कॉमर्स के स्टूडेंट्स के लिए सबसे बेहतर हैं यह कोर्स…

Commerce Courses after 12th

कॉमर्स एक प्रोफेशनल फील्ड है, जिसमें करियर के ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं। वहीं अगर आपने भी 12वीं कॉमर्स से किया है तो आपके पास इस फील्ड में करियर बनाने के न सिर्फ कई सारे विकल्प हैं बल्कि कई ऐसे कोर्सेस भी हैं जिन्हें कर आपको लाखों रुपए का पैकेज भी मिल सकता है और आप भी किसी साइंस स्ट्रीम से पढ़े हुए छात्र से ज्यादा कमा सकते हैं।

कॉमर्स एक ऐसा विषय है जिसके द्वारा न सिर्फ चार्टर्ड अकाउंटेंट बना जा सकता है, बल्कि इसके द्वारा बैंकिग कंपनी सैक्रेटरी, अकाउंटिग और ई-कॉमर्स जैसे फील्ड में भी बेहतरीन करियर बनाया जा सकता है।

वहीं आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से कॉमर्स की फील्ड से संबंधित करिअर विकल्प के बारे में बताने जा रहे है। आइए नजर डालते हैं कॉमर्स फील्ड के कुछ बेहतरीन करिअर विकल्प के बारे में –

कॉमर्स के स्टूडेंट्स के लिए सबसे बेहतर हैं यह कोर्स – Commerce Courses after 12th in India

Commerce Courses after 12th

12वीं के बाद कॉमर्स में बेहतरीन कोर्स – Courses after 12th Commerce in India

अगर आपने भी 12वीं कॉमर्स से किया है तो आप भी कुछ ऐसे कोर्स कर सकते हैं, जो कॉमर्स के स्टूडेंट्स के लिए सबसे बेहतर कोर्स हैं जिनके बारे में नीचे जानकारी दी गई है –

  • बैचलर ऑफ कॉमर्स – Bachelor of Commerce (B.Com)

12वीं के बाद कॉमर्स के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्र बीकॉम करते हैं क्योंकि जो छात्र ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करना चाहते हैं, उनके लिए बीकॉम एक अच्छा विकल्प है।

बीकॉम की डिग्री की सहायता से आसानी से छात्र अकाउंटिंग फाइनांस, ऑपरेशंस, टेक्सेशन और दूसरे कई फील्ड्स में अपना बेहतरीन करियर बना सकते हैं। आपको बता दें कि बीकॉम में स्टूडेट्स को गुड्स अकाउंटिंग, अकाउंट्स, प्रोफिट एंड लॉस और कंपनी कानून की जानकारी दी जाती है। वहीं यह भी माना जाता है कि कॉमर्स के छात्रों के लिए बीकॉम एक तरह से उनके करियर की पहली सीढ़ी है।

  • बैचलर ऑफ कॉमर्स ऑनर्स ( बीकॉम ऑनर्स) – Bachelors in Commerce (B.Com Honors)

ज्यादातर लोग बीकॉम और बीकॉम ऑनर्स को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं और वे इसमें फर्क नहीं कर पाते हैं। लेकिन हम आपको बता दें कि बीकॉम ऑनर्स, बीकॉम करने से अच्छा विकल्प है।

बीकॉम ऑनर्स 3 साल का डिग्री प्रोग्राम है, जिसमें कुल मिलाकर 40 विषय होते हैं। वहीं स्टूडेंट्स को इन विषयों के अलावा एक विषय में स्पेशलाइजेशन भी कराया जाता है।

स्पेशलाइजेशन के लिए स्टूडेंट्स मार्केटिंग मैनेजमेंट, अकाउंटिंग और फाइनांशियल मैनेजमेंट, टेक्सेशन, इंटरनेशनल ट्रेड एंड फाइनांस, ई कॉमर्स, बैंकिंग या ह्यूमन एंड रिसोर्स मैनेजमेंट में से किसी एक विषय चुन सकते हैं, जबकि बैचलर ऑफ कॉमर्स में यह सब्जेक्ट्स बीकॉम ऑनर्स की तुलना में कम डिटेल में पढ़ाए जाते है।

