रेम कथा पर आधारित टीवी धारावाहिक – Salim Anarkali Serial

सलीम-अनारकली की बेमिसाल प्रेम कहानी को न सिर्फ बड़े पर्दे पर दिखाया गया है, बल्कि इनके प्रेम कहानी पर बेस्ड कई टीवी धारावाहिक भी बनाए गए हैं। कलर्स टीवी पर इनकी प्रेम कहानी पर आधारिक एक टीवी सीरियल ”दास्तां-ए-मोहब्बत सलीम-अनारकली” भी टेलीकास्ट किया जा चुका है।

निखिल सिन्हा ने इस टीवी शो को टेलीकास्ट किया था, जबकि इस सीरियल में छोटे पर्दे की एक्ट्रेस सोनारिका भदोरिया ने अनारकली और शाहिर शेख ने सलीम का किरदार निभाया था। इसके अलावा कई किताबों में भी सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी का जिक्र देखने को मिलता है।

इस तरह से इन दोनों की प्रेम कहानी को कई लेखकों ने अपनी-अपनी काल्पनिक सोच का चौला पहनाया है, लेकिन इनकी प्रेम कहानी कल्पना और वास्तविकता के बीच के अंतर को खत्म करती है। हालांकि, लाहौर में बना अनारकली का मकबरा भी इस कहानी के ईर्द-गिर्द घूमता है। वहीं सलीम-अनारकली की प्रेम कहानी से हर सच्चे आशिक को अपने प्यार के लिए कुर्बानी एवं त्याग की भावना रखने की सीख लेनी चाहिए।

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