Karl Marx biography in Hindi | कार्ल मार्क्स का जीवन परिचय

Karl Marx – कार्ल मार्क्स एक समाजशास्त्री, दर्शनशास्त्री, अर्थशास्त्री, और एक क्रांतिकारी समाजवादी थे। उनका जन्म प्रुशिया में एक मध्यम-वर्गीय परिवार में हुआ था, बाद में उन्होंने राजनितिक अर्थशास्त्र और हैगीलियन दर्शनशास्त्र का अभ्यास किया था।

प्रौढावस्था में कार्ल मार्क्स ने अपना ज्यादातर समय लन्दन और इंग्लैंड में व्यतीत किया था, जहाँ वे लगातार अपने विचारो को सहयोग के साथ जर्मन विचारको की सोच के अनुसार विकसित करते थे। उनके बहुत से विचारो को प्रकाशित भी किया जाता था जिसमे मुख्य रूप से 1848 में प्रकाशित पुस्तिका दी कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो शामिल है। बाद में कार्ल मार्क्स – Karl Marx के लेखो ने बहुत से लोगो पर प्रभावशाली प्रभाव डाला था।

Karl Marx

कार्ल मार्क्स जीवनी – Karl Marx in Hindi

पूरा नाम – कार्ल मार्क्स
जन्म      – 5 मई, 1818
जन्मस्थान – जर्मनी
पिता     – हेनरिक मार्क्स
माता     – Henriette marx
विवाह   – जेनीवन वेस्ट फ्लेन

“दुनिया के मजदूरो एक हो”

कार्ल मार्क्स द्वारा समाज, अर्थशास्त्र और राजनीती के विषय में बताई गयी बातो को अक्सर मार्क्सवाद कहा जाता था – उनके अनुसार मानवी समाज विविध समुदाय में संघर्ष के साथ आगे बढ़ रहा है: जिनमे प्रबल समुदाय के बीच द्वन्द है और जो उत्पादित और काम करने वाले समुदाय पर नियंत्रण रखते है, इस समुदाय के लोग खुद को मजदूरी के बदले में बेचते है। परकीकरण, महत्त्व, वस्तु के जादू-टोन में विश्वास रखना और अपने गुणों को विकसित करने जैसे कई तथ्यों पर मार्क्स ने अपने विचार प्रकट किये है।

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मार्क्स ने मजदूरो के बीच किये जाने वाले भेदभाव पर भी अपने विचार प्रकट किये है। इसके साथ ही मार्क्स ने समाज की राजनितिक परिस्थति के बारे में भी अपनी थ्योरी (विचार प्रकट करना) दी है। इसके साथ ही मार्क्स ने देश में मानवी स्वाभाव और आर्थिक मजबूती को लेकर भी अपनी थ्योरी बताई है।

कार्ल मार्क्स के इन विचारो ने लोगो के मन में काफी प्रभाव डाला और इसका परिणाम हमें विकास के रूप में दिखाई देने लगा।

मार्क्‍स, जिनके लिए समाजवाद का अर्थ श्रम नहीं अवकाश था, का मानना था कि अपने संसाधनों का इस तरह पुनर्गठन किया जाना संभव है कि पुरुषों और महिलाओ को कठिन परिश्रम के अधिक अपमानजनक स्वरूपों से जहां तक हो सके मुक्त कराया जा सके।

मार्क्‍स के साथी समाजवादीयो के अनुसार फिर उन्हें ढीले-ढाले रंगीन कपड़े पहने यहां-वहां मटरगश्ती करने, अफसंतीन (ऐब्सिन्थ) की चुस्कियां लेते हुए एक-दूसरे को होमर की काव्य-पंक्तियां सुनाने की फुर्सत होती। सम्माननीय यहूदी परम्परा के तहत मार्क्‍स सख्त रूप से नैतिक विचारक थे, जिसे यह बात समझ में आ गई थी कि नैतिकता का मसला खासकर यह है कि खुद का आनंद उठाना कैसे सीखा जाए।