इसलिए बीकॉम ऑनर्स के छात्रों को इन विषय की अच्छी जानकारी होती है।

  • बीकॉम- एकाउंटिंग एंड फाइनांस – B.Com-Accts and Finance

क्लास 12th के बाद जो छात्र कॉमर्स के फील्ड में अपना करियर बनाना चाहते हैं उन छात्रों के लिए बैचलर ऑफ कॉमर्स इन अकाउंटिंग एंड फाइनांस एक अच्छा विकल्प है।

आपको बता दें कि इस यह तीन साल का डिग्री प्रोग्राम है जिसे वह छात्र कर सकते हैं जिन्होंने 12वीं कॉमर्स के साथ पास किया है। वहीं यह कोर्स करने के बाद अकाउंट्स और फाइनांस में करियर के काफी मौके होते हैं।

जबकि शुरुआत के दिनों में छात्र किसी कंपनी में ट्रेनी अकाउंटेंट के तौर पर काम कर सकते हैं। आपको यह भी बता दें कि बीकॉम अकाउंटिंग एंड फाइनांस करने वाले छात्रों को अकाउंट्स, फाइनांस, टेक्सेशन के करीब 39 विषय पढ़ाए जाते हैं। वहीं इस डिग्री प्रोग्राम में फाइनांशियल नॉलेज पर ज्‍यादा फोकस किया जाता है।

  • बीकॉम- बैंकिंग एंड इंश्‍योरेंस – B Com-Banking and Insurance

कॉमर्स से 12वीं करने के बाद जो छात्र कॉमर्स के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहते हैं, उन छात्रों के लिए बीकॉम बैंकिंग एंड इंश्योरेंस भी एक अच्छा करियर ऑपशन है। यही नहीं इस कोर्स को करने वाले छात्रों के लिए ढेर सारे जॉब ऑफर भी मार्केट में उपलब्ध हैं।

आपको बता दें कि बीकॉम- बैंकिंग एंड इंश्योरेंस एकेडमिक और प्रोफेशनल डिग्री कोर्स दोनों है जो कि तीन साल का डिग्री प्रोग्राम है।

वहीं इस डिग्री प्रोग्राम में बैंकिंग और इंश्योरेंस के अलावा अकाउंटिंग, लॉ और इंश्योरेंस, बैंकिंग लॉ और इंश्योरेंस रिस्क कवर की जानकारी भी दी जाती है।

इसके साथ ही यह डिग्री प्रोग्राम को करने वाले छात्रों को बैंकिंग और इंश्योरेंस इंडस्ट्री में कवर होने वाले टॉपिक्स और विषयों की सिस्टमेटिक स्टडी करवाई जाती है ताकि उन्हें इससे संबंधित हर विषय की अच्छी जानकारी मिल सके।

आपको बता दें कि 12वीं के बाद किए जाने वाले इस कोर्स में 38 विषय होते हैं। इसके अलावा इस प्रोग्राम में बैंकिंग और इंश्योरेंस से जुड़े 2 प्रोजेक्ट भी करने होते हैं।

इस कोर्स को करने के बाद स्टूडेंट्स एमकॉम, एमबीए, सीएफए जैसे हायर एजुकेशन वाले कोर्सेज भी बड़े ही आसानी से कर सकते हैं, जिनका पैकेज लाखों में होता है। यही नहीं इस डिग्री कोर्स के छात्र आसानी से गवर्मेंट और प्राइवेट सेक्टर में ऑडिटिंग, अकाउंटेंसी, बैंकिंग, फाइनांस की फील्ड में नौकरी के लिए भी बेहद आसानी से एप्‍लाई कर सकते हैं।

  • कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट – Cost and Works Accountants (CWA)

कॉमर्स में करियर बनाने के लिए छात्र कॉमर्स एंड वर्क अकाउंटेंट के कोर्स को भी चुन सकते हैं। यह एक प्रोफेशनल कोर्स है जो कि सीए से मिलता-जुलता कोर्स है। आपको बता दें कि द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट ऑफ इंडिया कॉस्ट अकाउंटेंसी का कोर्स कराता है। वहीं 12वीं के बाद भी स्टूडेंट्स CWA का कोर्स कर सकते हैं।

