डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर जी की जयंती पर भाषण

Ambedkar Jayanti Speech

दलितों के विकास में और देश की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले भीमराव अंबेडकर जी के बारे में कौन नहीं जानता है, उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े भारतीय संविधान का निर्माण किया है, इसलिए उन्हें आधुनिक भारत के निर्माता के रुप में भी याद किया जाता है।

आज इस लेख में हम आपको दलितों के मसीहा कहे जाने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के विषय में भाषण उपलब्ध करवा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल आप अपनी जरूरत के मुताबिक कर सकते हैं।

Ambedkar Jayanti Speech
Ambedkar Jayanti Speech

डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर जी की जयंती पर भाषण – Ambedkar Jayanti Speech

आप सभी को मेरा नमस्कार।

सम्मानीय मुख्य अतिथि, आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय और यहां मौजूद सभी छोटे-बड़े भाई-बहन एवं मेरे प्रिय साथियों, आप सभी का इस कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

मुझे बेहद खुशी हो रही है कि, आज इस मौके पर मुझे आधुनिक भारत के निर्माता और दलितों के मसीहा डॉ. भीमराव अंबेडकर जी पर भाषण देने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है।

मै अपने इस भाषण की शुरुआत डॉ. भीमराव अंबेडकर जी पर लिखी गईं कुछ पंक्तियों के माध्यम से करना चाहूंगी/ करना चाहूंगा –

”देश प्रेम में जिसने आराम को ठुकराया था
गिरे हुए इंसान को स्वाभिमान सिखाया था
जिसने हमको मुश्किलों से लड़ना सिखाया था
इस आसमां पर ऐसा इक दीपक बाबा साहेब कहलाया था।

यह पंक्तियां बाबा साहेब पर एकदम सटीक बैठती हैं, उन्होंने अपने जीवन में तमाम संघर्ष कर दलितों के उत्थान के लिए काम किया और अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया।

अंबेडकर जी को बचपन से ही दलित होने का दंश झेलना पड़ा था, यहां तक कि पढ़ाई में काफी होनहार होने के बाबजूद भी स्कूल में उनके साथ काफी बुरा बर्ताव किया जाता था, कई बार तो उन्हें स्कूल में पूरे दिन प्यासा ही रहना पड़ता था।

सिर्फ इसलिए, क्योंकि वे एक दलित जाति के थे, लेकिन अंबेडकर जी ने अपने जीवन के सभी संघर्षों का डटकर सामना किया और अपनी काबिलियत और योग्यता के बल पर अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में इतिहास के पन्नों में लिख दिया।

दलितो के समर्थन में किए गए कामों के लिए उन्हें दलित वर्ग के लोगों द्धारा उन्हें मसीहा के रुप में पूजा जाता है।

आपको बता दें कि भीमराव अंबेडकर जी न सिर्फ भारत के एक महान समाज सुधारक थे, बल्कि वे भारतीय संविधान के निर्माता, एक मशहूर राजनेता और प्रख्यात वकील भी थे, जिन्होंने सामाजिक भेदभाव का सामना करते हुए कानून की उच्च डिग्री हासिल की और आधुनिक भारत के संविधान का निर्माण किया और समाज में फैली जातिगद भेदभाव जैसी कुरोति को जड़ से खत्म कर, सभी को एक समान अधिकार दिलवाए।

इसके अलावा उन्होंने सती प्रथा, पर्दा प्रथा, बाल विवाह जैसी समाजिक बुराइयों को दूर करने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भीमराव अंबेडकर – Bhimrao Ambedkar जी ने महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकार दिलवाने के लिए भी कई काम किए।

14 अप्रैल 1891 में मध्यप्रदेश के इंदौर के पास महू के एक दलित परिवार में जन्मे भीमराव अंबेडकर जी ने उस समय दलितों को उनका हक दिलवाने के लिए अपनी आवाज बुलंद की थी, जब जातिगत भेदभाव ने भारतीय समाज को पूरी तरह से बिखेर कर रख दिया था और अपंग बना दिया था।

उस दौरान उन्होनें जातिवाद के खिलाफ बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र किया और दलित लोगों को उनके अधिकारों के लिए जागरूक किया। इसके साथ ही डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने उच्च, और सामान्य जाति के लोगों की तरह निम्न और दलित वर्ग के लोगों को मंदिरों में पूजा करने और सार्वजनिक नलों और कुओं से पानी पीने के लिए प्रेरित किया।

