“शिव स्मारक” जो बनेंगा दुनिया का सबसे ऊँचा स्टैच्यू…

Statue of Shivaji Maharaj

छत्रपति शिवाजी महाराज एक अविश्वसनीय भारतीय योद्धा और मराठा साम्राज्य के बहादुर संस्थापक थे। उन्होनें काफी संघर्ष के बाद पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। इसके अलावा उन्होनें भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उनकी रणनीति का हर कोई घायलयल था। वे हमेशा ही अपनी कुशल रणनीति से किसी भी राज्य में शासन करने के सक्षम थे, इसी वजह से हर कोई उनकी तरफ आर्कषित हो जाया करता  था। वहीं उनके द्धारा भारत के लिए किए गए त्याग और बलदिान को आज भी याद किया जाता है। इसलिए उनके सम्मान के लिए महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक – Shiv Smarak का निर्माण किया जा रहा है।

छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक – Shiv Smarak पूरी तरह से शिवाजी महाराज को समर्पित स्मारक है। वहीं यह स्मारक दुनिया का सबसे ऊंचा स्मारक होगा। यह भव्य स्मारक भारत के मुंबई शहर के तट के पास अरब सागर में बनाया जा रहा है। जिसका निर्माण काम साल 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है।

Statue of Shivaji Maharaj

“शिव स्मारक” जो बनेंगा दुनिया का सबसे ऊँचा स्टैच्यू – Statue of Shivaji Maharaj

सपनों की नगरी मुंबई में समुद्र के बीचों-बीच बन रही शिवाजी महाराज की प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी।  शिवाजी महाराज की 210 मीटर ऊंची विशाल प्रतिमा यहां के लोगों के लिए आर्कषण का मुख्य केन्द्र होगी।

इसके साथ ही इसके बनने से यहां के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। महाराष्ट्र सरकार करीब 3800 करोड़ रुपये की लगात से छत्रपति शिवाजी महाराज मेमोरियल का निर्माण करा रही है। आपको बता दें कि इस स्मारक के लिए बनने वाला आधार 77 मीटर होगा। इसी आधार पर घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी की मूर्ति होगी। वहीं पूरे स्मारक को 13 हेक्टेयर में फैले चट्टानों पर बनाया जा रहा है

दुनिया के सबसे ऊंचे स्मारक स्थल पर एमपी थिएटर, लाइब्रेरी, फूड कोर्ट भी बनाया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार का दावा है कि यह स्टैच्यू 2021 में बन कर तैयार हो जाएगा। इस स्मारक को शिव स्मारक – Shiv Smarak के नाम से भी जाना जाएगा।

फिलहाल अभी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा की सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (statue of unity)है। जिसकी ऊंचाई 182 मीटर है, जो कि शिवाजी महाराज की विशालकाय प्रतिमा से 28 मीटर कम है। शिवाजी का स्टैच्यू दुनिया में सबसे ऊंचा होगा। हालांकि बेस को मिलाने पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ऊंचाई सबसे ज्यादा होगी।

इसके अलावा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में सरदार वल्लभभाई पटेल की सीधी खड़ी मूर्ति है, जबकि शिवा स्मारक (Shiv Smarak) की मूर्ति में घोड़े और तलवार की ऊंचाई को भी जोड़ा गया है। आपको बता दें कि 31 अक्टूवर, 2018 को लौह पुरुष वल्लभ भाई पटेल की 143वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का उद्घाटन किया था। वहीं इसके बाद अब इस विशालकाय प्रतिमा को अन्य लोग भी देखने आ सकते हैं।

आपको बता दें कि गुजरात के केवड़ि‍या में बनी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है। यह प्रतिमा मातृभूमि की एकजुटता की भी प्रतीक मानी जाती है।

समुद्र के बीचों-बीच होगी छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा – Shiv Smarak Location

मुंबई के पास अरब सागर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। कई हजार लोगों की टीम मिलकर शिवाजी का स्टैच्यू मुंबई में अरब सागर में बना रहे हैं।

आपको बता दें कि शिवाजी के इस भव्य स्मारक का निर्माण मुंबई के गिरगांव चौपाटी के पास समुद्र में तट से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर किया जा रहा है।  इस विशालकाय प्रतिमा को बनाने में करीब 3800 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। 210 मीटर ऊंची इस भव्य स्मारक की नींव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल दिसंबर 2016 में रखी थी।

लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को सौंपी गई भव्य स्मारक की जिम्मेदारी – Shiv Smarak Construction

शिवाजी की मूर्ति को डिजाइन करने की जिम्मेदारी मशहूर शिल्पकार और पद्मभूषण से सम्मानित राम सुतार को सौंपी गई है। जिन्होंने इससे पहले ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ यानी सरदार वल्लभ भाई पटेल की स्मारक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भी  डिजाइन भी तैयार किया था।