हालांकि, इसके लिए 12वीं पास स्टूडेंट्स को पहले फाउंडेशन कोर्स करना होता है। कोर्स पूरा करने के बाद स्टूडेंट्स को कॉस्ट अकाउंटेंट और इससे जुडे़ पदों पर काम करने का मौका मिलता है।

इसके लिए छात्रों को द इंस्टीटय़ूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया में आवेदन करना होता है। वहीं इस कोर्स में एडमिशन के लिए जून और दिसम्बर में एंट्रेंस एग्जाम होता है। इसके अलावा फाउंडेशन कोर्स के बाद एक इंटरमीडिएट कोर्स भी करना होता है और फिर सीए की तरह ही फाइनल एग्जाम देकर कोर्स पूरा होता है।

  • बीकॉम – फाइनेंशियल मार्केट्स – B.Com. Financial Markets

12 वीं के बाद कॉमर्स के फील्ड में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए बीकॉम- फाइनेंशियल मार्केट्स कोर्स कई करियर विकल्प खोल देता है, वहीं यह कोर्स करने वाले छात्रों को लाखों रुपए का जॉब पैकेज भी मिलता है। क्योंकि इस कोर्स का काफी अच्छा स्कोप है।

आपको बता दें कि यह भी तीन साल का डिग्री प्रोग्राम हैं, जिसमें छात्र को 6 सेमेस्टर पास करने होते हैं। वहीं बैचलर ऑफ कॉमर्स इन फाइनांशियल मार्केट्स करने वाले छात्रों को फाइनांस, इंवेस्टमेंट्स, स्टॉक मार्केट, कैपिटल, म्यूचल फंड के बारे में जानकारी दी जाती है और करीब 41 विषयों की पढ़ाई की जाती है।

इस 3 साल के डिग्री कोर्स को करने के बाद छात्रों को एसोसिएट, फाइनांस ऑफिसर, फाइनांस कंट्रोलर, फाइनांस प्लानर, रिस्क मैनेजमेंट, मनी मार्केट डीलर इंश्योरेंस मैनेजर की भी नौकरी आसानी से मिल सकती है।

  • चार्टर्ड अकाउंटेंट – Chartered Accountant (C.A.)

कॉमर्स में करियर बनाने वाले ज्यादातर छात्र सीए बनने की चाहत रखते हैं। आपको बता दें कि चार्टर्ड अकउंटेंट का कोर्स द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) कराता है।
सीए में करियर बनाने के लिए शुरुआत में छात्रों को टफ कॉमन प्रोफिसिएंसी टेस्ट (CPT) देना होता है। जिसे पास करने के बाद ही छात्र अपने सीए बनने के लक्ष्य के पहले पड़ाव को पार कर दूसरे पड़ाव पर पहुंच सकता है।

आपको बता दें कि इसके एट्रेंस टेस्ट में अकाउंटिंग, मर्केटाइल लॉ, जनरल इकोनॉमिक्स एवं क्वांटिटेटिव एप्टीटय़ूड जैसे विषयों को शामिल किया जाता है। इसके बाद छात्र को IPCT, आर्टिकलशिप ट्रेनिंग और फिर सीए की अंतिम परीक्षा पास कर फाइनल चरण से गुजरना पड़ता है। इन तीनों चरणों को पास करने के बाद ही सीए बन सकते हैं।

इसके अलावा आपको बता दें कि मान्यता प्राप्त बोर्ड से कॉमर्स स्ट्रीम में 12वीं पास करने के बाद कोई भी स्‍टूडेंट्स सीए में करियर बना सकते हैं। वहीं कई बार स्‍टूडेंट्स सीए बनने की चाहत में अपनी शुरुआत ग्रेजुएशन के बाद भी करते हैं, लेकिन सीए कोर्स की लंबी अवधि की वजह से सीए की शुरुआत का सही समय 12वीं पास करने के बाद का ही होता है।