उनका मानना था कि जब स्त्री और पुरुष स्वयं के और अपनी विशिष्ट शक्तियों और समर्थ्यो के आनंददायी ध्येयों को सिद्ध करने के लिए स्वतंत्र होते हैं तब वे अपने चरम पर होते हैं। अगर हर कोई ऐसा करने के लिए स्वंतंत्र हो तो उन्हें पारस्परिक रूप से ऐसा करने का कोई तरीका ढूंढना होगा। औरों के परितोष में और उसके द्वारा उन्हें स्वयं का परितोष करना होगा। मार्क्‍स के लिए कम्युनिज़्म एक किस्म के सियासी इश्क की तरह ही था।

कार्ल मार्क्स को इतिहास के सबसे प्रभावशाली महापुरुषों की सूचि में से एक बताया। और उनके कार्यो की कई बार आलोचना भी की गयी और कई भी सराहना भी की गयी थी।

उनके अर्थशास्त्र से संबंधित कार्यो में हमें मजदूरो की समझदारी और वर्तमान परिस्थिति की पूरी जानकारी का प्रभाव दिखाई देता है। उनके अर्थशास्त्र के विचारो में हमें आर्थिक विचार, पूँजी के साथ हमारा संबंध और परिस्थिति को समझने के गुण दिखाई देते है। दुनिया में बहुत से मजदुर संघ, कलाकार और राजनितिक पार्टिया मार्क्स के कार्यो से प्रभावित हुई है, कई लोगो ने कार्ल मार्क्स के सुझावों को अपनाया भी है। मार्क्स को साधारणतः आधुनिक समाजशास्त्र और सामाजिक विज्ञान का महान प्राध्यापक कहा जाता है।

कार्ल मार्क्स का व्यक्तिगत जीवन – Karl Marx Personal Life History

कार्ल मार्क्स और वॉन वेस्टफेलन को कुल 7 संताने हुई, लेकिन उनकी परिस्थिति गरीब होने की वजह से उनमे से केवल 3 ही किशोरावस्था तक जीवित रह सके।

मार्क्स अक्सर कृतकनाम का उपयोग करते थे। पेरिस में वे मोंसियूर राम्बोज़ और लन्दन में हस्ताक्षर करते समय ए. विलियम्स जैसे कृतकनामो का उपयोग कार्ल मार्क्स अक्सर किया करते थे। जबकि उनके कुछ दोस्त उन्हें “मूर” कहकर भी बुलाते थे, अपने काले घुंघराले बालो की वजह से उनके बच्चे उन्हें अक्सर “ओल्ड नाइक (Old Nike)” और चार्ली कहकर बुलाते थे।

अपने परिवार और दोस्तों के बीच मार्क्स के कई उपनाम थे। मार्क्स अपने विचारो के साथ-साथ अपने उपनामों के लिये भी प्रसिद्ध थे।

कार्ल मार्क्स की मृत्यु – Karl Marx Death

दिसम्बर 1881 में अपनी पत्नी की मृत्यु हो जाने के बाद कार्ल मार्क्स को तक़रीबन 15 महीने तक बीमारी ने घेर रखा था। और कुछ समय बाद ही उनके फेफड़ो में सुजन और पशार्वशुल की समस्या होने लगी जिससे लन्दन में 14 मार्च 1883 (उम्र 64 साल) को ही उनकी मृत्यु हो गयी थी।

नागरिकताहिन होते हुए ही उनकी मृत्यु हो गयी थी, लन्दन में ही उनके परिवारजनों और दोस्तों ने कार्ल मार्क्स के शरीर को 17 मार्च 1883 को लन्दन के ही हाईगेट सिमेट्री में दफनाया था।

Read: Quotes by Karl Marx

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21 COMMENTS

    • चन्दन सर, आप आगे दी गयी लिंक पर आप queen victoria के बारे में पढ़ सकते हो. और उप्पर दिये गये सर्च बॉक्स में आप queen victoria का नाम डालके भी पोस्ट को सर्च कर सकते हो.. धन्यवाद
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