आपको बता दें कि मराठा योद्धा शिवाजी का 210 मीटर ऊंचा स्मारक  का कॉन्ट्रेक्ट दिग्गज इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो  ( Larsen and Toubro Ltd ) को दिया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  द्रेवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना की जिम्मेदारी लार्सन एंड टुब्रो  कंपनी को सौंपी थी। यह कंपनी इस भव्य और विशालकाय शिवाजी स्मारक की  डिजाइन, सामान की खरीद और निर्माण काम देख रही है।

आपको बता दें कि इंजीनियरिंग कंपनी L&T ने सभी टेक्नीकल और फाइनेंनशियल एस्पेक्ट्स को फाइनल करने के बाद शरुआत में इस स्मारक के बनने की कुल लागत 4000 करोड़ रुपए आंकी गई थी। इसके बाद इसका कॉन्ट्रेक्ट राज्य सरकार की तरफ से  2500 करोड़ में दिया गया था।

शिवा स्मारक में म्यूजियम, थियेटर और अस्पताल भी होगा

भारत के महान योद्दा शिवाजी के स्मारक काफी सुविधाओं से लैस किया गया है। इस स्मारक को देखने आने वाले लोगों का भरपूर मनोरंजन हो सके और उन्हें किसी तरह की कोई असुविधा का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए इस भव्य स्मारक में एक म्यूजियम, थियेटर, दो जेटी, हैलीपेड, रंगभूमि  होगी।

इसके अलावा इस स्मारक को देखने आने वाले पर्यटकों के लिए मेडिकल सुविधा भी दी जाएगी, इसके लिए एक अस्पताल भी इस स्मारक में होगा। महाराष्ट्र सरकार की माने तो साल 2021 तक इस स्मारक का काम पूरा हो जाएगा और इसे लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

वहीं जब ये शिवाजी का स्मारक पूरी तरह बन जाएगा तो ये दुनिया का सबसे ऊंचा स्मारक कहलाएगा वहीं दूसरी तरफ लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मारक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होने का खिताब सिर्फ तीन साल ही रह सकेगा। हालांकि कुछ पर्यावरणविदों ने शिवा स्मारक के डिजाइन को लेकर भी आपत्ति जताई है।

फिलहाल इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर ही फैसला होगा कि दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति का खिताब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को मिलता है या फिर छत्रपति शिवाजी जी महाराज की स्मारक को मिलता है।

दोनों ही स्मारकों का निर्माण भारत के महान योद्धाओं की याद में करवाया गया है, इसलिए इसमें से किसी भी स्मारक को विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति मिलने का खिलाब मिले, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इन दोनो ही स्मारकों से भारतवासियों का सिर गर्व से ऊंचा होगा।

शिवाजी स्मारक तक पहुंचने के लिए विजिटर्स के लिए होगी खास व्यवस्था – Shiv Smarak Tourist Place

मुंबई में समुद्र के बीच बन रहे शिवाजी स्मारक तक विजिटर्स को ले जाने के लिए खास इंतजमात किए जाएंगे। समुद्र तट से स्मारक तक पहुंचने के लिए विजिटर्स को बोट की सुविधा दी जाएगी जिनके आवागमन के लिए अलग से एक जेटी (बोट खड़े होने का स्थान) बनाई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक जेटी के लिए 4 एकड़ जमीन को चिह्नित किया गया है। वहीं जेटी बनने से स्मारक इसकी दूरी महज 3 किमी तक रह जाएगी। जिससे  पर्यटक सिर्फ 10 मिनट में ही स्मारक तक पहुंच सकेंगे।

आपको बता दें कि जेटी के अलावा भी यहां कई तरह की सुविधाएं दी जाएंगी और पैसेंजर्स के लिए वेटिंग एरिया का भी व्यवस्था की जाएगी। इस तरह से यह विशालकाय शिवाजी का स्मारक दुनियाभर के पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल होगा।

शिवाजी स्मारक और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में सामानता – Equality in Shivaji Memorial and Statue of Unity

भारत के महान सपूतों के लिए बनाए गए दोनों ही स्मारक छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर्यटकों के लिए बनाए गए हैं। दोनों की स्मारक की नींव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रखी है। दोनों ही मूर्तियों को बनाने का की जिम्मेदारी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को दी गई है।

इसी तरह दोनों स्मारकों में एक बात और कॉमन है, वह है राम वी सुतार। जी हां, राम वी सुतार ने ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया है उसी तरह छत्रपति शिवाजी का स्मारक को भी सुतार के निगरानी में बनाया जाएगा।

आपको बता दें कि जहां शिवाजी स्मारक, मराठा साम्राज्य को स्थापित करने वाले शिवाजी जी के सम्मान में बनाया गया है, वहीं दूसरी तरफ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी द्धारा भारत के लौहपुरूष वल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजली दी गई है और उनके त्याग और बलिदान को इस स्मारक के जरिए हमेशा याद रखा जाएगा।

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फिलहाल अभी  दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है जिसकी ऊंचाई 182 मीटर ऊंची है। हालांकि 3 साल बाद शिवाजी स्मारक इस रिकार्ड को तोड़कर दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बन जाएगी। हालांकि दोनों ही स्मारक भारत के वीर सपूतों की याद दिलाती हैं और भारत का सिर गर्व से ऊंचा करती हैं।

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