सीए की तैयारी करने वाले छात्रों को पहले अकाउंटिग में मजबूत पकड़ बनानी चाहिए। इसके अलावा स्‍टूडेंट्स में मैनेजमेंट और फाइनेंशियल क्षेत्र में एक्सपर्ट नॉलेज के साथ एक्सपर्ट व्यू का होना बहुत जरूरी है। तभी छात्र सीए बनने का अपना सपना पूरा कर सकते हैं और अपने भविष्य को संवार सकते हैं।

  • कंपनी सेक्रेटरी – Company Secretary (CS)

कॉमर्स के फील्ड में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स भी पहली पसंद बना हुआ है लेकिन इस प्रोफेशनल कोर्स को करने वाले छात्रों को 12 वीं पास होना बेहद जरूरी है।

आपको बता दें कि कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स देश में इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) द्दारा करवाया जाता है। आपको बता दें कि12वीं के बाद छात्र आसानी से कंपनी सेक्रेटरी कोर्से के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह कोर्स 3 चरणों में पूरा किया जाता है। जिसमें फाउंडेशन प्रोग्राम, एग्जिक्यूटिव प्रोग्राम और प्रोफेशनल प्रोग्राम शामिल हैं।

इसके अलावा आपको यह भी बता दें कि फाइन आर्ट्स को छोड़कर किसी भी स्‍ट्रीम में ग्रेजुएट उम्‍मीदवार CS का कोर्स कर सकते हैं. वहीं जो छात्र ग्रेजुएट कर चुके हैं, उन छात्रों को 8 महीने के फाउंडेशन कोर्स की भी छूट होती है और उन्‍हें सीधे दूसरे चरण में एडमिशन मिल जाता है।

इसके साथ ही एग्जिक्यूटिव और प्रोफेशनल कोर्स करने के बाद एक कंपनी या किसी अनुभवी या प्रैक्टिस कर रहे कंपनी सेक्रेटरी के साथ 16 महीने की ट्रेनिंग करवाती है।

इस प्रोफेशनल कोर्स और ट्रेनिंग के बाद छात्र आसानी से आईसीएसआई के एसोसिएट सदस्य बन जाते हैं, जिसके बाद में आसानी से जॉब भी मिल जाती है। और छात्र सीएस बनकर लाखों रुपए कमाते है।

  • बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) – Bachelor of Business Administration (B.B.A)

किसी भी स्‍ट्रीम से 12वीं करने वाले स्‍टूडेंट बीबीए कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर कॉमर्स के छात्र इस कोर्स को करना पसंद करते हैं। यह भी तीन साल का डिग्री प्रोग्राम कोर्स है, जिसमें छात्रों को बिजनेस एडमिनिस्‍ट्रेशन के गुर सिखाए जाते हैं। इस कोर्स को पूरा करने के बाद स्‍टूडेंट्स अलग-अलग कंपनियों के एचआर, फाइनांस, एड-सेल्‍स और मार्केटिंग डिपार्टमेंट्स में जॉब के लिए एप्‍लाई कर सकते हैं।

वहीं बीबीए करने वाले छात्रों के लिए जॉब के ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं। आपको बता दें कि खासकर बीबीए करने वाले छात्र मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर कई अलग-अलग कंपनियों में सेल्स और मार्केटिंग डिपार्टमेंट में जॉब कर सकते हैं।

इसके अलावा बीबीए के बाद छात्र एमबीए, पीजीडीएम, एमएमएस समेत कई कोर्सेज भी कर सकते हैं।

  • सर्टिफाइड फायनेंसियल प्लानर, (सीएफपी) – Certified Financial Planner (CFP)

अगर आपका रुझान पर्सनल फाइनेंस और वेल्थ मैनेजमेंट की तरफ है तो आपके लिए सर्टिफाइड फायनेंशियल प्लानर बनना एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

दरअसल, कॉमर्स स्ट्रीम वाले छात्र पहले से ही टैक्सेशन पॉलिसी और इन्वेस्टमेंट की मूलभूत बातें और जनरल अवेयरनेस आदि का अध्ययन कर चुके होते हैं, जो कि सर्टिफाइड फायनेंशियल प्लानर का कोर्स करने और उन्हें एक सर्टिफाइड फायनेंसियल प्लानर बनने में बहुत उपयोगी साबित होता है।

