नीले आसमान में इठलाती पतंगों का त्योहार (काईट फेस्टिवल)

Kite Festival in India in Hindi

भारत त्यौहार का देश है, यहां हर साल कई तरह के त्यौहार मनाए जाते हैं और इन्हीं त्योहारों में से एक है पतंगों का त्योहार। जो कि काफी लोकप्रिय त्योहार है। लोग इसे पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं।

Kite Festival in India

नीले आसमान में इठलाती पतंगों का त्योहार (काईट फेस्टिवल) – Kite Festival in India in Hindi

भारत में हिन्दू धर्म के मुख्य त्योहारों में से एक मकरसंक्रांति के त्योहार के दिन पतंग उड़ाने का रिवाज है। हर साल 14 जनवरी को यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है इसलिए धार्मिक लिहाज से यह दिन काफी पवित्र माना जाता है।

सूर्य भगवान को समर्पित मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की अनूठी परंपरा है, इसलिए इसे पतंगों का त्याहोर भी कहा जाता है। इस दिन पतंग उड़ाने को लेकर लोग काफी उत्साहित रहते हैं। वहीं आसमान में भी इस दिन सुंदर-सुंदर रंग-बिरंगी पतंगों से ढक जाता है। इसके अलावा भारत में हर साल इस दिन अ्ंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव (इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल) का भी आयोजन होता है।

इस त्योहार में पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगो से ढक जाता है और आसमान में छोटी-बड़े सभी आकार की फैंसी पतंगों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। इस दौरान लोग घर की छतों में पतंग उड़ाते दिखते हैं, इसमें बच्चे और क्या बड़े सब मिलकर एक साथ पतंगबाजी कर जमकर मस्ती करते हैं।

भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में पतंगबाजी का खेल बेहद लोकप्रिय है। सैकड़ों सालों से आसमान में रंग-बिरंगी पतंगे उड़ाए जाने की परंपरा चली आ रही है।

भारत में पतंगबाजी मुख्य रुप से गुजरात, पंजाब, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, दिल्ली में देखने को मिलती है। तो आइए जानते हैं इस पर्व पर पतंग उड़ाने की परंपरा की शुरुआत कब और कैसे हुई और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के बारे में-

मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की शुरुआत आखिर कैसे हुई – Kite Festival History

पतंगबाजी का इतिहास करीब 2800 साल पुराना माना जाता है। पतंगबाजी की शुरुआत चीन से की गई थी। चीन में पतंग का अविष्कार लू बैन और मोजी नाम के दो शख्स ने किया था। जबकि कुछ इतिहासकार चीन को पतंग की जन्मस्थली मानते हैं।

कुछ इतिहासकारों के मुताबिक चीन के एक सेनापति ने अपने सैनिकों को पतंग के माध्यम से संदेश भेजा था। उस समय पतंग का इस्तेमाल बचाव अभियान के लिए एक संदेश के रुप में, हवा की तीव्रता और संचार के लिए किया जाता था लेकिन अब पतंग का इस्तेमाल एक खेल के रुप में मनोरंजन के लिए किया जाता है।

चीन से शुरु हुई पतंगबाजी का चलन धीरे-धीरे अमेरिका, थाईलैंड, जर्मनी, भारत और मलेशिया समेत पूरी दुनिया में फैल गया और आज दुनिया के कई देशों में पतंगों को बड़े पैमाने पर उड़ाया जाता है।

वहीं अब आधुनिक तरीके की बेहद खूबसूरत पतंगें आसामान में उड़ाई जाती हैं। इस दिन बड़े स्तर पर पतंगे बिकती हैं। पतंगबाजी के त्योहार के दौरान पंतगों का कारोबारियों को भी काफी मुनाफा होता है।

इसके अलावा कई देशों में बकायदा काइट फेस्टिविल का आयोजन भी किया जाता है। भारत में पतंगबाजी मुख्य रुप से गुजरात, राजस्थान, दक्षिण भारत, पंजाब, आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में देखने को मिलती है। यही नहीं भारत में हर साल अंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का भी आयोजन किया जाता है।

आपको बता दें कि पतंगबाजी की उल्लेख रामचरिस मानस में भी किया गया है। यह भी माना जाता है कि बौद्ध तीर्थ यात्रियों के द्धारा पतंगबाजी का शौक भारत पहुंचा था।

भारत के गुजरात में मकरसंक्रांति के मौके पर जमकर पतंगबाजी की जाती है। यहां घर की छतों से लेकर, मैदान और समुद्र के किनारों तक हर जगह लोग डोर खींचते और पेंच लड़ाते नजर आते हैं।

आपको बता दें कि पतंगबाजी के इतिहास का वर्णन गुजरात के अहमदाबाद में पतंग संग्रहालय (काइट म्यूजियम) में बेहद शानदार तरीके से किया गया है।

गुजरात का काईट फेस्टिवल पूरी दुनिया में मशहूर हैं, अहमबाद में हर साल मकरसंक्राति के मौके पर 7 जनवरी से 15 जनवरी के बीच इंटरनेशनल काईट फेस्टिवल का भी आयोजन किया जाता है।

इस मौके पर यहां नीले आसमान पर इठलाठी पतंगों का नजारा वाकई बेहद खूबसूरत लगता है। आपको बता दें कि इस फेस्टिवल में देश के ही नहीं बल्कि विदेश के लोग भी हिस्सा लेते हैं।

इसके अलावा कई और राज्यों में मकरसंक्रांति के दिन पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दौरान पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता में लोग जीतने के लिए दूसरी प्रतियोगी की पतंग काटते है।