बाबा साहेब ने अपने प्रभावशाली भाषणों और महान विचारों के माध्यम से समाज में फैली जातिवाद प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए तमाम लड़ाईयां लड़ीं।

बाबा साहेब अंबेडकर जी ने दलितों को आरक्षण दिलवाने की भी मांग रखी थी, इसके लिए उन्होंने साल 1920 में एक सामाजिक पत्रिका ‘मूकनायक’ की स्थापना की थी,वहीं अंबेडकर जी के इस कदम से पूरे भारत में सामाजिक और राजनीतिक हलचल पैदा हो गई थी।

इसके साथ ही उन्होंने महाड सत्याग्रह (साल 1928), नासिक सत्याग्रह (साल 1930) समेत कई आंदोलन भी चलाए।

आपको बता दें कि दलित वर्ग के उत्थान के लिए वे देश में जगह-जगह घूमें और बड़े स्तर पर लोगों को जातिवाद और छूआछूत के खिलाफ जागृत किया और इस सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त करने के लिए लोगों को प्रेरित किया।

यही नहीं अंबेडकर जी ने जातिगत भेदभाव का सहयोग करने वाले हिन्दू शास्त्रों का भी जमकर विरोध किया और इस पर उचित तर्क भी दिए। दलितों को भारतीय समाज में आज जो भी स्थान मिला है, उसका श्रेय सिर्फ डॉ. भीमराव अंबेडकर को ही जाता है।

इसके अलावा अंबेडकर जी ने शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर भी काफी जोर दिया। अंबेडकर जी ने धार्मिक, राजनीतिक, औद्योगिक, साहित्यिक, संवैधानिक, ऐतिहासिक समेत तमाम क्षेत्रों में अपना योगदान दिया।

आपको बता दें कि भीमराव अंबेडकर जी इतनी तेज बुध्दी के थे, कि उन्हें महज 21 साल की उम्र में ही सभी धर्मों का अध्ययन कर लिया था, इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि उन्हें हिन्दी, अंग्रेजी समेत 9 भाषाओं का ज्ञान था।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी को किताबें पढने का काफी शौक था, इसलिए उन्होंने अपनी पर्सनल लाइब्रेरी भी बनाई थी, जिसमें 50 हज़ार से ज्यादा किताबें थीं। इसके साथ ही वे अर्थशास्त्र में PHD करने वाले पहले भारतीय थे, जिन्होंने दलित होने के बाबजूद विदेश जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण की।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के पास कुल 32 डिग्रियां थी। इसके साथ ही वे भारत के पहले कानून मंत्री भी थे, जिन्होंने न सिर्फ दलितों के उद्दार के लिए कानून बनाए बल्कि महिलाओं के लिए भी कई कानून बनाए, जिससे महिलाओं को उनका हक मिल सके, उन्होंने महिला मजदूरों के लिए Women Labor welfare fund, Maternity Benefit for women Labor, Women and Child, Labor Protection Act जैसे कई कानून बनाए।

अंबेडकर जी बौद्ध धर्म के विचारों से काफी प्रभावित थे, इसलिए उन्होंने 1956 में अपना धर्म परिवर्तन कर बौद्ध धर्म अपना लिया था, उन्होंने बौद्ध धर्म पर कई किताबें भी लिखी थी।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के द्धारा समाज के लिए किए गए अनगिनत योगदान के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

वहीं डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के सम्मान में उनके जन्मदिन को अंबेडकर जयंती के रुप में मनाया जाता है, इस मौके पर सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है।

आपको बता दें अंबेडकर जी को दलितों के उत्थान में काम करने और भारतीय समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया, साल 1990 में मरणोपरांत उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

अंबेडकर जी के योगदान को कभी नहीं भूला जा सकता है, पूरा देश उनका कृतज्ञ का हमेशा त्रणी रहेगा। उनके जीवन से हर किसी को प्रेरणा लेने की जरूरत है।

मै अपने भाषण को भीमराव अंबेडकर जी द्वारा कही एक पंक्ति के साथ विराम देना चाहूंगी।

“जीवन लंबा होने की बजाय महान होना चाहिए”

धन्यवाद।।

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1 COMMENT

  1. बहुत अच्छी रिसर्च है….उम्मीद करता हूं आप आगे भी इसी तरह हमतक जानकारी पहुंचाती रहेंगी

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