वहीं इस कोर्स के माध्यम से आप फाइनेंस, वेल्थ मैनेजमेंट, इंश्योरेंस प्लानिंग और म्युचु्अल के क्षेत्र में भी करियर बनाकर अच्छे पैसे कमा सकते हैं।

आपको बता दें कि एक प्रमाणित वित्तीय योजनाकार यानि कि सर्टिफाइड फायनेंशियल प्लानर बनने के लिए, छात्रों को वित्तीय योजना मानक बोर्ड (फायनेंसियल प्लानिंग स्टैण्डर्ड बोर्ड ऑफ इंडिया,एफपीएसबीआई) से प्रमाण पत्र लेना बेहद जरूरी होता है।

इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि फायनेंशियल प्लानिंग स्टैण्डर्ड बोर्ड ऑफ इंडिया कॉमर्स स्ट्रीम वाले छात्रों को फाइनेंशियल प्लानिंग, पर्सनल फाइनेंशियल एडवाइजरी प्रैक्टिसेज, टैक्सेशन, रिस्क मैनेजमेंट और अन्य विषयों के आर्ट और साइंस का पूरा ज्ञान प्रदान करने और सही प्रशिक्षण के उद्देश्य से एक टेक्नीकल प्रोग्राम ऑफर करता है।

सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर का कोर्स मुख्य रुप से 6 मॉड्यूल में विस्तृत है और हर मॉड्यूल के लिए परीक्षा ऑनलाइन प्रारूप में आयोजित की जाती है और एमसीक्यू / मल्टीपल च्वाइस क्वेश्चन स्टाइल पैटर्न पर सवाल पूछे जाते हैं।

सर्टिफाइड फायनेंशियल प्लानर के स्टडी मॉड्यूल में इंट्रोडक्शन टू फायनेंसियल प्लानिंग, रिस्क एनालिसिस एंड इंश्योरेंस प्लानिंग,(रिटायरमेंट प्लानिंग एंड एम्प्लोयी बेनिफिट्स, निवेश योजना (इन्वेस्टमेंट प्लानिंग) टैक्सेशन प्लानिंग एंड एस्टेट प्लानिंग) और अग्रिम वित्तीय योजना (एडवांस फायनेंसियल प्लानिंग) विषयों की जानकारी छात्रों को दी जाती है।

  • बैचलर ऑफ इकोनॉमिक्स – BACHELOR OF ECONOMICS

बैचलर ऑफ इकोनॉमिक्स एक डिग्री कोर्स है। इस कोर्स के माध्यम से छात्र आर्थिक नीतियों और कार्यक्रमों में व्यावहारिक अनुभव को हासिल करते हैं।

आपको बता दें कि किसी मान्यता प्राप्त स्कूल से 12वीं पास करने वाले छात्र यह कोर्स कर सकते हैं। वहीं इस कोर्स में उन छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन छात्रों ने 12वीं में वैकल्पिक विषय के तौर पर इकनॉमिक्स लिया होगा।

आपको बता दें कि बैचलर ऑफ इकोनॉमिक्स कोर्स में एडमिशन, मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाता है और उन छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है जो शिक्षाविदों के साथ-साथ अतिरिक्त कोर्स गतिविधियों में काफी अच्छे हैं। वहीं यह कोर्स करने वाले छात्रों के लिए ढेर सारे कैरियर के भी विकल्प हैं।

छात्रों को भू-स्ट्रेटजिक (Geo-Strategic), सामाजिक-आर्थिक और अंतराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) में आसानी से जॉब मिल सकती है। इसके अलावा छात्र सिविल सर्विसेज, कस्टम डिपार्टमेंट, इकनॉमिक कंस्लटिंग जॉब, फाइनेंश, बैंकिंग सेक्टर और कॉमर्स के क्षेत्र में आसानी से जॉब ले सकते हैं। इसके अलावा बैचलर ऑफ इकनॉमिक्स में मास्टर डिग्री के कोर्स कर भी करियर बना सकते हैं।

  • बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (बीएमएस) – Bachelor of Management Studies (B. M. S.)

