कैसी है अफगानिस्तान में हिंदू और सिख की जिंदगी

Life of Sikh and Hindus in Afghanistan

भारत में अलग – अलग धर्मों के लोग रहते है इसलिए इसे धर्मनिरपेक्ष देश भी कहा जाता है हालांकि भारत में सबसे ज्यादा आबादी हिंदू और सिख धर्म की है। दुनियाभर के दूसरे देशों में भी हिंदु समुदाय के लोग रहते है लेकिन उनका जीवन उन देशों में कैसा है इस पर कम ही बातें उभर कर आती है शायद इसलिए क्योंकि बाकी देशों में हिंदु और सिख समुदाय अल्पसंख्यक है पर एक समाज में होने के नाते हमें इन बातों पर जरुर गौर करना चाहिए कि कौन सा समुदाय किस देश में कैसी स्थिति में है तभी हम अल्पसंख्यक समुदायों को आगे लेकर आ पाएंगे।

इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे है अफगानिस्तान में हिंदु और सिख समुदाय के जीवन – Sikh and Hindus in Afghanistan के बारे में।

Sikh and Hindus in Afghanistan
Sikh and Hindus in Afghanistan

कैसी है अफगानिस्तान में हिंदू और सिख की जिंदगी – Sikh and Hindus in Afghanistan

अफगानिस्तान इतिहास में कभी भारत का ही हिस्सा हुआ करता था। इसलिए इसके बहुत से तार आज भी भारत से जुड़े है हालांकि अफगानिस्तान शुरु से मुस्लिम राष्ट्र है। लेकिन यहां पर कुछ आबादी हिंदु और सिखों की भी हैं। जो यहां बरसों से रहते हुए आ रहे है लेकिन सत्तर के दशक में आत्मघाती हमले के बाद कई हिंदु और सिखों ने पलायन किया था।

लेकिन उसके बाद वो लौट आए थे। लेकिन उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया गया था। जो उन्हें आज तक नहीं मिल पाई है। यहां पर होने वाले अंदरुनी लड़ाइयों के कारण भी हिंदु सिखों का जीवन प्रभावित होता है जिनमें उनकी कोई भागीदारी नहीं है लेकिन इसके बावजूद वो इन घटनाओं का शिकार होते है।

रिपोर्टस के अनुसार अफगानिस्तान में रहने वाले सिख और हिंदु सबसे ज्यादा परेशान अफगानिस्तान में होने वाले आत्मघाती हमलों से परेशान रहते है इस साल अफगानिस्तान के शहर जलालाबाद में हुए बम धमाके में बहुत सारे लोग मारे गए थे जिसमें अधिकांश लोग हिंदु और सिख थे जो अफगानिस्तान के राष्ट्रपति गिलानी से मिलने जा रहे थे। जलालाबाद में हुए आत्मघाती हमले में हिंदु सिख समुदाय का नेतृत्व करने वाले अवतार सिंह खालसा भी मारे गए थे।

और हैरानी की बात ये है कि उनकी मौत उनके नामांकन के कुछ दिनों बाद ही हो गई। जिसके बाद उनके बेटें को हिंदु और सिख समुदाय की तरफ से चुनावों में उतरना पड़ा। लेकिन उनके लिए चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि अफगानिस्तान में हिंदु और सिख समुदाय के लिए केवल एक है निर्वाचन सीट है जिसके लिए वो अकेल उम्मीदवार है।

अफगानिस्तान में हिंदु और सिख अल्पसंख्यक होने के कारण उन्हें अपने त्योहारों और रस्मा रिवाजों को आजादी से मनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन क्योंकि यही उनकी मातृभूमि है इसलिए वो इसे छोड़कर भी नहीं जा सकते।

शिक्षा का अभाव

अफगानिस्तान में वैसे तो सभी समुदायों के लिए जीवन बहुत मुश्किल है क्योंकि यहां आतंकी हमले होते रहते है। लेकिन हिंदु और सिखों के लिए ये समस्या ओर भी बढ़ जाती है क्योंकि रिपोर्ट्स की माने तो यहां पर रहने वाले अधिकांश युवा अच्छी शिक्षा नहीं पा पाते है। इसके अलावा हिंदु और सिख अल्पसंख्यकों को सरकार से वो फायदे भी नहीं मिल पाते है जो दूसरे समुदायों को मिलते हैं।

लेकिन अफगानिस्तान में हिंदु और सिखों की ऐसी स्थिति के लिए कही ना कही अफगानिस्तान की सरकार की लापरवाही जिम्मेदार है। किसी भी देश में कोई समुदाय अल्पसंख्यक है या अधिकांश आबादी में। लेकिन ये उस देश की सरकार का कत्तर्व्य है कि वो अपने देश के हर समुदाय के अधिकारों का ध्यान रखें।

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3 COMMENTS

    • धन्यवाद रवि शर्मा जी, हमें यह जानकर बेहद खुशी हुई कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया । इस लेख के माध्यम से हमने आपको अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू-सिख की जिंदगी के बारे में जानकारी शेयर की। वहीं अफगानिस्तान में सिखों की हालत बेहद दयनीय है, जिन पर वहां की सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।

    • इस पोस्ट को पढ़ने के लिए शुक्रिया रवि जी, हम आगे भी इस तरह के पोस्ट अपलोड करते रहेंगे। कृपया आप हमारी इस वेबसाइट से जुड़े रहिए।

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