हालांकि, पतंगबाजी करते वक्त कुछ सावधानियां रखने की बेहद जरूरत होती है क्योंकि इस खेल में थोड़ी सी भी चूक इस फेस्टिवल के रंग को फीका कर सकती है। इसलिए सावधान होकर ही पतंगबाजी करें।

भगवान राम से जुड़ी है पतंगबाजी करने की कथा – History of Kites

हिन्दू धर्म के प्रमुख महाकाव्य रामायण के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन विष्णु के अवतार भगवान श्री राम ने पतंगबाजी उड़ाने की अनोखी परंपरा की शुरुआत की थी। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान राम ने जो पतंग उड़ाई थी वह इंद्रलोक चली गई थी।

जिसके बाद इंद्र के पुत्र जयंत ने इस पतंग को अपने पास रख लिया था, फिर हनुमान जी जब इस पतंग का पता लगाने के लिए इंद्रलोक भेजा गया, तब जयंत की पत्नी ने पतंग वापस करने के लिए उनसे प्रभु राम के दर्शन करने की इच्छा जताई, जिसके बाद हनुमान जी ने यह संदेश भगवान राम को पहुंचाया, फिर भगवान में चित्रकूट में दर्शन करने की बात कही।

इसके बाद हनुमान जी को जयंत की पत्नी ने पतंग वापस कर दी। वहीं ऐसा माना जाता है , जब भगवान राम ने पतंग उड़ाई थी, उस दिन मकरसंक्रांति का दिन था, इसलिए तभी से इस त्योहार के मौके पर पतंग उड़ाने की परंपरा की शुरुआत की गई।

मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का वैज्ञानिक, सामाजिक एवं आर्थिक महत्व – Importance of Kite Flying

मकर संक्रांति के पर्व पर पतंग उड़ाने का न सिर्फ धार्मिक महत्व है, बल्कि वैज्ञानिक, सामाजिक एवं आर्थिक महत्व भी है। दरअसल, पतंग उड़ाने से कई तरह के व्यायाम होते हैं एवं शरीर में नई ऊर्जा-स्फूर्ति आती है। वहीं इस त्योहार पर पतंगबाजी करने के बहाने लोगों को अपने करीबी मित्रों एवं परिजनों से मिलने का मौका मिलता है।

साथ ही कई जगहों पर लोग तो अपने-अपने घरों में पतंगबाजी के लिए विशेष तरह का आयोजन करते हैं। इसके साथ ही इस मौके पर काफी मात्रा में पतंगों की बिक्री होती है, जिसकी वजह से कारोबारियों को काफी मुनाफा होता है।

वहीं बाजारों में इस पर्व के कई दिन पहले से ही दुकानों में अलग-अलग तरह की रंग-बिरंगी, सुंदर और आर्कषक पतंगे देखने को मिलती है, जिसकी वजह से कारोब पतंगबाजी का आर्थिक महत्व भी है।

अंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव – 2020 International Kite Festival

भारत में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर हर साल अहमदाबाद, गुजरात के अलावा जयपुर, हैदराबाद एवं बैंगलोर में बड़े स्तर पर काइट फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है।

इस दिन होने वाले पतंग महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए अलग-अलग राज्यों से लोग आते हैं और पतंगबाजी के मुकाबले में भाग लेते हैं। इस दिन को लेकर पहले से ही कई राज्यों में इसकी तैयारियां शुरु हो जाती हैं।

वहीं साल 2020 में भी गुजरात के अहमदाबाद में अंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 6 जनवरी से 15 जनवरी तक देखा जा सकता है। पतंग महोत्सव को लेकर राज्य सरकार द्धारा खास इंतजाम भी किए जाते हैं।

वहीं इस मौके पर आसमान में इठलाती, रंग-बिरंगी सुंदर पतंगों को नजारा बेहद शानदार होता है। पतंगबाजी के इस त्योहार पर लोग पतंगबाजी का अपना हुनर भी प्रदर्शित करते हैं साथ ही आसमान में एक-दूसरे की पतंगों से पेंच लड़ाने भी काफी रोमांचक होता है।

इस दौरान युवा, बच्चे, बुजुर्ग एवं महिलाएं सभी पतंगबाजी का लुफ्त उठाते हैं। वहीं लोग अपनी छतों या फिर पार्कों में गाने की धुनों पर नाचते भी नजर आते हैं।

पतंगबाजी करते वक्त ध्यान देने योग्य जरूरी बातें – Kite Flying Rules

मकर संक्रांति के पर्व पर पतंगबाजी करना जहां सुखदाई और आनंद देने वाला होता है, वहीं दूसरी तरफ इस मौके पर लापरवाही बरतने से हर साल कई हादसे भी होते हैं, इसलिए पतंगबाजी करते वक्त इन बातों का जरूर ध्यान रखें-

  • पतंग उड़ाते समय चाइनीज मांझे का बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें। इसकी जगहर स्वदेशी सूत का इस्तेमाल करें।
  • छत की जगह, खुले मैदान पर करें पतंगबाजी।
  • पतंग उड़ाते समय छत के किनारे पर न खड़े हो, बल्कि सुरक्षित जगह पर खड़े होकर पतंग उड़ाए।
  • पतंग उड़ाते समय बच्चों को मांझे से दूर रखें।

पतंगबाजी का यह पर्व जहां लोगों को ढेर सारी मौज मस्ती करने का मौका देता है, वहीं आपसी प्रेम और भाईचारे को भी बढ़ाता है। इस दौरान लोग मिलजुल कर पतंगबाजी करते हैं।

हालांकि, इस दौरान ऐहतियात बरतने की जरूरत है, क्योंकि थोड़ी सी भी चूक इस पर्व के रंग को फीका कर सकती है। इसलिए इस मौके पर बेहद सावधानी के साथ पतंगबाजी करें।

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