12 वीं के बाद जो छात्र मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, ऐसे छात्रों के लिए बीएमएस का कोर्स करना बेहतर साबित हो सकता है। वहीं बिजनेस स्टडीज में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए यह कोर्स बिल्कुल सही च्वॉइस है।

यह तीन साल का कोर्स होता है, जिसमें थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी जाती है। थ्योरी में छात्रों को कॉमर्स, ऑगेर्नाइजेशनल बिहेवियर, मैथ्स और माकेर्टिंग फाइनैंस जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं तो प्रैक्टिकल नॉलेज में प्रोजक्ट वर्क शामिल किए जाते हैं।

वहीं अगर बीएमएस करने वाले छात्रों के लिए करियर स्कोप की बात करें तो इस कोर्स के बाद छात्रों के पास जॉब के कई सारे विकल्प मौजूद हैं। इस कोर्स को कर छात्र न सिर्फ बैंकिंग एंड फाइनेंश में जा सकते हैं बल्कि वे सिविल सर्विसेज और अन्य दूसरे कॉम्पटिटिव एग्जाम भी दे सकते हैं।

इसके अलावा बीएमएस करने के बाद छात्र प्रोडक्शन मैनेजर, एचआर मैनेजर, मार्केटिंग मैनेजर, इनफोर्मेशन सिस्टम मैनेजर, बिजनेस प्रोफेसर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट मैनेजर और बिजनेस कंसल्टेंट बन सकते हैं।

  • बीबीए + एलएलबी – (B.B.A. + L.L.B.)

बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और बैचलर ऑफ लेजिस्लेटिव लॉ ऑनर्स, एक डिग्री प्रशासनिक कानून पेशेवर एकीकृत पाठ्यक्रम है। जो छात्र बीबीए एलएलबी करने के इच्छुक हैं, उन छात्रों को बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और लॉ की पढ़ाई करवाई जाती है और इसके बारे में जानकारी दी जाती है।

वहीं कोई भी छात्र जिसने न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के साथ 12वीं की हो इस कोर्स के लिए पात्र माना जाता है। देश में एलएलबी की पढ़ाई कराने वाले कई कॉलेज है। इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए छात्रों को एंट्रेंस एग्जाम देना होता है।

इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि यह कोर्स करने वाले छात्रों के लिए करियर के कई विकल्प मौजूद रहते हैं।

  • बैचलर ऑफ़ लॉ (बीकॉम + एलएलबी) – Bachelor of Law (B.Com + L.L.B.)

जो छात्र कॉमर्स स्ट्रीम से हैं और कानून की पढ़ाई की तरफ यानि की लॉ में रुचि रखते हैं, ऐसे छात्रों के लिए बीकॉम+एलएलबी का कोर्स बेहतर साबित हो सकता है।

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आपको बता दें कि इस कोर्स के माध्यम से छात्रों को महज 5 साल में ही बीकॉम और एलएलबी की डिग्री हासिल हो सकेगी जबकि अलग-अलग करने से 6 साल होने चाहिए।

इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि यह कोर्स कॉमर्स के उन छात्रों के लिए एक और दिलचस्प अध्ययन विकल्प है जो कानून और उनके संबंधित क्षेत्रों जैसे कॉर्पोरेट कानून, कराधान कानून और संबद्ध डोमेन में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

इस तरह कॉमर्स स्ट्रीम वाले छात्रों के लिए न सिर्फ केवल कॉमर्स के क्षेत्र में ही अपार जॉब की संभावनाएं और करियर के बेहतरीन विकल्प हैं बल्कि कॉमर्स के छात्र अन्य किसी फील्ड में भी अपना करियर बना सकते हैं।

वहीं कॉमर्स के क्षेत्र में कई ऐसे प्रोफशनल कोर्स हैं, जिनके माध्य्म से छात्रों को लाखों रुपए का पैकेज भी मिलता है। वहीं पहले जहां कॉमर्स वाले छात्रों को मेडिकल और साइंस स्ट्री्म वाले छात्रों की तुलना में गैर स्मार्ट माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा धीरे-धीरे खत्म हो रही है, क्योंकि कॉमर्स के छात्रों के पास अब ढेरों करियर विकल्प हैं जिन्हें कर छात्रों को अपने भविष्य को संवारने का मौका मिल रहा है।

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