एक अजब इन्सान जिसने पूरा एरोप्लेन खा लिया | Michel Lotito

दोस्तों, हम सब खाने के शौकीन होते है, हमे अलग अलग तरह के व्यंजन खाना अच्छा लगता है। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते है की किसी को लोहा या कोई धातुये खाने का शौक हो सकता है जी हा एक शख्स ऐसा ही है जिनका नाम है मिचेल लोटिटो जिन्हें अजीब अजीब सी चीजे खाने का शौक है जैसे रबर की चीजे, लोहे की चीजे, साइकल आदि खाने का शौक है। आश्चर्य की बात तो ये है की उन्हें ये सब खाने के बाद भी कुछ नहीं होता।

हमनें आज तक बहुत से रोचक बाते देखी और पढ़ी होंगी क्या आपने किसी ऐसे रोचक इन्सान को देखा हैं जो कुदरत के ख़िलाफ़ जाकर कुछ ऐसा करता हैं जिसे जानकर आप हैरान हो जाओंगे। तो आईये जाने उस इन्सान के बारे में।
Michel Lotito

एक अजब इन्सान जिसने पूरा एरोप्लेन खा लिया – Michel Lotito

मिचेल लोटिटो, ग्रेनोबल में जन्मे एक फ्रेंच मनोरंजनकर्ता थे, जो जानबूझकर अपचनीय वस्तुओ का उपभोग करते थे। उन्हें बाद में महाशय मँगटेआउट (मिस्टर इट-ऑल) के नाम से भी जाना जाता है।

माइकल की इस अजीबोगरीब लत की जानकारी लोगों को तब हुई जब वो 16 साल के थे। उस वक्त माइकेल जब अपने परिवार का टीवी सेट थोड़ा-थोड़ा करके खा गए थे। और 1966 में उन्होंने अपनी इस हरकत के सार्वजानिक प्रदर्शन की शुरुवात की। लोटिटो को खाने की बीमारी है, जिसे पिका के नाम से जाना जाता है।

माइकेल पीका नाम की बीमारी से ग्रस्त थे। इस बीमारी से ग्रस्त आदमी खाने के अलावा लगभग हर चीज खा सकता है चाहे वो किसी भी धातु की हो, जब माइकल कांच और नाखून भी खाने लगे तो उन्हें आभास हो गया कि वो सब कुछ खा सकते हैं। इसके बाद तो माइकल ने इसे अपना करियर बना लिया। उसके बाद से माइकल पेट्रोल पीकर गला नरम करते और सभी तरह की धातुओं के छोटे-छोटे टुकड़े करके खा जाते। धीरे धीरे उनकी भूक बढती गई।

उनके प्रदर्शनों में उन्होंने धातु, कांच, रबर और दूसरी वस्तुओ का सेवन किया। साथ ही उन्होंने बाइसिकल, शॉपिंग कार्ट, सेसेना 150 (एयरप्लेन), टेलीविज़न और दूसरी वस्तुओ को भी अलग करके, छोटे-छोटे भागो में कांटकर उनको खा लिया था। सेसेना 150 का ऐरोप्लन खाने में उन्हें 1978 से 1980 तक पुरे दो साल का समय लगा।

डॉक्टर ने यह भी निर्धारित किया था की लोटिटो के पेट और आंत में एक मोटी परत थी, जिसके चलते वे आसानी से धातु की वस्तुओ खा लेते थे।

लोटिटो ने यह भी दावा किया था की इन वस्तुओ को खाने के बाद उन्हें किसी तरह की कोई बीमारी नही होती थी। प्रदर्शन करते समय वे रोजाना लगभग 1 किलो धातु (वस्तुओ) का सेवन करते थे, लेकिन उपभोग करते समय वे उतनी ही मात्रा में पानी का भी सेवन करते थे। अक्सर वे कहते थे की, केले और उबले हुए अंडो का सेवन करने से वे बीमार हो जाते हैं। कहा जाता है की 1959 और 1997 के बीच उन्होंने तक़रीबन 9 टन धातुओ का सेवन कर लिया था।

किसी भी धातु का उपभोग वे उन्हें छोटे-छोटे टुकडो में कांटकर खाते थे। इसके बाद वे खनिज तेल और पानी का सेवन करते थे। यह तेल धातुओ के लिए चिकनाई का काम करता था। साथ ही अपने असामान्य आहार को पचाने में भी उन्हें कोई समस्या नही होती थी।

उनकी क्षमताओ का सम्मान करते हुए गिनीज बुक ने उन्हें पीतल की पट्टिका देकर सम्मानित किया था। लेकिन उन्होंने उसका भी सेवन कर दिया था।

अपने 57 वे जन्मदिन के दस दिनों बाद 25 जून 2007 को प्राकृतिक कारणों की वजह से लोटिटो की मृत्यु हो गयी। ग्रेनोबल के सेंट रोंच सिमेट्री में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

यहाँ निचे कुछ वस्तुओ का उल्लेख किया गया है, जिन्हेँ लोटिटो ने खाया किया था:

  • 2 पलंग
  • 7 टेलीविज़न सेट
  • 6 फानूस
  • 18 बाइसिकल
  • 15 शॉपिंग कार्ट
  • 1 सेसेना 150 एयरप्लेन (लोटिटो का सबसे पसंदीदा खाना : इसे खाने में उन्हें 1978 से 1980 तक दो साल का समय लगा।)

उनके ये ये अजीबों गरीब कारनामों से वे लोगों को हैरत में डाल देते थे। इससे ज्यादा हैरानी की बात ये है की इतना कुछ खाने के बाद भी लोटिटो को कोई नुक्सान नहीं हुआ, एवं उनकी मृत्यु भी सामान्य कारणों की वजह से हुई 2007 में इस बात की खूब चर्चा रही कि माइकल की मौत के पीछे का कारण क्या था लेकिन डॉक्टरों ने दावा किया कि उनकी मौत प्राकृतिक थी। लोटिटो आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन लोग आज भी उनके हैरतंगेज कारनामों को याद करते है।

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