तुलसीदास जी के दोहे हिंदी अर्थ सहित | Tulsidas Ke Dohe In Hindi

तुलसीदास जी का दोहा नंबर 22 – Tulsidas Ke Dohe 22

जो लोग बुरी संगत में पड़ जाते हैं और बहकावे में आकर अपने जीवन में कुछ गलत फैसला ले लेते हैं, उन लोगों के लिए महाकवि तुलसीदास जी का यह दोहा काफी शिक्षाप्रद है।

दोहा:

को न कुसंगति पाइ नसाई। रहइ न नीच मतें चतुराई।

अर्थ:

खराब संगति से सब बर्बाद हो जाते हैं।  नीच लोगों के विचार के अनुसार चलने से चतुराई बुद्धि भी भ्रष्ट हो जाती हैं।

क्या सीख मिलती है:

हमें हमेशा अच्छे लोगों से ही दोस्ती करनी चाहिए और उनकी सलाह माननी चाहिए क्योंकि बुरे लोगों की सलाह का नतीजा हमेशा बुरा ही होता है।

तुलसीदास जी का दोहा नंबर 23 – Tulsidas Ke Dohe 23

जो लोग समय के महत्व को नहीं समझते उन लोगों के लिए गोस्वामी तुलसीदास जी का यह दोहा शिक्षा देने योग्य है –

दोहा:

तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान। भीलां लूटी गोपियाँ, वही अर्जुन वही बाण।।

अर्थ:

गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, समय बड़ा बलवान होता है, वो समय ही है जो व्यक्ति को छोटा या बड़ा बनाता है। जैसे एक बार जब महान धनुर्धर अर्जुन का समय ख़राब हुआ तो वह भीलों के हमले से गोपियों की रक्षा नहीं कर पाए।

क्या सीख मिलती है:

हमें समय के महत्व को समझना चाहिए और हमेशा समय के अनुसार ही काम करना चाहिए तभी हम अपने जीवन में सफलता हासिल कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

बहरहाल, आज के समय में लोग अपने घमंड में चूर होकर कई ऐसे काम करते हैं जिससे उन्हें ही नुकसान नहीं पहुंचता है बल्कि समाज में भी इसका बुरा असर पड़ता है। वहीं अगर महाकवि तुलसीदास जी के इन दोहों का लोग अपनी जिंदगी में पालन करें तो निश्चय ही उनका जीवन सफल हो जाएगा, और हमारा समाज एक सभ्य समाज कहलाएगा।

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34 thoughts on “तुलसीदास जी के दोहे हिंदी अर्थ सहित | Tulsidas Ke Dohe In Hindi”

  1. तुलसी जी के दोहे बहुत ही बढिया पोस्ट।। ऐसे ही जानकारी देते रहिये

  2. Rahul Singh Tanwar

    तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुँ और।
    बसीकरण इक मन्त्र हैं परिहरू बचन कठोर।।

  3. अनहोनी होनी नही, होनी होय तो होय
    पूरा दोहा और दोहा नंबर बताया जाय

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